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Thursday, July 2, 2026
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गिरिडीह डीसी ने पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना के पहलुओं की समीक्षा की, अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया

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गिरिडीह:  प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना के तहत बैंकों के उन्मुखीकरण व इसके सफल क्रियान्वयन को लेकर उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने सभी पहलुओं पर बिंदुवार समीक्षा बैठक की. बैठक में उपायुक्त ने कहा कि आपसी समन्वय स्थापित करते हुए कार्य करें तथा हितग्राही की बैंक औपचारिकताओं को डीआरपी के माध्यम से पूर्ण कराकर स्वीकृति एवं वितरण में तेजी लाएं। डीसी ने बताया कि सूक्ष्म खाद्य उद्यमों का समर्थन करने के लिए इकाइयों की स्थापना/उन्नयन के लिए तकनीकी और व्यावसायिक सहायता केंद्र प्रायोजित योजना है। यह योजना 2020-21 से पूरे देश में लागू की जा रही है।

योजना के तहत 10 लाख के अनुदान का प्रावधान

डीसी ने इसके व्यापक प्रचार-प्रसार तथा सफल संचालन को लेकर सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया। कहा कि इस योजनांतर्गत स्वरोजगार स्थापना के लिए बैंक शाखाओं के माध्यम से सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाई के उन्नयन के लिए या नवीन उद्योग की स्थापना पर लिए गए ऋण के टर्म लोन पर 35 प्रतिशत अधिकतम 10 लाख रुपए अनुदान का प्रावधान है। डीसी ने निर्देशित किया कि अधिक से अधिक स्व-सहायता समूहों को इस योजना से जोड़कर उनके प्रकरण तैयार कर स्वीकृत करें। साथ ही संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आगामी दिनों में योजना से संबंधित अधिक से अधिक प्रकरण स्वीकृत करें। बैठक में जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक, डीपीएम, JSLPS, महाप्रबंधक, उद्योग विभाग व अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

पारसनाथ पर अब सियासत शुरू, जैन समाज के पुरुषों में आक्रोश, महिलाओं की आंखों में आंसू

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सम्मेदशिखर से कमलनयन: पारसनाथ क्षेत्र की पवित्रता को लेकर जैन समाज के आक्रोश के बीच पक्ष-विपक्ष में परस्पर सियासत शुरू हो गई है. पक्ष-विपक्ष दोनों एक-दूसरे को जिम्मेवार ठहरा रहे हैं. हालांकि वोट बैंक की राजनीति के मद्देनजर शिखर जी पवित्रता बनाए रखने पर दोनों ओर से किसी भी तरह की पहलकदमी नहीं की गई है. सम्मेदशिखर जी को पर्यटन क्षेत्र घोषित करने के सरकारी प्रस्ताव के विरोध के कारण विश्व भर के जैन समुदाय उबले हुए हैं. अहिंसा परमो धर्म का पालन करनेवाले पारसनाथ तीर्थक्षेत्र पूरे देश में प्रस्ताव को वापस लेने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन और मौन जुलूस जैसे कार्यक्रम आयोजन किए जा रहे हैं. पर्यटन क्षेत्र घोषित कियेजाने संबंधी गजटीय अधिसूचना जारी होने के बाद जैन के पुरुष वर्गों में सरकार के प्रति गुस्सा है वहीं महिलाओं के आंसू छलक रहे हैं.  

सरकार के फैसले से हम सहमत नहीं: डॉ. रुचि

दरअसल, सम्मेदशिखर जैन समाज के लिए वैसा ही तीर्थक्षेत्र ऐसी सिद्धभूमि है, इसकी महत्ता का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार एक हर जैनी शिखर जी वंदना कर अपना मनुष्य जीवन सार्थक मानता है. सम्मेदशिखर आनेवाला हर तीर्थयात्री पूरे मनोभाव से तीर्थंकरों का स्मरण कर उनके उपदेशों का पालन करता है. जैनियों का मानना है कि इस सिद्धक्षेत्र का कण-कण पवित्र है. अगर पर्यटन क्षेत्र घोषित हुआ तो इसकी पवित्रता पूरी तरह खंडित हो जाएगी. सरकारी अधिसूचना के बाद जैन समाज उद्वेलित है. पर्वत वंदना करने आयी महाराष्ट्र के औरंगाबाद की डॉ. रुचि विशाल पाटनी ने कहा कि अपने परिवार के साथ वह तीसरी बार सम्मेदशिखर आई है. यहां आकर उन्हें जो सुकून और आत्मिक शांति मिलती है, वह पर्यटन क्षेत्र बनने से नहीं मिलेगी. सरकार के फैसले से सहमत नहीं है. मध्यप्रदेश के सागर जिले से अभय जैन और उनकी बेटी अनुप्रेक्षा जैन ने कहा कि सरकार का यह फैसला बिल्कुल ही हमारे धर्म के खिलाफ है. हमारी सरकार से अपील है कि तीर्थराज जैसा पहले था वैसा ही रहने दिया जाए. धर्म मंगल जैन की विद्यापीठ की तारा बहन जी ने कहा कि सरकार का यह निर्णय अव्यावहारिक है और हम इसका समर्थन नहीं करते. उन्होंने यहां आनेवाले लोगों से आग्रह किया कि जो लोग यहां आते हैं वे धार्मिक यात्रा मान कर आएं, तभी इस क्षेत्र की पवित्रता बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि गिरिहीह जिला प्रशासन द्वारा इसकी पवित्रता को लेकर जो आदेश आया है उसका भी हमलोग प्रचार-प्रसार कर रहे हैं.

क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रशासन कटिबद्ध: डीसी

जैन समाज के विरोध के इतर झारखंड सरकार के पर्यटन सचिव मनोज कुमार के निर्देश के आलोक में गिरिडीह जिला एवं पुलिस-प्रशासन ने पारसनाथ क्षेत्र में मांस-मदिरा के क्रय-विक्रय व उपभोग को लेकर काफी गंभीर है. पर्वत पर जानेवाले हर यात्री के बैग की जांच-पड़ताल के बाद ही जाने की अनुमति मिल रही है. इस बाबत गिरिडीह के डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने कहा कि सरकार आदेश का अक्षरश: पालन किए जाने का निर्देश पुलिस-प्रशासन को दिया गया है, जिसकी मॉनिटरिंग की जा रही है. पूरे क्षेत्र में पुलिस गश्ती बढ़ाई गई है. क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं.

शिखर जी की पवित्रता बनाए रखना सरकार का दायित्व: मुनिश्री प्रमाण सागर

जैन समाज के संत शिरोमणि दिगंबर जैनाचार्य श्री108 विद्यासागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य अप्रितम साधक मुनि श्री108 प्रमाण सागर जी महाराज ने सरकारी प्रस्ताव की बाबत समस्त जैन समाज की भावनाओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि श्री सम्मेदशिखर जैन समाज की आत्मा है, जहां चौबीस में से बीस तीर्थंकरों सहित अनेक मुनियों ने मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त किया है. उन्होंने कहा कि इस सिद्धक्षेत्र की पवित्रता खंडित न हो इसका पालन करना और कराना शासन-प्रशासन का दायित्व है. सरकार को अपने फैसले पर गंभीरता से विचार करे एवं जैन समाज की आस्था को खंडित होने से बचाए. क्योंकि इस क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र बनाना जैन समाज की धार्मिक भावना के विपरीत है.   

राम भक्तों के लिए

खलारी – टेरर फंडिंग मामले में कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें

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टेरर फंडिंग मामले में कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें, जीएम के सलाखों के पीछे जाने के बाद भी अधिकारी नहीं सुधरे अपराधियों को आर्थिक सहायता पहुंचाने की सूचना

पिपरवार, 3 जनवरी : पिपरवार, मगध- आम्रपाली कोयला परियोजना की टेरर फंडिंग से जुड़े एनआईए ने फरवरी 2018 में लिया था केस।
बता दें कि एनआईए ने चतरा जिले के टंडवा थाना में दर्ज प्राथमिकी को फरवरी 2018 को टेकओवर किया। अनुसंधान करते हुए 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें खुलासा कर चुकी है कि सीसीएल, पुलिस, उग्रवादी व शांति समिति के बीच समन्वय से टेरर फंडिंग हो रही थी। तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) को फंड देने की पुष्टि हुई है। टीपीसी को लेवी देने के लिए ही उसने ऊंची दर पर मगध और आम्रपाली प्रोजेक्ट से कोयला ढुलाई का ठेका लिया था। झारखंड में एनआईए ने पहला केस 2012 में दर्ज किया था। वर्तमान में कुल 24 केस में सुनवाई चल रही है, लेकिन एक भी मामले में फैसला नहीं आ सका है।
मुकदमे का सामना कर रहे आधुनिक पावर कंपनी के तत्कालीन एमडी महेश अग्रवाल, कारोबारी विनीत अग्रवाल, अमित अग्रवाल, सुदेश केडिया समेत अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए की विशेष अदालत के जज को मुकदमे की सुनवाई प्राथमिकता के
आधार पर एक साल के अंदर पूरी करने का आदेश दिया है। इसके बाद एनआईए कोर्ट ने सुनवाई डे- टू-डे शुरू कर दी है । छुट्टियों को कर दी है। छुट्टियों को छोड़कर सभी दिनों में गवाही एनआईए को सुनिश्चित करनी है। गवाहों के नहीं आने से परीक्षण स्थगित न हो, इस पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

मामले में इन आरोपियों पर होगा आरोप गठन

मामले में महेश अग्रवाल, सुदेश केडिया, विनीत अग्रवाल, अमित अग्रवाल एवं अजय कुमार उर्फ अजय सिंह के खिलाफ जल्द ही आरोप गठित किया जाएगा। पिछले महीने आरोपी विनीत अग्रवाल की आरोप मुक्त याचिका अदालत ने खारिज कर दी थी। हालांकि मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गवाही को उक्त आरोपियों के रिकॉर्ड पर लाया जा रहा है। विनोद गंझू, बिरबल गंझू, प्रदीप राम समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ सितंबर 2019 में आरोप गठित किया गया था। मामले में पहली गवाही 25 नवंबर 2019 को दर्ज की गई थी।

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खलारी – अलाव जला कर कड़कड़ाती ठंढ से बचाव व राहत की व्यवस्था की गई

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खलारी/डकरा, 03 जनवरी : खलारी प्रखंड क्षेत्र में घने कोहरे एवं कड़कड़ाती ठंढ से बचाव व राहत के लिए प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न चौक चौराहे पर प्रखंड प्रशासन ने अलाव की व्यवस्था की है। अंचलाधिकारी शिशुपाल आर्य के निर्देश पर मंगलवार को बिरहोर टोला मैकलुस्कीगंज एवं बैंक चौक खलारी के कई स्थानों पर शाम में अलाव को जला कर लोगों को राहत देने की कोशिश की गई। शाम में ठिठुरन बढ़ जाने से राहगीर, बाजार में आम जन एवं गरीब लोगों के पास कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस तरह के अलाव जलने से गरीब गुरबा एवं अन्य जरूरत मन्द को ठिठुरन से राहत मिलेगी।

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खलारी – सावित्रीबाई फुले व जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर दी गयी श्रद्धांजलि

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खलारी/डकरा, 03 जनवरी : एसटी एससी ओबीसी एकता मंच ने अंबेडकर पार्क डकरा में मंगलवार को सावित्रीबाई फुले एवं जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर भारत के प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले एवं मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के जीवनी पर प्रकाश डाला गया, साथ ही उनके विचारों को रखा गया। वक्तावों ने कहा कि नारी मुक्ति आंदोलन की प्रणेता भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ने 1848 में महिलाओं को शिक्षित करने के साथ बहुजन समाज के बेटियों और महिलाओं को शिक्षा देने का काम किया। साथ ही महान समाज सेविका ने महिलाओं को सम्मान के साथ जीने एवं लड़कियों को हक अधिकार पढ़ाई लिखाई के प्रति जागरूक किया। वहीं मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के बारे में कहा कि 1946 में वे संविधान सभा के सदस्य के रूप में आदिवासियों के हितों की रक्षा में मुखर होकर बोले थे। जयपाल सिंह मुंडा भारतीय आदिवासियों और झारखंड आंदोलन के एक सर्वोच्च नेता थे। वर्ष 1925 में ऑक्सफोर्ड फोर्ड ब्लू का खिताब पाने वाले हॉकी के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी थे। उनकी कप्तानी में 1928 के ओलंपिक में भारत ने पहला स्वर्ण पदक प्राप्त कर पूरे देश में अपना नाम रोशन किया है। इसलिए हमें और हम सभी लोगों को उनके बताए हुए रास्ते पर चलने की जरूरत है। इस दौरान कन्हाई पासी, देवंती देवी, मधुबाला देवी, इंदिरा देवी, भीम गंझू, सिया पति देवी, गीतांजलि कुमारी, नरेश कुमार, अमरलाल सतनामी, मास्टर धनेश, अनुज कुमार, सूरज कुमार, अनिता एक्का, खेमलाल तुरी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

दिल्ली से अधिक प्रदूषित है कोयलांचल, एक दशक बाद तय मानक से पांच गुना अधिक, जेएसएमडीसी ने लोगों को सचेत किया

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धनबाद: कोयलांचल की राजधानी धनबाद प्रदूषण के मामले में दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है. पिछले एक दशक में कोयलांचल में पहली बार प्रदूषण का स्तर यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) की सघनता 554 दर्ज की गई है। लेकिन सोमवार को 2011 से अधिक प्रदूषण का स्तर दर्ज होने के बाद प्रदूषण की भयावहता लोगों के दैनिक जीवन को बुरी तरह से प्रभावित करेगा. प्रदूषण के मामले में पीएम-2.5 का स्तर 544.2 और पीएम-10 का स्तर 554.9 शामिल था। यह राष्ट्रीय मानक 100 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर (एमजीसीएम) से पांच गुना अधिक है। इससे पहले 2011 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी कंप्रिहेंसिव इंवायरमेंटल पाल्यूशन इंडेक्स (सेपी) का स्तर लगभग 500 दर्ज किया गया था। एक वर्ष तक प्रतिबंध रहने के बाद फिर स्थिति में थोड़ा सुधार आया था और तत्काल प्रभाव से धनबाद में सभी तरह के नए उद्योग लगाने पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन यह नीति असरकारक साबित नहीं हुई.

एक्यूआइ की सघनता 300 से अधिक रहने की संभावना

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार अगले दो-तीन दिन तक एक्यूआइ की सघनता 300 से अधिक रहने की संभावना है। प्रदूषण की वजह से सोमवार को लोगों को सांस लेने में काफी परेशानी हुई। खासकर दमा एवं सर्दी-खांसी से ग्रसित लोग परेशान रहे। प्रदूषण बढ़ने का कारण हवा में काफी नीचे तक धूल-कणों का तैरना है। धुंध होने की वजह से धूलकण आसमान में नहीं जा पा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने का कारण ठंड, हवा में मौजूद धूल कण, झरिया की आग, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं और कोलियरी क्षेत्र में नियमों की अनदेखी कर हो रही कोयला ट्रांसपोर्टिंग है। शहर के कई इलाके ऐसे हैं, जहां सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।

कई तरह की बीमारियों को देते हैं आमंत्रण  

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय पदाधिकारी रामप्रवेश कुमार ने बताया कि पीएम यानी पार्टिकुलेट मैटर, जो हवा धूलकण का आकार बताते हैं। इसके कण बेहद सूक्ष्म होते हैं जो हवा में तैरते हैं। हमारे शरीर के बाल पीएम 50 के आकार के होते हैं। इससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीएम-10 कितने बारीक कण होते होंगे। 24 घंटे में हवा में पीएम-10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक होने पर स्थिति खतरनाक मानी जाती है। हवा में मौजूद यही कण हवा के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर खून में घुल जाते हैं। इससे शरीर में कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। पीएम-10 के अंतर्गत हवा में सल्फर डाइआक्साइड, नाइट्रोजन डाइआक्साइड, ओजोन, आयरन, मैगनीज, बैरीलियम, निकल आदि तैरता है। सोमवार के दिन यही कण जमीन की सतह से काफी नजदीक तैर रहे थे।

झरियावासी तो रोज प्रदूषण खाते और पीते हैं

बताया गया कि ठंड में धूलकण हवा में कम ऊंचाई पर तैरते रहते हैं। प्रदूषित हवा सबसे अधिक फेफड़े को प्रभावित करती है। इसकी वजह से धनबाद में ब्रोंकाइटिस, दमा ट्यूबरक्लोसिस के मरीज अधिक हैं। प्रदूषित हवा से स्ट्रोक, इस्केमिक हृदय रोग, क्रानिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, कैंसर, निमोनिया और मोतियाबिंद की बीमारी भी होती है। तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषण और एलर्जी कारक तत्व वायुमंडल से हट नहीं पाते हैं। इससे अस्थमा, एलर्जी राइनाइटिस और अन्य एलर्जी विकार बढ़ जाते हैं। तापमान और ठंड में अचानक परिवर्तन के चलते, शुष्क हवा भी वायुमार्ग को संकुचित करती है, जिससे कष्टप्रद खांसी शुरू हो जाती है। लोगों से अपील की गई है कि प्रदूषित वातावरण में न रहें। अपने चेहरे पर फेस मास्क जरूर लगाएं। चेहरा ढंककर रखें। बीच-बीच में चेहरे को साफ पानी से धोते रहें। रोजाना गुड़ व गर्म दूध का सेवन करें। हालांकि कोयलांचल निवासी को प्रदूषण में जीने-मरने की आदत हो गई है. लोग कहते हैं कि झरिया निवासी तो आग के ऊपर रहने के आदी हैं, वे तो प्रतिदिन प्रदूषण खाते और पीते हैं.  

राम भक्तों के लिए

पारसनाथ: जैन समाज का मौन प्रदर्शन, 5 जनवरी को राज्य के सभी जिलों के लोग पहुंचेंगे गिरिडीह

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सम्मेदशिखर/गिरिडीह: जैन धर्म के तीर्थराज सम्मेद शिखर-पारसनाथ को पर्यटन क्षेत्र घोषित किये जाने के सरकारी प्रस्ताव के विरोध का दायरा अब दिल्ली तक जा पहुंचा है. देश का जैन समाज आंदोलन पर उतर आया है. इधर, 5 जनवरी को पूरे झारखंड में सकल जैन समाज गिरिडीह जिला मुख्यालय में मौन प्रदर्शन करेगा, जिसमें प्रदेश के सभी 24 जिलों के समाज के हजारों महिला-पुरुष भाग लेंगे। प्रदर्शन के बाद गिरिडीह उपायुक्त के जरिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया जायेगा। मौन प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि अपने-अपने बैनरों के साथ शिरकत करेंगे।

मौखिक बयानों से संतुष्ट नहीं है जैन समाज

हालांकि सरकार की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि जैन समाज की भावना के खिलाफ सरकार नहीं जायेगी। तीर्थ क्षेत्र की धार्मिक आस्था हर हाल में पूर्ववत कायम रहेगी। लेकिन सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण सम्मेद शिखर से लेकर दिल्ली के इंडिया गेट तक जैन समाज के लोग आंदोलन कर रहे हैं. लेकिन समाज सरकारी नुमाइंदों के मौखिक बयानों से संतुष्ट नहीं हैं. इसी क्रम में मंगलवार को गिरिडीह जैन समाज के मंत्री लोकेश जैन, महिला समिति की मंत्री मंजू जैन, उपमंत्री धीरज जैन और अजय जैन ने संयुक्त रूप से पत्रकारों से  कहा कि प्रस्ताव के विरोध में देशभर में समाज के लोग उद्वेलित हैं.

सम्मेदशिखर जैन समाज की आत्मा है

पदधारियों ने कहा कि हमारी एक सूत्री मांग सिर्फ यही है कि तीर्थ क्षेत्र को तीर्थ क्षेत्र रहने दिया जाय। सम्मेद शिखर जैन समाज की आत्मा है, जिसपर हमले करना कदापि उचित नहीं है। कहा कि हम सरकार से हाथ जोड़कर करवद्ध विनती करते हैं कि तीर्थ क्षेत्र की पवित्रता को बनाये रखने के लिए तत्काल जैन समाज के प्रस्ताव वापस ले लिया जाये। आज देश भर के मीडिया ने भी सम्मेद शिखर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया है. दूसरी ओर गिरिडीह जिला प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निबटने के लिए तैयार है. डीसी नमन प्रियेश लकड़ा के निर्देश पर पारसनाथ के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. वहीं जैन समाज लगातार राज्य सरकार पर अपने फैसले वापस लेने का दबाव बनाए हुए है.

राम भक्तों के लिए

राजस्थान के सकराय धाम में अपने सपने को हकीकत में बदलने के लिए 6 जनवरी को पहुंचेंगे लाखों श्रद्धालु, तैयारियां शुरू, प्रशासन सतर्क

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कमलनयन

भारतीय सनातन संस्कृति में आस्था सर्वोपरि है. मध्यकाल में आस्था स्थलों पर हुए बेशुमार हमलों के बावजूद भारतीय संस्कृति गरिमा के साथ आज भी कायम है. हमारी प्राचीन संस्कृति की प्रमुख विशेषता है. देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्राचीन मंदिरों (उपासनास्थलों) में कई सदियों से गणपति बप्पामोरया, हर-हर महादेव, जय माता दी और वाहेगुरू के जयकांरों से गुंजायमान है. इनमें सामाजिक समरसता और धार्मिकता-आध्यात्मिकता का बोध होता है. इन प्राचीन धार्मिक स्थलों पर आस्था से परिपूर्ण श्रद्धालु तनावपूर्ण जीवन में आत्मिक सुख पाने की चाहत में परिजनों के साथ जाते हैं. ऐसे उपासना स्थलों पर जाकर बाल-बच्चों के लिए मन्नतें मांगी जाती हैं या मन्नतें पूरी होने के बाद वहां पूजा-अर्चना या चढ़ावा के लिए जाते हैं, मत्था टेकते हैं.  गृहस्थ जीवन के लिए मनोवांछित आशीर्वाद के साथ नई उम्मीदें लेकर आत्मविश्वास के साथ घर वापसी हैं. देश के इन्हीं प्राचीन मंदिरों में शक्ति और भक्ति की साधना स्थली राजस्थान के सकराय में स्थित वनस्पति की देवी माता शाकम्बरी का अलौकिक धाम  “शाकम्बरी पीठ” शुमार हैं, जहां भक्तों की ऐसी अटूट आस्था जुड़ी है. इस वर्ष 6 जनवरी को पावन तिथि पड़ी है. इस अवसर पर देश भर से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे. विशाल भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक  स्तर पर व्यापक तैयारी चल रही है.

51 शक्तिपीठों में एक है शाकम्बरी पीठ

भक्तों की मानें तो माता के दरबार में सच्चे मन से मत्था टेकनेवाले हर भक्त की मनोकामना आकार लेती है और हमारे सपने हकीकत में बदल जाते हैं. मंदिर में विराजमान माता ब्रहाणी माता रुद्राणी की रहमत से भक्त की हर वाजिब मनोकामना पूरी होती है. राजस्थान के सीकर जिले के उदयपुर वाटी में स्थित  मालकेतु पर्वत के मध्य घाटी, जिसके चारों ओर छोटे-बड़े शिखरों, जंगली फल-फूल के पेड़ों की लताओं के बीच स्थित माता का भव्य मंदिर है, जो मां दुर्गा स्वरुपा 51 शक्ति पीठों में एक है शाकम्बरी पीठ, जिन्हें भक्त शाक-सब्जियों की देवी शताक्षी समेत विविध नामों से पूजते हैं. देवी भगवती सांभर इलाके की अधिष्ठात्री देवी भी है. मातारानी के मंदिर के कारण इलाके का पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक एंव पुरातात्विक महत्व एंव सदियों से गौरवशाली इतिहास और विशेष संस्कृति की पहचान रही है.

युधिष्ठिर ने बनवाया था मंदिर

लोहार्गल माहात्मय समेत अन्य धर्मग्रथों के मुताबिक देवराज इन्द्र ने सकराय के इसी स्थान पर शाकम्बरी देवी की आराधना कर मां के आशीर्वाद से अपना खोया राजवैभव प्राप्त किया था। इसके अलावा महाभारत युद्ध के पश्चात गौत्र हत्या के पाप से मुक्ति के लिए पांचों पाण्डवों ने इसी लोहार्गल में आकर युद्ध में प्रयोग किये गये शस्त्रों को पवित्र कुंड में बहाये एंव धर्मराज युधिष्ठिर ने देवी शंकरा अर्थात माता शाकम्बरी का मंदिर बनाया जो कालान्तर में शाकम्बरी पीठ के नाम से विख्यात हुआ उक्त संदर्भ में कई उल्लेखित शिलालेख मंदिर के पूर्वी छोर में मंदिर की प्राचीनता का गवाह है। माता शाकम्बरी शाक की देवी के रूप में पूजित है। मान्यता है कि एक समय पृथ्वी पर सौ सालों तक वर्षा नहीं होने से पूरी पृथ्वी में त्राहि-त्राहि मच गई थी. जन-जीवन के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा तो देव -मुनियों ने देवी भगवती से प्रार्थना कर इस संकट से उबारने की गुहार लगाई। फलस्वरूप देवी भगवती ने शाकम्बरी के रूप में प्रगट होकर अपने शरीर से शाक द्वारा संसार का भरण-पोषण किया एवं वर्षा कर देवी ने सृष्टि को नष्ट होने से बचाया था. जिसके कारण पौष पूर्णिमा को देवी शाकम्बरी का प्राक्कटय दिवस मनाया जाता है. इस पावन तिथि को भक्त फल-फूल, शाक-सब्जी, हलवा-पुड़ी, खीर का भोग लगाकर सुहाग की चुनरी अर्पित करते हैं.

पौष पूर्णिमा पर होता है सामूहिक महोत्सव

ऐसे तो देश-विदेश से 365 दिन लाखों श्रद्धालु माता शाकम्बरी के दरबार में वंदना करने आते हैं, लेकिन सभी नवरात्रों के अलावा हर साल पौष पूर्णिमा को माता का प्राकट्य महोसत्व सामूहिक रूप से मनाया जाता है. इस विशेष दिवस पर देशभर के विभिन्न जनपदों में भी भक्तगण भव्य रूप से मातारानी की जयंती मनाते हैं. इस दौरान माता ब्राहाणी-रूद्राणी का भव्य श्रृंगार कर दरबार सजाकर, संगीतमय मंगल पाठ, चुनरी उत्सव, मेंहदी उत्सव, छप्पन भोग, कन्या भोजन, मंगल आरती, महाप्रसाद समेत विविध कार्यक्रमों में भाग लेकर सपरिवार जोत लेते हैं। परिवार में सुख-शांति और समद्धि की प्रार्थना के लिए लोगों को यहां पहुंचना शुरू हो गया है. माता शाकम्बरी के देश भर में लाखों भक्त है। लेकिन कहा जाता है कि माता रानी राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में कई राजघरानों की कूल देवी हैं. बगैर विघ्न-बाधा के पूजा-अर्चना संपन्न कराने के लिए पुलिस को होटलों के आसपास चौकसी बरतने का सख्त निर्देश जारी किया गया है. सकराय में पुलिस-प्रशासन हर आने-जानेवालों पर कड़ी निगाह बनाए हुए है.  

राम भक्तों के लिए

खलारी – सरस्वती विद्या मन्दिर करकट्टा में क्रिकेट मैच का किया गया आयोजन

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डकरा, 02 जनवरी : सरस्वती विद्या मन्दिर करकट्टा में क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया। विद्यालय के विद्यार्थियों के बीच दो टीमों का गठन किया गया जिसमें एसवीएम टाइगर एवं एसवीएम फाईटर के बीच यह मैच खेला गया। मैच के दौरान एसवीएम टाइगर 12ओवर में 7 विकेट पर 70 रन बनाई वहीं दूसरी टीम एसवीएम फाईटर 7 ओवर में 3 विकेट पर 71 रन बनाकर मैच पर जीत हाशिल कर ली। इस मैच का शुरुआत प्रधानाचर्या शालीग्राम सिंह के द्वारा मैच का पहला गेंद मार कर किया गया। मौके पर आचार्य गोविंद चौहान, श्रीकांत शर्मा, संजीव सिंह, गौरी शंकर कमिला, पुरुषोत्तम सिंह,चंद्रभूषण सिंह, दिलीप शर्मा, पूनम पाठक, मती संध्या सिन्हा, नूतन सिंह तथा अन्य शिक्षक उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

खलारी – सीबीएसई राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में शामिल होंगे जेपीएस की अंडर 19 बालिका टीम, भोपाल के लिए रवाना

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डकरा, 02 जनवरी : झारखंड पब्लिक स्कूल मोहननगर खलारी के अंडर 19 बालिका फुटबॉल टीम सीबीएसई राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए भोपाल रवाना हुए। ये सभी फुटबॉल खिलाड़ियो को दिनांक 03 जनवरी से 07 जनवरी तक मध्य प्रदेश भोपाल मे आयोजित सीबीएसई राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता मे शामिल होना है। इस प्रतियोगिता मे पूरे भारत देश से कई राज्य के फुटबॉल महिला खिलाड़ी शामिल होंगे। खलारी पिपरवार कोयलांचल क्षेत्र से पहली बार बालिका फुटबॉल टीम का चयन अंडर 19 सीबीएसई राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता के लिए किया गया। इस फुटबॉल प्रतियोगिता मे शामिल होने वाले झारखंड पब्लिक स्कूल के फुटबॉल खिलाड़ियो में दीपिका कुमारी, सोनी कुमारी, सुलेखा कुमारी, कंचन कुमारी, रविना कुमारी, निधी कुमारी, अलका कुमारी, करिश्मा कुमारी, पूजा कुमारी, बबीता कुमारी, रींकी कुमारी, आंचल कुमारी एवं उषो कुमारी शामिल हैं वहीं उनके साथ कोच के रूप मे गणेश कुमार महतो एवं मैनेजर के रूप मे रीता कुमारी भी शामिल रहेंगे। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अभिषेक चौहान एवं सभी शिक्षकों ने सभी खिलाड़ियो को बधाई एवं उज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी है।

राम भक्तों के लिए
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