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Saturday, June 20, 2026
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पर्ची पर लिख कर बोलनेवाला करोड़ों का भाग्य विधाता बन बैठा है और प्रोपेगंडा शो का स्क्रिप्ट गोदी मीडिया के हवाले है…!

चड्ढा और चड्डी दोनों बिक गए। चड्डी गैंग की ताकत का अंदाज़ा सिर्फ इस बात से लगाइए कि बिना रजिस्टर्ड हुए उसके पास कितना पैसा और पावर है कि पिछले साल लाल किले से एक सफेद दाढ़ी वाला गिद्ध उसकी तारीफ कर रहा था। चड्ढा ने कहा था कि दुनिया में वह पैसा नहीं बना और न ही वह पार्टी बनी जो मुझे खरीद सके। लेकिन चुपचाप बिक गया। मैं चड्ढा नहीं हूं जो चड्डी बन जाऊंगी, घोष हमेशा घोष ही रहेगा। यही कहा था सयानी घोष ने।

‘चक्र’ बाबू नायडू भी अब बेअसर हो जाएंगे

क्या हुआ? चड्ढा भी बिक गए और घोष भी चड्डी बन गई। ईडी, सीबीआई और तड़ीपार का स्वभाव ही गन प्वाइंट का है। उससे डरकर लोग चड्डी में सुसु कर देते हैं। देखा कैसे नीलेश कुमार को ठिकाने लगा दिया? चक्र बाबू नायडू भी बेअसर हो गए। इस देश की जनता बहुत भोली है। उसे गिद्धों की प्रजाति पहचानने की कला नहीं है। गोधरा ट्रेन में आग लगवाने वाला गिद्ध, पुलवामा में सैनिकों को मरवाने वाला गिद्ध, हिंंदुओं का नेशनल हीरो कैसे बन गया? अपराध की दुनिया में हमेशा किसी घटना के पीछे के लाभार्थी को देखिए शॉर्टटर्म और लॉन्गटर्म लाभार्थी।

बड़े शातिर ढंग से किए जाते हैं राजनीति के अपराध 

जिस दिन आप लाभार्थी को पहचान लेंगे, अपराध छल-षड्यंत्र और हिंसा की स्क्रिप्ट लिखने वाला गिद्ध आपको स्वतः दिखाई देने लगेगा। इस देश की जनता सफेद शीशे के गिलास में रखे पानी में पड़े बड़े-बड़े कंकड़ और पत्थरों के टुकड़े तो देख लेती है, लेकिन माइक्रो जर्म्स नहीं देख पाती।

राजनीति के अपराध बड़े शातिर ढंग से किए जाते हैं, क्योंकि इस अपराध के पीछे जनता की इमोशनल भावनाओं को भड़काना और उनका वोट और समर्थन हासिल करना होता है। ये चंबल के डकैतों जैसा खुलेआम ऐलान करके कांड नहीं करते, ये राजनीति के अपराधी बाहर से सीधा सादा और सभ्य दिखाने की कोशिश करते हैं, और ये अंदर से चम्बल के डाकुओं से भी ज्यादा खतरनाक इरादे रखते हैं. इरादे जान भी गए तो आप क्या कर लेंगे?

दम तोड़ती लोकतांत्रिक संस्थाएं

आम जनता इनके बहकावे में आ जाती है, आम जनता गोदी मीडिया का प्रोपेगंडा शो देखती है, इस प्रोपेगंडा शो का स्क्रिप्ट गिद्ध के इशारे पर लिखा जाता है, जिसे आम जनता सुनती और देखती है, ब्रेन वॉश एक दिन में नहीं होता, इसे होने में सौ साल के अलावा गोधरा कांड से लेकर ये आखिरी का 12 साल भी बहुत महत्वपूर्ण है। ईडी, सीबीआई और तड़ीपार का गन प्वाइंट आम जनता की समझ से परे है. पर्ची पर लिख कर बोलने वाला अनपढ़, 140 करोड़ लोगों के भाग्य का विधाता बना हुआ है। तोड़फोड़ कर 360-400 पार की संख्या पूरी होने जा रही है.

बहुत जल्द संविधान का राम नाम सत्य हो जाएगा. तब देखते हैं कि गन प्वाइंट पर खड़े नेताओं के समर्थक अपने नेताओं की मजबूरी देख कर खाजपा के खिलाफ विद्रोह में खड़े हो पाते हैं या नहीं। बाहर से या अंदर से जुड़ कर गिद्ध को समर्थन देनेवाले नेता कभी भी आपको ये नहीं बताएंगे कि वे कैसे और किस लेवल पर गन प्वाइंट से डरे हुए हैं.

अफसोस है कि जिस वक्त गुलामी का इतिहास लिखा जा रहा है, आज भी देश की जनता, बुद्धि पर पर्दा डाल कर सो रही है। अच्छा लगा कि युवा छात्र कोटा में पेपर लीक के खिलाफ आक्रोश में दिखे, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है। छात्रों, आपका मुकाबला गिद्धों से है? लड़ाई बड़ी है, क्योंकि लोकतांत्रिक संस्थाएं खास कर मीडिया आपके साथ नहीं है। इसकी धार को पूरी तरह से कुंद कर दिया गया है.

-शर्मा अमरेंद्र


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