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Wednesday, September 2, 2026
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पशु जन्म नियंत्रण एवं श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक

गुमला न्यूज ब्यूरो – गणपत लाल चौरसिया 

सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश एवं पशु जन्म नियंत्रण नियमावली, 2023 के अनुरूप समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश

गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में आज उनके कार्यालय कक्ष में पशु जन्म नियंत्रण, श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम, रेबीज नियंत्रण तथा पशु कल्याण से संबंधित विषयों की समीक्षा को लेकर विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में गुमला के पुलिस उपाधीक्षक, जिला पशुपालन पदाधिकारी, नगर परिषद, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि सहित संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों एवं पशु जन्म नियंत्रण नियमावली, 2023 के आलोक में जिले में पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, आवारा कुत्तों की आबादी के नियंत्रण, नसबंदी एवं एंटी रेबीज टीकाकरण, डॉग बाइट की घटनाओं की रोकथाम, पशु क्रूरता पर नियंत्रण तथा पशु कल्याण से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

उपायुक्त ने संबंधित विभागों एवं संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी ) के अनुरूप कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम के साथ-साथ पशुओं के प्रति मानवीय एवं संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। पशुओं के साथ क्रूरता किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में नगर परिषद एवं संबंधित स्थानीय निकायों को जिले में सघन पशु जन्म नियंत्रण अभियान चलाने, चिन्हित क्षेत्रों एवं हॉटस्पॉट में आवारा कुत्तों को मानवीय तरीके से पकड़कर नसबंदी, कृमिनाशक उपचार एवं एंटी रेबीज टीकाकरण सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। उपचार एवं टीकाकरण के बाद स्वस्थ कुत्तों को नियमानुसार उसी क्षेत्र में वापस छोड़ने तथा आक्रामक एवं बीमार कुत्तों के लिए निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप शेल्टर होम में रखने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।

उपायुक्त ने आक्रामक आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की उपलब्धता एवं आवश्यकता का आकलन करते हुए भूमि, क्षमता, आधारभूत संरचना, उपकरण एवं मानव संसाधन से संबंधित आवश्यकताओं को उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने हेतु निर्देश दिया गया। साथ ही, जिले में वार्डवार आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित फीडिंग जोन चिन्हित कर आवश्यक सूचना-पट्ट लगाने तथा नागरिकों एवं पशु प्रेमियों को निर्धारित स्थानों पर ही पशुओं को भोजन कराने के लिए जागरूक करने को कहा गया।

स्वास्थ्य विभाग को डॉग बाइट के मामलों में राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के प्रावधानों के अनुरूप एंटी रेबीज वैक्सीन एवं आवश्यकतानुसार रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों एवं चिकित्सकों को आवश्यक प्रोटोकॉल के संबंध में प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया। डॉग बाइट से संबंधित मामलों का समुचित अभिलेखीकरण एवं डाटा रिपोर्टिंग करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि डॉग बाइट की घटना होने पर नागरिकों को तत्काल प्राथमिक उपचार एवं स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लेने के संबंध में जागरूक किया जाए। काटने वाले कुत्ते की, जहां संभव हो, निर्धारित अवधि तक निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा संबंधित मामले की सूचना स्थानीय निकाय एवं संबंधित विभाग को देने की व्यवस्था विकसित की जाए।

पालतू पशुओं के संबंध में उपायुक्त ने अनिवार्य पंजीकरण एवं वार्षिक एंटी रेबीज टीकाकरण को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। पालतू कुत्तों के मालिकों को पशु नियंत्रण, टीकाकरण एवं सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित निर्धारित नियमों के पालन के लिए जागरूक करने को कहा गया।

पशु क्रूरता से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए पुलिस विभाग एवं संबंधित पदाधिकारियों को प्राप्त शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। बैठक में भारतीय न्याय संहिता सहित पशु क्रूरता से संबंधित लागू कानूनी प्रावधानों के अनुपालन तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर भी चर्चा की गई।

उपायुक्त ने संबंधित विभागों को जिले में पशु जन्म नियंत्रण एवं रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी के लिए नोडल समन्वय एवं निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। साथ ही एबीसी केंद्रों एवं शेल्टर होम निर्माण हेतु निर्देश दिया गया।

बैठक के दौरान अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा करते हुए कार्यक्रम के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों के निराकरण पर भी चर्चा की गई। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को आगामी माह के लिए पशु जन्म नियंत्रण अभियान के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने तथा सघन जनजागरूकता अभियान की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि पशु जन्म नियंत्रण, रेबीज की रोकथाम, नागरिकों की सुरक्षा और पशु कल्याण इन सभी पहलुओं को साथ लेकर समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। संबंधित विभाग अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करते हुए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया एवं सक्षम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें।


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