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Saturday, March 7, 2026
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पुरुष नहीं बल्कि पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ महिलाओं का हुआ था ऐतिहासिक संघर्ष

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के पूर्व संध्या भाषण,कविता वा गीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व छात्र प्रतिनिधि अभिषेक राज कर रहे थे कार्यक्रम में मुख्य वक्ता व अतिथि वक्ता के रूप में प्रशिक्षु आईएएस सुलोचना मीना,डॉ.जॉनी रुफिना तिर्कि( विभाग अध्यक्ष एंथ्रोपॉलजी),रश्मि प्रधान प्रचार्या विधि महाविद्यालय तथा अन्य शिक्षक शामिल हुए। कार्यक्रम मे अन्य कई शिक्षक शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन हिमांशु कुमार, आरती मेहता, ने किया।वक्ताओ ने कहा कि 8 मार्च का यह ऐतिहासिक दिन जिसे पूरे दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह केवल एक दिवस नहीं है या यह कोई महोत्सव या आयोजन भर नहीं ,बल्कि लड़कियों महिलाओं का इस समाज में अपने अधिकारों के लिए किया गया संघर्ष का प्रतीक है।जो संघर्ष कहीं ना कहीं आज भी चल रहा है।

शारीरिक रूप से और कानूनी रूप से तो उन्हे अधिकार मिल गए है,लेकिन क्या मानसिक रूप से इस समाज मे बराबर का दर्जा मिल पाया है। नज़र घुमा कर देखियेगा तो आप पाएंगे, ऐसा नही है,,
लड़कियों महिलाओं छात्राओं को देवी की तरह पूजने से पहले उन्हें पूरी तरह से इंसान मानिए उन्हें समाज मे बराबर का दर्जा देना ही सार्थकता है।
नजर और नज़रिए से भी बराबर माने।
मुंशी प्रेमचंद अपने साहित्य में रहते हैं महिलाओं का काम केवल एकादशी का व्रत करना बच्चों को जन्म देना और घर का कामकाज करना ही नहीं है बल्कि इस समाज के हर एक दशा और दिशा को बदलने में पुरुष समाज के साथ कंधा से कंधा मिलाकर आगे बढ़ाना है।

अंतरराष्ट्रीय पर एक भ्रम आज पितृसत्तात्मक समाज में यह भी है की महिला दिवस यानी महिलाओं को आगे बढ़ाना महिलाओं के लिए ही यह दिवस है। यह महिला दिवस सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं है अपितु एक सार्थक सफल और विकसित समाज के लिए पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर के एक सही समाज का निर्माण करने के लिए आगे बढ़ाने की परिकल्पना है ।जिसमें केवल महिलाएं ही अकेले आगे नहीं बढ़ सकते उनके लिए इस समाज के दोनों को एक साथ एक बराबरी के साथ बढ़ाना होगा ,तभी एक बराबर का समाज बनेगा और यह अधिकारों की लड़ाई पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ है ना कि पुरुष से।
कार्यक्रम मे भाषण,गीत व कविता मे विभिन्न विभाग के दर्जनो प्रतिभागियों ने भाग लिया, भाषण प्रतियोगिता में पहला स्थान तकी तसनीम,दूसरा ज्योति कुमारी, तीसरा पुरुषोत्तम राज, कविता में पहला स्थान सलोनी साहू, दूसरा राजिया बनो, तीसरा मानसी प्रिया हुई । निर्णायक मंडली मे श्रीमती मोना बग्गा, पुष्कर कुमार पुष्प, आतिश आलोक।आयोजन को सफल बनाने मे अभिषेक राज, जीवन यादव, लव कुश पांडे, गुलाम सरवर, प्रिंस राज , सागर कुमार, अमरदीप मेहता कुणाल गुप्ता, तारानुम आदि छात्र शामिल थे।

News – Vijay Chaudhary.


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