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Friday, March 20, 2026
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21 रमजान पर हजरत अली की शहादत की याद में मजलिस आयोजित

न्यूज – कहकशां फारूकी 

21 रमजानुल मुबारक के मौके पर जनाबे अमीरुल मोमिनीन, मजहरुल अजायब वलग़रायब, हैदर-ए-कर्रार हजरत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की शहादत की याद में चलकरी बस्ती, बेरमो में मजलिस-ए-मनाकिब का आयोजन किया गया। इस मौके पर अकीदतमंदों ने हजरत अली की बारगाह में नजराना-ए-अकीदत पेश किया।
यह मजलिस जनाब हसन बाबू अबुल उलाई के मकान पर उनके एहतिमाम में आयोजित की गई। कार्यक्रम की सदारत पीर-ए-तरीकत, रहबर-ए-शरीयत हजरत अल्लामा व मौलाना अल्हाज सैय्यद शाह अलकमा शिबली कादरी मुनअमी अबुल उलाई, जेबे सज्जादा खानकाह मजहरिया मुनामिया, रांची ने की।
अपने संबोधन में उन्होंने तमाम सहाबा-ए-किराम के साथ खास तौर पर हजरत अली शेर-ए-खुदा के मनाकिब, उनकी खिदमात और फजाएल पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि मौला-ए-कायनात हजरत अली की तारीफ और तौसीफ अल्फाज में पूरी तरह बयान नहीं की जा सकती। उनकी शख्सियत की अजमत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें काबा में विलादत और मस्जिद में शहादत का मुकाम हासिल हुआ।
उन्होंने कहा कि अहले बैत-ए-किराम की मिसाल हजरत नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती की तरह है। जो उस पर सवार हुआ वह कामयाब हुआ और जिसने मुखालफत की वह गर्क हो गया। उन्होंने कहा कि उम्मत-ए-मुस्लिमा पर अहले बैत से मोहब्बत फर्ज है, इसलिए सभी को अहले बैत के दामन को मजबूती से थामे रहना चाहिए।
मजलिस के अंत में कुल फातिहा के बाद इफ्तार कराया गया, जिसके साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस मौके पर जनाब मनीरुद्दीन साहब, मौलाना इसराफिल साहब, सरफराज, नेशार समेत चलकरी और आसपास के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।


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