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Friday, July 3, 2026
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उपायुक्त की अध्यक्षता में विशेष प्रेस वार्ता आयोजित, जनगणना 2027 की तैयारियों की दी गई विस्तृत जानकारी

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गुमला ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमल उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में सूचना भवन सभागार में विशेष प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें भारत की जनगणना 2027 के सफल क्रियान्वयन हेतु की गई तैयारियों की विस्तृत जानकारी साझा की गई।

उपायुक्त ने बताया कि जनगणना 2027 का प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना पूर्णतः डिजिटल माध्यम से दिनांक 16 मई 2026 से 14 जून 2026 तक संपन्न होगा, जबकि स्व-गणना की प्रक्रिया 01 मई 2026 से 15 मई 2026 तक चलेगी। इस दौरान नागरिक अपने मोबाइल फोन या कम्प्यूटर के माध्यम से se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि स्व-गणना के पश्चात प्राप्त SE ID को सुरक्षित रखना आवश्यक है, जिसका सत्यापन वास्तविक गणना के दौरान प्रगणकों द्वारा किया जाएगा।

उपायुक्त ने कहा कि “भारत की जनगणना केवल आंकड़ा संग्रह की प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के समग्र विकास की आधारशिला है। इससे प्राप्त आंकड़े सरकार की योजनाओं के निर्माण एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2027 की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है, जो पारदर्शिता, गति एवं सटीकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

गुमला जिले की तैयारियों की जानकारी देते हुए उपायुक्त ने बताया कि जिले में कुल 13 चार्ज बनाए गए हैं तथा 37 फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया गया है। जिले में कुल 2071 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स (HLB) का गठन किया गया है। इसके अतिरिक्त, 27 अप्रैल 2026 से 09 मई 2026 तक चार्ज स्तर पर 2289 प्रगणकों एवं 408 पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

जनगणना कार्य के सुचारू संचालन एवं अनुश्रवण हेतु जिला स्तर (जिला सांख्यिकी कार्यालय, गुमला) एवं चार्ज स्तर (प्रखंड/अंचल) पर कोषांग का गठन किया गया है, जिससे किसी भी समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

उपायुक्त ने जिले के सभी नागरिकों एवं प्रबुद्धजनों से अपील करते हुए कहा कि वे स्व-गणना में बढ़-चढ़कर भाग लें एवं 16 मई से 14 जून 2026 के बीच होने वाले मकान सूचीकरण कार्य में प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को आवश्यक सहयोग प्रदान करें।

उन्होंने कहा कि “आपकी सही एवं समय पर दी गई जानकारी ही आने वाले वर्षों में विकास की दिशा तय करेगी। अतः सभी नागरिक इस राष्ट्रीय दायित्व में सक्रिय सहभागिता निभाएं।”

साथ ही उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग करें।

इस दौरान अपर समाहर्ता गुमला, जिला सहकारिता पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

गुमला होगा कार्बाइड मुक्त जिला, फल दुकानों व स्ट्रीट फूड वेंडरों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्त नजर, स्वच्छता में लापरवाही पर होगी कार्रवाई

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गुमला ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिले में आमजनों को सुरक्षित एवं शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर सघन जांच एवं जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उपायुक्त गुमला के निर्देश एवं अभिहित अधिकारी सह अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. धनुर्जय सुम्ब्रई एंव खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुग्गी के द्वारा जिला मुख्यालय के विभिन्न बाजारों, मंडियों एवं प्रमुख चौक-चौराहों पर फल दुकानों, स्ट्रीट फूड वेंडरों, गोलगप्पा – गुपचुप एवं चाट ठेलों का निरीक्षण किया गया।

उक्त अभियान के दौरान जिले को कार्बाइड मुक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने फल विक्रेताओं को सख्त निर्देश दिया कि फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक रसायनों का उपयोग किसी भी स्थिति में न करें। बताया गया कि कार्बाइड से पके फल मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं और इससे पेट संबंधी समस्याएं, तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव तथा गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में पकड़े जाने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी प्राकृतिक तरीके से फल पकाने तथा सुरक्षित विकल्प अपनाने की सलाह दी गई।

वहीं, स्ट्रीट फूड वेंडरों, गुपचुप एवं चाट विक्रेताओं की स्वच्छता व्यवस्था की भी गहन जांच की गई। कई स्थानों पर साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। खाद्य सामग्री खुले में रखी हुई मिली तथा कुछ विक्रेता बिना ग्लव्स एवं कैप के खाद्य पदार्थों का निर्माण एवं परोसने का कार्य करते पाए गए। इस पर अधिकारियों ने तत्काल सुधार करने के निर्देश देते हुए सख्त चेतावनी जारी की।

उक्त अभियान के तहत विक्रेताओं को ग्लव्स, कैप एवं साफ-सुथरे बर्तनों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया तथा स्वच्छ पेयजल के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम से संबंधित आवश्यक नियमों एवं मानकों की जानकारी भी दी गई, ताकि वे सुरक्षित तरीके से खाद्य सामग्री का निर्माण एवं विक्रय कर सकें।

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने बताया कि जिले में यह अभियान लगातार जारी रहेगा और आमजनों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्बाइड मुक्त फल उपलब्ध कराना एवं स्ट्रीट फूड की गुणवत्ता में सुधार लाना विभाग की प्राथमिकता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो भी विक्रेता नियमों की अनदेखी करेंगे या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जानकारी विभाग को दें और साफ-सफाई का ध्यान रखने वाले विक्रेताओं से ही खाद्य सामग्री खरीदें।

राम भक्तों के लिए

गुमला जिला में सखी मंडल की दीदीयों को मिला वाहन, महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ी उपलब्धि

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गुमला ब्यूरो प्रमुख –  गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला पलाश-झारखंड स्टेट प्रमोशन सोसाइटी के द्वारा महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में एसवीईपी परियोजना अंतर्गत आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के अंतर्गत गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो द्वारा तीन प्रखंडो –डुमरी, जारी, एवं घाघरा के सखी मंडल से जुड़े 03 लाभुको को समाहरणालय परिसर,गुमला में टाटा मैजिक सवारी वाहन की चाबी सौपा गया एवं उपायुक्त ,अपर समाहर्ता, जिला परिवहन पदाधिकारी एवं अनुमंडल पदाधिकारी गुमला द्वारा हरी झंडी दिखाकर वाहनों को रवाना किया।

इस अवसर पर उपायुक्त द्वारा लाभुको – कुसुम देवी(रोशनी महिला मंडल दोदांग) ,अगुस्तिना टोप्पो(जीवन आजीविका सखी मंडल ), एवं फिल्मिना एक्का(गुलाब आजीविका सखी मंडल) को भविष्य हेतु शुभकामनाये दी| यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम है , बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी है।

आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के माध्यम से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती एवं सुरक्षित परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के साथ-साथ महिलाओं को ब्याज मुक्त ऋण देकर उन्हें उद्यमी बनाया जा रहा है।

इस मौके पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक शैलेन्द्र जारिका , जिला प्रबंधक स्किल्स एवं जॉब्स बिरेन बघवार, प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक, घाघरा, डुमरी, जारी एवं, जिला के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे।

राम भक्तों के लिए

जल ही विकास का आधार: उपायुक्त ने जलाशयों के निरीक्षण के साथ कृषि सशक्तीकरण का खाका किया तैयार

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गुमला ब्यूरो प्रमुख  – गणपत लाल चौरसिया 

कतरी जलाशय से शुरू हुआ निरीक्षण, खेतों तक निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर

गुमला : – गुमला जिले में कृषि को सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आज उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो द्वारा विभिन्न जलाशयों एवं उनसे जुड़े नहर तंत्र का विस्तृत निरीक्षण किया गया। लगभग 7 घंटे तक कड़ी धूप में किए गए इस क्षेत्र भ्रमण का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध जल संसाधनों के समुचित उपयोग, उनकी मरम्मति एवं किसानों तक निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करना रहा।

निरीक्षण की शुरुआत कतरी जलाशय से की गई, जहां उपायुक्त ने नहरों एवं डिस्ट्रीब्यूटरी सिस्टम का जायजा लेते हुए निर्देश दिया कि जल का प्रवाह खेतों तक सुचारु रूप से पहुंचे, ताकि रबी सहित सभी फसली चक्र में किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिल सके। उन्होंने सोलर लिफ्ट इरिगेशन, सोलर पंप एवं किसान समृद्धि योजना के तहत इच्छुक किसानों को सिंचाई संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही, रबी सीजन से पूर्व इन सुविधाओं को सुनिश्चित करने एवं किसानों के लिए ओरिएंटेशन सत्र आयोजित करने की बात कही, ताकि कोई भी खेत खाली न रहे।

नहरों की मरम्मति, सोलर सिंचाई और मत्स्य विकास को लेकर दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश

उपायुक्त ने केनाल के किनारे स्थित किसानों को सोलर आधारित पाइप एवं पंप की सुविधा उपलब्ध कराने, नहरों की मरम्मति हेतु डीपीआर तैयार करने तथा जलाशय रखरखाव में लगे कर्मियों के पारिश्रमिक सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।

मत्स्य विकास को बढ़ावा देते हुए उन्होंने मत्स्यपालक समूहों/सोसाइटी के गठन, केज निर्माण एवं स्थानीय नागरिकों को मत्स्य पालन हेतु प्रेरित करने के निर्देश दिए।

जलाशय का निरीक्षण करते हुए उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जलाशय के किनारे कोई भी भूमि अनुपयोगी न रहे। उन्होंने किसानों को प्रेरित कर अधिकतम कृषि गतिविधियों से जोड़ने का निर्देश दिया। साथ ही, इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने, बोटिंग सुविधा प्रारंभ करने एवं आवश्यक डीपीआर तैयार करने हेतु संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया।

79 किमी नहर नेटवर्क के जीर्णोद्धार एवं मसरिया जलाशय के विकास पर भी विशेष फोकस

निरीक्षण के क्रम में घाघरा प्रखंड अंतर्गत डोडांग एवं शिवराजपुर पंचायत में क्षतिग्रस्त नहरों एवं डैम संरचनाओं का भी जायजा लिया गया। उपायुक्त ने लीकेज की तत्काल मरम्मति, नहरों की साफ-सफाई (डिसिल्टिंग) एवं प्राथमिकता के आधार पर क्षतिग्रस्त स्थलों के पुनर्निर्माण हेतु एक सप्ताह के भीतर पृथक-पृथक डीपीआर तैयार करने का निर्देश जल संसाधन विभाग को दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कतरी जलाशय से शिवराजपुर डैम तक लगभग 79 किलोमीटर लंबे मुख्य नहर एवं डिस्ट्रीब्यूटरी नेटवर्क के समग्र जीर्णोद्धार हेतु योजनाबद्ध कार्य किया जाए, ताकि जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।

इसके उपरांत मसरिया जलाशय का भी निरीक्षण किया गया, जहां आसपास के गांवों को जलाशय प्रणाली से जोड़ते हुए कृषि विस्तार की संभावनाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए।

उपायुक्त ने कहा कि _”जिले में उपलब्ध जल संसाधनों का संरक्षण, मरम्मति एवं वैज्ञानिक प्रबंधन ही कृषि विकास की कुंजी है। किसानों को संसाधन उपलब्ध कराना एवं उन्हें प्रेरित करना जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”_

उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि सभी पात्र किसानों को विभिन्न योजनाओं से आच्छादित किया जाए तथा क्लस्टर आधारित सूची तैयार कर नियमित संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं।

इस दौरान अपर समाहर्ता, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी, जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता, माइनर इरिगेशन विभाग के सहायक अभियंता, प्रखंड विकास पदाधिकारी गुमला, प्रखंड विकास पदाधिकारी घाघरा, सहायक जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

स्टेट कंसल्टेंट गौरव वर्मा का गुमला दौरा, स्कूली बच्चों को जल संरक्षण के प्रति किया जागरूक

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गुमला ब्यूरो प्रमुख गणपत लाल चौरसिया 

सभी विद्यालयों में बाल संसद की बैठक आयोजित, जागरूकता संबंधी वीडियो फिल्म का हुआ प्रदर्शन

जल पखवाड़ा में गुमला के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी, बाल संसद व इको क्लब बने जागरूकता के केंद्र


गुमला गुमला जिला में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के तत्वावधान में संचालित जल पखवाड़ा 2026 के अंतर्गत राज्य स्तर से गतिविधियों की मॉनिटरिंग एवं प्रोत्साहन के क्रम में स्टेट कंसल्टेंट गौरव वर्मा द्वारा गुमला जिले का भ्रमण किया गया।

इस दौरान उन्होंने पीएमश्री उच्च विद्यालय सिसई का दौरा कर बाल संसद की बैठक में भाग लिया तथा बच्चों से संवाद करते हुए बाल संसद के सभी सदस्यों के कार्य एवं दायित्वों पर परिचर्चा की । साथ ही उनके द्वारा जल संरक्षण, जल के समुचित उपयोग एवं पर्यावरण संतुलन के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने बच्चों को दैनिक जीवन में जल बचाने के सरल उपाय अपनाने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया।

जिला भ्रमण के क्रम में उनके द्वारा डीईओ कविता खलखो, डीएसई नूर आलम खां एवं डायट प्राचार्य प्रियाश्री भगत के साथ औपचारिक मुलाकात कर गुमला जिले में बाल संसद एवं इको क्लब क्रियाशीलता, जल पखवाड़ा के संचालन, विभिन्न विभागीय गतिविधियों एवं विद्यालय स्तर पर किए जा रहे नवाचारों पर विस्तृत परिचर्चा की गई।

जल पखवाड़ा गतिविधि अंतर्गत आज जिले के सभी विद्यालयों में बाल संसद से संबंधित शैक्षणिक वीडियो का प्रदर्शन किया गया। इसके उपरांत बाल संसद एवं इको क्लब की बैठक आयोजित कर बच्चों को उनके कार्य, दायित्व एवं नेतृत्व भूमिका के संबंध में विस्तार से जागरूक किया गया तथा विद्यार्थियों को विद्यालय एवं समुदाय में जल संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने हेतु प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर गौरव वर्मा ने अपने संदेश में कहा कि “जल एवं पर्यावरण हमारे जीवन के आधार हैं। जल पखवाड़ा का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि बच्चों एवं समाज में स्थायी व्यवहार परिवर्तन लाना है। इस पखवाड़े के आयोजन से पूरे राज्य में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी है तथा गुमला जिले के बच्चों ने जिस उत्साह एवं जिम्मेदारी के साथ इन गतिविधियों में भाग लिया है, वह अत्यंत सराहनीय है।”

डीईओ कविता खलखो ने कहा कि “विद्यालय स्तर पर आयोजित गतिविधियों जैसे बाल संसद, विभिन्न प्रतियोगिताएं, जागरूकता कार्यक्रम एवं सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह पहल भविष्य में जल संकट से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”

डीएसई नूर आलम खां ने बताया कि जिले में जल पखवाड़ा के तहत लगातार विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देने की दिशा में सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं।

 

राम भक्तों के लिए

पीएम की चुनावी रैलियों में थोथी दलील : हकीकत…विरासत टैक्स को राजीव गाँधी ने ही ख़त्म किया था

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रणधीर झा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी रैलियों में बता रहे हैं कि इंदिरा गाँधी की छोड़ी गयी भारी-भरकम सम्पत्ति पर टैक्स न देना पड़े इसलिए राजीव गाँधी ने 1985 में ‘विरासत टैक्स’ हटा दिया था।

1977 के लोकसभा चुनाव के बाद एक शख़्स इंदिरा गाँधी को लेकर बहुत चिंतित था। यह वही शख़्स था जिसने केंद्र में कांग्रेस के तीस साल के अनवरत शासन के अंत की पटकथा लिखी थी यानी लोकनायक जयप्रकाश नारायण। उनकी चिंता थी कि उनके बड़े भाई जैसे जवाहरलाल नेहरू की बेटी और उनकी भतीजी इंदु अब घर खर्च कैसे चलायेगी। उन्हें पता था कि नेहरू-गाँधी परिवार ने अपनी सारी सम्पत्ति देश के नाम कर दी है।

इंदिरा गाँधी से बदला लेने को आतुर जनता पार्टी के तमाम नेताओं को उन्होंने आगाह किया और इंदिरा गाँधी से मिलने उनके घर गये। इस मुलाक़ात के बारे 2017 में बीबीसी हिंदी वेबसाइट में एक लेख छपा था जो अभी भी देखा जा सकता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क़रीबी और मौजूदा समय में इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र, दिल्ली के निदेशक, वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने इस मुलाक़ात के बारे में बीबीसी को बताया था,“जे.पी.ने इंदिरा से पूछा कि अब तुम प्रधानमंत्री नहीं हो तो तुम्हारा ख़र्च कैसे चलेगा? इंदिरा ने जवाब दिया कि नेहरू जी की पुस्तकों की रॉयल्टी से उनका जीवन यापन हो जायेगा।”

कांग्रेस के घोषणापत्र में विरासत टैक्स के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया था

दरअसल, वे चुनावी रैलियों में दावा कर रहे थे कि कांग्रेस की सरकार बनने पर पैतृक सम्पत्ति पर ‘विरासत टैक्स’ लगाया जाएगा। कथित मुख्यधारा मीडिया उनका भोंपू बनकर इसे प्रचारित भी कर रहा था। लेकिन सोशल मीडिया में यह बात उजागर कर दी कि कांग्रेस घोषणापत्र में विरासत टैक्स के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है और भारत में जो विरासत टैक्स लगता था उसे राजीव गाँधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ही ख़त्म किया था।

इस रहस्योद्घाटन के बाद उन्होंने बैकफ़ुट पर जाने के बजाय राजीव गाँधी की मंशा पर सवाल उठाते हुए हमले का नया मोर्चा खोल दिया। ज़ाहिर है चुनावी लाभ के लिए देश पर शहीद हुए दो प्रधानमंत्रियों, इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी को संदिग्ध बनाने से मोदी जी को कोई परहेज़ नहीं है। उनकी बात मानी जाये तो लगता है कि इंदिरा गाँधी ने करोड़ों की संपत्ति छोड़ी होगी जिसके लिए राजीव गाँधी ने विरासत टैक्स ख़त्म किया।

इस बहाने वे गाँधी परिवार को भ्रष्ट भी साबित करना चाहते हैं जिसके पास काफ़ी सम्पत्ति थी, लेकिन इतिहास को दो-चार पन्ने खोलते ही आरएसएस की शाखाओं में पढ़ाया गया यह पाठ हास्यास्पद नज़र आने लगता है।

‘आनंद भवन’ स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र था

इलाहाबाद के मशहूर वकील मोतीलाल नेहरू देश के उन चुनिंदा रईसों में थे जो सबसे पहले महात्मा गाँधी से प्रभावित हुए और 1920 के असहयोग आंदोलन के साथ हो लिए थे। उनका घर यानी ‘आनंद भवन’ धीरे-धीरे स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र बन गया और इस दशक में आज़ादी के आंदोलन से जुड़े तमाम बड़े फ़ैसले इसी घर में लिए गये।

1930 में इस भवन को मोतीलाल नेहरू ने औपचारिक रूप से कांग्रेस को दे दिया और वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का राष्ट्रीय मुख्यालय बन गया। अब इसका नाम ‘स्वराज भवन’ रख दिया गया।

नेहरू ने स्वराज भवन देश को समर्पित कर दिया था

मोतीलाल नेहरू के निधन के बाद 24 नवंबर 1931 को जवाहर लाल नेहरू ने स्वराज भवन को एक न्यास बनाकर देश को समर्पित कर दिया। यह भवन हमेशा अंग्रेज़ों के निशाने पर रहा और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इसे ज़ब्त भी कर लिया गया था। तब वहाँ पहरे के लिए फौजी टुकड़ी तैनात की गयी थी।
स्वराज भवन कांग्रेस पार्टी को दिये जाने के बाद नेहरू परिवार बग़ल में ही बनाये गये नये भवन में चला गया जिसे अब ‘आनंद भवन’ नाम दे दिया गया। इंदिरा गाँधी का जन्म 1917 में स्वराज भवन में हुआ था और उनकी शादी 26 मार्च 1942 को आनंद भवन में हुई। इस भावनात्मक जुड़ाव के बावजूद उन्होंने आनंद भवन को 14 नवंबर 1969 को राष्ट्र को समर्पित कर दिया।

जवाहरलाल नेहरू स्मारक निधि की देख-रेख में आनंद भवन को संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया। ऐसा करते हुए उन्होंने नेहरू की राह ही पकड़ी थी जिन्होंने 3 सितंबर 1946 को अंतरिम सरकार में शामिल होने का फैसला किया तो आनंद भवन को छोड़ कर अपनी सारी संपत्ति देश को दान कर दी थी।

इंदिरा परिवार के पास अब कोई पैतृक आवास नहीं रह गया था

यानी इंदिरा गाँधी के रहते इस परिवार के पास कोई पैतृक आवास नहीं रह गया था। दोनों आवास देश को समर्पित कर दिये गये थे। रही बात नक़दी की तो नेहरू की हालत क्या थी, इसके तमाम दस्तावेज़ी प्रमाण उपलब्ध हैं।

1962 के भारत-चीन युद्ध के समय इंदिरा ने सोने-चाँदी के आभूषण राष्ट्रीय रक्षा कोष में दान कर दिया था

साफ़ है कि नेहरू जी के पास न घर बचा था और न नकदी। यही हाल इंदिरा गाँधी का भी था। उनके पास जो सोने-चाँदी के आभूषण थे, वह सभी उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय राष्ट्रीय रक्षा कोष में दान कर दिया था। नेहरू-गाँधी परिवार का सम्पत्ति के बारे में क्या दृष्टिकोण रहा है, इसकी गवाही बिजनौर का सरकारी कोषागार देता है जहाँ पचास साल से इंदिरा गाँधी की 73 किलो चाँद रखी हुई है लेकिन परिवार ने कभी इस पर दावा नहीं किया।
दरअसल 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी निर्माणाधीन कालागढ़ बांध का दौरा करने गयी थीं। वहाँ स्थानीय निवासियों ने उन्हें चाँदी से तौला था। इंदिरा जी इस चाँदी को अपने साथ नहीं ले गयीं और प्रशासन ने इसे कोषागार में रखवा दिया। साल 2002 में जिला प्रशासन ने इस पर दावा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को लिखा था लेकिन रिजर्व बैंक ने इसे निजी संपत्ति बताकर कब्जा लेने से इनकार कर दिया।

फिर राजीव गाँधी ने विरासत टैक्स कैसे ख़त्म कर दिया, इसका रहस्य सिर्फ़ मोदी जी  को ही पता होगा !

स्वाभाविक रूप से राजीव गाँधी को विरासत में न स्वराज भवन मिल सकता था और न आनंद भवन। जवाहरलाल नेहरू या इंदिरा गाँधी के पास कहीं और ज़मीन-जायदाद रही हो, ऐसी भी जानकारी नहीं है। फिर किस टैक्स से बचने के लिए राजीव गाँधी ने विरासत टैक्स ख़त्म किया होगा, इसका रहस्य सिर्फ़ प्रधानमंत्री मोदी को पता होगा!
सच ये है कि कांग्रेस ने ज़मींदारी उन्मूलन से लेकर बैंकों के राष्ट्रीयकरण तक तमाम ऐसे काम किये जिससे 1980 तक देश में ग़ैर-बराबरी तेज़ी से घटी। लेकिन बीते दस वर्षों में मोदी जी ने जिस तरह से अपने क़रीबी कॉरपोरेट मालिकों को छूट दी है उसने एक फ़ीसदी लोगों के पास देश की चालीस फ़ीसदी संपत्ति पहुँचा दी है। आज ग़ैरबराबरी अंग्रेज़ी राज से बदतर हो चली है। राहुल गाँधी इसी पर सवाल उठा रहे हैं जिससे मोदी जी परेशान हैं।

दस साल के शासन के बावजूद वे अपनी उपलब्धियाँ गिनाने की हालत में नहीं हैं तो कांग्रेस घोषणापत्र को लेकर तमाम झूठ फैला रहे हैं। जिस भारत का ध्येय वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ हो, उसके प्रधानमंत्री की यह हालत अफ़सोसनाक है। इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी जैसे शहीदों पर झूठ के सहारे किया जाने वाला हमला इस अफ़सोस को और बढ़ा देता है। विरासत टैक्स खत्म इसलिए किया गया क्योंकि उसकी वसूली में टैक्स से अधिक रकम खर्च हो जाती थी।

राम भक्तों के लिए

राजनाथ जी…! आपकी पार्टी की सरकार आए या ममता की, गुंडे तो वहां रहेंगे ही…आपकी सरकार आ गई, तो जो गुंडे उधर हैं, इधर आ जाएंगे

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रक्षामंत्री जी स्वयं आपकी भाषा बहुत सभ्य मालूम नहीं देती। तो आपकी पार्टी की सरकार आए या ममता बनर्जी की सरकार रहे, गुंडे तो वहां रहेंगे ही। आपकी सरकार आ गई तो जो गुंडे उधर हैं, इधर आ जाएंगे। जब आम आदमी पार्टी के सात सांसद उधर से इधर आ सकते हैं तो गुंडे तो गुंडे हैं, उन्हें क्या शर्म? वे भी इधर आ जाएंगे और आपकी पार्टी उनका स्वागत करेगी। अब तो उत्तर भारत में गुंडे ही निर्णायक शक्ति हैं।

शरीफों के जेल जाने का वक्त आ चुका है और कुछ तो जा भी चुके हैं! आप तो राजनाथ जी, अनुभवी हैं और कभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। आपके समय से आज तक गुंडे वहां कभी खत्म हुए हैं? डबल इंजन-ट्रिपल इंजन सरकार के बावजूद वहां क्या हाल है, किसी से छुपा है क्या? आपके गृहमंत्री, उत्तर प्रदेश और असम के मुख्यमंत्री जिस भाषा में बात करते हैं, वह क्या शरीफों की भाषा है? ये तो चंद उदाहरण हैं।

 

सम्राट जी…! भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया, तो भ्रष्टाचार भी आपको बर्दाश्त नहीं करेगा…!

उधर, बिहार के नये मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि भ्रष्टाचार और लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं होंगे! ऐसा मत करिए सर। सबकुछ बर्दाश्त करने के बाद ही आप मुख्यमंत्री बने हैं तो इन दोनों को भी आराम से बर्दाश्त कीजिए। अगर आपने भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया तो भ्रष्टाचार भी आपको बर्दाश्त नहीं करेगा। वह किसी भी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से कई गुना अधिक ताकतवर है।

मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री तो आते-जाते रहते हैं, भ्रष्टाचार, किसी सरकारी नौकर से भी अधिक परमानेंट है बल्कि वही एकमात्र परमानेंट है। और महाशय, लेट लतीफी नहीं रही तो भ्रष्टाचार कहां रहेगा? तो लेटलतीफी भी रहेगी, भ्रष्टाचार भी रहेगा मगर आप कितने समय तक पद पर रहेंगे, यह निश्चित नहीं है.

सर, आप यह कहते कि मैं ईमानदारों को बर्दाश्त नहीं करूंगा तो लगता कि आप सचमुच गंभीर हैं। तो गंभीरता को नष्ट मत होने दीजिए। और प्लीज़ कभी जोश- जोश में यह न कह दीजिएगा कि मैं न खाऊंगा,न खाने दूंगा। जिन माननीय ने यह वाक्य कहा था, उनकी पिछले बारह वर्षों से खिल्ली उड़ रही है। आप अपनी मत उड़वाइगा। सावधान रहिएगा. याद रखियेगा…बिहार में अभी सत्ता संग्राम अभी थमा नहीं है.

राम भक्तों के लिए

उपायुक्त के निर्देश पर जन शिकायत निवारण दिवस अब प्रत्येक मंगलवार को होगा

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गुमला ब्यूरो प्रमुख- गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो के निर्देशानुसार जन शिकायतों एवं जन समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निष्पादन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पूर्व निर्धारित जन शिकायत निवारण दिवस (जनता दरबार) में आंशिक संशोधन किया गया है।

संशोधित व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक मंगलवार को जिला स्तर पर जन शिकायत निवारण दिवस (जनता दरबार) का नियमित आयोजन किया जाएगा।

इस संबंध में सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि निर्धारित दिवस पर जनता दरबार के सफल संचालन हेतु आवश्यक तैयारी एवं समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि प्राप्त शिकायतों का त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी समाधान किया जा सके।

उपायुक्त, गुमला द्वारा आम नागरिकों से अपील है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान हेतु प्रत्येक मंगलवार को चंदाली स्थित समाहरणालय सभागार गुमला में उपायुक्त द्वारा आयोजित जिला स्तरीय जनता दरबार में उपस्थित होकर अपनी समस्याओं को अवश्य रखें।

राम भक्तों के लिए

उपायुक्त की अध्यक्षता में साप्ताहिक जन शिकायत निवारण दिवस आयोजित

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गुमला ब्यूरो प्रमुख- गणपत लाल चौरसिया 

विभिन्न प्रखंडों से आए नागरिकों की समस्याओं पर सुनवाई, त्वरित समाधान हेतु अधिकारियों को निर्देश

गुमला : – गुमला जिला समाहरणालय परिसर में आज उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में साप्ताहिक जन शिकायत निवारण दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं दूर-दराज क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपनी समस्याएं उपायुक्त के समक्ष रखीं।

उपायुक्त ने सभी आवेदनों को गंभीरतापूर्वक सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक मामले का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित, पारदर्शी एवं न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध निष्पादन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।

जन शिकायत निवारण दिवस के दौरान प्रखंड सिसई अंतर्गत ग्राम पंचायत छारदा के ग्रामीणों द्वारा ग्राम प्रधान के सहायक सचिव एवं कोषाध्यक्ष पद के चुनाव को पेसा प्रावधानों के अनुरूप निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने हेतु अनुरोध किया गया, जिस पर संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

ग्राम फसिया, थाना सिसई के निवासी रामदेव सिंह द्वारा अपनी खतियानी भूमि पर अवैध रूप से प्लॉटिंग किए जाने की शिकायत प्रस्तुत की गई, जिस पर राजस्व एवं संबंधित अंचल अधिकारियों को जांच कर आवश्यक विधिसम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

मौजा बघनी, प्रखंड सिसई से प्राप्त आवेदन में सामूहिक भूमि से संबंधित विवाद एवं कथित रूप से अनियमित भूमि हस्तांतरण का मामला सामने आया, जिस पर उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तथ्यात्मक जांच कर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

प्रखंड रायडीह के ग्राम टेडाचुंवा के आवेदकों द्वारा आवास निर्माण से संबंधित भूमि विवाद एवं निर्माण कार्य बाधित होने की समस्या रखी गई, जिस पर राजस्व विभाग को मामले का परीक्षण कर उचित समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

ग्राम चेटर से प्राप्त एक अन्य आवेदन में भूमि सीमांकन से जुड़े विवाद के निष्पक्ष समाधान हेतु पुनः मापी कराने का अनुरोध किया गया, जिस पर संबंधित अंचल प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग से संबंधित एक प्रकरण में लंबित भुगतान एवं प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की गई, जिस पर संबंधित विभाग को आवश्यक जांच कर उचित कार्रवाई करने को कहा गया।

प्रखंड बिशुनपुर के ग्राम भौरा गानी के ग्रामीणों द्वारा जर्जर सड़क के निर्माण एवं आवागमन सुविधा में सुधार की मांग रखी गई, जिस पर संबंधित विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

साथ ही विभिन्न आवेदकों द्वारा पेंशन, जन वितरण प्रणाली, आधारभूत सुविधाओं एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित समस्याएं भी प्रस्तुत की गईं, जिन पर उपायुक्त द्वारा संबंधित अधिकारियों को त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया।

जन शिकायत निवारण दिवस के माध्यम से जिला प्रशासन द्वारा आम नागरिकों को उनकी समस्याओं के समाधान हेतु एक सुलभ एवं प्रभावी मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

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मात्र एक रुपया शुल्क पर बीएसएनएल सिम कार्ड वितरण किया गया

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गुमला ब्यूरो प्रमुख- गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला अंतर्गत स्थित आज पालकोट प्रखंड के अंतर्गत भुसुंडिटोली में बीएसएनएल, गुमला के एसडीई द्वारा सिम वितरण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में मात्र ₹1 के नाममात्र शुल्क पर सिम कार्ड वितरित किए गए।

फोटो एवं आधार सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत कुल 31 सिम कार्डों का सफलतापूर्वक वितरण किया गया।

इस पहल से गांव के लोगों में काफी खुशी देखने को मिली। डिजिटल इंडिया को सफल बनाने के उद्देश्य से बीएसएनएल द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर शिविर लगाकर सिम कार्ड वितरण करना एक सराहनीय पहल बताया जा रहा है l

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