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Sunday, March 8, 2026
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गुमला में सरना धर्म महासम्मेलन का शुभारंभ, आस्था और संस्कृति की गूंज से सराबोर हुआ शहर

गुमला: झारखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक सर्ना धर्म महासम्मेलन सह प्रार्थना सभा का शुभारंभ बुधवार शाम के.ओ. कॉलेज गुमला के सामने स्थित सर्ना झंडा पूजा स्थल में हुआ। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बीच यह आयोजन स्व. पंखराज कार्तिक उरांव की जयंती पर सर्ना प्रार्थना सभा, जिला समिति गुमला द्वारा आयोजित किया गया है। कार्यक्रम पूरी रात भक्ति और सांस्कृतिक माहौल में गुरुवार सुबह तक जारी रहेगा।

मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण मंत्री चमरा लिंडा ने कार्तिक उरांव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और सर्ना स्थल पर पारंपरिक ढंग से पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा —

सर्ना धर्म केवल पूजा का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी आत्मा और पहचान है। यह धरती, जल, जंगल और जीव के प्रति सम्मान सिखाता है। हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना होगा। सरकार सर्ना समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री ने आगे कहा कि कार्तिक उरांव ने आदिवासी समाज को शिक्षा और आत्मसम्मान की राह दिखाई, और उनके मार्ग पर चलकर ही समाज सशक्त बन सकता है।

अध्यक्ष छोट्या उरांव ने कहा —

“सर्ना धर्म की अलग पहचान हमारा संवैधानिक हक है। सर्ना झंडा हमारी पहचान है, इसे झुकने नहीं देंगे।”

उपाध्यक्ष आह्लाद उरांव ने कहा —

“हमारा धर्म प्रकृति आधारित है, जो समानता और पर्यावरण के सम्मान का संदेश देता है। सर्ना धर्म की मान्यता के लिए संघर्ष जारी रहेगा।”

कार्यक्रम में सर्ना मां की स्तुति भजन प्रतियोगिता हुई, जिसमें पारंपरिक कुड़ुख और मुंडारी गीतों की गूंज ने माहौल भक्ति से भर दिया। विजेताओं को ₹1,00,001, ₹51,000 और ₹26,000 के पुरस्कार दिए जाएंगे।

शहीद बुधु भगत, तेलंगा खड़िया, जतरा टाना भगत और कार्तिक उरांव पर आधारित नाटिकाओं की शानदार प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पूरे परिसर में “जोहार सरना धर्म! जोहार कार्तिक उरांव!” के नारे गूंजते रहे और गुमला आस्था, परंपरा और प्रकृति के रंग में रंग गया।

न्यूज़ – गणपत लाल चौरसिया


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