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Sunday, March 8, 2026
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हवा की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी है कि साफ आसमान देखना मुश्किल हो गया है :-डॉ जयदीप सन्याल

सन 2020-21 में ऑक्सीजन की कमी से लाखों लोग मौत के मुँह में समा गए।

हज़ारीबाग विनोबा भावे विश्वविद्यालय यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज के संस्थापक डॉ जयदीप सन्याल ने कहा कि पर्यावरण में वयाप्त प्रदूषण चरम पर है यही वजह है कि सन 2020-21 में ऑक्सीजन की कमी से लाखों लोग मौत के मुँह में समा गए थे।उन्होंने कहा कि प्रत्येक छात्र छात्राओं को एक पीपल का पेड़ लगाकर उसे बड़ा करने का शपथ लेना चाहिए।एक पीपल का पेड़ चौबीस घंटे ऑक्सीजन देता है तथा पर्यावरण को स्वच्छ रखता है।पीपल का पेड़ की वजह से काफी मात्रा में हमे ऑक्सीजन प्राप्त होता है। यह कहा जा सकता है कि एक पीपल के पेड़ से दस लोगों को प्राण वायु मिलता है।डॉ जयदीप सन्याल ने कहा कि कोरोना काल मे बड़े बड़े अस्पतालों में एक व्यक्ति को ऑक्सीजन सप्लाई करने के एवज में प्रतिदिन पाँच हज़ार रुपया वसूल किया गया। उन्होंने कहा कि अगर रुपये देकर ऑक्सीजन खरीदकर लिया जाता तो एक आकड़े के मुताबिक एक व्यक्ति जीवन पर्यंत चौदह करोड़ चालिस लाख रुपया का ऑक्सीजन लेने के लिए मजबूर होता पर प्रकृति मुफ्त में हमे ऑक्सीजन प्रदान करती है उन्होंने कहा कि उसके बदले में मनुष्य प्रकृति को कुछ भी नही देता है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को एक पीपल का पेड़ लगाना चाहिए और उसे संरक्षण देना चाहिए।डॉ सन्याल ने कहा कि जन्मदिन,शादी की सालगिरह जैसे अवसर पर इंसान हज़ारो रुपये केक,मिठाई, तरह तरह के पकवान आदि में खर्च करता है उसके बदले में एक पीपल का पेड़ लगाए तो प्रकृति के लिए एक सार्थक कदम होगा।डॉ सन्याल ने कहा कि वायु प्रदूषण का एक हिस्सा होने के बावजूद,धूल को अलग से संबोधित करना जरूरी है, क्योंकि इसके स्रोत और समाधान प्रदूषण के अन्य कारकों से अलग हैं। धूल के मुख्य स्रोतों में निर्माण कार्य, सड़कों पर मिट्टी, और भारी वाहनों की आवाजाही शामिल हैं।विश्व पर्यावरण दिवस हमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाता है। भारत में वायु प्रदूषण और धूल की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। दिल्ली, मुंबई, और लखनऊ जैसे शहरों में हवा की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी है कि साफ आसमान देखना मुश्किल हो गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लू एच ओ )ने चेतावनी दी है कि भारत के कई शहरी क्षेत्रों में पीएम 2 -5 का स्तर 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक है, जबकि सुरक्षित सीमा 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।

News Source – Hazaribagh Bureau


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