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Wednesday, November 4, 2026
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पल्स अस्पताल को कुर्क करने के बाद ईडी भुईंहरी जमीन मालिक के साथ भी इंसाफ करे, आखिर जमीन का नक्शा कैसे पास हो गया व जमीन के एवज में बैंक से लोन कैसे मिल गया?

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नारायण विश्वकर्मा

रांची : आखिरकार ईडी ने आइएएस पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा के पल्स सुपर स्पेशिलिएटी अस्पताल कुर्क कर लिया है. पूजा की करीब 82.77 करोड़ रुपये की संपत्ति कुुुर्क करने में पल्स डायग्नोस्टिक सेंटर और जमीन के दो महंगे प्लॉट भी शामिल हैं. मनरेगा घोटाले में 18.06 करोड़ रुपये का आरोप खूंटी की डीसी रही पूजा सिंघल पर है. पल्स सुपर स्पेशिलिएटी अस्पताल का निर्माण कार्य भुइंहरी जमीन पर हुआ है. ईडी यह जरूर पता करना चाहिए कि ननसेलेबुल भुइहरी जमीन का नक्शा कैसे पास हो गया और जमीन के एवज में बैंक से लोन कैसे मिल गया? जमीन के असली वारिस (वंशज) कृष्णा मुंडा के अलावा काफी दिनों से भुईंहरी परिवार को इंसाफ दिलाने की जद्दोजहद करनेवाले आरटीआई एक्टिविस्ट इंद्रदेव लाल ने ईडी से आग्रह किया है कि पल्स अस्पताल को कुर्क करने के बाद भुईंहरी जमीन मालिक के साथ भी इंसाफ होना चाहिए.

सीएम ने ही दिया था जांच का आदेश

आरटीआई एक्टिविस्ट इंद्रदेव लाल का कहना है कि बड़गाई अंचल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पल्स सुपर स्पेशिलिएटी अस्पताल की जमीन भुईंहरी नेचर की है. इसके बावजूद अभिषेक झा को एचडीएफसी बैंक से कर्ज मिल गया. नगर निगम से नक्शा भी पास हो गया. हालांकि ईडी ने कुछ माह पूर्व नगर निगम के अधिकारियों के इस मामले में पूछताछ की है. पूजा सिंघल ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर रघुवर दास के शासनकाल में ही 2016 से ही भुईंहरी जमीन पर अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया था. 13 फरवरी 2020 को हमने इस मामले में सीएम को ट्वीट कर उनका ध्यान आकृष्ट कराया था. सीएम ने उसी दिन रांची के तत्कालीन डीसी महिमापत रे को रिट्वीट कर जांच का आदेश दिया था. लेकिन ढाई साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच रिपोर्ट का अभी तक कहीं कोई अता-पता नहीं है. पूजा सिंघल की गिरफ्तारी के बाद पल्स अस्पताल निर्माण को लेकर ईडी ने जब दस्तावेज खंगालना शुरू किया, तब जुलाई माह में रांची के तत्कालीन डीसी छविरंजन ने उस जांच रिपोर्ट की छानबीन शुरू की. करीब एक माह में काफी नाटकीय ढंग से जांच रिपोर्ट मिलने की बात स्वीकारी गई. बताया गया कि जांच रिपोर्ट की फाइल सीएमओ में धूल फांक रही है.

सीएम ने इंसाफ नहीं किया, पर ईडी से न्याय की उम्मीद

यहां यह बताना जरूरी है कि सीएम को ट्वीट करने के चंद माह बाद पूजा सिंघल की सीएमओ में इंट्री हो गई थी और खनन विभाग उनके हवाले कर दिया गया था. यानी पूजा सिंघल का जो रसूख रघुवर सरकार में था, वही रसूख हेमंत सरकार में कायम हो गया. उधर, विपक्ष ने जांच रिपोर्ट के बारे में कभी सरकार पर दबाव नहीं बनाया और अंतत: यह मामला दब गया. मई माह में जब ईडी ने पूजा सिंघल के सीए के यहां से 19 करोड़ से अधिक रुपए जब्त किए, तब पल्स अस्पताल का मामला एक बार फिर उजागर हुआ. अब जबकि ईडी द्वारा अस्पताल को कुर्क कर लिया गया है, तो फिर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि भुईंहरी परिवार को कैसे इंसाफ मिलेगा? कुछ माह पूर्व निर्दलीय विधायक सरयू राय ने हेमंत सरकार पर तंज कसते हुए कहा था कि इस अस्पताल का नाम बदलकर प्रवर्तन अस्पताल कर देना चाहिए. उन्होंने इसे रिम्स के साथ अटैच कर देने का भी सुझाव दिया था. हालांकि जब ईडी ने पूजा सिंघल के एसेट्स को खंगालना शुरू किया तो भुईंहरी परिवार को लगा कि सीएम हेमंत सोरेन ने तो उनके साथ इंसाफ नहीं किया लेकिन ईडी जरूर उसे न्याय दिलाएगा.

रघुवर राज में नींव पड़ी व हेमंत राज में अस्पताल तैयार हुआ

भुईंहरी परिवार के वंशज कृष्णा मुंडा ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि ईडी को हमारी जमीन दिलाने की पेशकश करनी चाहिए. अगर जमीन वापसी नहीं हुई तो कम से कम हेमंत सरकार मुआवजा दिलाने की पहल तो करे. आखिर आदिवासी सीएम के रहते हमारे परिवार के साथ इंसाफ नहीं किया गया तो फिर आदिवासी समाज कैसे भला होगा? उन्होंने कहा कि अबुआ राज में हमारे घर की महिलाएं हड़िया बेचती और रेजा-कुली का काम करती है और हमारे घर के पुरुष रिक्शा चलाकर किसी तरह से अपना पेट भर रहे हैं. वहीं हमारी जमीन से रसूखदार लोग मालामाल हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से हमलोग मजबूत होते तो अदालत में फरियाद करते और अपनी हासिल कर लेते. जल-जंगल और जमीन बचाने का ढोंग कर आदिवासी सीएम हेमंत सोरेन ने इधर जांच का आदेश दिया और उधर पूजा सिंघल को अपने बगल में बिठा लिया. कहा कि रघुवर राज में भुईंहरी जमीन पर अस्पताल की नींव पड़ी और हेमंत राज में अस्पताल तैयार हुआ. उन्होंने कहा कि शुक्र है कि अब ईडी ने अस्पताल को कुर्क कर लिया है, इसका हम स्वागत करते हैं, लेकिन जबतक हमें इंसाफ नहीं मिलेगा तबतक ईडी की कार्रवाई अधूरी मानी जाएगी.

राजस्व विभाग में लंबित है फाइल

कृष्णा मुंडा को उनकी जमीन पर हक दिलाने के लिए इंद्रदेव लाल के आवेदन पर  दक्षिणी छोटानागपुर के कमिश्नर रहे नितिन मदन कुलकर्णी ने कार्रवाई करते हुए बड़गाई सीओ से सवाल-जवाब किया था. अंचल कार्यालय ने कमिश्नर को भेजे गए जवाब में यह माना कि पल्स अस्पताल की जमीन भुईंहरी नेचर की है. इसके बाद कमिश्नर ने पूरी जांच रिपोर्ट राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेज दिया है. चार माह बाद भी सरकारी स्तर पर सीओ की रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं होने से पूजा सिंघल के रसूख का पता चलता है. श्री लाल ने कहा कि ईडी अगर पल्स अस्पताल से जुड़े सभी दस्तावेज की सूक्ष्मता से जांच करे तो कई ब्यूरोक्रेट्स इसकी जद में आएंगे. वहीं रांची नगर निगम के आयुक्त से यह पूछा जाना चाहिए कि आखिर नक्शा कैसे पास हो गया और बैंक ने बगैर जांच-पड़ताल किए बिना कैसे लोन पास कर दिया? कैसे बड़गाई अंचल कार्यालय से म्यूटेशन हुआ? कौन इस जमीन का मालिक बनकर अभिषेक झा को बेच दिया. उन्होंने कहा कि ईडी चाहे तो राजस्व विभाग में लंबित पड़ी फाइल की जांच कर सत्य के करीब आराम से पहुंच सकता है.    

राम भक्तों के लिए

राजधानी रांची किन्नरों से परेशान, रंगदारी न मिलने पर नई नवेली दुल्हन और घरवालों से की मारपीट

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रांची – राजधानी रांची मे किन्नरों ने किस तरह आतंक मंचा रखा है इसका ताजा उधारान अदलहातु, मोराबादी, बरियातु थाना क्षेत्र के रहने वाले श्री उमा शंकर जी की बेटी की शादी का है जहां पर किन्नरो ने 51000 रुपये की मांग की , उमा शंकर जी ने 5100 देने की बात की मगर किन्नर अपनी बात पर अड़े रहे और बात बढ़ती गई , किन्नरो ने घरवालों को भदी भदी गलियाँ दिया और उस वक्त घर मे मौजूद बुजुर्ग के साथ मार पीट किया, जब हल्ला हुआ तो आस पड़ोस के लोग आकार बीच बचाओ किया, उस वक्त तो किन्नर चले गए फिर दूसरे दिन 10 गाड़ी मे भर भर के किन्नर आए और पूरे घर मे कोहराम मचाया, घर मे मौजूद सभी लोगों यहा तक की नई नवेली दुल्हन के साथ मार पीट किया और घर मे भारी तोड़ फोड़ मचाया , मुहाले के लोगों के बीच के आने के बाद दोनों पक्ष मे मार पीट हुए, चारो तरफ से घिरने के बाद किन्नर भागने लगे , इसी कर्म के कुछ किन्नरो को मुहाले वालों ने खदेड़ कर पकड़ा और उनकी पिटाई की और उनकी गाड़ी को तोड़ फोड़ दिया , मामला बरियातु थाना पहुचा जहा दोनों पक्ष के आरोप प्रत्यारोप के बाद किन्नरो को चेतावनी देकर छोड़ा गया , बता दे आपको बरियातु थाना क्षेत्र मे किन्नरो द्वारा किया गया ये पहला उत्पात नहीं है इससे पहले भी कई बार ये आकार जबरदस्ती रंगदारी, वसूली और मारपीट कर चुके हैं , स्थानीय लोग भी इनसे ज्यादा उलझना नहीं चाहते है जिससे इनका मनोबल और बढ़ा हुआ है और आए दिन किसी न किसी से साथ पैसे ना मिलने पर मारपीट करते हैं , किन्नरो से जुड़ा मामला इस क्षेत्र मे प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है , प्रसशान भी इनके मामले मे कुछ करने से बचती है , इस घटना के बाद स्थानीय लोगों मे काफी रोष है, प्रसशान अगर अभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आने वाले दिनो मे कुछ बड़ी अप्रिय घटना हो सकती है |

राम भक्तों के लिए

छवि रंजन के गलत म्यूटेशन आदेश को HC ने खारिज की, कुलकर्णी ने भी भूमिका पर उठाए थे सवाल, सरकार को सौंपी है रिपोर्ट, साल भर बाद भी कार्रवाई नहीं

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नारायण विश्वकर्मा

रांची : रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन झारखंड हाईकोर्ट ने झटका दिया है. गुरुवार को हाईकोर्ट ने उनके उस आदेश को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने बजरा मौजा की 7 एकड़ से ज्यादा भूमि के म्यूटेशन का आदेश पारित किया था. प्रार्थी चंदन कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन ने 7 एकड़ जमीन का 83 साल की लगान रसीद एक ही दिन काटने का आदेश दे दिया था, जो पूर्णत: नियम विरुद्ध है. इस पूरे प्रकरण में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के तत्कालीन आयुक्त नितिन मदन कुलकर्णी ने रांची डीसी भूमिका पर कई सवाल उठाए थे. श्री कुलकर्णी ने हेहल अंचल की 7.16 एकड़ जमीन पर कथित कब्जा मामले में रांची डीसी छवि रंजन की भूमिका को संदिग्ध माना था. श्री कुलकर्णी ने कहा था कि डीसी कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद जमीन की बिक्री और फिर स्थानीय पुलिस की मदद जमीन पर चाहरदीवारी करवाना, ये सारे काम पूर्व नियोजित थे. कुलकर्णी ने मामले की सघन जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में उसका उल्लेख किया है. 

कुलकर्णी ने छवि रंजन की भूमिका को संदिग्ध माना था

दरअसल, रांची डीसी ने जिस 7.16 एकड़ जमीन का 83 सालों की लगान रसीद काटने का आदेश दिया था. उसकी सरकारी कीमत करीब 25 करोड़ है, जबकि जमीन कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार इस भूखंड की वर्तमान कीमत इसकी दुगनी बता रहे हैं. रांची डीसी ने जमीन के संबंध में फैसला सुनाने का आधार एक पंचनामा को माना था. इसमें ग्रामीणों के हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान थे. पंचनामा 13 मार्च 2016 को तैयार किया गया. इस पंचनामे के मुताबिक जमीन पर विनोद कुमार सिंह का कब्जा है. इसी आधार पर डीसी ने जमीन की जमाबंदी विनोद कुमार सिंह के पक्ष में करने का आदेश दे दिया. इसके बाद यह मामला आयुक्त के पास पहुंचा. आयुक्त ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि हेहल अंचल के सीओ ने 7 नवंबर 2020 को अचानक से इस पंचनामे को डीसी के पास भेजा. चार साल बाद इस पंचनामा को सीधे डीसी कार्यालय को क्यों भेजा गया, यह स्पष्ट नहीं है. इससे पहले भी इस जमीन को लेकर जिला प्रशासन की दूसरी अदालतों में सुनवाई हुई थी. लेकिन विनोद कुमार सिंह ने इस पंचनामा का जिक्र कहीं नहीं किया. आयुक्त ने बिहार टीनेट्स होल्डिंग्स (मेंटेनेंंस ऑफ रिकॉर्ड 1973) में जमीन के नामांतरण, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया निर्धारित है. इस एक्ट की धारा 16 में यह बात स्पष्ट है कि पुनरीक्षण के दौरान कोई नया तथ्य, जो नीचे के न्यायालय में नहीं रखे गये थे, उसे डीसी की अदालत में नहीं रखा जा सकता. हां, ऐसे मामले में डीसी के पास इस तरह के तथ्यों की समीक्षा के लिये मामले को रिमांड किया जा सकता था. 

कमिश्नर ने डीसी कोर्ट के आदेशों की जांच की अनुशंसा की है

उल्लेखनीय है कि पूर्व कमिश्नर ने छवि रंजन के कोर्ट द्वारा एक साल में जमीन से जुड़े आदेशों की जांच की अनुशंसा की थी. इतना ही नहीं कमिश्नर ने डीसी के खिलाफ अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई की भी सिफारिश की थी. उन्होंने अपनी रिपोर्ट कड़ी टिप्पणी की थी. कमिश्नर की रिपोर्ट कहा गया कि जमीन के गोरखधंधे में थानेदार, सीओ से लेकर डीसी तक शामिल हैं। जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा दिलाने के लिए सरकारी मशीनरी का भी धड़ल्ले से दुरुपयोग हुआ. रिपोर्ट में कहा गया है कि रांची डीसी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रवि सिंह भाटिया व श्याम सिंह के पक्ष में अवैधानिक आदेश पारित किया और खाता नंबर 140 की 7.16 एकड़ जमीन की जमाबंदी खोलने का आदेश दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि बजरा की 7.16 एकड़ जमीन की सरकारी दर 29.88 करोड़ है। लेकिन इसे सिर्फ 15.10 करोड़ में बेची गई। चूंकि यह जमीन प्राइम लोकेशन पर है। विक्रेता को सर्किल रेट से अधिक कीमत मिल सकती थी। इसके बावजूद आधी कीमत पर जमीन बेचना संदिग्ध लगता है। इसलिए इसकी अलग से जांच कराई जाए।

छविरंजन ने गलत ढंग से जमाबंदी खोलने का आदेश दिया था  

प्रमंडलीय आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि रांची डीसी ने जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया। मजिस्ट्रेट और 150 पुलिसकर्मियों को प्रतिनियुक्त कर जमीन पर अवैध तरीके से चहारदीवारी का निर्माण कराया। पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति पर सरकारी राशि खर्च हुई। इसलिए इस राशि की वसूली डीसी के वेतन और जमीन की खरीदारी करनेवाले रवि भाटिया व श्याम सिंह से की जाए। दरअसल, जमीन की गलत तरीके से जमाबंदी किए जाने की शिकायत सरकार को मिली थी। इसके बाद सरकार ने प्रमंडलीय आयुक्त को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। आयुक्त ने रिपोर्ट में कहा है कि विनोद कुमार ने वर्ष 2016 में इस जमीन के म्यूटेशन के लिए हेहल अंचल में आवेदन दिया था। सीओ ने आवेदक का दखल न होने की बात कहते हुए आवेदन रद्द कर दिया। डीसीएलआर ने भी विनोद के आवेदन को रद्द कर दिया था। इसके बाद विनोद ने डीसी छवि रंजन के कोर्ट में रिवीजन के लिए आवेदन दिया। डीसी ने हेहल सीओ द्वारा दिए गए सादा पंचनामा के आधार पर विनोद कुमार सिंह के नाम पर जमीन की जमाबंदी खोलने का आदेश दे दिया। डीसी कोर्ट के आदेश के अगले ही माह विनोद सिंह ने मार्च 2021 में जमशेदपुर के रवि सिंह भाटिया और श्याम सिंह को यह जमीन 15.10 करोड़ में बेच दी।

बहरहाल, कोर्ट ने जमीन मालिक के पक्ष में अपना फैसला दे दिया है. पर कुलकर्णी द्वारा सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट की फाइल साल भर बाद भी धूल फांक रही है. उन्होंने छवि रंजन के डीसी कोर्ट से पिछले एक साल में दिए गए जमीन से जुड़े सभी आदेशों की जांच की भी सिफारिश सरकार से की है. अब देखना है कोर्ट के आदेश के बाद सरकार क्या रुख अपनाती है…?

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राम भक्तों के लिए

CM से ED की पूछताछ पर रांची में राजनीतिक तपिश बढ़ी,UPA में खदबदाहट,पक्ष-विपक्ष जोरदार प्रदर्शन की तैयारी में

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रांची : राजधानी रांची में झारखंड की राजनीतिक तपिश की आंच से हेमंत सरकार बेखबर नहीं है. गुरुवार को ईडी के समक्ष पेश होने की पूर्व संध्या पर हेमंत सोरेन अपने साथी दलों के साथ बैठक की फिर झामुमो की अलग से बैठक हुई. इधर, रांची के मोरहाबादी मैदान में महाजुटान को लेकर लोगों का रांची पहुंचना जारी है, तो दूसरी तरफ ईडी कार्यालय के आसपास की सुरक्षा का घेरा बढ़ा दिया गया है. ईडी ने इसके लिए डीजीपी को सूचना दे दी है. सत्ता प्रतिष्ठान के ब्यूरोक्रेट्स भी अपनी ड्यूटी में लग गए हैं. यानी कि अवैध खनन मामले में हेमन्‍त सोरेन 17 नवंबर को ईडी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश से पूर्व अच्छी एक्सरसाइज जारी है. वहीं सीएम के करीबी लोगों की ईडी द्वारा कड़ी घेराबंदी से यूपीए नेताओं की बेचैनी देखी जा रही है।  

JMM कार्यकर्ताओं के जुटान के बहाने…!

बताया जा रहा है 1932 के खतियान और ओबीसी आरक्षण को लेकर सीएम को शुक्रिया कहने के बहाने झामुमो कार्यकर्ताओं का जुटान तो सिर्फ एक बहाना है। याद करें… तीन नवंबर को भी समन के दिन विभिन्‍न जिलों से झामुमो कार्यकर्ता रांची पहुंचे थे, तब हेमन्‍त सोरेन ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए आक्रामक बयानबाजी की थी। उसके अगले दिन यूपीए की ओर से ईडी सहित केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और भाजपा के खिलाफ राज्‍यभर में प्रदर्शन हुआ था। बताया गया कि हेमन्‍त की दहाड़ के बीच भाजपा ने भी जिलों में हेमन्‍त सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया है। हेमन्‍त सरकार की विफलता और भ्रष्‍टाचार को लेकर 19 नवंबर को भाजपा राज्‍य भर में व्‍यापक प्रदर्शन की जोरदार तैयारी में जुटी हुई है।

आसन्न संकट से निबटने की तैयारी में सरकार

उधर, कई बार की बैठकों में ईडी की चुनौती स्वीकार करते हुए रणनीति और आसन्न संकट से निबटने की तैयारी में हेमंत सरकार ने मंथन किया. यूपीए विधायकों को रांची के आसपास ही रहने की हिदायत दी गई है. दो दिन पूर्व सरकार के बेहतर संचालन के लिए झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन की अध्‍यक्षता में समन्‍वय समिति गठित की गई। बहरहाल, गुरुवार को दिनभर राजनीतिक कोलाहल उफान पर रहेगा. सरकार अपने सैड बैक को धकियाते हुए फ्रंटफूट पर भाजपा जवाब देना का मन बनाए हुए है, ताकि हेमंत सरकार के रुख का पता दिल्ली को भी चले. अब देखना दिलचस्प होगा है कि पूछताछ में हेमंत सोरेन ईडी के सवालों पर कैसे रिएक्ट करते हैं…?     

राम भक्तों के लिए

CM से ED की पूछताछ पर रांची में राजनीतिक तपिश बढ़ी, यूपीए नेताओं में खदबदाहट, सत्तापक्ष-विपक्ष प्रदर्शन की तैयारी में जुटे

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रांची : राजधानी रांची में झारखंड की राजनीतिक तपिश की आंच से हेमंत सरकार बेखबर नहीं है. गुरुवार को ईडी के समक्ष पेश होने की पूर्व संध्या पर हेमंत सोरेन अपने साथी दलों के साथ बैठक की, फिर झामुमो की अलग से बैठक हुई. इधर, रांची के मोरहाबादी मैदान में महाजुटान को लेकर लोगों का रांची पहुंचना जारी है, तो दूसरी तरफ ईडी कार्यालय के आसपास की सुरक्षा का घेरा बढ़ा दिया गया है. ईडी ने इसके लिए डीजीपी को सूचना दे दी है. सत्ता प्रतिष्ठान के ब्यूरोक्रेट्स भी अपनी ड्यूटी में लग गए हैं. यानी कि अवैध खनन मामले में हेमन्‍त सोरेन 17 नवंबर को ईडी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश से पूर्व अच्छी एक्सरसाइज कर ली गई है. वहीं सीएम के करीबी लोगों की ईडी द्वारा कड़ी घेराबंदी से यूपीए नेताओं की बेचैनी भी देखी जा रही है।  

कार्यकर्ताओं के जुटान के बहाने…!

बताया जा रहा है 1932 के खतियान और ओबीसी आरक्षण को लेकर सीएम को शुक्रिया कहने के बहाने झामुमो कार्यकर्ताओं का जुटान तो सिर्फ एक बहाना है। याद करें… तीन नवंबर को भी समन के दिन विभिन्‍न जिलों से झामुमो कार्यकर्ता रांची पहुंचे थे, तब हेमन्‍त सोरेन ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए आक्रामक बयानबाजी की थी। उसके अगले दिन यूपीए की ओर से ईडी सहित केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और भाजपा के खिलाफ राज्‍यभर में प्रदर्शन हुआ था। बताया गया कि हेमन्‍त की दहाड़ के बीच भाजपा ने भी जिलों में हेमन्‍त सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया है। हेमन्‍त सरकार की विफलता और भ्रष्‍टाचार को लेकर 19 नवंबर को भाजपा राज्‍य भर में व्‍यापक प्रदर्शन की जोरदार तैयारी में जुटी हुई है।

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उधर, कई बार की बैठकों में ईडी की चुनौती स्वीकार करते हुए रणनीति और आसन्न संकट से निबटने की तैयारी में हेमंत सरकार ने मंथन किया. यूपीए विधायकों को रांची के आसपास ही रहने की हिदायत दी गई है. दो दिन पूर्व सरकार के बेहतर संचालन के लिए झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन की अध्‍यक्षता में समन्‍वय समिति गठित की गई। बहरहाल, गुरुवार को दिनभर राजनीतिक कोलाहल उफान पर रहेगा. सरकार अपने सैड बैक को धकियाते हुए फ्रंटफूट पर भाजपा जवाब देना का मन बनाए हुए है, ताकि हेमंत सरकार के रुख का पता दिल्ली को भी चले. अब देखना दिलचस्प होगा है कि पूछताछ में हेमंत सोरेन ईडी के सवालों पर कैसे रिएक्ट करते हैं…?     

राम भक्तों के लिए

वो भी क्या दिन थे

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जब हम स्कूल में पढ़ते थे (😳) उस स्कूली दौर में निब पैन का चलन जोरों पर था..!तब कैमलिन की स्याही प्रायः हर घर में मिल ही जाती थी, कोई कोई टिकिया से स्याही बनाकर भी उपयोग करते थे और बुक स्टाल पर शीशी में स्याही भर कर रखी होती थी 5 पैसा दो और ड्रापर से खुद ही डाल लो ये भी सिस्टम था …जिन्होंने भी पैन में स्याही डाली होगी वो ड्रॉपर के महत्व से भली भांति परिचित होंगे ! कुछ लोग ड्रापर का उपयोग कान में तेल डालने में भी करते थे…😜महीने में दो-तीन बार निब पैन को खोलकर उसे गरम पानी में डालकर उसकी सर्विसिंग भी की जाती थी और लगभग सभी को लगता था की निब को उल्टा कर के लिखने से हैंडराइटिंग बड़ी सुन्दर बनती है। सामने के जेब मे पेन टांगते थे और कभी कभी स्याही लीक होकर सामने शर्ट नीली कर देती थी जिसे हम लोग सामान्य भाषा मे पेन का पोंक देना कहते थे…पोंकना अर्थात लूज मोशन…😧हर क्लास में एक ऐसा एक्सपर्ट होता था जो पैन ठीक से नहीं चलने पर ब्लेड लेकर निब के बीच वाले हिस्से में बारिकी से कचरा निकालने का दावा कर लेता था !!नीचे के हड्डा को घिस कर परफेक्ट करना भी एक आर्ट था !हाथ से निब नहीं निकलती थी तो दांतों के उपयोग से भी निब निकालते थे…दांत , जीभ औऱ होंठ भी नीला होकर भगवान महादेव की तरह हलाहल पिये सा दिखाई पड़ता था 😜दुकान में नयी निब खरीदने से पहले उसे पैन में लगाकर सेट करना फिर कागज़ में स्याही की कुछ बूंदे छिड़क कर निब उन गिरी हुयी स्याही की बूंदो पर लगाकर निब की स्याही सोखने की क्षमता नापना ही किसी बड़े साइंटिस्ट वाली फीलिंग दे जाता था..!निब पैन कभी ना चले तो हम सभी ने हाथ से झटका देने के चक्कर में आजू बाजू वालों पर स्याही जरूर छिड़कायी होगी!कुछ बच्चे ऐसे भी होते थे जो पढ़ते लिखते तो कुछ नहीं थे लेकिन घर जाने से पहले उंगलियो में स्याही जरूर लगा लेते थे, बल्कि पैंट पर भी छिड़क लेते थे ताकि घरवालों को देख के लगे कि बच्चा स्कूल में बहुत मेहनत करता है!!भूली हुइ यादें…

राम भक्तों के लिए

आप कैडबरी वालो को हम सोनपापड़ी वालों को तरफ से शुभ दीपावली

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आपने इधर सोनपापड़ी जोक्स और मीम्स भारी संख्या में देखे होंगे। निर्दोष भाव से उन पर हँस भी दिए होंगे। पर अगली बार उस बाज़ार को समझिए जो मिठाई से लेकर दवाई तक और कपड़ों से लेकर संस्कृति तक में अपने नाखून गड़ाये बैठा है। एक ऐसी मिठाई जिसे एक स्थानीय कारीगर न्यूनतम संसाधनों में बना बेच लेता हो। जिसमें सिंथेटिक मावे की मिलावट न हो। जो अपनी शानदार पैकेजिंग और लंबी शेल्फ लाइफ के चलते आवश्यकता से अधिक मात्रा में उपलब्ध होने पर बिना दूषित हुए किसी और को दी जा सके, खोये की मिठाई की तरह सड़कर कूड़ेदान में न जा गिरे। आश्चर्य, बिल्कुल एक सुंदर, भरोसेमंद मनुष्य की तरह जिस सहजता के लिए इसका सम्मान होना चाहिए, इसे हेय किया जा रहा है। एक काम कीजिये डायबिटिक न हों तो घर में रखे सोनपापड़ी के डिब्बों में से एक को खोलिए। नायाब कारीगरी का नमूना गुदगुदी परतों वाला सोनपापड़ी का एक सुनहरा, सुगंधित टुकड़ा मुँह में रखिये। भीतर जाने से पहले होंठों पर ही न घुल जाये तो बनानेवाले का नाम बदल दीजियेगा। कई लोगों की पसंदीदा मिठाई यूँ ही नहीं है। बात बाज़ार से शुरू हुई थी, सोनपापड़ी तो तिरस्कार का विषय हुई। अब लंबी शेल्फ लाइफ और बढ़िया पैकेजिंग का दूसरा किफ़ायती उपहार और क्या हो सकता है? चॉकलेट्स!!! और क्या? समझ रहे होंगे। एक छोटे से उपहास के चलते, इधर के दो चार महीनों में ही कैडबरी का ही टर्न ओवर क्या से क्या हो सकता है मेरी कल्पना से बाहर की बात है। पिछले दो दशकों से वे बड़े- बड़े फ़िल्म स्टार्स को करोड़ों रुपये सिर्फ़ इस बात के दे रहे हैं कि हमारी जड़ बुद्धि में ‘कुछ मीठा हो जाये’ यानी चॉकलेट ठूँस सकें। और हम हैं कि अब भी मीठा यानी मिठाई ही सूँघते , ढूँढ़ते फिर रहे हैं। तो क्या करना चाहिए। मिठाई क्या यह तो प्रोटीन बार है, और चीनी तो हर मिठाई में है। और लोकप्रियता का आधार देखिये वो 35 रुपये में एक टुकड़ा देते हैं ये डिब्बाभर थमा देते हैं। सो, याद रखिये, मीठा यानी, गुलाबजामुन, रसगुल्ला, सोनपापड़ी और सूजी का हलवा। चॉकलेट यानी चॉकलेट।आप कैडबरी वालो को हम सोनपापड़ी वालों को तरफ से शुभ दीपावली।।साभार…एक सौम्य उपहार

राम भक्तों के लिए

डायबिटीज के मरीज जरूर पिएं दालचीनी का पानी, नहीं पड़ेगी दवाई की जरूरत

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दालचीनी हर घर में मौजूद होती है. दालचीनी सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता बल्कि हमे बहुत सारे पोषक तत्व भी देता है. सिर्फ दालचीनी ही नहीं बल्कि दालचीनी का पानी भी हमारे लिए बेहद फायदेमंद रहता है. जो लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं उनके लिए दालचीनी का पानी रामबाण इलाज है. ऐसे में हम आपको बताएंगे कि आपको किस तरह से दालचीना का सेवन करना चाहिए और इसके क्या फायदे है?डायबिटीज में किस तरह से लाभदायक है दालचीनी का पानी?दालचीनी (Cinnamon) को मामूली मसाला नहीं है. दालचीनी में कई गुण होते हैं जो की स्वास्थ के लिए काफी फायदेमंद रहते हैं. इसके साथ पानी और दालचीनी का संयोजन एक बहुत ही अच्छी ड्रिंक होती है ये शरीर में मौजूद सभी टॉक्सिन्स (toxins) को बाहर निकाल देती है. इसके फायदे यहीं समाप्त नहीं होते हैं. दालचीनी का पानी शरीर में बढ़ रहें अनचाहे फैट को भी बर्न करती है. इसके साथ यह हृदय से जुड़ी बीमारी और अल्जाइमर जैसे रोगों को भी दूर करती है. किस तरह करती है दालचीनी शुगर को कंट्रोल?दालचीनी में मौजूद औषधीय गुण करते हैं डायबिटीज (Diabetes) का खात्मा.इसमें मौजूद इन्सुलिन संवेदनशीलता को बढ़ने में मदद करता है.खाने में मौजूद ब्लड शुगर स्पाइक को कम करता है. डायबिटीज से जुड़ी अन्य बिमारियों को दूर करता है.कैसे बनाये दालचीनी का पानी?दालचीनी (Diabetes) के पानी को बनाने के लिए आप एक कंटेनर में 1 लीटर पानी और उसमें 1 इंच तक दालचीनी का टुकड़ा डालें. अब इसे रात भर के लिए ऐसे ही छोड़ दें. आप इसमें कुछ नीबू के टुकड़े भी डाल सकते हैं. अगले दिन जब भी आपको प्यास लगे इस पानी का सेवन करें. इसके साथ आप दालचीनी को पानी में उबालकर भी इसके पानी का सेवन कर सकते हैं. इसके लिए बस आपको दो कप पानी लेना है और उसको उबाल लेना है. उसके बाद उस पानी में दालचीनी का पाउडर डालें और इसे अच्छी तरह से मिक्स कर लें. आप इसे रोजाना पी सकते हैं. आपको डायबिटीज में इसका फायदा जरूर मिलेगा.

राम भक्तों के लिए

1630 ईसवी की एक शाम। निन्गो बंदरगाह, चीन

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तट की तरफ़ जाने वाली संकरी गलियाँ खचा-खच भरी हैं। यात्री, व्यापारी, फेरीवाले, भिखारी, चोर, आवारा लोग इस भीड़ का हिस्सा हैं। कई ठेलों पर चूल्हे जला कर भोजन बनाया जा रहा है। कुछ बाँस के बने पट्टों पर किताबें लटकी हैं। रोचक गल्प भी हैं, प्रेरक पुस्तकें भी। कुछ बौद्ध भिक्षु राहगीरों को बिठा कर कथाएँ सुना रहे हैं। कुछ वैद्य अजीबोग़रीब जड़ों से औषधि बना रहे हैं। साँप, मेढक और हिरण के मांस ज़मीन पर सुखाए जा रहे हैं। नाई उस्तरा लेकर, और मुंशी काग़ज़ और दवात लेकर बैठे हैं। मुंशी तांबे के सिक्के लेकर अनपढ़ों के लिए चिट्ठी लिख रहे हैं। एक भविष्यवक्ता बेंत की गठरी लेकर बैठा है, जिसमें हर बेंत पर एक अंक लिखा है। लोग आकर एक बेंत चुनते हैं, और वह अपने ग्रंथ का वह पन्ना खोलता है जिसमें उनका भविष्य लिखा है। उसके ठीक पीछे एक पट्टिका पर लिखा है- ज़िंदगी बहुत कीमती है। अपने जीवन में सावधानी बरतें। सदैव किसी दिव्य व्यक्ति से मार्गदर्शन लें। ख़ास कर जब आप समुद्र यात्रा पर जा रहे हों!’- झांग दाइ (Zhang Dai) के संस्मरण से, सत्रहवीं सदीचीन के इतिहास में दो चीजें बहुतायत में मिलती हैं। एक तो किताबें बहुत लिखी गयी, क्योंकि काग़ज़ की खोज जल्दी हो गयी। दूसरा यह कि यात्रा संस्मरण बहुत लिखे गए। दूसरे देशों के इतिहास को भी चीनी यात्रियों के संस्मरणों से देखा गया, जिसमें भारत में शामिल है। भले ही ह्वेन-सांग का लिखा आधा-अधूरा हो, विकृत हो, उसके अनुवाद ग़लत हुए हों या ह्वेन-सांग नामक कोई व्यक्ति ही न हो; लेकिन वह ह्वेन-सांग के नाम से लिख दिया गया, तो अब वह इतिहास का हिस्सा है। मार्को पोलो ने क़ैदखाने में बैठे-बैठे किसी दूसरे कैदी को कुछ कहानी सुनायी, उसने कुछ मसाला जोड़ कर लिख दिया, वह इतिहास बन गया। इसलिए इस विषय पर माथापच्ची करने का मतलब नहीं कि सही इतिहास क्या और ग़लत क्या। अगर कोई घटनाओं को दर्ज़ ही नहीं करता, तो वह सत्य होकर भी इतिहास के पन्नों में नहीं जाएगी। अगर दर्ज़ हो गयी तो हम उसे भले अविश्वसनीय और मिथ्या कहते रहें, वह इतिहास बन जाएगी। अब जैसे इसी कथन को लें- ‘मंगोलों के बाद चीन पर कभी भी लंबे समय तक पूर्ण विदेशी शासन नहीं हुआ’यह बात न सिर्फ़ चीनी बल्कि पश्चिमी इतिहासकार भी लिखते हैं। मैंने भी पहले लिखा है। लेकिन, यह कथन भ्रांतिपूर्ण है। इसलिए नहीं कि यूरोपीय शक्तियों ने चीन पर धौंस जमायी, या जापान ने हराया, बल्कि चीन का आखिरी राजवंश जिसने तीन सौ वर्षों तक शासन किया वही चीन की दीवाल फाँद कर आए थे!सत्रहवीं सदी के शुरुआत में जब डोंगलिन अकादमी के बुद्धिजीवियों ने सत्ता के खिलाफ़ विद्रोह शुरू किया, तो उन्हें पकड़ कर मृत्युदंड दे दिया गया। लगभग पूरी अकादमी ही साफ़ कर दी गयी। मगर उन्होंने जनता में अपना संदेश पहुँचा दिया था। पहले छोटे दुकानदारों ने शहरों में आंदोलन शुरू किए। फिर गाँवों में किसान उठ खड़े हुए। मिंग वंश की नींव हिल गयी।1635 ईसवी में ली जिचेंग नामक एक किसान के नेतृत्व में तीस हज़ार चीनियों ने राजधानी की ओर बढ़ना शुरू किया। वह एक-एक कर चीनी शहर जीतते जा रहे थे। हालाँकि वे अराजक थे, जो सरकारी संपत्ति जलाते हुए आगे बढ़ रहे थे। कैफेंग प्रांत में तो उन्होंने एक बाँध तोड़ दिया, जिसमें तीन लाख लोगों के डूब कर मर जाने का विवरण है। 1644 ई. में जब वह बीजिंग पहुँचे, मिंग वंश के आखिरी राजा फॉरबिडेन सिटी के बाहर एक पेड़ से लटके हुए मिले। उन्होंने आत्महत्या कर ली थी।ली जिचेंग ने उस जमाने का एक साम्यवादी भाषण दिया- ‘अब इस राज्य पर शाही शासन नहीं, हम गरीबों का राज होगा। कोई कर नहीं लगाया जाएगा। ज़मीन हर नागरिक को बराबर बाँट दी जाएगी’ऐसे अशांत माहौल में दो विदेशी शक्तियों ने चीन पर अपने जाल फेंकने शुरू किए थे। पहले पुर्तगालियों ने यह सोचा कि मिंग राजवंश को सैन्य सहयोग देकर धीरे-धीरे इसे अपना उपनिवेश बना लिया जाए। उन्होंने तोप और बारूद भिजवाए, जो चीन के लिए अपेक्षाकृत नयी चीज थी। ये गोला-बारूद युद्ध में भले काम आते किंतु इस जन-विद्रोह में तो नाकाम रहे। दूसरी विदेशी शक्ति चीन की दीवाल के उत्तर में थी। नुरहाची नामक एक सरदार ने जुरचेन, मंगोल और अन्य को मिला कर कुल आठ कबीलों का एक समूह बनाया। संभवतः वे तेंगरी या शामन आस्थाओं को मानते थे। कुछ स्रोत उन्हें बोधिसत्व मंजूश्री का अनुयायी मानते हैं। ऐसा भ्रम उनके नाम को लेकर संभव है। चीन की दीवाल फाँद कर अगली तीन सदियों तक चीन पर अपना शासन स्थापित करने वाले ये लोग थे- मंचू।
Credit – Dr. Praveen Jha

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जाने क्या है सावित्रीबाई फूले किशोरी समृद्धि योजना

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रामगढ़: *झारखंड में मुख्यमंत्री सुकन्या योजना का नाम बदल कर सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना कर दिया गया है। इसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण, बालिका शिक्षा पर जोर व बाल विवाह प्रथा का अंत, किशोरियों के स्वास्थ्य एवं वैयक्तिक स्वच्छता में सहायता करना है।**योजना के तहत छात्राओं को आर्थिक सहायता मुहैया करायी जायेगी। इसमें कक्षा 8वीं एवं नाैवीं में नामांकित बालिका को 2500 रुपये, कक्षा 10वीं, 11वीं एवं 12वीं में दाखिला लेने वाली बालिकाओं को 5000 रुपये तथा 18 से 19 वर्ष की आयु की बालिका को एक मुश्त अनुदान के रूप में 20,000 रुपये दिये जायेंगे।**इन्हें मिलेगा लाभ*==========*यह सहायता मां की पहली दो बेटियों के लिए देय होगा। लाभार्थी की मां की ओर से स्व घोषणा पत्र समर्पित किया जायेगा जिसे आवेदन के साथ संलग्न करना होगा। इस योजना के तहत सरकारी, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित, महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा संचालित,एनसीएलपी के अंतर्गत संचालित तथा झारखंड सरकार द्वारा अनुदानित विद्यालयों में कक्षा 8वीं से 12वीं में अध्ययनरत सभी छात्राओं को योजना के दायरे में लाया गया है। योजना का लाभ केवल उन्हें मिलेगा, जिनके माता-पिता किसी सरकारी सेवा अथवा सार्वजनिक उपक्रम में सेवारत नहीं हैं। माता-पिता आयकर दाता नहीं हों। आवेदन में छात्रा का जन्म प्रमाण पत्र लगाना होगा।**वोटर लिस्ट में पंजीयन अनिवार्य*=========*छात्रा की उम्र 18 वर्ष पूर्ण होने पर उनका नाम संबंधित कैलेंडर वर्ष में झारखंड राज्य की मतदाता सूची में पंजीकृत कराना अनिवार्य है। लाभार्थी का आवेदन के समय मतदाता पहचान पत्र आवेदन के साथ संलग्न करना अनिवार्य है। 19 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पूर्व ही इस योजना के तहत आवेदन करना अनिवार्य है।**यहां कर सकेंगे आवेदन*============*योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी सीधे अथवा आंगनबाड़ी सेविका के माध्यम से बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कार्यालय में आवश्यक प्रमाण-पत्रों एवं दस्तावेजों के साथ आवेदन पत्र समर्पित कर सकते है। प्रमाण-पत्रों एवं अभिलेखों की स्व-अभिप्रमाणित छायाप्रति संलग्न करना अनिवार्य है। प्रारंभ में इस योजना के तहत पूरी प्रक्रिया मैन्युअल की जायेगी। कालांतर में पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। ज्यादा जानकारी के लिए समाहरणालय स्थित जिला समाज कल्याण कार्यालय एवं प्रखंडवार बाल विकास परियोजना कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है

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