33.2 C
Ranchi
Wednesday, July 1, 2026
Advertisement
Home Blog Page 13

उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में टेलीकॉम सेवाओं की समीक्षात्मक बैठक संपन्न

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में शुक्रवार को समाहरणालय स्थित सभागार में जिले में दूरसंचार सेवाओं की उपलब्धता एवं गुणवत्ता को लेकर टेलीकॉम कंपनियों तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में बीएसएनएल टावरों की स्थिति, भारत नेट परियोजना की प्रगति, नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने तथा दूरसंचार सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिन स्थानों पर बीएसएनएल टावरों के उपकरणों अथवा अन्य सामग्रियों की चोरी हुई है, वहां संबंधित थानों में अविलंब प्राथमिकी दर्ज कराई जाए, ताकि पुलिस प्रशासन द्वारा चोरी गए सामान की शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने इस संबंध में लापरवाही नहीं बरतने तथा आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

समीक्षा के क्रम में बीएसएनएल के उन टावरों की भी जानकारी ली गई, जहां चोरी अथवा अन्य कारणों से सेवाएं प्रभावित हुई हैं। उपायुक्त ने ऐसे सभी टावरों की मरम्मत एवं आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए उन्हें जल्द से जल्द पुनः क्रियाशील बनाने का निर्देश दिया।

बैठक में भारत नेट परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने जिले की सभी पंचायतों में भारत नेट सेवाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय स्थापित कर कार्य करें।

उपायुक्त ने बीएसएनएल को रामजा (कोब्जा) पंचायत में नया मोबाइल टावर स्थापित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई शीघ्र प्रारंभ करने का निर्देश दिया। साथ ही जानकारी दी गई कि जिले में कुल 12 संभावित स्थलों पर टावर स्थापना हेतु भूमि का चिह्नीकरण किया जा चुका है।

बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि जिले के 12 शैडो एरिया, जहां वर्तमान में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां टावर स्थापना हेतु भूमि की उपलब्धता से संबंधित प्रतिवेदन प्रेषित किया गया है। उपायुक्त ने इस दिशा में आगे की कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया।

भारत नेट परियोजना के अंतर्गत नव निर्मित 16 सरकारी भवनों में उपकरणों के स्थानांतरण की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने पुराने भवनों से उपकरणों को नए भवनों में शीघ्र शिफ्ट करने का निर्देश दिया, ताकि सेवाओं का निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पंचायत स्तर पर इंटरनेट एवं फाइबर कनेक्टिविटी को निरंतर बनाए रखने हेतु आवश्यक रिचार्ज एवं तकनीकी प्रक्रियाएं समय पर पूर्ण की जाएं। इसके अतिरिक्त सभी संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाताओं एवं अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप में यूआईडी संबंधी प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

उपायुक्त ने कहा कि जिले के दूरस्थ एवं नेटवर्क विहीन क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण दूरसंचार सेवाएं पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है तथा इस दिशा में सभी संबंधित एजेंसियों को समन्वित एवं जवाबदेह तरीके से कार्य करना होगा।

बैठक मे अपर समाहर्ता गुमला , संबंधित दूरसंचार कंपनियों के प्रतिनिधि, बीएसएनएल के अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में जिला समाज कल्याण विभाग की समीक्षात्मक बैठक संपन्न

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में शुक्रवार को समाहरणालय स्थित सभागार में जिला समाज कल्याण विभाग की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत सुविधाओं, पोषण संबंधी गतिविधियों, वित्तीय प्रगति, लंबित चयन प्रक्रियाओं तथा विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।

समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने निर्देश दिया कि पोषण वाटिका के लिए आवंटित राशि का अविलंब उपयोग सुनिश्चित किया जाए। जिन क्षेत्रों में निर्धारित कार्य नहीं किया जाना है, वहाँ की अप्रयुक्त राशि को नियमानुसार सरेंडर करने की कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि जिले में किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली एवं पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विद्युत व्यवस्था, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तथा पोषण वाटिका सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में आवंटित राशि के व्यय से संबंधित प्रतिवेदन की समीक्षा के क्रम में पाया गया कि केवल चैनपुर प्रखंड से ही व्यय प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है। इस पर उपायुक्त ने शेष सभी प्रखंडों को आवश्यक प्रतिवेदन शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

उपायुक्त ने किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के संबंध में विशेष निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे केंद्रों में बिजली, पानी एवं शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। यदि निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो संबंधित केंद्रों को 30 जून तक वैकल्पिक उपयुक्त भवनों में स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जाए।

बैठक में फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) आधारित उपस्थिति की भी समीक्षा की गई। पालकोट एवं गुमला प्रखंड में एफआरएस उपस्थिति प्रतिशत संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उसमें सुधार लाने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि निर्धारित प्रगति नहीं होने की स्थिति में संबंधित कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए वेतन स्थगित करने की कार्रवाई की जाएगी।

इसके अतिरिक्त सेविका एवं सहायिका की लंबित चयन प्रक्रियाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने सभी लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने तथा चयन प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया।

बैठक में उप विकास आयुक्त, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, विभिन्न प्रखंडों की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ), महिला पर्यवेक्षिकाएं (एलएस) सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

पेसा नियमावली-2025 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने कहा- ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करना है पेसा का उद्देश्य

गुमला। पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं उसके विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देने के उद्देश्य से शुक्रवार को गुमला नगर भवन में एक दिवसीय जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सम्मेलन में जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत जिला पंचायती राज पदाधिकारी शिशिर कुमार सिंह के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार संपन्न बनाने, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने तथा समुदाय आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने में पेसा नियमावली की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस अवसर पर उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने कहा कि राज्य में पेसा नियमावली पूर्ण रूप से लागू हो चुकी है और इसके अंतर्गत एक्ट के सभी प्रावधानों की विस्तृत व्याख्या की गई है। उन्होंने कहा कि नियमावली लागू होने के बाद लोगों के बीच इसके क्रियान्वयन को लेकर कई तरह की जिज्ञासाएं और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इन्हीं शंकाओं के समाधान के लिए राज्य स्तरीय विशेषज्ञों की उपस्थिति में इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है।

उपायुक्त ने कहा कि पेसा का मूल उद्देश्य पारंपरिक ग्राम सभा एवं पंचायती राज स्वशासन व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाना है। उन्होंने बताया कि छोटानागपुर और संथाल क्षेत्र में परंपरागत रूप से ग्राम प्रधानों की व्यवस्था विभिन्न नामों से प्रचलित है, जैसे मुंडा-मानकी, भूमिज और हो समाज के ग्राम प्रधान। ग्राम सभाओं का संचालन इन्हीं पारंपरिक प्रतिनिधियों के माध्यम से किया जाना है।

उन्होंने निर्देश दिया कि जहां भी ग्राम प्रधानों के पद रिक्त हैं, वहां परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार उनके उत्तराधिकारियों का चयन कर पदों को शीघ्र भरा जाए। साथ ही सभी विभागीय अधिकारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारियों एवं अभियंताओं को पेसा नियमावली का गहन अध्ययन करने का निर्देश दिया, ताकि अनुसूचित क्षेत्रों में संचालित होने वाली सभी योजनाओं में नियमावली का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

उपायुक्त ने कहा कि पेसा नियमावली का प्रभावी पालन होने से ग्राम सभाएं सशक्त होंगी और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं जनभागीदारी बढ़ेगी।

कार्यक्रम में पंचायती राज विभाग से आए पेसा राज्य समन्वयक शैलेंद्र कुमार ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पेसा नियमावली-2025 की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कानून किन परिस्थितियों में अस्तित्व में आया, इसकी आवश्यकता क्यों महसूस हुई तथा झारखंड में इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया क्या है। उन्होंने ग्राम सभा की शक्तियों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय परंपराओं एवं संस्कृति की रक्षा तथा जनभागीदारी आधारित शासन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। साथ ही पेसा नियमावली से संबंधित शंकाओं और भ्रांतियों का समाधान किया गया, जिससे उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं ग्राम प्रधानों को नियमावली की स्पष्ट और व्यापक जानकारी प्राप्त हुई।

कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष, पुलिस अधीक्षक, वन प्रमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, जिला परिषद उपाध्यक्ष, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि, डीपीएम पंचायती राज सहित बड़ी संख्या में संबंधित अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के अंत में उपायुक्त ने सभी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं पारंपरिक ग्राम प्रधानों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें जोहार किया।

राम भक्तों के लिए

बरसात के साथ बढ़ा सर्पदंश का खतरा, तीन दिनों में दो मौतें; गुमला सदर अस्पताल में 1500 एंटी-स्नेक वेनम वायल उपलब्ध

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला। जिले में मानसून की शुरुआत के साथ ही सर्पदंश की घटनाओं में वृद्धि होने लगी है। बीते तीन दिनों के भीतर सर्पदंश से दो लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अंधविश्वास और झाड़-फूंक से बचने तथा सर्पदंश की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है।

ताजा घटना बिशुनपुर थाना क्षेत्र के लापू गांव की है, जहां 22 वर्षीय रोशन भगत की सांप के काटने के बाद गुमला सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। जानकारी के अनुसार रोशन बुधवार रात भोजन करने के बाद गांव के मध्य विद्यालय परिसर में सोने जा रहा था। रास्ते में किसी विषैले सांप ने उसके पैर में डस लिया। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिशुनपुर ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए गुमला सदर अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मृतक के पिता मुनेश्वर भगत ने बताया कि गर्मी के कारण गांव के कई युवक स्कूल परिसर में रात बिताते थे। रोशन भी उसी उद्देश्य से घर से निकला था, लेकिन रास्ते में सांप के डंसने का शिकार हो गया।

घटना की सूचना मिलने के बाद बिशुनपुर थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गुमला सदर अस्पताल भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

जनवरी से अब तक 25 मामले, छह की मौत

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 से 11 जून 2026 तक जिले में सर्पदंश के 25 मामले सामने आए हैं, जिनमें छह लोगों की मौत हो चुकी है। केवल मई महीने में ही लगभग 14 सर्पदंश की घटनाएं दर्ज की गईं। वर्ष 2024 में जिले में सर्पदंश से 14 लोगों की मौत हुई थी, जबकि वर्ष 2025 में नौ लोगों की मौत दर्ज की गई थी। हालांकि समय पर उपचार और एंटी-वेनम की उपलब्धता के कारण 17 मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटने में सफल रहे थे।

अंधविश्वास बन रहा मौत का कारण

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सर्पदंश के बाद कई लोग अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक, ओझामती और देशी जड़ी-बूटियों का सहारा लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल पहुंचने में देरी और अंधविश्वास के कारण कई मरीजों की जान चली जाती है। जिले में सर्पदंश से होने वाली मौतों का वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक होने की आशंका जताई जाती है।

सर्पदंश स्थानीय आपदा घोषित

झारखंड सरकार ने सर्पदंश को अधिसूचित बीमारी और स्थानीय आपदा की श्रेणी में रखा है। सर्पदंश से मृत्यु होने पर मृतक के आश्रितों को राज्य आपदा मोचन निधि के तहत चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि प्रदान की जाती है।

बरसात में क्यों बढ़ जाता है खतरा?

गुमला सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने बताया कि बरसात के मौसम में सांपों के बिलों में पानी भर जाने के कारण वे बाहर निकल आते हैं। ऐसे समय में खेतों, झाड़ियों, घरों के आसपास तथा रात के समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

उन्होंने बताया कि सर्पदंश के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना सबसे महत्वपूर्ण है। मरीज को जितनी जल्दी चिकित्सा सुविधा मिलेगी, उसके स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

अस्पतालों में पर्याप्त एंटी-वेनम उपलब्ध

डॉ. चौधरी ने बताया कि गुमला सदर अस्पताल में वर्तमान में 1,500 एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) वायल उपलब्ध हैं। इसके अलावा जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 35 से 40 एएसवी वायल उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को सर्पदंश के उपचार एवं प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।

सर्पदंश होने पर क्या करें?

  • मरीज को शांत रखें और घबराने न दें।
  • प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखें।
  • तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं।
  • घटना का समय और परिस्थितियां याद रखें।
  • चिकित्सकों की सलाह के अनुसार ही उपचार कराएं।

क्या न करें?

  • झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार का सहारा न लें।
  • प्रभावित स्थान को काटने या जहर चूसने का प्रयास न करें।
  • अत्यधिक कसकर पट्टी न बांधें।
  • सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में किसी भी प्रकार के अंधविश्वास में समय न गंवाएं। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर अस्पताल पहुंचने और एंटी-स्नेक वेनम मिलने पर अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

राम भक्तों के लिए

CAG की ताजा रिपोर्ट सरकारी झूठ का पुलिंदा…जनता की आंखों में धूल झोंकने की बाजीगरी दिखा रही है मोदी सरकार !

0

पंकज कुमार जाट

साहब जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ माहिर हैं। साहव कहते हैं कि हमने 2014 के 74 एयरपोर्ट्स को 2026 में 160+ कर दिया, लेकिन ये  सीएजी (CAG) की ताजा रिपोर्ट इस झूठ की धज्जियां उड़ाती है.

CAG के मुताबिक इनकी बहुप्रचारित ‘उड़ान’ योजना के तहत आवंटित 52 प्रतिशत रूट्स कभी शुरू ही नहीं हो पाए और जो शुरू हुए, उनमें से केवल 30 प्रतिशत ही 3 साल टिक सके।

जनता की जेब से ₹1,089 करोड़ लूटने के बाद भी 83 एयरपोर्ट और हेलीपैड आज खंडहर बन चुके हैं क्योंकि वहां कोई फ्लाइट नहीं चलती. इन्होंने बस बंद पड़ी पट्टियों और वाटर एयरोड्रम्स को कागजों पर एयरपोर्ट दिखाकर अपनी पीठ थपथपा ली।

70 साल में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे असली विश्व-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे बने थे, जिन्हें आज इस सरकार ने ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ के तहत चुपचाप अडानी समूह जैसे अपने खास मित्रों की झोली में डाल दिया है।सड़कों के मामले में भी 2014 के 1,000 किमी से 2026 में 6,700 किमी एक्सप्रेसवे का दावा पूरी तरह से एक फ्रॉड है, जो सिर्फ ‘लेन-किलोमीटर’ की नई परिभाषा गढ़ने से पैदा हुआ है।

पहले जहां मुख्य हाईवे की लंबाई मापी जाती थी, वहीं अब एक ही सड़क की चारों लेनों को अलग-अलग गिनकर आंकड़ों को चार गुना फुलाकर दिखाया जा रहा है, सामान्य 4-लेन नेशनल हाईवे को ‘एक्सप्रेसवे’ का फर्जी टैग दिया जा रहा है।

देश गवाह है कि बिना किसी प्रोपेगेंडा के ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ जैसी विशाल और मजबूत योजनाएं पहले लागू की गई थीं, जबकि आज के ये कथित आधुनिक बुंदेलखंड और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पहली ही बारिश में धंस जाते हैं और बीच सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो जाते हैं।

NHAI पर ₹3.4 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज

विकास के नाम पर आज भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) पर ₹3.4 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज है, और जनता से प्रतिदिन रिकॉर्ड ₹150+ करोड़ का टोल टैक्स वसूल कर उनकी जेबें सरेआम काटी जा रही हैं।मेट्रो नेटवर्क को 5 शहरों से बढ़ाकर 20+ शहरों में पहुंचाने का दावा भी महज एक राजनीतिक छलावा और फीता काटू संस्कृति का उदाहरण है।

छोटे-छोटे टियर-2 शहरों में चुनाव जीतने के लिए महज 2 से 5 किलोमीटर के टुकड़ेनुमा और अधूरे रूट बनाकर केवल वोट बटोरने के लिए उद्घाटन कर दिए गए हैं।असलियत यह है कि भारत में मेट्रो की मजबूत और व्यावहारिक नींव पहले ही रखी जा चुकी थी, और आज जो 390 किलोमीटर से ज्यादा लंबी दिल्ली मेट्रो देश की लाइफलाइन है, वह पूर्ववर्ती सरकारों की दूरदर्शी सोच का ही नतीजा है,जिसने मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसी मेगा परियोजनाओं को मंजूरी और हजारों करोड़ का फंड दिया था।

आज के छोटे शहरों की ये अधूरी मेट्रो प्रणालियां भारी आर्थिक घाटे में चल रही हैं, जहां पैसेंजर फुटफॉल न के बराबर है और ये सिर्फ प्रधानमंत्री की राजनीतिक रैलियों और विज्ञापनों के लिए बैकड्रॉप का काम कर रही हैं।

रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों को जाता है

डिफेंस एक्सपोर्ट को ₹700 करोड़ से ₹23,000 करोड़ पहुंचाने का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार इस सच को छुपा जाती है कि भारत आज भी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक (Arms Importer) बना हुआ है और कुल रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों को जाता है।

इस ₹23,000 करोड़ के निर्यात में कोई स्वदेशी फाइटर जेट, पनडुब्बी या मिसाइलें शामिल नहीं हैं, बल्कि यह निजी कंपनियों द्वारा सप्लाई किए जाने वाले छोटे कलपुर्जे (Sub-components), बुलेटप्रूफ जैकेट और विदेशी हथियारों के गिने-चुने पार्ट्स का कुल योग है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की असली रीढ़ यानी एचएएल (HAL), डीआरडीओ (DRDO) और इसरो (ISRO) जैसी संस्थाएं हैं, जिन्होंने देश को क्रायोजेनिक इंजन से लेकर सुखोई और तेजस तक की क्षमता दी।

वर्तमान सरकार ने इन सरकारी संस्थानों के बजट में कटौती की और इन्हें पंगु बनाकर रक्षा सौदों का ठेका भी निजी उद्योगपतियों की नई-नवेली कंपनियों को दे दिया,इस पूरे प्रोपेगेंडा का सबसे सफेद झूठ यह है कि 2014 से पहले डिजिटल पेमेंट “नहीं था”, जबकि देश का बच्चा-बच्चा जानता है कि 2014 से पहले आरटीजीएस (RTGS), एनईएफटी (NEFT), आईएमपीएस (IMPS) और करोड़ों डेबिट-क्रेडिट कार्ड्स के जरिए रोजाना अरबों का लेनदेन हो रहा था।

जिस यूपीआई (UPI) के दम पर आज भारत दुनिया में नंबर 1 होने का दावा करता है, उसे बनाने वाली संस्था एनपीसीआई (NPCI) की स्थापना साल 2008 में ही कर दी गई थी और इसका पूरा आर्किटेक्चर पहले ही तैयार था।

काले धन को वापस लाने के झूठे वादे को छिपाने के लिए सरकार ने मजबूरी में UPI को अपना राजनीतिक ढाल बनाया

8 नवंबर 2016 को बिना किसी तैयारी के लागू की गई तुगलकी ‘नोटबंदी’ की भयानक आर्थिक तबाही, जिसमें बेकसूर लोग लाइनों में मर गए और देश की जीडीपी को 2 प्रतिशत का सीधा नुकसान हुआ, उसी विफलता और काले धन को वापस लाने के झूठे वादे को छिपाने के लिए सरकार ने मजबूरी में यूपीआई को अपना राजनीतिक ढाल बना लिया।

सोलर क्षमता को 2.5 GW से बढ़ाकर 150+ GW करने का दावा भी कागजों पर तो चमकता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि भारत आज भी अपनी 70 प्रतिशत से ज्यादा बिजली की जरूरतों के लिए प्रदूषण फैलाने वाले कोयले (Coal) पर ही निर्भर है।

भारत में सौर ऊर्जा की वास्तविक और नीतिगत शुरुआत साल 2010 में “जवाहरलाल नेहरू नेशनल सोलर मिशन” के साथ 22,000 मेगावाट के लक्ष्य से हुई थी, जिसका मौजूदा सरकार ने सिर्फ नाम बदला।

सौर क्षमता के पीछे की कड़वी सच्चाई यह है कि देश में लगे 80 प्रतिशत से अधिक सोलर पैनल और सेल आज भी सीधे चीन से आयात किए जा रहे हैं, जिससे हमारी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पूरी तरह बर्बाद हो गई है।

मेक इन इंडिया का ढकोसला

मेक इन इंडिया का नारा लगाने वालों ने घरेलू उद्यमियों को दरकिनार कर पिछले कुछ सालों में चीन की कंपनियों की जेबें भरने के लिए अरबों डॉलर बाहर भेज दिए हैं। पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग को 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का दावा सीधे तौर पर देश की खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण के साथ एक खतरनाक खिलवाड़ है।

एथेनॉल बनाने के लिए आज भारी मात्रा में गन्ने, मक्के और यहां तक कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों से मिलने वाले सब्सिडी वाले चावल जैसे खाद्यान्नों को डायवर्ट किया जा रहा है, इससे देश में अन्न का संकट पैदा हो सकता है।

पूर्ववर्ती सरकारों की प्राथमिकता हमेशा देश के 140 करोड़ लोगों की खाद्य सुरक्षा और पेट भरना रही थी, लेकिन इस 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग की जिद के कारण देश का ग्राउंडवाटर (भूजल) खतरनाक स्तर पर दोहा जा रहा है क्योंकि गन्ने की खेती में बेहिसाब पानी लगता है।

जो अनाज इंसानों और मवेशियों के निवाले के काम आना चाहिए था, उसे गाड़ियों के ईंधन में जलाकर चंद बड़ी चीनी मिलों और कॉर्पोरेट घरानों को मोटा मुनाफा कमा कर दिया जा रहा है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र तबाह हो गया

सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में 0 से 10+ यूनिट्स लगाने का दावा एक और बड़ा झूठ है, क्योंकि 2026 तक जिन 12 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है, उनमें से अधिकांश केवल पैकेजिंग, एसेंबलिंग और टेस्टिंग (OSAT/ATMP) यूनिट्स हैं, जो असली चिप मैन्युफैक्चरिंग नहीं हैं।

धोलेरा में बन रहा एकमात्र वास्तविक फैब्रिकेशन प्लांट भी अभी व्यावसायिक उत्पादन से सालों दूर है और केवल कागजी दावों पर चल रहा है। सरकार केवल विदेशी और निजी कंपनियों (जैसे माइक्रोन, फॉक्सकॉन) को जनता के टैक्स का ₹76,000 करोड़ ‘सब्सिडी’ के तौर पर रेवड़ियों की तरह बांटकर यह झूठा माहौल बना रही है कि हम आत्मनिर्भर हो गए हैं।

भारत में जिस आईटी हब और चिप डिजाइनिंग के ईको-सिस्टम का फायदा आज ये कंपनियां उठा रही हैं, उसकी पूरी नींव तो दशकों पहले बेंगलुरु को ‘सिलिकॉन वैली’ बनाकर रख दी गई थी, जिसकी बदौलत आज देश सॉफ्टवेयर और डिजाइन में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।

एक तरफ देश की गरीब और मध्यमवर्गीय जनता 12 साल से लगातार बढ़ती कमरतोड़ महंगाई की मार झेल रही है, जहां 2014 का ₹410 का घरेलू एलपीजी सिलेंडर आज ₹1000 पार है, पेट्रोल ₹100 के पार है और खाने का तेल, दालें, दवाइयां सब आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं।

दूसरी तरफ हमारे प्रधान सेवक करोड़ों रुपये के आलीशान वीवीआईपी बोइंग 777 विमानों में घूम रहे हैं, ₹20,000 करोड़ से अधिक के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत अपने लिए महल बनवा रहे हैं और रोज नए-नए विदेशी परिधानों में फोटोशूट करा रहे हैं।

18 घंटे काम करने का दावा करने वाली इस सरकार ने पिछले 12 सालों में महिलाओं, बुजुर्गों या बच्चों के लिए एक भी ऐसी दूरगामी और कल्याणकारी बुनियादी योजना लागू नहीं की जो पूर्ववर्ती मनरेगा (MGNREGA), शिक्षा का अधिकार (RTE) या खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) की बराबरी कर सके।

राम भक्तों के लिए

जिला परिषद अध्यक्ष सुनीता देवी ने पीसीसी पथ एवं गढ़वाल निर्माण कार्य का किया शिलान्यास

0

न्यूज – कहकशां फारुकी

गोमिया—ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिला परिषद सदस्य सह अध्यक्ष सुनीता देवी ने गुरुवार को तुलबुल पंचायत के बरवाडीह में दो विकास योजनाओं का विधिवत शिलान्यास किया।
जिला योजना मद से स्वीकृत इन योजनाओं के तहत पारसनाथ टुडू के घर से तालाब तक लगभग 100 फीट गढ़वाल निर्माण तथा पारसनाथ टुडू के घर से गुणराम के खेत तक लगभग 200 फीट पीसीसी पथ का निर्माण कराया जाएगा। शिलान्यास के बाद अध्यक्ष ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास उनकी प्राथमिकता है। इन योजनाओं के पूर्ण होने से स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी तथा क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में तुलबुल पंचायत की मुखिया ममता देवी, उपमुखिया नरेश साव, समाजसेवी चितरंजन साव, पंचायत समिति सदस्य हरी नारायण प्रजापति, वार्ड सदस्य बबीता देवी, सुरेश साव, कृष्णा प्रजापति सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
ग्रामीणों ने विकास कार्यों के शुभारंभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला परिषद अध्यक्ष का आभार जताया और उम्मीद व्यक्त की कि भविष्य में भी क्षेत्र में इसी प्रकार विकास कार्य जारी रहेंगे।

राम भक्तों के लिए

तेनुघाट रजिस्ट्री कार्यालय मे कोबरा मिलने से मची अफरा-तफ

0

न्यूज – कहकशां फारुकी

गोमिया–गुरुवार सुबह तेनुघाट रजिस्ट्री कार्यालय में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब कार्यालय खुलते ही एक जहरीला कोबरा सांप दिखाई दिया। सांप के दिखते ही कर्मचारियों में हड़कंप मच गया और सभी एहतियातन कार्यालय से बाहर निकल गए।
जानकारी के अनुसार, कार्यालय कर्मी पंकज कुमार जब अवर निबंधन पदाधिकारी के कक्ष में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक कोबरा सांप फन फैलाकर फुंफकार मार रहा है। कार्यालय में टाइल्स लगी होने के कारण सांप तेजी से इधर-उधर नहीं जा पा रहा था, जिससे उसे नियंत्रित करना अपेक्षाकृत आसान रहा।
घटना की सूचना मिलते ही कथारा निवासी एवं प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यूअर राजू कुमार यादव को बुलाया गया। मौके पर पहुंचकर उन्होंने सावधानीपूर्वक कोबरा को पकड़कर एक जार में सुरक्षित बंद किया और बाद में उसे जंगल में छोड़ दिया।
राजू कुमार यादव ने बताया कि वह पिछले सात-आठ वर्षों से सांपों का रेस्क्यू कार्य कर रहे हैं। अब तक वे तीन से चार हजार से अधिक सांपों को सुरक्षित पकड़कर जंगलों में छोड़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि पकड़ा गया कोबरा अत्यंत विषैला था। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सांप पकड़ना बेहद जोखिम भरा कार्य है। उचित प्रशिक्षण और जानकारी के बिना किसी भी व्यक्ति को ऐसे प्रयास नहीं करने चाहिए, अन्यथा जान का खतरा हो सकता है।
इधर, कार्यालय पहुंचने पर अवर निबंधन पदाधिकारी रितु रंजन कुमार ने राजू कुमार यादव को उनकी तत्परता और साहसिक कार्य के लिए सम्मानित करते हुए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि समय पर सांप को पकड़ लिए जाने से किसी संभावित दुर्घटना को टाला जा सका।

राम भक्तों के लिए

CISF की बड़ी कार्रवाई, 3.730 टन अवैध कोयला जब्त

0

न्यूज – कहकशां फारुकी

गोमिया–बेरमो थाना क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 3.730 टन अवैध कोयला जब्त किया है। बरामद कोयला को नियमानुसार सीसीएल प्रबंधन को सौंप दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोपनीय सूचना तथा ड्रोन निगरानी से प्राप्त वीडियो इनपुट के आधार पर सीसीएल के बी एंड के एरिया में विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान कारो एक्सकैवेशन के पीछे तथा खासमहल क्षेत्र में छापेमारी कर अवैध रूप से संग्रहित लगभग 3.730 टन कोयला बरामद किया गया।
CISF अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में अवैध कोयला खनन और तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। ड्रोन सर्विलांस एवं तकनीक आधारित निगरानी के माध्यम से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद अवैध कोयला कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। CISF की सतर्कता, मजबूत आसूचना तंत्र और त्वरित कार्रवाई से कोयला चोरी में संलिप्त असामाजिक तत्वों के मनोबल पर असर पड़ा है।
अभियान में सहायक कमांडेंट वर्पे सार्थक बाबाजी, निरीक्षक एस.आर. नायक, सब-इंस्पेक्टर संतोष कुमार तिवारी, प्रधान आरक्षक संदीप कुमार, सीसीएल सुरक्षा कर्मियों तथा अन्य CISF जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

राम भक्तों के लिए

बिजली पोल लदा ट्रैक्टर पलटा, ठेका मजदूर कि हुई मौत

0

न्यूज – कहकशां फारुकी

गोमिया– बोकारो थर्मल थाना क्षेत्र के पिलपिलो मोड़ के समीप बुधवार को बिजली पोल लदा एक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में ट्रैक्टर पर सवार एक ठेका मजदूर की दबकर मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार नावाडीह ऊपरघाट के कंजकीरो गांव में बिजली विभाग की ओर से पोल गाड़ने का कार्य चल रहा है। फुसरो पावर सब-स्टेशन से बिजली पोल लेकर ट्रैक्टर कंजकीरो की ओर जा रहा था। इसी दौरान पिलपिलो और बोकारो थर्मल के बीच मुख्य सड़क पर ट्रैक्टर अचानक असंतुलित होकर पलट गया। हादसे में ट्रैक्टर पर सवार ठेका मजदूर बिनय मुरमुर गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना के बाद अन्य मजदूरों एवं स्थानीय लोगों की मदद से घायल को तत्काल बोकारो थर्मल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
बताया जाता है कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रैक्टर पर चालक समेत कुल चार मजदूर सवार थे। हादसे में अन्य मजदूरों को मामूली चोटें आई हैं। सूचना मिलते ही बोकारो थर्मल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी। वहीं दुर्घटनाग्रस्त ट्रैक्टर को भी जब्त कर मामले की जांच की जा रही है।
घटना के बाद मृतक के परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई है। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच में जुटी हुई है।

राम भक्तों के लिए

गोमिया क्रिकेट अकादमी की अंडर-14 टीम ने बंगाल में लहराया जीत का परचम

0

न्यूज – कहकशां फारुकी

गोमिया। गोमिया क्रिकेट अकादमी की अंडर-14 टीम ने बंगाल दौरे पर शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन मैचों की श्रृंखला 2-1 से अपने नाम कर ली। युवा खिलाड़ियों के बेहतरीन खेल और सामूहिक प्रयास के दम पर टीम ने ट्रॉफी जीतकर गोमिया का नाम रोशन किया।
श्रृंखला में टीम के कप्तान सृजन कुमार भोगता ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए तीन मैचों में कुल 176 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने एक शानदार शतक और एक अर्धशतक जड़ा, जिससे टीम को निर्णायक बढ़त मिली। वहीं तहसीन फातिमा ने भी तीन मुकाबलों में 82 रन बनाकर टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मनीष कुमार यादव ने भी प्रभावी बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया, जबकि दीपिका कुमारी ने विकेटकीपर के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए टीम को मजबूती प्रदान की। गेंदबाजी विभाग में छोटी कुमारी ने सटीक लाइन-लेंथ और नियंत्रित गेंदबाजी के दम पर महत्वपूर्ण विकेट हासिल कर विपक्षी टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा।
अकादमी के कोच रवि निषाद ने खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि टीम ने अनुशासन, संघर्ष और उत्कृष्ट खेल भावना का परिचय दिया। खिलाड़ियों के सामूहिक प्रयास और समर्पण के बल पर गोमिया की अंडर-14 टीम ने बंगाल की धरती पर जीत का परचम लहराते हुए श्रृंखला और ट्रॉफी दोनों अपने नाम कर लिए।
इस उपलब्धि पर खेल प्रेमियों और अभिभावकों ने खिलाड़ियों तथा कोचिंग स्टाफ को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

राम भक्तों के लिए
IIT - Polo Tshirt - Premium