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Monday, June 15, 2026
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ममता बनर्जी की बनाई TMC से निकलकर 20 सांसद नेशनलिस्ट (NCPI) हो जाएंगे! 

भारत के संसदीय इतिहास में पहली बार दो साल पहले चुनाव दफ़्तर में रजिस्टर हुई एक अज्ञात-सी पार्टी, जिसके पास न एक विधायक है न सांसद, यहां तक स्थानीय निकाय का कोई निर्वाचित सदस्य भी नहीं; अब देश के सत्ताधारी गठबंधन-NDA की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन जायेगी !

पूरे 20 सांसदों की पार्टी ! ममता बनर्जी की बनाई TMC से निकलकर ये सारे NCPI के नेशनलिस्ट हो गये! पार्टी के अध्यक्ष कोई उत्तिया कुंडू साहेब हैं! NCPI  बनाने वालों ने पार्टी का नाम भी सोच समझकर रखा गया होगा: ‘नेशनलिस्ट सिटिजेन्स पार्टी ऑफ इंडिया!’

टीएमसी के कथित बागी सांसदों ने लोकसभाध्यक्ष से मिलकर अपनी अर्जी लगा दी है कि उन्हें नयी पार्टी के संसदीय दल के तौर पर मान्यता देकर अलग सीटें आवंटित की जाये!

सुदीप बंदोपाध्याय, शताब्दी राय, काकोली घोष, युसूफ पठान और सायोनी घोष जैसे स्वनामधन्य सियासतदान अब ममता बनर्जी की बजाय कुंडू साहेब के नेतृत्व में देश, खासकर बंगाल की जनता की सेवा करेंगे ! उन्हें जरूर इसका ‘मेवा’ मिलेगा!

पीएम का सपना अब पूरा हो सकता है?

भाजपा और एनडीए सरकार के शीर्ष नेतृत्व, खासतौर पर प्रधानमंत्री मोदी ने तो पहले ही कह दिया था कि इस बार संसद से 131वां संविधान संशोधन (डिलिमिटेशन व महिला-आरक्षण आदि का विवादास्पद विधेयक) क्लियर नहीं हो सका.पर हमने आशा नहीं छोड़ी है. वह हमारा संकल्प है और उसे हम जरूर पूरा करेंगे!’

नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी रिकॉर्ड के अनुसार, 3 साल पहले 2023 में बंगाल के उत्तिया कुंडू और शेउली कुंडू नाम के कपल ने पार्टी की नींव रखी थी।

NCPI के डॉक्यूमेंट्स में उत्तिया कुंडू पार्टी के अध्यक्ष हैं। पत्नी शेउली का नाम कोषाध्यक्ष के रूप में दर्ज है। NCPI अध्यक्ष उत्तिया ने 13 मई को फेसबुक पर बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी के साथ अपनी फोटो शेयर करते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी थी।

हावड़ा में NCPI का ऑफिस है, जहां सोमवार को सुरक्षाबलों की तैनाती दिखी। ऑफिस के गेट पर उत्तिया ने खुद को बंगाली न्यूजपेपर का एडिटर और टीचर बताया है। उनकी पत्नी शेउली के नाम के नीचे कलकत्ता हाईकोर्ट की वकील लिखा है।

भाजपा की अब महाराष्ट्र पर नजर

देखिये, महाराष्ट्र में आगे क्या होता है. क्या ठिकाना, दक्षिण में भी कुछ हो जाय! सुना है, वहां भी कोशिश हो रही है! ‘लोकतंत्र’ बेचारा क्या करेगा जब किसी समाज में ‘लोक’ को ही ‘यंत्र’ में तब्दील किया जा रहा हो! लोक ‘यंत्रवत’ हो जायेगा तो समाज का बढ़ता अंधेरा कौन मिटायेगा? समाज में जिंदादिली कहां से आयेगी?

ऐसे दौर में समाज और लोक के बीच छाया अंधेरा महज कुछ जुगनुओं से नहीं खत्म होगा, अंधेरे में रास्ता दिखाने वाले विराट आकाशदीपों की जरूरत होगी !

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश की टिप्पणी


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