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Sunday, July 5, 2026
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उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के नेतृत्व में गुमला में भव्य पुस्तक परब सह सांस्कृतिक कार्यक्रम

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

24-25 मार्च को भव्य आयोजन, ‘हाँ, मैं सावित्रीबाई फुले’ नाटक होगा मुख्य आकर्षण का केंद्र

गुमला में शिक्षा और संस्कृति का संगम, पुस्तक परब में क्विज, प्रदर्शनी और लोक नृत्य होंगे आकर्षण के केंद्र

गुमला : – गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के नेतृत्व में जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग एवं अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से नगर भवन, गुमला में 24 एवं 25 मार्च को गुमला पुस्तक परब सह सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया जा रहा है। साथ ही 24 मार्च को बसिया एवं 25 मार्च को चैनपुर अनुमंडल में भी समान रूप से उक्त भव्य कार्यक्रम का आयोजित किए जाएंगे।

दो दिवसीय कार्यक्रम के विशेष आकर्षण के रूप में देश की जानी-मानी रंगकर्मी, लेखिका, निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता सुषमा देशपांडे द्वारा रचित एकल नाटक “हाँ, मैं सावित्रीबाई फुले” का मंचन किया जाएगा। महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले के जीवन और विचारों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से गुमला जिला प्रशासन द्वारा यह विशेष सांस्कृतिक पहल की जा रही है।

सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों और समाज के बहिष्कृत वर्गों को शिक्षा प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाई। वे भारत की पहली महिला अध्यापिका बनीं और लड़कियों के लिए पहला विद्यालय खोला। उन्होंने बेसहारा स्त्रियों के लिए कार्य किया तथा समानता के लिए संघर्ष करते हुए समाज में स्त्री अधिकारों की मजबूत नींव रखी। उन्हें भारतीय नारी आंदोलन की जननी के रूप में भी जाना जाता है।

उक्त नाटक का मंचन प्रसिद्ध कलाकार शुभांगी भुजबल एवं शिल्पा साने द्वारा किया जाएगा, जो अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों तक सावित्रीबाई फुले के विचारों को जीवंत रूप में पहुँचाएँगी जो अपने नाट्य कार्यों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों, विशेषकर महिला शिक्षा और समानता, को समाज के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती रही हैं।

निर्धारित कार्यक्रम के तहत 24 मार्च को नगर भवन, गुमला एवं अनुमंडल पुस्तकालय मैदान, बसिया में तथा 25 मार्च को बरवे मैदान, चैनपुर एवं मध्य विद्यालय, घाघरा में इस नाटक का मंचन किया जाएगा। जिला मुख्यालय सहित घाघरा, बसिया और चैनपुर प्रखंडों में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं आमजन की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

इस दो दिवसीय आयोजन में विभिन्न प्रकाशकों एवं संस्थानों द्वारा पुस्तक स्टॉल लगाए जाएंगे, वहीं विभिन्न विभाग अपने-अपने स्टॉल के माध्यम से उपलब्धियों का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, विज्ञान प्रदर्शनी, शैक्षणिक गतिविधियाँ, जनजातीय साहित्यिक संगोष्ठी, नाटक, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक लोक नृत्य एवं दुर्लभ मुखौटे आधारित छऊ नृत्य भी आकर्षण के केंद्र रहेंगे।

जिला प्रशासन ने सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों सहित आम नागरिकों से इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेकर इसे सफल बनाने की अपील की है।

राम भक्तों के लिए

सिद्धि क्राफ्ट हाउस – आपके हर खास मौके को बनाए और भी यादगार

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सिद्धि क्राफ्ट हाउस – आपके हर खास मौके को बनाए और भी यादगार

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राम भक्तों के लिए

चैंबर ऑफ़ कॉमर्स गुमला के द्वारा सरहुल जुलूस का किया गया स्वागत

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

जिला मुख्यालय में चेंबर ऑफ कॉमर्स गुमला द्वारा सरहुल पूजा के अवसर पर मेन रोड गुमला में स्टॉल लगाकर जुलूस में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच चना, शरबत वितरण किया गया एंव केंद्रीय सरहुल समिति गुमला के सदस्यों व शहर के गणमान्य व्यक्तियों को अंग वस्त्र से सम्मानित किया गया.।

मौके पर हिमांशु केसरी, दीपक कुमार गुप्ता, अध्यक्ष राजेश लोहानी,सचिव प्रणय कुमार साहू, उपाध्यक्ष बबलू वर्मा, सहसचिव राहुल केसरी ,कोषाध्यक्ष अजय कुमार ,मीडिया प्रभारी मनीष केशरी पीआरओ प्रतीक अग्रवाल व रितेश गुप्ता,समेत कार्यकारिणी सदस्य गुरमीत सिंह,अनिकेत कुमार शशांक सोनी, दिनेश कुमार,मुन्नीलाल साहू सहित नगर के गण्यमन लोग उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

हर्ष उल्लास के साथ गुमला में ईद का पर्व मनाया गया, मांगी गई अमन चैन की दुआ

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित ईदगाह में मौलाना इनाम रब्बानी द्वारा एक बड़ी जमात को ईद की नमाज पढ़ाई गई इस मौके पर उन्होंने शहर गुमला, अपना झारखंड राज्य और भारत देश में अमन शांति और तरक्की के लिए विशेष दुआ मांगी गई उन्होंने कहा कि ईद हमें खुशी का पैगाम देता है इस दिन सभी गिले शिकवे भूलकर एक दूसरे को गले मिलकर ईद की खुशी बाटी जाति है हम सब मिलकर आपस में भाईचारा प्रेम का जो संदेश हमारे प्यारे नबी हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने जो दिया है उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें इस मौके पर अंजुमन इस्लामिया के सदर द्वारा अंजुमन से संबंधित जो कार्य किया जा रहे हैं उसकी उन्होंने संक्षेप में बातें रखते हुए कहा है कि जो भी कार्य जामा मस्जिद मोती मस्जिद गुमला कब्रिस्तान और जो जामा मस्जिद के सामने मार्केट कंपलेक्स तामीर कराई जा रही है जो भी कार्य आज तक हुआ है गुमला की अवाम का मदद से हुआ है और निरंतर आगे भी समाज के लिए गरीब बेसहारा महिलाओं के लिए बढ़ चढ़कर कार्य किया जाएगा, ईद के मौके पर मुस्लिम मोहल्ले में हर तरफ रौनक और चहल-पहल देखी गई खासकर छोटे बच्चों में काफी उत्साह देखा गया ईद के मौके पर गुमला शहर के विभिन्न मस्जिदों में एवं सिसई रोड स्थित ईदगाह में श्रद्धा और एतराम के साथ हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने नमाज अदा की और एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद पेश करते हुए एक दूसरे को गले लगाए ईद की तैयारी को लेकर अंजुमन इस्लामिया गुमला तथा जिला प्रशासन द्वारा विधि व्यवस्था सफाई पानी बिजली का समुचित व्यवस्था की गई थी सुबह 6:00 से ही गुमला रांची मार्ग को बड़ी वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया गया था, 1* मदरसा इस्लामिया फैज़ ए आम सिसई रोड गुमला में सबसे पहली जमात सुबह 7:00 बजे पढ़ी गई जिसकी इमामत हाफिज रुस्तम साहब ने किया,

2* मस्जिद रजा ए हबीब रजा कॉलोनी गुमला में 7:30,3* जनाब तनबीरूल हसन साहब, 3*मस्जिद ए जैनब में 7:30 बजे जनाब कारी मसीहुद्दीन साहब,4*कादरिया मस्जिद गौसनगर गुमला में 7:45 बजे,मुफती कासिद रजा नईमी साहब 5* मस्जिद गौसुलवरा आजाद बस्ती गुमला में 8:00 हाफिज सद्दाम हुसैन साहब,6* मस्जिद ए होदा हुसैन नगर गुमला में 8:00 बजे कारी आफताब 7* मस्जिद रजा ए मुस्तफा 8:30 इमामत साकिर रजा नूरी साहब,8* मस्जिद फैजाने रजा में 8:30 बजे मौलाना अशरफ रजा साहब 9* मक्का मस्जिद सिसई रोड गुमला 8:30 कारी शोऐब साहब,10* गौसिया मोती मस्जिद बाजार टांड गुमला में 8:45 बजे हाफिज जाहिद रजा 11* मदीना मस्जिद आजाद बस्ती गुमला में 9:00 मुफ्ती जमशेद साहब 12* जामा मस्जिद थाना रोड गुमला में 9:00 , हाफिज नैयर आजम साहब द्वारा ईद की नमाज पढ़ाई गई और खास दुआ अमन चैन और भाईचारा के लिए मांगी गई

राम भक्तों के लिए

चेंबर ऑफ कॉमर्स के नई कमिटि के सदस्यों के बीच सौंपी गई विभाग वार कार्यभार 

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित परिषद में गुमला चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के तृतीय मासिक बैठक में बतौर मुख्य अतिथि एनडीसी ललन कुमार रजक, फेडरेशन झारखंड चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एन्ड इंडस्ट्रीज के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सह नगर परिषद उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी और चेम्बर अध्यक्ष राजेश लोहानी द्वारा पूरे हाऊस के समक्ष नए सत्र में उप समिति में शामिल किए गए सभी सदस्यों को प्रमाण पत्र और उनके कार्यभार सौंपे गए। जिसमें मनीष कुमार केशरी को *मीडिया प्रभारी* की जिम्मेदारी दी गई। वहीं *बैंकिंग विभाग* का चेयरमैन गुरमीत सिंह व उनके सहयोगी राहुल केसरी ,शंकर लाल जाजोदिया व पंकज कुमार को बनाया गया ।वही *नगर परिषद* विभाग का चेयरमैन बबलू वर्मा,सहयोगी गुन्नू शर्मा, अमित मंत्री ,रितेश कुमार गुप्ता व सुमित साहू को दी गई। *वित्त विभाग* का चैयरमैन अभिजीत जायसवाल व उनके सहयोगी बृज कुमार फोगला, मुनीलाल साहू व शुभम जायसवाल को बनाया गया।जबकि *कृषि विभाग* का चेयरमैन दिलीप गुप्ता, सहयोगी दीपक अग्रवाल, अजय कुमार को बनाया गया । *परिवहन विभाग* का चैयरमैन प्रतीक अग्रवाल सहयोगी शेखर अग्रवाल, कुणाल साहू ,* *विधुत विभाग* का चेयरमैन मुनीलाल साहू सहयोगी प्रणय कुमार पंकज सोनी ,संदीप कुमार कर्पूरी ठाकुर को * *बीमा विभाग* का चेयरमैन संजीव मालानी व सहयोगी मनीष केसरी,*श्रम एव मापतौल विभाग* का चेयरमैन अजय कुमार, सहयोगी गुन्नू शर्मा,रूपक कुमार,*स्वास्थ्य विभाग* का चेयरमैन अनिकेत कुमार सहयोगी राजू श्रीवास्तव, रोहित खंडेलवाल , *गैस एवम पेट्रोलियम विभाग* का चेयरमैन नीरज गुप्ता सहयोगी आदित्य गुप्ता *पेयजल विभाग* का चेयरमैन राहुल केसरी सहयोगी दिनेश कुमार व मोहम्मद शाहनवाज *शिक्षा विभाग* का चैयरमेन पंकज खंडेलवाल सहयोगी रजत केसरी व विनोद विश्वकर्मा ,*स्वच्छ भारत एवं पौधरोपण विभाग* का चेयरमैन रितेश गुप्ता सहयोगी आदित्य गुप्ता,*उद्योग विभाग* का चेयरमैन अमित मंत्री सहयोगी शशांक सोनी व विनोद विश्वकर्मा,*दूरसंचार विभाग* का चेयरमैन विकास सिंह सहयोगी बृज किशोर फोगला व संदीप कुमार को जिम्मवारी सौपी गई।

राम भक्तों के लिए

गुमला जिला मुख्यालय में धूमधाम से सरहुल का त्यौहार मनाया गया और एक विशाल जुलूस निकाली गई

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

सरहुल जुलूस में परंपरागत वेशभूषा में बड़े बूढ़े, नर नारी, युवक युक्तियां और बच्चे सम्मिलित हुए

ढोल नगाड़े, और मंदार की थाप पर सभी झूमते नाचते, नृत्य करते और गीत संगीत गाते नजर आए

जिला प्रशासन गुमला उपयुक्त प्रेरणा दीक्षित और पुलिस प्रशासन गुमला के पुलिस कप्तान हरिश बिन जामां स्वंय नजर रखे हुए थे

गुमला : – गुमला जिला में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सरहुल का त्यौहार काफी धूमधाम से मनाया गया , इस अवसर पर लोहरदगा रोड छात्रावास से एक विशाल जुलूस निकाली गई, जिसमें बड़े बुजुर्ग, नर नारी, युवक युवतियाँ , और बच्चे बच्चियँ ढोल नगाड़े और मांदर के थाप पर, नृत्य संगीत की धुन पर नाचते गाते नजर आए, जिला प्रशासन गुमला उपयुक्त प्रेरणा दीक्षित , पुलिस प्रशासन गुमला पुलिस कप्तान हरिश बिन जामां के निर्देश पर समस्त चौक चौराहा पर मजिस्ट्रेट, पुलिस पदाधिकारी,और सशस्त्र बल महिला पुरुष जवान अपने-अपने ड्यूटी पर मुस्तैद नजर आए *सरहुल त्योहार* (संताली ) मध्य-पूर्व भारत के आदिवासी समुदायों का एक प्रमुख पर्व है, सरहुल त्यौहार जो झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य भारत के आदिवासी क्षेत्रों में मनाया जाता है। इस पर्व को मुख्य रूप से मुण्डा, भूमिज, हो, संथाल और उराँव आदिवासियों द्वारा मनाया जाता है, और यह उनके महत्वपूर्ण उत्सवों में से एक है यह उत्सव चैत्र महीने के तीसरे दिन, चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। यह नए साल की शुरुआत की निशानी है। हालांकि इस त्योहार की कोई निश्चित तारीख नहीं होती क्योंकि विभिन्न गांवों में इसे विभिन्न दिनों पर मनाया जाता है,

गुमला जिला में इस वार्षिक सरहुल त्यौहार बसंत ऋतु के दौरान मनाया जाता है और इसमें पेड़ों और प्रकृति के अन्य तत्वों की पूजा शामिल होती है। इस समय, साल (शोरिया रोबस्टा) पेड़ों में फूल आने लगते हैं। झारखण्ड में, इससे एक राजकीय अवकाश घोषित किया गया है।सरहुल का शाब्दिक अर्थ है ‘साल वृक्ष की पूजा’, सरहुल त्योहार धरती माता को समर्पित है – इस त्योहार के दौरान प्रकृति की पूजा की जाती है। सरहुल कई दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें मुख्य पारंपरिक नृत्य सरहुल नृत्य किया जाता है।
आदिवासियों का मानना ​​है कि वे इस त्योहार को मनाए जाने के बाद ही नई फसल का उपयोग मुख्य रूप से धान, पेड़ों के पत्ते, फूलों और फलों का उपयोग कर सकते हैं। भूमिज इस पर्व को ‘हादी बोंगा’ के नाम से और संथाल इसे ‘बाहा बोंगा’ के नाम से मनाते हैं। इसे ‘बाः परब’ और ‘खाद्दी परब’ के नाम से भी जाना जाता है।त्योहार के दौरान साल के फूलों, फलों और महुआ के फलों को जायराथान या सरनास्थल पर लाए जाते हैं, जहां पाहान या लाया (पुजारी) और देउरी (सहायक पुजारी) जनजातियों के सभी देवताओं की पूजा करता है। “जायराथान” पवित्र सरना वृक्ष का एक समूह है जहां आदिवासियों को विभिन्न अवसरों में पूजा होती है। यह ग्राम देवता, जंगल, पहाड़ तथा प्रकृति की पूजा है जिसे जनजातियों का संरक्षक माना जाता है। नए फूल तब दिखाई देते हैं जब लोग गाते और नृत्य करते हैं। देवताओं की साल और महुआ फलों और फूलों के साथ पूजा की जाती है।[ आदिवासी भाषाओं में साल (सखुआ) वृक्ष को ‘सारजोम’ कहा जाता है।देवताओं की पूजा करने के बाद, गांव के पुजारी (लाया या पाहान) एक मुर्गी के सिर पर कुछ चावल अनाज डालता है स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि यदि मृगी भूमि पर गिरने के बाद चावल के अनाज खाते हैं, तो लोगों के लिए समृद्धि की भविष्यवाणी की जाती है, लेकिन अगर मुर्गी नहीं खाती, तो आपदा समुदाय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा, आने वाले मौसम में पानी में टहनियाँ की एक जोड़ी देखते हुए वर्षा की भविष्यवाणी की जाती है। ये उम्र पुरानी परंपराएं हैं, जो पीढ़ियों से अनमोल समय से नीचे आ रही हैं।


झारखंड में सभी जनजाति इस उत्सव को महान उत्साह और आनन्द के साथ मनाते हैं। जनजातीय पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को रंगीन और जातीय परिधानों में तैयार करना और पारंपरिक नृत्य करना। वे स्थानीय रूप में चावल से बनाये गये ‘हांडिया’ पीते हैं। आदिवासी पीसे हुए चावल और पानी का मिश्रण अपने चेहरे पर और सिर पर साल फुल (सारजोम बाहा) लगाते हैं, और फिर जायराथान के आखड़ा में नृत्य करते हैं।
हालांकि एक आदिवासी त्योहार होने के बावजूद, सरहुल भारतीय समाज के किसी विशेष भाग के लिए प्रतिबंधित नहीं है। अन्य विश्वास और समुदाय जैसे हिंदू, मुस्लिम, ईसाई लोग नृत्य करने वाले भीड़ में भाग लेते हैं। सरहुल सामूहिक उत्सव का एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहां हर कोई प्रतिभागी है। आदिवासी मुंडा, भूमिज, कोल, हो और संथाल लोग इस त्योहार को हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं। गुमला जिला मुख्यालय स्थित लोहरदगा रोड के छात्रावास से एक विशाल सरहुल जुलूस निकाला जाता है, जिसमें सभी नर नारी, बूढ़े बुजुर्ग, युवक – युवतियाँ और नन्हे मुन्ने बच्चे एक साथ ढोल नगाड़े और मंदार की थाप पर नृत्य करते हुए, नगर के मुख्य मार्गो, जैसे लोहरदगा रोड गुमला , मेन रोड गुमला, पालकोट रोड के दो सरना स्थलों सहित जिला मुख्यालय के विभिन्न सारण स्थलों में पूजा अर्चना के बाद, विभिन्न गांवों और क्षेत्र के लोग उक्त सरहुल जुलूस में सम्मिलित हो जाते हैं और सिसई रोड गुमला , टावर चौक ( शहीद चौक ) गुमला के पास पहुंचकर अपने अपने सरनास्थलों और अपने अपने क्षेत्र के सरना स्थलों के लिए प्रस्थान करते हैं, और वहां पहुंच कर सरहुल त्यौहार के अवसर पर रात भर मंदार की थाप पर नित्य गीत कर आनंदित होते हैं l

राम भक्तों के लिए

कंगना के अंगना के काले सच से भला कौन वाकिफ नहीं…!

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माननीय कंगना राणावत जी का कहना है कि- “राहुल गाँधी को देखकर हम महिलाओं को ‘असहज’ फील होता है, वो टपोरियों की तरह व्यवहार करते हैं..!!”

ये वही कंगना राणावत साहिबा हैं जो अपने पिता से भी उम्रदराज महेश भट्ट के साथ लंबे अरसे तक ‘सहज’ रहीं हैं, पता नहीं तब उनकी पत्नी सोनी राजदान जी और भट्ट साब के बच्चे (पूजा, राहुल, आलिया) कितना ‘सहज’ फील करते रहे होंगे.. जबकि पूजा भट्ट तो वैसे भी इनसे लगभग 15 साल बड़ी हैं।

खैर.. ये वही मोहतरमा हैं जो भट्ट से पहले बाल-बच्चेदार और शादीशुदा मर्द आदित्य पंचोली के साथ ‘सहज’ रहीं, जिनका व्यवहार काफी उग्र और गुस्सैल माना जाता था. हो सकता है तब आदित्य पंचोली सहज रहे हो मगर उस वक़्त उनका टीनएजर बेटा सूरज पंचोली या उनकी पत्नी ज़रीना वहाब यकीनन ‘असहज’ ही रहीं होंगी.

पंचोली और भट्ट साब के साथ सहजता से जीवन व्यतीत करनेवाली सुश्री कंगना राणावत जी ने शेखर सुमन के पुत्र अध्ययन सुमन का भी बारीकी से अध्ययन किया था, ये अलग बात है कि इस बार अध्ययन सुमन काफी ‘असहज’ फील करने लगे और बड़ी मुश्किल से इनके चंगुल से निकलकर भागे थे..

अध्ययन ने बाद में आरोप लगाया था कि ये मोहतरमा उन्हें ड्रग्स लेने का दबाव बनाती थीं, उसके साथ मारपीट और गालीगलौज करती थीं. अध्ययन ने सबसे संगीन आरोप यहाँ तक लगाया था कि उसके खाने में अपने पीरियड का अशुद्ध खून भी मिलाकर खिलाती थीं.. अगर ये सच है तो यकीनन ‘असहज’ होने का लेबल शायद अध्ययन सुमन से ज्यादा कोई ना जानता होगा।

बहरहाल राहुल गाँधी जैसे बेदाग और शालीन नेता को सिर्फ देखकर ‘असहज’ होनेवाली कंगना राणावत उन सांसदों के साथ ही कतार में बैठतीं हैं जिनमें से तड़ीपार भी हैं, बलात्कारी भी हैं, दंगाई भी हैं और हत्यारोपियों का तो पूरा हुजूम है.. कुल मिलाकर मौजूदा लोकसभा में भाजपा के 240 सांसदों में से 94 (39%) पर आपराधिक केस दर्ज हैं, जिनमें से 63 (26%) सांसदों पर तो बेहद संगीन अपराध दर्ज हैं मगर यहाँ मोहतरमा पूरी तरह सहज हैं!!

दरअसल कंगना जी को ‘असहज’ होने की सही परिभाषा जानना है तो उन्हें एक बार उस सुज़ैन खान से भी पूछ लेना कि वो तब कितनी असहज थी जब उसके पति ऋतिक रोशन के साथ ये खुद नाजायज़ रिश्ता कायम किये हुए थीं और इस नाजायज़ रिश्ते के चक्कर में सुज़ैन-ऋतिक का जायज़ रिश्ता ही तलाक़ पर जाकर खत्म हो गया?

काश उस वक़्त एक बार ऋतिक के जवान हो रहे दोनों बेटे से पता कर लेना था कि वो कितने ‘असहज’ फील करते हैं, जब कोई गैर औरत उनके बाप के साथ ‘अवैध संबंधों’ में है?

सही मायने में इन मोहतरमा के जरिये ‘असहज’ होनेवालों के इतने किस्से लिख सकता हूँ कि इनके जाफ़रानी-अंडे इस पोस्ट से भारी ‘”असहज” हो सकते हैं.. इसलिए बड़ी सहजता और शालीनता से निवेदन करता हूँ कि अब गर्मी शुरू हो चुकी है, इन मोहतरमा को सूखा नशा लेना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए..!!

 पोस्ट के साथ संलग्न चित्र देखकर पुरुष-प्रजाति के मित्रगण ‘असहज’ ना हों, ये सभी चित्र 2014 में मिली आजादी से पहले के हैं।

 

राम भक्तों के लिए

बाजार का हालचाल और ‘सेवकों’ से उम्मीद

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रुपया गोते लगाते हुए 93 पार का हो चुका है, जबकि कच्चे तेल की कीमत 118 डालर फी बैरल (159 लीटर) तक जा पहुंची है। रसोई गैस की किल्लत शुरू हो गई है, जो निकट भविष्य में गहरा सकती है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कमजोर कारपोरेट आय और भू-राजनीतिक तनाव के कारण शेयर मार्केट धड़ाम हुआ जा रहा है। अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों में हाहाकार मचा हुआ है। उनके तेल और गैस संयंत्र ड्रोन और मिसाइल के शिकार हो रहे हैं।

इसका प्रतिकूल असर अपने घरेलू बाजार पर देखने को साफ-साफ मिल रहा है। कई जिन्सों की कीमतें बढ़ती चली जा रही हैं। खाड़ी युद्ध और लंबा खिंचा तो स्थिति विकट होने की आशंका बनी रहेगी। अभी ही समोसे-पकौड़े से लेकर अन्य कई उपभोक्ता सामग्री की कीमतें रंग पकड़ने लगी हैं।

अपने यहां बाजार की जो परंपरा रही है, बढ़ी कीमतें फिर वापस नहीं होतीं। अपनी व्यवस्था इस मामले में बेहद लाचार दिखती है। ऐसी स्थिति में लोअर मिडिल क्लास और उसके नीचे के आय वर्ग वालों की जेब दिनोंदिन तंग होना स्वाभाविक है।

तेल और गैस हमारे बाजार को बहुत अधिक प्रभावित करते हैं और फिलहाल दोनों में आग लगी हुई है। उपभोक्ताओं के लिए ईंधन तेल की कीमतें हालांकि अभी बढ़ी नहीं हैं, लेकिन विश्व बाजार का जो हालचाल है, वह कतई आश्वस्त नहीं करता कि वर्तमान स्थिति कायम रहेगी। इसमें गिरावट और कीमतों में उछाल तय लग रही है। गैस की कीमतें हाल ही बढ़ाई जा चुकी हैं। आगे क्या होगा, सोचा जा सकता है। सरकार जिस राह जाएगी, अवाम को उसी राह पर चलना ही होगा यानी महंगाई का सामना करने को तैयार रहना होगा। यह एक राष्ट्रीय/अन्तरराष्ट्रीय समस्या होगी।

ऐसे में एक सहज सवाल उठता है कि जो माननीय सेवक एकाधिक पेंशन लाभ उठा रहे हैं, कोई-कोई तो चार-चार, पांच-पांच, क्या वे राष्ट्रहित में स्वयं को एक पेंशन तक सीमित करना चाहेंगे! बेशक, अर्थव्यवस्था में इसका बहुत बड़ा योगदान नहीं होगा, लेकिन गिलहरी-प्रयास की ही तरह एक आदर्श और सराहनीय योगदान तो माना ही जाएगा। अवाम तक इसका बेहतर संदेश जाएगा कि हमारे ‘सेवक’ बड़ा त्याग कर रहे हैं, हमें भी करना चाहिए।

बुजुर्गों, दिव्यांगों, पत्रकारों ने रेल सफर में सब्सिडी, बड़ी आबादी ने गैस सब्सिडी का राष्ट्रहित में त्याग किया है, जबकि ‘सेवकगण’ रेल यात्रा कौन कहे, मुफ्त हवाई सफर का भी लाभ उठा रहे हैं। ऐसे में एक पेंशन पर संतोष करने का उदाहरण पेश करें। यहां तो बहुतेरे नागरिकों को एक भी पेंशन नसीब नहीं है।

राम भक्तों के लिए

हाजत में आरोपी ने फांसी लगा कर की आत्महत्याः पत्नी से मारपीट के आरोप में लाया गया था थाना, पुलिस लापरवाही पर होगी कार्रवाई

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न्यूज – प्रवीण कुमार 

कोडरमा स्थित जयनगर थाना के हाजत में एक आरोपी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना तब हुई, जब उसे शराब के नशे में पत्नी से मारपीट के आरोप में थाना लाया गया था। मृतक की पहचान परसाबाद के कटिया गांव निवासी 40 वर्षीय विजय यादव के रूप में हुई है।मुख्यालय डीएसपी रतिभान सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बीती रात विजय यादव की पत्नी चमेली देवी ने परसाबाद पिकेट में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पति शराब के नशे में उनके साथ मारपीट कर रहे हैं। मामले की जांच करती पुलिस। विजय को रात में जयनगर थाना लाई थी पुलिस इस शिकायत के आधार पर, परसाबाद पिकेट प्रभारी प्रमोद सिंह कटिया गांव स्थित विजय यादव के घर पहुंचे। उन्होंने विजय को हिरासत में लिया और जयनगर थाना ले आए। इसके बाद विजय को जयनगर थाना के हाजत में रखा गया।
शुक्रवार सुबह जयनगर पुलिस ने विजय को नाश्ता कराया और वह पूरी तरह स्वस्थ दिख रहा था। इसी बीच, सुबह करीब 11 बजे उसकी पत्नी और बेटी थाना आईं और विजय से बातचीत की। बातचीत के बाद वे थाने से बाहर निकल गईं। विजय पेशे से ट्रक चालक था। विजय को पुलिसकर्मी सदर अस्पताल ले गए पुलिस की थोड़ी सी गैर-मौजूदगी का फायदा उठाकर विजय ने हाजत में फांसी लगा ली। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिसकर्मी विजय को आनन-फानन में सदर अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।जयनगर पुलिस का दावा है कि विजय ने अपने गले में मौजूद धागे की माला से खुद गला दबाकर आत्महत्या की, जबकि सदर अस्पताल के चिकित्सक का कहना है कि उसकी मौत फांसी लगाने के कारण हुई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सही कारण स्पष्ट हो पाएगा।इधर, मुख्यालय डीएसपी रतिभान सिंह ने स्पष्ट किया है कि यदि इस मामले में किसी भी पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।रात में भी शराब के नशे में आया था आरोपी वहीं, मृतक की पत्नी चमेली देवी ने कहा कि उनके पति विजय रोज शराब के नशे में घर आते थे और उसके साथ मारपीट किया करते थे। कई बार वह शराब के नशे में आकर उसे घर से बाहर भी निकाल दिया करते थे। बीती रात भी वे शराब के नशे में आए और मुझे घर से बाहर निकलने को कहने लगे।जब मैंने दरवाजा नहीं खोला तो उन्होंने मेरी जेठानी को फोन लगाया और कहा कि आज इसे जान से मार दूंगा। इसके बाद मैंने पुलिस को सूचना दी। विजय पेशे से ट्रक चालक था। वह अपने पीछे दो पुत्री व एक पुत्र को छोड़ गया है।

राम भक्तों के लिए

21 रमजान पर हजरत अली की शहादत की याद में मजलिस आयोजित

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न्यूज – कहकशां फारूकी 

21 रमजानुल मुबारक के मौके पर जनाबे अमीरुल मोमिनीन, मजहरुल अजायब वलग़रायब, हैदर-ए-कर्रार हजरत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की शहादत की याद में चलकरी बस्ती, बेरमो में मजलिस-ए-मनाकिब का आयोजन किया गया। इस मौके पर अकीदतमंदों ने हजरत अली की बारगाह में नजराना-ए-अकीदत पेश किया।
यह मजलिस जनाब हसन बाबू अबुल उलाई के मकान पर उनके एहतिमाम में आयोजित की गई। कार्यक्रम की सदारत पीर-ए-तरीकत, रहबर-ए-शरीयत हजरत अल्लामा व मौलाना अल्हाज सैय्यद शाह अलकमा शिबली कादरी मुनअमी अबुल उलाई, जेबे सज्जादा खानकाह मजहरिया मुनामिया, रांची ने की।
अपने संबोधन में उन्होंने तमाम सहाबा-ए-किराम के साथ खास तौर पर हजरत अली शेर-ए-खुदा के मनाकिब, उनकी खिदमात और फजाएल पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि मौला-ए-कायनात हजरत अली की तारीफ और तौसीफ अल्फाज में पूरी तरह बयान नहीं की जा सकती। उनकी शख्सियत की अजमत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें काबा में विलादत और मस्जिद में शहादत का मुकाम हासिल हुआ।
उन्होंने कहा कि अहले बैत-ए-किराम की मिसाल हजरत नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती की तरह है। जो उस पर सवार हुआ वह कामयाब हुआ और जिसने मुखालफत की वह गर्क हो गया। उन्होंने कहा कि उम्मत-ए-मुस्लिमा पर अहले बैत से मोहब्बत फर्ज है, इसलिए सभी को अहले बैत के दामन को मजबूती से थामे रहना चाहिए।
मजलिस के अंत में कुल फातिहा के बाद इफ्तार कराया गया, जिसके साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस मौके पर जनाब मनीरुद्दीन साहब, मौलाना इसराफिल साहब, सरफराज, नेशार समेत चलकरी और आसपास के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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