गुमला – गुमला जिले के पारंपरिक कारीगरों , शिल्पकारों के औद्योगिक विकास को लेकर गुमला उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के द्वारा लगातार कई पहल किए जा रहे हैं। इस दिशा में जिले के विभिन्न पारंपरिक कारीगरों को चिन्हित करते हुए उनके विकास हेतु सीएफसी सेंटर का निर्माण एवं टूल किट वितरण सहित कई मूलभूत सुविधाओं से आच्छादित करने का कार्य जिले में किया जा रहा है एवं आने वाले समय में जिले के प्रत्येक क्षेत्र के पारंपरिक कारीगरों को चिन्हित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
इसी क्रम में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के निर्देश के आलोक में जिले के विभिन्न प्रखंडों के पारंपरिक कारीगरों के लिए सी.एफ.सी.सेंटर के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है जिसमें मांदर कारीगर, ब्रास एवं ब्रोंज के कारीगर, बांस कारीगरों के लिए सीएफसी सेंटर निर्माण सहित अन्य सुविधाएं देने का कार्य किया जा रहा है।
जिले के मांदर कारीगरों के लिए बनाया जा रहा है सीएफसी सेंटर
जिला उद्यमी समन्वयक, मुख्यमंत्री लघु कुटीर विकास उद्यम बोर्ड सूरज कुमार द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देश के आलोक में तथा राज्य सरकार की योजना “उद्योग लगाओ, उल्लास जगाओ” के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों के कारीगरों के विकास को लेकर मुख्यमंत्री लघु कुटीर विकास उद्यम बोर्ड के द्वारा कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि रायडीह प्रखंड के चिन्हित 40 मांदर कारीगरों की मैपिंग की गई है। उनके सहयोग के लिए सी.एफ.सी. केंद्र का निर्माण किया जा रहा है , ताकि सभी कारीगर एक साथ बैठ कर कार्य कर सकें, उनके आय वृद्धि के लिए कारीगरों को उत्पादन गुणवत्ता हेतु प्रशिक्षण भी दे दिया गया है। मांदर कारीगरों के प्रोड्यूसर कंपनी के गठन एवं उनका GST एवं उद्योग आधार पूर्ण किया जा चुका है। इसके अलावा जिले के मांदर की भौगोलिक विशेषता हेतु आवेदन भारत सरकार को समर्पित की गई है।
बसिया प्रखंड के ब्रास एवं ब्रोंज कारीगरों को पहचान पत्र उपलब्ध कराया गया, सी.एफ.सी. केंद्र का निर्माण कार्य प्रारंभ
उपायुक्त गुमला के निर्देश के आलोक में बसिया के पारंपरिक ब्रास एवं ब्रोंज कारीगरों को पहचान पत्र भारत सरकार डीसी हैंडीक्राफ्ट द्वारा उपलब्ध कराते हुए उन्हें विभिन्न योजनाओं से आच्छादित करने का कार्य किया जा रहा है। बसिया प्रखंड के रामजड़ी में कुल 60 ब्रास एवं ब्रोंज के कारीगरों को चिन्हित करते हुए उन्हें एक सुविधाजनक तथा कार्य करने हेतु सुरक्षित स्थान देने के लिए लिए सी.एफ.सी. सेंटर का निर्माण किया जा रहा है , कारीगरों को ई श्रम कार्ड उपलब्ध कराया गया एवं उनका श्रमिक निबंधन एवं उद्योग आधार बनाने की प्रक्रिया पूर्ण कर दी गई है। इसके अलावा उक्त कारीगरों को “सेफ्टी फर्स्ट, प्रोडक्टिविटी मस्ट” के तहत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने हेतु भी कार्य किए जा रहे है ।
पारंपरिक बांस कारीगरों को पुनर्जीवित करने का प्रयास
गुमला जिले के विभिन्न प्रखंडों में सर्वाधिक पारंपरिक बांस कारीगरों को पूर्व में ही चिन्हित करने का कार्य पूर्ण किया गया था इसके साथ ही जिले के लगभग 1400 से अधिक बांस कारीगरों को टूल किट वितरण एवं क्लस्टर वार उनके लिए सी.एफ.सी. सेंटर का भी निर्माण कार्य किया गया है । इसी क्रम में डुमरी प्रखंड स्थित लावाबार ग्राम में 27 बांस कारीगर, गुमला प्रखंड स्थित डुमरला ग्राम के 22 बांस कारीगर एवं बिशुनपुर के बेठाड़ में कुल 20 नए बांस कारीगरों को चिन्हित करते हुए उनका पहचान पत्र , श्रम कार्ड, श्रम निबंधन करवाया गया साथ ही उन्हें टूल किट भी प्रदान किए गए है। तथा संबंधित क्षेत्रों में तीन नए सीएफसी केंद्र का भी निर्माण किया जा रहा है।
माटी शिल्पाकारों के विकास हेतु जिला प्रशासन की तैयारी जोरों से
गुमला सदर प्रखंड स्थित टोटो ग्राम के 32 परिवारों वाले माटी शिल्पकारों के विकास को लेकर भी उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के निर्देश पर योजनाएं बनाई गई थी। जिसके तहत उक्त क्षेत्र के कारीगरों को कारीगर प्रमाण पत्र दिलवाया गया, श्रम कार्ड एवं श्रम निबंधन कराने के साथ साथ सरकार की विभिन्न योजनाओं से आच्छादित करने का कार्य किया जा रहा है। कारीगरों के उत्पादन को बढ़ाने हेतु इलेक्ट्रॉनिक चाक एवं इलेक्ट्रॉनिक पगमिल कराया गया है। एवं सभी कारीगरों को सुविधाजनक स्थान प्रदान करने के उद्देश्य से उनके लिए सी.एफ.सी. केंद्र का भी निर्माण कराने का कार्य किया जा रहा है।।
इसके अलावा पिछले दिनों उद्योग विभाग के साथ हुए समीक्षात्मक बैठक में उपायुक्त द्वारा जिले के अन्य क्षेत्रों के पारंपरिक कारीगरों को चिन्हित करते हुए भी उन्हें भी जिला स्तर से संभव सुविधाओं से आच्छादित करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही कार्य प्रारंभ कर दिए जाएंगे।
News – गनपत लाल चौरसिया
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