गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया
टावर चौक पर धरना-प्रदर्शन कर लोगों ने मांगा न्याय, पैतृक गांव पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि…सरकार और सिस्टम पर उठाए सवाल
गुमला। आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत के बाद गुमला में विरोध और न्याय की मांग तेज हो गई है। शनिवार को जिला मुख्यालय के टावर चौक पर धरना-प्रदर्शन किया गया। इसमें शामिल लोगों ने निशा भगत की मौत की निष्पक्ष जांच कराने और पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की भी मांग की। इसके बाद निशा भगत की अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
इस बीच झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने निशा भगत के पैतृक गांव पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने पार्थिव शरीर पर मिट्टी अर्पित की और शोकाकुल पिता हांडू भगत समेत परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार से निशा भगत के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की। साथ ही गुमला के प्रमुख चौराहे पर निशा भगत की प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी रखी, ताकि आने वाली पीढ़ियां उन्हें याद रख सकें।
रघुवर दास ने कहा कि निशा भगत की मौत से पूरा झारखंड दुखी है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्हें आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि निशा भगत ने अपने वीडियो में कुछ लोगों और व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। ऐसे में उन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है, जिनका जिक्र उन्होंने अपने आखिरी वीडियो में किया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि निशा भगत सरना आदिवासी समाज, धर्मांतरण और आदिवासी जमीन की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठा रही थीं। उनके मुताबिक, निशा भगत को कथित तौर पर जमीन से जुड़े विवादों और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के जरिए प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने अजय तिर्की समेत कुछ लोगों पर निशा भगत के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया और पूरे मामले की जांच की मांग की।
रघुवर दास ने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एक आदिवासी बेटी की मौत के मामले में सरकार को सामने आकर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में आदिवासी जमीन, धर्मांतरण और भू-माफियाओं से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने वालों को पर्याप्त संरक्षण नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि निशा भगत की लड़ाई जल, जंगल और जमीन के अधिकारों से जुड़ी थी। इस मुद्दे का जिक्र करते हुए उन्होंने पूर्व सांसद शहीद कार्तिक उरांव के धर्मांतरण और आरक्षण से जुड़े पुराने विरोध का भी उल्लेख किया। रघुवर दास ने समाज के लोगों से इस मामले में एकजुट होकर न्याय की मांग उठाने की अपील की।
फिलहाल, निशा भगत की मौत को लेकर गुमला में न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग तेज है। प्रदर्शनकारियों और परिजनों की प्रमुख मांग है कि मामले की सीबीआई जांच हो, दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए और परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।







