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Thursday, August 20, 2026
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बिना फूंके – चुनावी बिगुल फूंक दिया गया है, चुनावी शतरंज बिछ चुकी है, खिलाड़ी भी खेल के मैदान में हैं, पर इस खेल में विशेषता यह है की सभी खिलाड़ी जीत का दावा ठोक रहे हैं

न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

कोई कहता है जातिवाद हमारा नारा है, तो कोई कहता है बाटोगे तो काटोगे

कोई कह रहा है शाम अस्त झारखंड मस्त

कोई खुला खेल फर्रुखाबादी खेलना चाह रहा है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में हैं

गुमला जिला के गुमला – सिसई और बिशनपुर विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव का बिना फूके – चुनावी बिगुल फूंक दिया गया है चुनाव का बिगुल , चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, राष्ट्रीय दल भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय दल कांग्रेस,और झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित आदि विभिन्न दलो में भी चुनावी और राजनीतिक छटपटाहट दिनों दिन,बढ़ती ही जा रही है, सभी दल, एक दूसरे को पटखनी, देने के लिए विभिन्न आकार प्रकार के समीकरण तैयार किये जा रहे हैं, जिसमें जातिगत राजनीति भी होगी, वहीं केंद्र सरकार की भारतीय जनता पार्टी अपनी केंद्र सरकार की उपलब्धि सहित देश और राज्यों में विकास सहित विभिन्न विपक्षी राज्यों को केंद्र सरकार के द्वारा अनुदान देने और केंद्र सरकार के द्वारा केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार में चलने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की उपलब्धि और विकास की गिनती भी गिनाई जाएगी, वहीं कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा अपनी डफली अपनी राग छेड़ कर, मिले सुर – मेरा – तुम्हारा गाते हुए चुनाव मैदान में उतरेगी, सभी दालों और पार्टियों के प्रत्याशी अपनी अपनी जीतने का दवा ठोकती रहेगी, विभिन्न आकार प्रकार के समीकरण बनते बिगड़ते रहेंगे, फिलहाल अभी दिल्ली दूर है, फिर भी विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ता अपने विभिन्न आकार प्रकार के वाहनों पर सवार होकर, विभिन्न प्लेटफॉर्म (स्टेशनों ) पर उतरते और चढ़ते रहेंगे, इसी बीच और इसी क्रम में एक दूसरे पार्टी में अहुर और बहुर का, का खेल खुला खेल फर्रुखाबादी खेला जाएगा, एक दूसरे के पार्टी में आने जाने का सिलसिला भी जारी रहेगा, उक्त चुनाव में ऐसे ऐसे प्रत्याशी भी आएंगे जो अपने चालाकी और अपने हुनर से तरह-तरह के जादू और कर्तव्य दिखाएंगे, कितने के घर टूटेंगे, कितने के दिल टूटेंगे, और कोई शानदार दूल्हा बनकर घोड़ी में सवार हो जाएगा, यह तो नसीब नसीब की बात होगी , पर फिलहाल सभी पार्टीओ में सुराख़ (छेद ) अभी से ही दिखने लगे हैं, सुरक्षित कोई नहीं है, चाहे वह भारतीय जनता पार्टी हो, कांग्रेस हो, झारखंड मुक्ति मोर्चा हो, या अन्य अनेक पार्टी हो, सभी पार्टियों के अंदर दो खेमे में कार्यकर्ता बट चुके हैं, फलस्वरुप भीतर घात की संभावनाएं प्रबल हो चुकी है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है, झारखंड में भी बटोगे तो कटोगे का नारा बुलंद होगा, इसमें कोई किंतु परंतु भी नहीं है, वही जातीय तोड़फोड़ का एजेंडा भी बेखौफ चलेगा वैसे भी झारखंड में चुनाव के वक्त यह कहावत कॉफी फेमस हो चुका है और चरितार्थ हो चुका है, की *शाम अस्त झारखंड मस्त का भी असर चलेगा और जोरदार चलेगा चाहे कितना भी पाबंदी और जोर क्यों ना लगे, झारखंड की राजधानी रांची से लेकर राज्य के विभिन्न सूदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक में यह जादू सिर चढ़कर (चलेगा.) और बोलेगा, और हंड्रेड परसेंट चलेगा , क्योंकि किसी में भी यह दम नहीं हैं जो इसे रोक दे और टोक दे, यह तो पावर पावर की बात है, जोहार, जय झारखंड


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