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Saturday, June 6, 2026
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पिट्स मॉडर्न में 165वीं रवींद्र जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई

न्यूज – कहकशां फारूकी 

“मोनो मोर मेघेर संगी” से गूंजा विद्यालय का सभागार

गोमिया : विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती शनिवार को पिट्स मॉडर्न स्कूल में कला, साहित्य और संस्कृति के संगम के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य, वक्तव्य और मंच संचालन के माध्यम से गुरुदेव को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के समन्वयकों द्वारा विद्यालय परिसर में स्थापित गुरुदेव की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण कर तथा दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। इसके पश्चात विद्यालय के सभागार में आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में समन्वयकगण, शिक्षकगण तथा कक्षा सप्तम एवं अष्टम के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत कक्षा अष्टम ‘अ’ की छात्रा सिद्धि के ओजस्वी वक्तव्य से हुई। “गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर” विषय पर बोलते हुए उसने कहा कि, “गुरुदेव ने ‘गीतांजलि’ के माध्यम से विश्व को भारतीय आत्मा से परिचित कराया। उनका मानना था कि शिक्षा प्रकृति की गोद में होनी चाहिए।”

इसके बाद कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से रवींद्र संगीत “मम् चित्ते नीति नृत्ये के जे नाचे” प्रस्तुत किया, जिससे पूरा सभागार संगीतमय हो उठा। वहीं कक्षा आठवीं के छात्र-छात्राओं ने गुरुदेव के प्रसिद्ध रवींद्र संगीत “मोनो मोर मेघेर संगी” पर मनमोहक सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। बंगाली वेशभूषा में सजे विद्यार्थियों की भाव-भंगिमा और लयबद्ध प्रस्तुति ने शांति निकेतन जैसा वातावरण निर्मित कर दिया।

पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन कक्षा आठवीं ‘ब’ की छात्रा प्रज्ञा सिंह ने कुशलतापूर्वक किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के सांस्कृतिक विभाग के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

विद्यालय के शिक्षक बृजमोहन लाल दास ने कहा कि, “टैगोर जी का गीत ‘मोन मोर मेघेर संगी’ हमें सिखाता है कि मनुष्य और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं। कक्षा आठवीं के बच्चों ने गीत, नृत्य और सिद्धि के वक्तव्य के माध्यम से गुरुदेव के दर्शन को जीवंत कर दिया। यही पिट्स मॉडर्न की शिक्षा का लक्ष्य है — कला के साथ ज्ञान।”

विद्यालय प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष अरिंदम दास गुप्ता ने कहा कि, “रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘गीतांजलि’ के माध्यम से भारतीय संस्कृति को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया। ‘मोन मोर मेघेर संगी’ जैसी रचनाएँ प्रकृति और मानव मन का अद्भुत सेतु हैं। आज विद्यार्थियों ने सिद्ध कर दिया कि गुरुदेव के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।”

विद्यालय समिति के एमसीएम अभिषेक बिश्वास ने कहा कि, “टैगोर केवल नोबेल पुरस्कार विजेता नहीं थे, बल्कि एक महान शिक्षाविद् भी थे। शांति निकेतन की स्थापना कर उन्होंने आनंदपूर्ण शिक्षा की अवधारणा को बढ़ावा दिया। आज के कार्यक्रम ने यह विश्वास और मजबूत किया कि नई पीढ़ी उनके आदर्शों को आगे बढ़ाएगी।”

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।


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