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Monday, June 8, 2026
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BJP का IQ लेवल देखिए…हिन्दू राष्ट्र बनाना है और अखंड भारत भी…यक्ष प्रश्न ये कि उसमें 60 करोड़ मुस्लिम होंगे, तो हिन्दू राष्ट्र कैसे बनेगा ?

-विष्णु राजगढ़िया-

पीपल के भूत की तरह यह बात भी हौवा है कि भाजपा लंबी योजना के साथ अपनी B टीम, C टीम वगैरह बनाती है। अपने ही खिलाफ आंदोलन कराती है। इनका IQ लेवल देखिए। हिन्दू राष्ट्र बनाना है और अखंड भारत भी। दोनों एक दूसरे के विपरीत। बांग्लादेशी घुसपैठियों को भगाने की ऐसी चुल्ल क्यों मची है, जब अखंड भारत बनाना ही है। उसमें 60 करोड़ मुस्लिम होंगे तो हिन्दू राष्ट्र कैसे बनेगा? इनका जवाब तो दूर, इन्हें सवाल भी समझ नहीं आएगा।

अब आइए 70 साल की गंदगी साफ करने का दावा। इसमें अटल-आडवाणी के 6.5 साल और खुद मोदी के 3 साल शामिल हैं। किसी भाजपा वाले को 70 का गणित समझ नहीं आता।

सबकी स्क्रिप्ट लिखकर सबकी लंबी प्लानिंग करनेवाले अपनी ही प्लानिंग नहीं कर पाते

मोदी की डिग्री। पहले खुद कई इंटरव्यू में कहा, मैंने कोई पढ़ाई नहीं की है। 2014 के चुनाव नामांकन में कुछ और लिख दिया। हल्ला हुआ, तो अमित शाह ने मोदी की एमए इन एंटायर पोलिटिकल साइंस की डिग्री दिखा दी। केजरीवाल ने RTI में मांगा, तो केस करा दिया। सबकी स्क्रिप्ट लिखकर सबकी लंबी प्लानिंग करने वाले अपनी ही प्लानिंग नहीं कर पाए।

कितनी लंबी योजना बनाते हैं ये लोग, इसे राज्यों में देखें। जिस राज्य में जीत की पूरी संभावना होती है, वहां भी चुनाव के पहले और बाद तक कोई ढंग का चेहरा नहीं उभार पाते। रिजल्ट के बाद भी CM खोजने में मशक्कत करनी पड़ती है। दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण राज्य में ले-देकर रेखा गुप्ता मिलती है। दूरदृष्टि वालों को तो दो-चार महीने पहले ही कोई ढंग का नेता खोज लेना था। भले ही घोषणा बाद में करते। यूपी में योगी ने कैसे CM पद लिया, सब जानते हैं।

झारखंड में CM-CM खेलते रहे

झारखंड बना तो प्रथम CM बाबूलाल मरांडी बने। डोमिसाइल विवाद में उन्हें हटाकर अर्जुन मुंडा को बना दिया। मरांडी की लोकप्रियता कायम रही, लेकिन सम्मान नहीं मिला, तो उन्होंने अलग पार्टी बना ली। इससे भाजपा को नुकसान हुआ। लोकप्रिय विधायक मधु कोड़ा को टिकट नहीं दी। वह निर्दलीय लड़कर विपक्षी खेमे से CM बन गए। अर्जुन मुंडा की लोकप्रियता के बावजूद उन्हें केंद्र में भेज दिया।

रघुवर दास भी लोकप्रिय CM रहे, लेकिन उन्हें ओड़िशा का गवर्नर बना दिया। अब वापस बुला लिया। बाबूलाल मरांडी अपनी अलग पार्टी के जरिये विपक्ष का स्पेस छीन रहे थे, अचानक उन्हें वापस भाजपा में लाकर प्रदेश की कमान दे दी। पूरी संवादहीनता और अराजकता की स्थिति इनकी दूरदृष्टि, दीर्घकालिक योजना और चरम बुद्धिमत्ता का हासिल है। अन्य राज्यों में भी चलें तो हैरतअंगेज उदाहरण मिलेंगे।

भारी विरोध के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान को बनाए रखना जरूरी क्यों?

इनका IQ चेक करना हो, तो यूजीसी सवर्ण नियम देख लें, जिससे कोर वोटर भड़क गया। NEET पेपरलीक और CBSE मामले भी खुद भाजपाई बच्चों की जिंदगी तबाह कर रहे हैं। कोई IQ वाला होता, तो फौरन मंत्री को हटाकर अफसरों को भी दिखने योग्य सजा देता।

दिखावा ही सही। NEET 2024 में इससे भी बड़ा पेपरलीक था। 2026 के पेपर लीक मामले में भारी विरोध के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान को बनाए रखकर समर्थकों को निराश करने वाले लोग कितनी दूर की सोच पाते होंगे? CBSE के अफसर को हटाए। दो-चार दिन उसे हिमाचल घूमने भेज देते। लेकिन नहीं, दूसरे ही दिन उससे भी अच्छी पोस्टिंग दे दी।

यह इतने बुद्धिमान हैं कि देश की राजधानी को ही दस साल केजरीवाल के हवाले कर दिया? जी-20 की अध्यक्षता के दौरान दिल्ली सरकार पर मोदी नहीं, केजरीवाल थे। देश भर में इठलाने वाले मोदी जी को देश की राजधानी में ही कसक का सामना करना पड़ा।

इतनी शानदार स्क्रिप्ट तो सलीम-जावेद भी नहीं लिख पाते

कोरोना काल में ऑनलाइन मीटिंग में मोदी जी को अपने ही द्वारा बनाए गए सीएम केजरीवाल की रोकटोक सहनी पड़ी। बीजेपी वालों ने उसी केजरीवाल से यह स्टेटमेंट दिलाया गया कि मोदी कायर और साइकोपैथ है। फिर अपने ही द्वारा खड़ी की गई आम आदमी पार्टी के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर जेल भेजना पड़ा। दुख तो मोदीजी को भी हुआ होगा। लेकिन लंबी प्लानिंग का मामला था। इसके बाद की स्क्रिप्ट तो और खतरनाक है।

केजरीवाल के खिलाफ मामले एक खास जज के पास भेजे गए। उस जज को पहले ही संघ के कार्यक्रमों में बुलाया गया। फिर इसकी खबर मीडिया में चलवा दी। उधर केजरीवाल से कह दिया कि जज बदलने की मांग करो। इधर जज से कह दिया कि केजरीवाल की बात मत सुनना। इतनी शानदार स्क्रिप्ट तो सलीम-जावेद भी न लिख पाए कभी।

असल खेल हिन्दू-मुस्लिम नरेटिव का है

एमए इन एंटायर पोलिटिकल साइंस का IQ लेवल भी ऐसा ही हौवा ही होता है। पीपल पेड़ के भूत जैसा। वहम है वहम। असल खेल हिन्दू-मुस्लिम नरेटिव का है। युवा आक्रोश को दिशा मिले, तो इनका IQ इतना भी तय नहीं कर पाएगा कि ट्रंप की तरह यूएस कैपिटल पर दंगे कराना है, या जनमत का सम्मान करना है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व सोशल एक्टिविस्ट हैं.
ये उनके अपने विचार हैं.)


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