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Wednesday, November 4, 2026
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जहाज कोठी, कांके रोड, रांची

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रांची के कांके रोड पर ढीला जहाज कोठी एक अनिश्चित भविष्य का इंतजार है । हरदीप सिंह द्वारा चित्ररांची, 11 मार्च: कांके रोड पर जहाज कोठी, जिसका अपरिवर्तनीय डिजाइन जिज्ञासु आगंतुकों को आकर्षित करता था, अपने पूर्व स्व की छाया है ।इमारत, जो हवाई जहाज से मिलती है, अतीत में बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करती थी । वर्तमान में यह एक खेदजनक आकृति में कटौती करता है क्योंकि रखरखाव की कमी ने इसे एक दिलचस्प संरचना में बदल दिया है ।कलकत्ता के इंजिनियर अर्जुन राय ने दौरा किया शहर के लिए लाइक कांके रोड पर जमीन का टुकड़ा खरीदकर हवाई जहाज के आकार में मकान बना लिया ।इमारत को सड़क से देखा जा सकता है और उसके किनारे विशाल कंक्रीट के पहिये हैं । 16 कमरे वाले जहाज़ कोठी पर अब सात परिवारों का कब्ज़ाजहाज कोठी की रहने वाली टीना तिर्की ने कहा उनके महान दादा अर्जुन राय के लिए माली बनकर काम करते थे । राय की मौत के बाद उनके परिवार कलकत्ता लौटे और छुट्टियों के दौरान आते थे ।′′ राय परिवार ने मेरे पूर्वजों को संपत्ति के उपकीप के साथ सौंपा था । समय बीतने के साथ, परिवार ने बार-बार आना बंद कर दिया और हमें रखरखाव के लिए परिसर में रहने की अनुमति दी,” उसने जोड़ा ।′′ मैं इस इमारत में बड़ा होकर अपने माता-पिता को यहां मरते देखा है । यह अब हमारा घर है,” टीना ने कहा ।जहाज कोठी के पिछले वैभव पर बोलते हुए उसने कहा कि इमारत उन दिनों शहर की बात हुआ करती थी ।दूर-दूर के स्थानों से लोग कांके के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकाट्री में इलाज के लिए आते थे और घर के सामने इसके अनोखे डिजाइन की सराहना करने के लिए रुक जाते थे ।′′ इमारत ने अपना ग्लैमर खो दिया है और केवल हमें उसकी प्रिस्टीन ग्लोरी की याद दिलाता है । पुराने मकानों को बनाए रखने के लिए बहुत पैसा लगता है खासकर जहाज कोठी जैसे । मालिकों ने अपना अधिकार हासिल कर लिया है और लगभग आना बंद कर दिया है,” एक स्थानीय पंसारी मनोज शर्मा ने कहा ।इमारत में एक अंडाकार बालकनी है जिसके बगल में एक कमरा है, जिससे अनुभाग एक विमान के कॉकपिट की तरह दिखता है ।जहाज कोठी में कमरे हैं जो पंखों की तरह दिखते हैं । पिछले अंत में एक छोटी सीढ़ी है, जो एक विमान की पूंछ पंखों से मिलती है । source – Facebook User Manohar lal

राम भक्तों के लिए

झारखंड मे क्या है हड़िया – The Desi Beer

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झारखंड के वन-प्रांतर में रहने वाले जनजातीय एवं मूलवासी परिवारों में एक पारम्परिक पेय पदार्थ ‘हड़िया’ के सार्वजनिक रूप से सेवन का प्रचलन सर्वमान्य है। इस पेय पदार्थ में उर्जा और मादकता दोनों का सामंजस्य है। किन्तु शासकीय स्तर पर हड़िया को मद्य निषेध कानूनों के दायरे से मुक्त रखा गया है। वस्तुतः हड़िया घर-धर में बनाया जाता है। इसका मूल घटक चावल है, जो आसानी से उपलब्ध है। हड़िया बनाने की विधि बहुत अधिक जटिल नहीं होने से इसे तैयार करने में परहेज नहीं किया जाता है। वस्तुतः सीधे शब्दों में कहा जाए तो हड़िया चावल के भात से बनता है। लेकिन इसके मूल घटक में चावल के अतिरिक्त गेहूँ और मडु़वा को भी शामिल कर लिया गया है। गेहूँ और मड़ुवा का भी भात सीझा कर समान-विधि से हड़िया बनाया जाता है। चावल में अरवा और उसना दोनों प्रकार का उपयोग हो सकता है।

लेकिन विशेष रूप से उसना चावल के भात से ही हड़िया बनाने का प्रचलन है। चावल में करैनी धान का चावल अधिक उपयुक्त माना जाता है। स्वाद के कारण किसी भी किस्म के उसना चावल से परिवारों में हड़िया बनाने का प्रचलन है।कैसे तैयार होता है हड़ियाहड़िया बनाने की मूल प्रक्रिया फर्मन्टेशन है। इस प्रक्रिया में ‘रानू’ नामक एक जड़ी को भी मिलाया जाता है। विधि के अनुसार, सर्वप्रथम चावल को भात के रूप में पका देते हैं, जिसे भात ‘सीझाना’ भी कहते हैं। इसके बाद भात को ठंडा होने देते हैं। इसे भात का ‘जुड़ाना’ कहते हैं। जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो एक बडे़-चौड़े बर्तन या डलिया में भात को उडे़ल देते हैं, जिसे भात पसारना कहा जाता है।अब इस पसरे हुए न गर्म न ठंडे भात मं रानू नामक जड़ी के पाउडर को अच्छी तरह मिला देते हैं और फिर जड़ी मिले इस पदार्थ (भात) को तसला या अन्य उपयुक्त बर्तन में रखकर गलाने (सड़ने) या कहें तो फर्मेन्टेशन के लिए छोड़ देते हैं। इसमें अभी पानी नहीं मिलाया जाता है। इस कार्य में परिवार की महिलाआें का हीं विशेष योगदान होता है। सर्वेक्षण के अनुसार जाड़े के दिनों में सिर्फ चावल (भात) और ‘रानू’ के मिश्रण को हड़िया के रूप में तैयार होने में चार से पॉंच दिन या एक-दो दिन अधिक भी समय लग सकता है। जबकि गर्मी के दिनों में दो-तीन दिन में ही हड़िया का माल तैयार हो जाता है।

कैसे सेवन करते हैं हड़ियाहड़िया का पदार्थ तैयार हो जाने के बाद अब उसमें शुद्ध और साफ पानी मिला कर धीरे-धीरे बर्तन को हिलाते हैं, जब हिलाते-हिलाते हड़िया-पदार्थ में मिलाया पानी एकरूप से सफेद हो जाता है तब उसे ग्लास में, कटोरा में, कटोरी में या अन्य प्रकार के सुविधा जनक पात्र में छननी से छानकर और ढालकर पीते हैं। हड़िया अकेले में पीया जाता है, तो समूह में बैठकर भी पीया जाता है। हित-कुटुम्ब, नाते-रिश्तेदार, दोस्त-मित्रों को भी हड़िया परोस कर स्वागत करने की परम्परा झारखण्ड के जनजातीय एवं मूलवासी परिवारों में रही है और आज भी है। सार्वजनिक समारोहां में भी हड़िया का सेवन वर्जित नहीं है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हड़िया को प्रतिष्ठापूर्वक पारम्परिक पेय के रूप में लोग सेवन करने से परहेज नहीं करते।हड़िया और परम्परासर्वेक्षण के अनुसार स्पष्ट होता है कि झारखण्ड के जनसमाज में हड़िया एक मादक पेय होते हुए भी परम्परागत और सांस्कृतिक रूप से सर्वग्राह्य एवं प्रचलित पेय पदार्थ है। यह कृषि-श्रमिकों को भी पीने के लिए दिया जाता है। इससे श्रमिकों में उत्साह और श्रम की प्रवृति प्रबल होती है। जबकि हड़िया को किसी भी प्रकार के सामाजिक-सांस्कृतिक, धार्मिक या पारिवारिक कार्यक्रमों के दौरान भी पवित्रतापूर्वक उपयोग किया जाता है। इसे न केवल कुल देवता पर चढ़ाया जाता है बल्कि अन्य देवी-देवताओं पर भी चढ़ा कर श्रद्धा अर्पित करते हैंं। शादी-ब्याह, जन्म-मरण के अवसरों पर भी हड़िया का सामूहिक सेवन वर्जित नहीं है। वस्तुतः ऐसे अवसरों पर हड़िया का सेवन कराना सामाजिक रूप से अनिवार्य माना जाता है।

हालांकि अभी शिक्षित परिवारों में पारिवारिक-सामाजिक या अन्य प्रकार के समारोहों में हड़िया के सेवन के प्रति उपेक्षा की सुगबुगाहट भी देखने को मिल रही है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रां में ऐसी कोई ‘क्रांति’ देखने को नहीं मिल रही है।हड़िया और स्वास्थ्यमादकता के बावजूद हड़िया का सेवन करनेवाले इसे अपेक्षाकृत एक निर्दोष पेय बताते हैं लेकिन मात्रा से अधिक सेवन करने पर शरीर में तत्कालिक भारी शिथिलता और प्रमाद की भी शिकायत मिलती है। इसके अत्यधिक सेवन से व्यक्ति निष्क्रिय हो जाता है और किसी कार्य के प्रति वह अनिच्छा का शिकार हो जाता है। सीमित सेवन करने पर हड़िया को स्वास्थ्यकर पेय का दर्जा देने वालों का मानना है कि पीलिया (जॉन्डिस) जैसी बीमारी में यह बहुत फायदा करता है। हालांकि एक बार में चुलाए गए हड़िया के तीसरी बार के पानी हड़िया का सेवन ही स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त बताया जाता है।हड़िया में हो रही मिलावटखाद्य एवं पेय पदार्थों में मिलावट के दोष और अपराध से हड़िया भी ग्रसित है। जानकार बताते हैं कि शहरों-बाजारों में ग्रामीण हाटों में जहाँ-तहाँ सड़क किनारे हड़िया की भी खुलेआम ब्रिक्री हो रही है।

 

 

 

 

 

 

लेकिन अधिकांश विक्रेता हड़िया को नशीला बनाने के लिए उसमें यूरिया मिलाकर तैयार करते हैं। इससे न केवल यूरिया मिला हड़िया त्वरित नशा करता है बल्कि जानलेवा भी बन जाता है। हड़िया में अन्य नशीले पदार्थां की मिलावट की भी शिकायत मिलती है। यह दुष्कृत्य वस्तुतः हड़िया बेचनेवाले अपराधी लोग ही करते हैं, जैसा अपराध अन्य मिलावटखोर करते हैं। गांवों में यह विकृति अभी कम है। यह इसलिए कि जिस तरह अन्य प्रदेशों में स्वयं या अतिथियों के लिए स्वागत मं चीनी-गुड़-दूध-दही से तैयार पेय पिलाया जाता है, उसी तरह झारखण्ड के जनजातीय और मूलवासियों क परिवार में हड़िया को प्रस्तुत किया जाता है। बच्चों को हड़िया से दूर रखा जाता है। जबकि युवक चाहें तो सेवन कर सकत हैं। नमक, मिर्च, चना, मटर, नरमकी, पकौड़ी या अन्य प्रकार के बाजारू नमकीन पदार्थ हड़िया के साथ ‘चखना’ के रूप में खाया जाता है।एक बार का बना हड़िया कितने दिन चलता हैचावल, गेहूँ या मडुवा के भात से एक बार बना हड़िया 15 दिन तक सेवन करने के योग्य माना जाता है। उसके स्वाद में दिन बीतने पर खट्टापन आ सकता है लेकिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं हो सकता है।

 

 

 

 

 

यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि सीझे चावल में रानू मिलाकर जब उसे फर्मेन्टेशन के लिए छोड़ा जाता है और प्रक्रिया पूरी होने पर पानी डालकर पहली बार आवश्यकतानुसार हड़िया चुआ लेते हैं तो दो-तीन दिन छोड़-छोड़ कर भी उसमें पानी मिलाकर कई बार हड़िया चुलाते हैं और पीते हैंं।रानू है असली जड़ीहड़िया बनाने में रानू नामक जड़ी का महत्व है। यह बाजार में या जड़ी बनाने वाले जानकार लोगां द्वारा बेची जाती है। जंगलां में उपलब्ध ‘चौली कंदा’ एवं अन्य गुप्त जड़ी को अरवा चावल के आटे में कूटकर मिला देने के बाद इसकी छोटी-छोटी गोलियां बनाकर बिक्री होती है। इसी को ‘रानू’ कहते हैं। जब हड़िया का चावल, गेहूँ या मडुवा का भात सीझ जाता है तो ठंडा होने के बाद ‘रानू की सफेद गोली’ को गर्म कर बुकनी बना ली जाती है और प्रति एक किलोग्राम भात में तीन गोली की मात्रा में रानू की बुकनी (पाउडर) मिलाकर छोड़ दिया जाता है। रानू के बिना हड़िया का भात खराब हो जाता है। रानू मिलाने से चार-पॉंच दिनां तक गलने से भात से हड़िया चुलाया जा सकता है।Note:- यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है नशापान का किसी भी प्रकार से मैं समर्थन नहीं करता।

 

 

 

 

 

राम भक्तों के लिए

बैटरी से चलने वाली “मेड इन झारखंड” बाइक

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यह है बैटरी से चलने वाली “मेड इन झारखंड” बाइक; धुआं रहित इको फ्रेंडली है बाइकबैटरी डिस्चार्ज होने का टेंशन भी नहीं; पैदल मारकर साइकिल की तरह भी चला सकते हैं इसेझारखंड के सरायकेला-खरसवां जिला के बासुरदा गांव के निवासी श्री कामदेव पान ने बैटरी वाली बाइक बनाया है. मुख्यमंत्री श्री Hemant Soren से कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास में आज श्री कामदेव पान ने मुलाकात कर बाइक के बारे में बताया.मुख्यमंत्री ने कामदेव पान के द्वारा निर्मित की गई बैटरी वाली बाइक की प्रशंसा करते हुए कहा “झारखंड के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। राज्य के युवा वर्ग को प्रोत्साहित कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। राज्य के युवाओं को सही दिशा देने का हर संभव प्रयास हमारी सरकार कर रही है।”श्री कामदेव पान ने मुख्यमंत्री के समक्ष बैटरी से चलने वाली इस बाइक की फीचर्स से संबंधित पूरी जानकारी रखी। श्री कामदेव पान ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि उनके द्वारा निर्मित की गई यह बाइक फुल चार्ज होने पर 50 से 60 किलोमीटर की माइलेज देती है। यह बाइक पूरी तरह आधुनिक है। पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी यह बाइक काफी अनुकूल है। यह बाइक ध्वनि एवं धुआं रहित है। बैटरी डिस्चार्ज होने पर पैडल से भी इस बाइक को चलाया जा सकता है।

राम भक्तों के लिए

महिंद्रा FirstCry ने खोला बोकारो मे बच्चों के लिए exclusive स्टोर

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बोकारो – महिंदा FirstCry ने बोकारो स्टील सिटी सेक्टर 4 में बच्चों के लिए exclusive स्टोर खोला है | इस शोरूम में नवजात शिशु से लेकर 8 साल तक के बच्चों के उपयोग में आने वाले चीजें मिलती हैं | शोरूम के संचालिका सुप्रिया कुमारी ने बताया की हमारे स्टोर में सभी प्रचलित ब्रांड की सामग्री उपलब्ध है | बोकारो में ये अपने तरह का पहला स्टोर है जहाँ पर आप अपनी जरूरतों के सामान एक ही छत्त के नीचे मिल जाएगा | Product Range में Baby gear , Mom and Maternity , Feeding and Nursing , cloths and shoes, Bath and Skin care, Toys and Gaming ,Diaper , के प्रोडक्ट्स मिलते हैं जो लोगों की बजट और रेंज के अंदर में मिल जायेगा | पहले लोगों को अलग अलग जगह में जाकर सारे सामान लेना पड़ता था पर अब FirstCry के स्टोर खुल जाने से अब लोगों को एक ही छत्त के निचे ये सारे सामान मिल जाएँगी | सुप्रिया कुमारी ने बताया हमारे स्टोर में 10 लोगों को हमने रोज़गार दिया है और हमारा प्रयास है की बोकारो में लोगों को अच्छे कंपनी के प्रोडक्ट्स मिलें | समय समय पर FirstCry में सेल और ऑफर्स चलता ही रहता है जिसका जिसका फायदा बोकारो के लोग उठा सकते हैं साथ ही FirstCry बोकारो सामाजिक कार्यो में भी काफी बढ़ चढ़ कर भाग लेती है और समय समय पर बच्चो के लिए बहुत सारे Social, educational Events organize कराते रहती है | FirstCry का स्टोर बोकारो स्टील सिटी सेक्टर 4 के मार्किट का पता है

Address :- FirstCry, F 8, Sector 4, Near Harshvardhan Plaza, Bokaro Steel City, Jharkhand 827004 – Phone – 8411927266

राम भक्तों के लिए

हुंडरू फॉल शहर के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है

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सुबरनारेखा नदी के पाठ्यक्रम पर बना हुंडरू फॉल्स रांची, जहां 320 फीट ऊंचाई से गिरता है ।हुंडरू झरने के आधार पर, एक पूल है, जो स्नान स्थल और पिकनिक स्थल के रूप में काम करता है । इतनी बड़ी ऊंचाई से पानी गिरने का शानदार नजारा काफी समय से लोगों से अपील कर रहा है । लगातार गिरते पानी के क्षरण से चट्टान के विभिन्न रूपों ने जगह की सुंदरता को जोड़ दिया है ।रांची के मुख्य शहर रांची से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हुंडरू जलप्रपात । इस झरने का वैभव पर्यटकों का ध्यान काफी हद तक आकर्षित करता है और उन्हें यादगार और अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है । हुंडरू फॉल्स रांची वास्तव में उन आगंतुकों के लिए एक आश्चर्य पैकेज है जिन्हें छोटा नागपुर पठार का मनोरम दृश्य पसंद है ।रांची के हुंडरू फॉल्स में लोग अपने परिवार के साथ बड़ी छुट्टी बिताने के लिए जाते हैं । हुंडरू फॉल में साहसिक प्रेमी भी इकट्ठा होते हैं, जो इस जगह के लोकप्रिय ट्रेकिंग स्थलों में से एक माना जाता है ।स्थानीय रूप से उपलब्ध लकड़ी, बांस, और जंगली मशरूम से बने स्थानीय हस्तशिल्प खरीदना भी लोग पसंद करते हैं ।

राम भक्तों के लिए

इंदु शर्मा झारखण्ड की रॉक स्टार

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इंदु शर्मा झारखण्ड की प्रसिद्ध कलाकार है इन्होने झारखण्ड के अलावा भारत के सभी राज्यों में अब तक हज़ारो स्टेज शोज किया है | ये धनबाद की रहनेवाली है , झारखण्ड वीकली की टीम काफी समय से इनसे इंटरव्यू लेने का प्रयास कर रही पर इनके व्यस्त कार्यकर्मो की वजह से हमसे बात नहीं हो पाई , पिछले हफ्ते हमारी इनसे मुलाकात हुई |

झारखण्ड वीकली – इंदु जी झारखण्ड वीकली से बात करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सबसे पहले आप हमारे रीडर्स को अपने बारे में बताइये आप कहा की रहनेवाली है और संगीत के क्षेत्र में कैसे और कितने सालों से हैं आप |

इंदु शर्मा – बहुत बहुत धन्यवाद सबसे पहले मैं धनबाद शहर से हु और संगीत की दुनिआ में १५ सालों से हु , बचपन से ही संगीत का शौक था |

झारखण्ड वीकली – आप झारखण्ड के आलावा कहा कहा पर स्टेज शोज किया है और किन किन बॉलीवुड सिंगर्स के साथ आपने काम किया है

इंदु शर्मा – झारखण्ड, बंगाल , और करीब इंडिया के हर स्टेट में स्टेज शोज कर चुकी हु , बॉलीवुड सिंगर मोहम्मद अज़ीज़ , शब्बीर कुमार , विनोद राठोड , अर्जुन कानूनगो , उषा उथुप के साथ स्टेज शोज कर चुके हैं

झारखण्ड वीकली – आप कब से स्टेज शोज कर रही है और अब तक आपने कितने स्टेज शोज कर लिया है

इंदु शर्मा – मैं २००४ से स्टेज शोज कर रही हु और अब तक हज़ारों शोज कर चुकी हु |

झारखण्ड वीकली – स्टेज शोज के आलावा आपने कितने एलबम्स में काम किया है आने वाले आप एलबम्स कौन कौन से हैं |

इंदु शर्मा – मेरे कुछ अनप्लग्ड वीडियोस यूट्यूब चॅनेल पर इंदु शर्मा धनबाद पर उप्लोडेड है आप उन्हें देख सकते हैं इनमे से एक बहुत ही पॉपुलर वाला है सजना है मुझे सजना के लिए |

झारखण्ड वीकली – आप अपना आइडल किसे मानती है

इंदु शर्मा – मेरे आइडल लता मंगेशकर जी हैं |

झारखण्ड वीकली – संगीत के अलावा आपके क्या क्या होब्बीएस है

इंदु शर्मा – संगीत के अलावा मेरी हॉबी कुकिंग है |

झारखण्ड वीकली – प्लेबैक में आने का क्या प्रोग्राम है क्या आपको आने वाले समय में बॉलीवुड के किसी सांग्स में हम सुन सकेंगे |

इंदु शर्मा – अभी तक वैसा कुछ तो नहीं हुआ है मगर कोशिश कर रही हु |

झारखण्ड वीकली – नए कलाकारों को कोई सन्देश देना चाहेंगी आप

इंदु शर्मा – म्यूजिक बहुत साधना की चीज़ है म्यूजिक सीखना चाहिए जब तक आप गा रहे है तब तक रिचार्ज करें और सीखें

राम भक्तों के लिए

डकरा – गोपी भाई का फेमस लिट्टी चोखा

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डकरा – अगर आप डकरा के आस पास जैसे खलारी , चुरी , मांकी , KDH , मोहन नगर मे रहते है और लजीज लिट्टी चोखा खाने का जी करे तो डकरा हॉस्पिटल के मैन गेट के सामने ही गोपी भाई का एक छोटा सा फूड स्टॉल हैं वहाँ पर आकार मजेदार लिट्टी चोखे का मजा ले सकते हैं | गोपी जी का यहा पर पिछले 5 साल से लिट्टी चोखे का फूड स्टॉल चलाते हैं और बड़े प्यार से लोगों को लिट्टी चोखा खिलाते हैं | झारखंड वीकली की टीम पिछले सप्ताह डकरा खलारी के विजिट पर थी और हमने गोपी भाई के लिट्टी चोखे का आनंद लिया | गोपी भाई ने बताया वो लिट्टी चोखे को बनाने मे विशेष ध्यान देते हैं और थोड़ा ज्यादा तयारी करते हैं, हल्के आँच मे लिट्टी को बनाते है जिससे लिट्टी का स्वाद बढ़ जाता हैं , लहसन , अदरक , तीखी चटनी , अंचार , और स्वादिस्त आलू का चोखा खाकर मजा आ जाता हैं | मजेदार बात ये है की लिट्टी चोखा बनाने की प्रकिया मे गोपी भाई किसी का भी साथ नहीं लेते और सारा काम खुद करना पसंद करते हैं | यहाँ गोपी भाई ने दाम लिट्टी चोखा का दाम भी काफी कम रखा है जिससे आप जी भर के लिट्टी चोखे का मजा ले सकते हैं वो भी अपने बजट मे | गोपी जी का पूरा नाम है गोपाल प्रसाद , इनहोने विनोबाभावे यूनिवरसिटि से ग्राजुएशन कर रखा है , पहले से ही मन बना रखा था की वो अपना खुद काम ही करेंगे और जब मौका मिला तो अपना फूड स्टॉल खोल दिया | कभी मौका मिले डकरा जाने का तो गोपी भाई के हाथों के लिट्टी चोखे का मजा जरूर लें  | डकरा हॉस्पिटल मैन गेट के सामने गोपी भाई का छोटा सा फूड स्टॉल है , हॉस्पिटल के पास के किसी भी दुकान वाले से पूछेंगे तो वो आपको गोपी भाई के फूड स्टॉल का पता बता देगा | Contact No. of Gopi Bhai – 9709014720

राम भक्तों के लिए

अभिमन्यु पाल – मजदूर से लेकर सोशल मीडिया वारियर्स तक का सफर

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जमशेदपुर – जुगसलाई विधानसभा के खाकड़ीपाड़ा पंचायत से उभरता हुआ सितारा झारखंड राजनीती के सोशल मीडिया में एक जाना माना नाम है अभिमन्यु पाल, सोशल मीडिया में बहुत ही एक्टिव रहते है और अपनी पार्टी के लिए सोशल मीडिया में रणनीति तैयार करते हैं। आईये जानते हैं हम इनके बारे में इन्हीं की जुबानी। जमशेदपुर प्रखंड के खाकड़ीपाड़ा पंचायत के बड़ा गोविंदपुर में 1992 में एक साधारण परिवार में जन्म हुआ जो परिवार कभी राजनीति के बारे में कुछ जानते ही नहीं। 10वीं पास करने के बाद इंटर में दाखिला लिया और पढ़ाई के साथ साथ टाटा मोटर्स कंपनी में ठिकेदारी में काम भी करने लगा, काम करते करते बीच में पढ़ाई छूट गई, फिर हमने काम छोड़कर पढ़ने का मन बनाया और आईटीआई में दाखिला लिया, 2012 में आईटीआई का कोर्स पूरा करने के बाद नौकरी की तलाश में इधर उधर लोगो से मिलना जुलना शुरू किया

झारखंड की राजनीति को सोचने और समझने की ज्ञान हुई, तब से राज्य के जनक पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय शिबू सोरेन जी के द्वारा किए गए कार्य गांव में हमेशा चर्चा होती रहती थी, लोग उनके सोच का तारीफ करते थे कि कैसे हमें झारखंड अलग राज्य मिला, अलग राज्य पाने के लिए कितने आंदोलन करने पड़े और कितने आंदोलनकारी इस आंदोलन में शहीद हुए, जिसे हम अक्सर सुनते थे ओर सोचते थे कि हम भी जब राजनीति में कदम रखेंगे, तो वो झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी का ही दामन थामेंगे और शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन जी के राह, उनके विचार पर चलकर एक अच्छे और खुशहाल झारखंड बनाने में हम भी उनका साथ दे कर उनका आवाज़ बुलन्द करेंगे, 2013 में जब झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार बनी और हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने तब घाटशिला विधायक रामदास सोरेन जी के नेतृत्व में झामुमो का दामन थामा और पार्टी की राह में चलकर पार्टी के लिए काम करना शुरू किया। 2014 लोकसभा चुनाव के समय पहली बार निर्मल गेस्ट हाउस जमशेदपुर में हेमंत सोरेन जी के साथ मुलाकात हुई, उनके विचार सुनकर और भी प्रभावित हुआ

2015 में हमने अपना प्रयास सोशल मीडिया के माध्यम से शुरू किया, सोशल मीडिया में अपनी प्रयत्न जारी रखने लगे धीरे धीरे पार्टी के तमाम लोगों से सोशल मीडिया के द्वारा जुड़ने लगे और मुझे सोशल मीडिया में एक नई पहचान मिली, इसी क्रम में पार्टी के तमाम बड़े बड़े नेता लगातार हमारे हौसला बढ़ाते रहे, उसके बाद हमें पार्टी के सोशल मीडिया प्रभारी बनाया गया, सोशल मीडिया में हमारा काम से पोटका के विधायक संजीव सरदार जी काफी खुश हुए और मुझे बुलाकर सम्मानित भी किए। मै हमेशा निस्वार्थ पार्टी के लिए दिन रात काम करता हूं और मुझे पार्टी हित में काम करना अच्छा लगता है, मै गर्व से कह सकता हूं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा का सच्चा सिपाही हूं। भले ही हमने पढ़ाई लिखाई कम किए है फिर भी हमारा शौक पढ़ना है चाहे वह अखबार हो, किताब हो, नॉवेल हो, साधारण ज्ञान कि पुस्तक हो या किसी भी अच्छे लेखक द्वारा लिखी गई ज्ञानवर्धक किताब हो। मैं हमेशा कहानी की किताबें, समाचार पत्र, पत्रिकाएं, और किसी भी अन्य सामग्री को पढ़ता हूं जो मुझे अपने खाली समय में दिलचस्प लगता है। मेरी किताबों को पढ़ने का यह शौक बचपन से ही है नई चीजों को सीखना, नए नए लोगो से मिलना बात करना अच्छा लगता है। जब मै छोटा था तब से मुझे अपने माता-पिता कुछ ना कुछ कहानियों की किताब लाकर देते थे जो मुझे पढ़ने में बहुत दिलचस्पी लगता था।

सोशल मीडिया के बारे में कहना चाहूंगा आज यह गर्व से कह सकता हूँ कि यह सोशल मीडिया-इन्टरनेट की ताकत ही है कि तमाम अनजाने लोगो से मेरी जान-पहचान हुई और उनके स्नेह ने मुझे दिनों दिन हौसला दिया। मैं उन लोगों धन्यवाद देना चाहूंगा जिन्होंने मेरा साथ दिया, आज सोशल मीडिया के सभी साथी आज मुझे अपने परिवार के सदस्य की तरह ही लगते हैं। मुझे लगता है लोगो तक अपना बात रखने के लिए सोशल मीडिया एक बहुत अच्छा रास्ता है। मैं तो सोशल मीडिया पर बने रिश्तों-अपने मित्रों से बहुत लाभान्वित हुआ हूँ, दुखी भी हुआ हूँ, दुःख भी साझा किया है और साथ साथ संघर्ष भी किया है। सोशल मीडिया आम जन हेतु अभिशाप तो कतई नहीं है मेरी नजर में, यह समाज के हाथों में एक हथियार है जिसके उपयोग की प्रवृत्ति से यह निश्चित किया जा सकता है कि अमुक मामले में यह अभिशाप साबित हुआ और अमुक में वरदान। सोशल मीडिया रूपी यह धारदार हथियार समाज के हाथों में है और इसका गलत प्रयोग करने वाले व्यक्ति, समूह की प्रवृत्ति का दोष सोशल मीडिया के मंच पर ही थोपना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर लोग अपनी बात धड़ल्ले और बेबाकी से लिख रहे हैं। अख़बारों के पत्रकारों-सम्पादकों और चिंतकों से ज्यादा लोकप्रिय चेहरे सोशल मीडिया पर सुर्खियां और टिप्पणियां बटोर रहे हैं। आज कल तक अनजान रहे चेहरों की लेखन के पीछे बड़े-बड़े चिंतक, लेखक, पत्रकार दौड़ लगा रहे है, उस लिखत की भर्त्सना या प्रशंसा कर रहे हैं और यही तो सोशल मीडिया की असली ताकत है।

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राम भक्तों के लिए

गिरिडीह – क्यो पड़ा एक होटल का नाम बेवकूफ होटल

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गिरिडीह – अगर आपको लगता है सिर्फ आमिर खान ही इडियट है तो ये आपका भरम है, झारखंड के गिरिडीह शहर मे चले आइए आपको एक दर्जन से भी जायेदा बेवकूफ लोग मिलेंगे, माफ कीजिएगा लोग नहीं होटल मिलेंगे, दरअसल मे गिरिडीह शहर मे एक दर्जन से जायेदा होटेलों के नाम मे बेवकूफ लगा हुआ है , मसलन बेवकूफ होटल , सबसे बड़ा बेवकूफ होटल , बेवकूफ नंबर वन होटल, इत्यादि | 1971 मे बीरबल प्रसाद और उनके चाचा जी आर्थिक परेशानी से गुजर रहे थे तो उन्होने गिरिडीह मे एक बिना नाम का होटल खोला और चलाने लगे , खाने के दाम सस्ता रखा था तो लोगों की भीड़ लगी रहती थी इसी भीड़ का फायेदा उठा कर कुछ छात्र खा कर बिना पैसे दिये चलते बने तो होटल के मालिक बीरबल प्रसाद के चाचा ने कहा की ये लोग तो हमको बेवकूफ बना के चले गए बस फिर क्या था बिना नाम के होटल का नाम बेवकूफ होटल कर दिया और फिर ये बेवकूफ होटल आगे चलकर कितना फेमस हो गया की मिलते जुलते नाम से एक दर्जन से जाएडा लोगों ने होटल खोल लिया , अगर आप गिरिडीह जाये तो सस्ते मे अच्छा खाने का मजा लेना चाहे तो बेवकूफ होटल चले जाये और बीरबल प्रसाद जी से उनकी कहानी भी सुनके आए | बीरबल प्रसाद जी बड़े ही मजेदार इंसान है खाना खिलाने के साथ साथ अपनी आपबीती भी सुनते है कैसे उन्होने 1971 से अब तक का सफर पूरा किया झारखंड वीकली की पूरी टीम के तरफ से उनको सादर प्रणाम |

राम भक्तों के लिए

माया नगरी के खेल निराले, काम करे कोई नाम ले जाए कोई

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मुंबई – मायानगरी मुंबई मे प्रतिभावान कलाकारों का शोषण कोई नयी बात नहीं , शुशांत सिंह राजपूत जैसे बड़े कलाकार भी इससे अछूते नहीं रहे | फ़िल्मनगरी मे कई बार ऐसा होता है की मेहनत कोई करता है और नाम कोई और ले जाता है , बहुत सारी किस्से हैं जहां पर प्रतिभावान कलाकारों श्रेय कोई और ले जाता है, ऐसा ही कुछ हुआ बॉलीवुड के जाने माने डायरेक्टर आनंद शास्त्री जी के साथ , इन्होने एक फिल्म का निर्देशन किया जिसका नाम है सेक्रेट अटैक , फिल्म के प्रोडूसर हैं बरेली, उत्तर प्रदेश के डॉक्टर हेमेंद्र कुमार सिंह , प्रोडूसर ने डायरेक्टर के साथ बहुत बड़ा धोखा किया, फिल्म बन जाने के बाद डायरेक्टर साहब और उनकी टीम को कोई मेहताना नहीं दिया गया और ना ही फिल्म में उनका श्रेय दिया गया यहाँ तक की डायरेक्टर आनंद शास्त्री का नाम हटा के प्रोडूसर ने अपना ही नाम कर दिया , झारखण्ड वीकली टीम से बात करते हुए डायरेक्टर आनंद शास्त्री जी काफी भावुक हो गए , उन्होंने कहा की सारा काम करा लेने के बाद ना ही उनके और ना ही उनके टीम को कोई मेहताना दिया गया और ना ही उनके काम का श्रेय दिया गया | प्रोडूसर साहब ने अपनी पुरे घरवालों को अपने फिल्म में लिया और निर्देशक आनंद शास्त्री ने नाकाबिल लोगों को काबिल बना के फिल्म में काम करवाया , आगे आनंद ने कहा हम इतनी मेहनत से कोई फिल्म का निर्देशन करते हैं और लोग अपना नाम निर्देशक की स्थान पर चिपका देते हैं इससे एक कलाकार पर क्या गुजरती है कलाकार ही जनता है , डायरेक्टर आनंद शास्त्री ने अपनी शिकायत फिल्म एसोसिएशन को किया है और उम्मीद करते है की बहुत जल्द प्रोडूसर पर इसकी गाज गिरेगी |

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