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Saturday, March 7, 2026
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विडम्बना देखिए…! हम पाक पर आतंकवाद का आरोप लगा रहे हैं और अमेरिका उसे आतंकवाद की लड़ाई का भरोसेमंद सहयोगी बता रहा है?

अमिता नीरव
अपनी स्टूडेंट लाइफ में पाकिस्तान के बारे में मेरा एक ऑब्जर्वेशन रहा कि परसेप्शन बिल्डिंग वॉर में पाकिस्तान ने हमेशा भारत को मात दी है। उन्हीं दिनों कहीं पढ़ा था कि 1965 के वॉर के बारे में पाकिस्तान ने दुनिया को कन्वींस करवा दिया था कि युद्ध भारत ने शुरू किया और पाकिस्तान ने इस युद्ध में भारत को हरा दिया।
अपने इस ऑब्जर्वेशन को मैंने ज्यादा तवज्जो नहीं दी और समय के साथ भूल गई। कुछ महीनों पहले पाकिस्तानी पॉडकास्ट में वहीं के पत्रकार ने जब ठीक यही बात कही तो मुझे अपना ऑब्जर्वेशन याद आया। वो लगातार खतरे लेकर बता रहा था कि ये पाकिस्तान का झूठ है जो दशकों से पाकिस्तानी अवाम को बताया जा रहा है.

ऑपरेशन सिंदूर मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को बढ़त मिली

ऑपरेशन सिंदूर मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की बढ़त ने इस बात को फिर से सिद्ध किया कि असल वार में चाहे जो रहा हो, परसेप्शन वार में उसने फिर से हमें मात दी है। असीम मुनीर को पाकिस्तान और दुनिया में मिलने वाली तवज्जो से हैरानी जरूर हो रही है।
भारत बहुत साल इस गुमान में रहा कि हमारे पास संसाधन है, स्किल्ड प्रोफेशनल्स हैं और है 140 करोड़ लोगों का बाजार…। इसके चलते हमें विदेश नीति और राजनय के मामलों में कोई प्रयास करने की जरूरत नहीं है। फिर जनता को विदेशों में रॉक स्टार शो करके समझा दिया कि सब चंगा सी।
मगर पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर हमारी जो दुनिया में भद पिटी है, उसने हमारी विदेश नीति के प्रति गंभीरता की पोल खोल कर रख दी है। अपने 26 लोगों को खोकर भी हम दुनिया को ये बताने में नाकामयाब रहे कि हम पीड़ित हैं। एक सामान्य संवेदना संदेश के सिवा इस मामले में हमें कुछ भी हासिल नहीं हुआ।

पाक आतंकवाद की पनाहगाह 

पहलगाम हमले के बाद निजी बातचीत में एक दोस्त ने पूछा कि ‘हमला होते ही हमने तुरंत पाकिस्तान का हाथ होने का आरोप लगा दिया। क्या ये ठीक है!’ मैं उद्वेलित हो गई, ‘पाकिस्तान आतंकवाद की पनाहगाह है, इसे क्या सिद्ध करने की जरूरत है!’ बात बहुत तल्ख़ नोट पर खत्म हुई।
बाद में थोड़ी स्थिर हुई तो समझ आया कि ये हम जानते हैं, दुनिया को सुबूतों के साथ समझाना पड़ेगा। जैसा 2008 के आतंकी हमले के बाद मनमोहन सरकार ने किया था। पाकिस्तान पर दबाव तब पड़ेगा, जब दुनिया के प्रभावशाली और ताकतवर देश इस बात से कन्वींस हो जाए। राजनय या डिप्लोमेसी एक प्रक्रिया है। वो हाउडी मोदी शो नहीं है।

आतंकियों के लॉन्चिंग पैड नष्ट करने से आतंकवाद खत्म नहीं होगा

जब पहली बार एयर स्ट्राइक को प्रचारित किया जा रहा था, तब भी सवाल उठा था कि आतंकियों के लॉन्चिंग पैड नष्ट करके क्या आतंकवाद खत्म हो जाएगा? अभी भी यही सवाल उठा कि स्ट्रक्चर नष्ट करके हमने क्या तीर मार लिया?
प्रचारित किया जा रहा था कि 100 से ज्यादा आतंकी मार गिराए। कोई दुर्दांत आतंकी का नाम आया? उसे छोड़िए पहलगाम हमले को लगभग दो महीने होने आए जिन चार आतंकियों के फोटो सरकार ने रिलीज किए थे, उनमें से किसी का कोई सुराग मिला?

अजहर मसूद की रिहाई का दंश आज भी देश भुगत रहा है

अब सोचिए कि यदि उनमें से कोई भी या वे सारे अब भी कश्मीर में ही हैं तो और क्या कहर बरपा सकते हैं वो। अजहर मसूद को रिहा करने को देश आज तक भुगत रहा है।
पहले भी लिख चुकी हूं, विदेश नीति और डिप्लोमेसी एक गंभीर विधा है, ये कोई रॉक स्टार शो नहीं है, जिसमें बढ़िया कपड़े पहन कर जोशीला भाषण देकर, विपक्ष की आलोचना करके मजमा लूट लिया जा सके. ऑपरेशन सिंदूर मामले में हमारी विदेश नीति कई स्तरों पर फेल हुई है.
बढ़िया बात ये है कि सरकार हर असफलता को उपलब्धि साबित करने में महारत हासिल कर रखी है। यही महारत यदि दुनिया में भारत की छवि बनाने में इस्तेमाल होती तो देश का भला हो जाता। इस वक्त अमेरिका बार-बार पाकिस्तान को आतंकवाद की लड़ाई का बड़ा स्ट्रेटिजिक पार्टनर कह रहा है!

डंका नहीं बज रहा है, आपके कान बज रहे हैं

हमें शर्म से मर नहीं जाना चाहिए? हमारे लोग मारे गए हैं। हम पाकिस्तान पर आतंकवाद का आरोप लगा रहे हैं। और अमेरिका उसे आतंकवाद की लड़ाई का भरोसेमंद सहयोगी कह रहा है? कौन सा देश हमारे साथ खड़ा दिख रहा है?
पाकिस्तान सरकार सुबूत मांग रही है, हमने बिना सुबूत पाकिस्तान पर आरोप लगाए हैं। अपने लोगों को खोकर भी हमारे हिस्से दुनिया की सहानुभूति नहीं आई। ये है हमारी विदेश नीति की सफलता? बाकी तो बहुत सवाल हैं जो बार बार उठाये ही जा रहे हैं, मगर हमारे राजा बाबू बस कहते हैं, जवाब देना उन्हें कहाँ पसंद है? तो यदि आपको डंका बजने की आवाज़ आ रही है तो यकीन कीजिए, डंका नहीं बज रहा है, आपके कान बज रहे हैं।
नोट : (मप्र की वरिष्ठ पत्रकार हैं,ये उनके अपने विचार हैं)

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