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विनोबा भावे विश्वविद्यालय में जयंती पर संगोष्ठी, भूदान आंदोलन की हुई विस्तृत चर्चा

हजारीबाग, 11 सितम्बर 2025।
विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में गुरुवार को आचार्य विनोबा भावे की 130वीं जयंती के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने भूदान और ग्रामदान आंदोलनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विनोबा के योगदान को याद किया।

“गांधी के बाद देश को दिशा देने वाले संत”

संगोष्ठी की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने की। उन्होंने कहा,
“यह हमारा सौभाग्य है कि जिस महान संत ने महात्मा गांधी के बाद स्वतंत्र भारत की नैतिक दिशा तय की, उन्हीं के नाम पर हमारे विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है।”
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विनोबा भावे ने 12 वर्ष 13 महीने तक पूरे भारत का पैदल भ्रमण किया और जनता की नब्ज़ को करीब से समझा।

हजारीबाग में मिला सबसे बड़ा भूदान

विशिष्ट वक्ता डॉ. प्रमोद कुमार ने आचार्य विनोबा भावे के हजारीबाग आगमन का ऐतिहासिक संदर्भ साझा किया। उन्होंने बताया कि विनोबा 1952 और 1953 में हजारीबाग आए थे।
“हजारीबाग का गौरव है कि पूरे भारत में विनोबा को सर्वाधिक भूमि यहीं से मिली। रामगढ़ स्टेट के राजा बहादुर कामाख्या नारायण सिंह ने उन्हें चार लाख एकड़ भूमि दान में दी थी,” उन्होंने कहा।
डॉ. प्रमोद ने यह भी याद दिलाया कि विनोबा ने ‘जय जगत’ का नारा दिया, जो उनके विश्वकल्याणकारी दृष्टिकोण का परिचायक है।

“भूदान से चकित हुआ विश्व”

मुख्य वक्ता और शिक्षा शास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ. मृत्युंजय प्रसाद ने विनोबा को गांधी का आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बताया। उन्होंने कहा,
“विनोबा का मानना था कि भूमि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं बल्कि समाज की धरोहर है। उनका संदेश ‘सभी भूमि गोपाल की’ जब लोगों ने अपनाया तो पूरा विश्व आश्चर्यचकित रह गया।”
उन्होंने आगे बताया कि विनोबा का जीवन और उनकी रचनाएं जैसे ‘नारी महिमा’ और ‘गीताई’, आज भी समाज को मार्गदर्शन देती हैं।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम का संचालन विभागीय प्राध्यापक डॉ. अजय बहादुर सिंह ने किया। इस अवसर पर विभाग के शोधार्थी और तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

News – Vijay Chaudhary


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