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Saturday, September 19, 2026
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विनोद कुमार

जो शरणार्थी बन कर आये, वे ही मालिक बन गये!

आदिवासी इलाकों ने- चाहे वह झारखंड हो या अंडमान- बंगाली शरणार्थियों का कभी तिरस्कार नहीं किया. उन्हें बसने की जगह दी और जीवनयापन का आधार भी. लेकिन वे शरणार्थी ही अब उन इलाकों में अपना मालिकाना हक समझने लगे हैं और जिन्होंने शरण दी, उनको अपमानित करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते.

इस बात की जानकारी सभी को हैं कि 1971 में बांग्लादेश बना और वहां से बड़ी संख्या में हिंदू शरणार्थी भारत आये और उनके ही एक हिस्से को रांची के कांटा टोली क्षेत्र में बसाया गया. यह पूरा इलाका पहले मुंडा आदिवासियों का क्षेत्र था. बाद में उरांव भी आये और वे भी इस क्षेत्र में बसे. रांची के बहुत सारे मोहल्लों में मुंडा और उरांव आदिवासी एक साथ रहते हैं. और फिर उन्हीं के इलाके में बांग्लादेशी रिफ्यूजियों को बसाया गया.

चतुर सयाने होने की वजह से उनकी तरक्की भी तेजी से हुई और हालत यहां पहुंच गयी कि वे शरण देने वाले आदिवासियों को ही पिछड़ा और असभ्य कहने लगे और अपनी कालोनी में रहने वाले आदिवासी उन्हें नागवार लगने लगे. और ताजा तरीन घटना में उसी नजरिये की घृणित अभिव्यक्ति हुई है जब वे अपने बीच रहने वाली एक आदिवासी लड़की और उसके दोस्तों को सेक्स रैकेट चलाने वाली बताने लगे.

रही अंडमान की बात, तो इसी वर्ष जनवरी माह में वंदना टेटे और अश्विनी जी के साथ अंडमान गया था. वहां की सामाजिक संरचना को जानने के क्रम में पता चला कि वहां भी बांग्लादेशी रिफ्यूजी बड़ी संख्या में बसाये गये. वहां बसायी गयी आबादी में एक बड़ी आबादी बांग्लादेशी शरणार्थियों की ही है. हां, रांची में बसे लोग बांगलादेश के निर्माण के बाद यहां भाग कर आये थे और अंडमान में बसाये गये बाग्लादेशी शरणार्थी 1947 में भारत विभाजन के बाद आये थे. उन्हें कई राज्यों में बसाने की कोशिश हुई, लेकिन किसी राज्य की सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी तो उन्हें अंडमान के आदिवासी इलाकों में ही हजारों की संख्या में बसा दिया गया. अब वहां की अर्थव्यवस्था और नौकरियों पर उनका दबदबा है.

आदिवासी इलाकों की नियति यही रही है. इसका अंग्रेजों ने उपनिवेश बना कर शोषण तो किया ही, आजाद मुल्क के प्रभुवर्ग की नजर में भी यह उनका आंतरिक उपनिवेश ही है. एक दुखद करने वाला उदाहरण यह है कि देश के लिए यूरेनियम यह राज्य ही उपलब्ध कराता है और यूरेनियम को थोड़ा बहुत परिस्कृत कर और प्रोसेसिंग के लिए हैदराबाद ले जाया जाता है. वहां परिस्कृत यूरेनियम तो निकाल लिया जाता है, लेकिन कचरा लाकर वापस झारखंड में ही डंप किया जाता है, क्योंकि वे उसके कचड़े को अपने राज्य में रखने के लिए तैयार नहीं.

गोड्डा के पावर प्लांट को तो सभी देख रहे हैं. जमीन आदिवासियों की. श्रम उनका. बिजली बेच कर मुनाफा कमा रहा है कारपोरेट. झारखंड के हिस्से सिर्फ विरुपित धरती और धीरे-धीरे सर्वत्र फैलता कचरा.

आप पूछ सकते हैं कि बंगाली टोला की ताजा घटना से इन बातों का क्या रिश्ता? रिश्ता यह कि आदिवासी इलाके और वहां रहने वाले लोग सहिष्णु हैं और राजनीतिक नेतृत्व आत्महीन. यह एक भयंकर त्रासदी है.

सहिष्णुता एक उच्चस्तरीय मानवीय गुण है, लेकिन पूंजी केंद्रित व्यवस्था में उसका कोई मोल नहीं. और इसी सहिष्णुता का मोल आदिवासी चुका रहे हैं.

क्या झारखंड की अबुआ सरकार इन बातों की सुध लेगी?

Vishwanath Singh

आपको लगता है कि हेमंत जी आपकी सोच का सम्मान करेंगे आप कभी इतने दिनों में भी हेमंत जी का इसलिए समर्थन करते रहे हैं क्योंकि वह आदिवासी हैं और सेकुलर खेमे में रह रहे हैं लेकिन वह कितना झारखंडी है और झारखंडियों के लिए झारखंडियों के साथ कितना है यह भी आपको पता है. आपको यह भी पता होगा कि उनके इर्द-गिर्द जिनको हम लोग थिंक टैंक कहते हैं उसमें भी आदिवासी और झारखंडी तो दूर की बात झारखंड आंदोलन के दौरान उनके दिवंगत पिताजी आदरणीय दिशोम गुरु के साथ जो कदम से कदम चलने वाले झारखंडी थे, जिनके पास झारखंड बनाने का एक सपना था वैसे लोगों को भी वह अपने आसपास फटकने नहीं देते. हेमंत जी को आप अब कह सकते हैं पर वो कितना अबुआ है यह तो दिख रहा है. अभी तक का जितना कंट्रोवर्सी हुआ है उस कंट्रोवर्सी (पंकज मिश्रा) में आप देखिए कि हेमंत जी झारखंडियों के साथ कितना खड़े दिखे हैं. उनके सलाहकार उनके अगल-बगल जो नीति निर्धारण करने वाले लोग हैं वह सारे गैर झारखंडी है और गैर आदिवासियों को उन्होंने ज्यादा तरजीह दी है। गहराई से अगर आप समझने की कोशिश करेंगे तो आपको मिलेगा कि उनके इर्द-गिर्द आज भी संघ के समर्थक अंडरकवर लोग काम कर रहे हैं। कल्पना मुर्मू सोरेन जिसे लोग झारखंड का नया महिला नेतृत्व के रूप में देख रहे हैं. गांडेय विधानसभा से उन्होंने चुनाव जीता है. कोई बता सकता है कि कितने झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता के पास कल्पना मुर्मू सोरेन का नंबर है. उन्होंने भी एक खास व्यक्ति को रखा है और जो उन्हें संचालित करता है।


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