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झारखंड शिक्षा विभाग का बड़ा कदम: ‘डहर 2.0’ पोर्टल से अब ऑनलाइन होगा शिशु पंजी सर्वे; ड्रॉप आउट बच्चों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

रांची/गुमला: झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) अब राज्य के 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के ‘स्कूल से बाहर’ (Out of School) और ‘पढ़ाई छोड़ चुके’ (Drop-out) बच्चों की पहचान करने के लिए अपनी वार्षिक शिशु पंजी सर्वे प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन करने जा रहा है। इस उद्देश्य से विभाग ने ‘डहर 2.0’ (DAHAR 2.0 – Digital Application For Holistic Action Plan and Review for Out of School Children) नामक मोबाइल और वेब-आधारित एप्लीकेशन तैयार किया है। इस डिजिटल पहल को अंतिम रूप देने के लिए गुरुवार, 18 सितंबर 2025 को विभाग के सचिव के निर्देश पर तीसरे दौर की राउंड टेबल बैठक संपन्न हुई।

सर्वे की समय-सीमा और पारदर्शिता

समग्र शिक्षा के आगामी बजट और वार्षिक कार्य योजना के निर्माण के लिए यह शिशु पंजी सर्वे इस वर्ष अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह से 16 दिसंबर, 2025 तक कराने का प्रस्ताव है।
  • अनिवार्यता: विभाग ने प्रत्येक सरकारी और गैर-सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों के लिए इस सर्वे को ‘डहर 2.0’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन करना अनिवार्य कर दिया है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बन सके।
  • परिणाम: पोर्टल में प्राप्त आंकड़ों के आधार पर स्कूल से बाहर रहे बच्चों की वास्तविक संख्या ज्ञात की जाएगी, जिसे वार्षिक कार्य योजना बनाने हेतु भारत सरकार को भेजा जाएगा।

ड्रॉप आउट बच्चों के लिए विशेष फोकस

प्रभाग प्रभारी श्रीमती बिनीता तिर्की ने बताया कि ‘डहर 2.0’ पोर्टल बच्चों के नामांकन और ड्रॉप आउट की सटीक जानकारी देगा। एक माह पूर्व से लगातार स्कूल से बाहर रहे बच्चे या कभी नामांकित न हुए बच्चे ‘आउट ऑफ स्कूल’ माने जाएंगे।
  • विशेष प्रशिक्षण: उन्होंने घोषणा की कि सात वर्ष से अधिक आयु के और लगातार तीन महीने या उससे अधिक समय से स्कूल छोड़ चुके बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत विशेष प्रशिक्षण/कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए आवश्यक राशि उपलब्ध कराने हेतु समग्र शिक्षा के आगामी बजट में भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
  • ट्रैकिंग: बच्चों के ड्रॉप आउट होने के कारणों का पता लगाया जाएगा और भविष्य में उन्हें ट्रैक करने के लिए पूरा पता लिया जाएगा।

जवाबदेही और विभागीय चेतावनी

श्रीमती तिर्की ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक सरकारी विद्यालय को शिशु पंजी के लिए गाँव/टोलों से टैग किया जाएगा, जिससे 3-18 आयु वर्ग के बच्चों का नामांकन संबंधी सटीक डेटा पोर्टल पर उपलब्ध हो सके। विभाग ने सभी शिक्षकों को सर्वे में भाग लेने का निर्देश दिया है और चेतावनी दी है कि सर्वे में लापरवाही बरतने वाले या सर्वे नहीं करने वाले शिक्षकों की सूची बनाकर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पोर्टल से ऐसे बच्चों की पहचान हो सकेगी जो नामांकित तो हैं, लेकिन उनका डेटा UDISE सिस्टम में अपलोड नहीं हुआ है।

सफलता की राह: पिछले वर्ष 90% बच्चों का पुनः नामांकन

विभाग के प्रयासों के संदर्भ में बताया गया कि वर्ष 2025-26 में कराए गए शिशु पंजी सर्वे में 59,094 बच्चों को ‘आउट ऑफ स्कूल/ड्रॉप आउट’ चिह्नित किया गया था। शिक्षा विभाग के निरंतर प्रयास से इनमें से 53,253 बच्चों को विद्यालय से पुनः जोड़ने में सफलता मिली, जो कुल लक्ष्य का 90.11% है। राउंड टेबल बैठक में झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक श्री शशि रंजन, प्रभाग प्रभारी श्रीमती बिनीता तिर्की, राज्य MIS समन्वयक श्री सचिन कुमार के साथ KPMG टीम के प्रतिनिधि, IT PMU के प्रतिनिधि और सिस्टम विश्लेषकों की टीम शामिल हुई। News Desk

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