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Sunday, September 20, 2026
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 झारखंड जनाधिकार महासभा ने कहा- पांचवीं अनुसूची सूची क्षेत्र को 100% आदिवासी व दलित प्रतिनिधित्व के बगैर परिसीमन मंजूर नहीं होगा

रांची : रांची (बगईचा) में पांचवीं अनुसूची सूची क्षेत्र को 100 प्रतिशत आदिवासी आरक्षण और राज्य में पर्याप्त दलित प्रतिनिधित्व के बिना झारखंडियों को परिसीमन को लेकर झारखंड जनाधिकार महासभा व अन्य संगठनों द्वारा रविवार को परिसीमन व SIR पर राज्यस्तरीय चर्चा का आयोजित की गई. चर्चा में एक स्वर में विभिन्न जिलों से आये प्रतिनिधियों ने इसे किसी कीमत पर मंजूर नहीं करने की वकालत की।

बैठक में पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी, लातेहार, चतरा, गोड्डा, पूर्वी सिंहभूम, सिमडेगा, बोकारो, हजारीबाग, पलामू, गढ़वा आदि जिलों के सक्रिय साथियों ने अपने यहां के एसआईआर के अनुभव भी बताये। ASDD और लॉजिकल डिस्क्रिपेन्सी के तहत बड़ी संख्या में नोटिस आने से लोगों में बड़ी बेचैनी है। लोगों ने बताया कि SIR से आदिवासी-मूलवासी व्यापक रुप से परेशान हो रहे हैं।

SIR के जरिये से देश में नागरिकों के दो दर्जे बनाए जा रहे हैं

तार्किक विसंगति के लिए तरह-तरह के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। खतियान न होने के कारण दलित समाज सबसे अधिक परेशान हो रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि SIR के माध्यम से देश में नागरिकों के दो दर्जे बनाए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा नाम आदिवासी, मूलवासी, दलित, अल्पसंख्यक, महिला और गरीबों के कट रहे हैं। समय सीमा में सबका दस्तावेज  जमा हो पाना संभव नहीं।

वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार परिसीमन के माध्यम से लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होगा तो आदिवासी समाज और दक्षिण के राज्यों को घाटा होगा।

झारखंड में पलायन, अधिक मृत्यु दर, जनसंख्या नियंत्रण का प्रयोग एवं भारी बाहरी आबादी के बसने के कारण, परिसीमन में आदिवासी प्रतिनिधित्व में भारी कमी का खतरा है। अगर 50% बढ़ोतरी भी हो, तो भी गैरआदिवासी सांसदों की संख्या में व्यापक बढ़ोतरी होगी और आदिवासियों की कम बढ़ोतरी होगी।

वक्ताओं ने कहा कि कोई भी पार्टी अनारक्षित सीट से आदिवासी-दलितों को टिकट नहीं देती, भले ही क्षेत्र में उनकी बड़ी संख्या हो। अनारक्षित सीटों को पार्टियों ने सवर्णों और दबंग पिछड़ों के लिए आरक्षित सा कर दिया है। इस कारण आदिवासी और दलित आवाज़ें और ज्यादा कमजोर हो जाती हैं।

परिसीमन प्रक्रिया की विसंगतियों और खतरों को चिन्हित किया गया

परिसीमन पर आयी चर्चा में लगभग सभी साथियों ने परिसीमन प्रक्रिया की विसंगतियों और खतरों को चिन्हित किया। परिसीमन स्थगित करने का स्वर प्रबल था। 2022 में जम्मू-कश्मीर व 2023 में असम में हुआ विशेष परिसीमन मोदी सरकार के खतरनाक खेल का नमूना है।

इन दोनों राज्यों में परिसीमन में एक दूसरे से भौगोलिक तौर पर पूरा कटे, दूर दूर के क्षेत्रों को एक निर्वाचन क्षेत्र में डाल दिया गया। समुदायों व वोटरों को चिन्हित करके यह खेल खेला गया। निर्वाचन क्षेत्रों के भौगोलिक सीमांकन, नव-सीमांकन  में आदिवासियों, दलितों, मुसलमानों और ग्रामीण मतदाताओं के निर्णायक प्रभाव को कम करने और सवर्ण और शहरी मतदाताओं के प्रभाव को बढ़ाने के लिए परिसीमन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

आदिवासियों की सीटों में आनुपातिक वृद्धि के प्रस्ताव पर असहमति रही। उसे भी आदिवासियों की राजनीतिक प्रभाव के लिए प्रतिकूल माना गया। यह निर्णय लिया गया कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के सारे निर्वाचन क्षेत्रों आदिवासी आरक्षित संसदीय और विधानसभा क्षेत्र बनाया जाय।

 मतदाता सूची के हिसाब से वंचित मतदाताओं को सूची में जोड़ने की मांग

आदिवासियों की अच्छी संख्या वाले गैर-अनुसूचित क्षेत्रों को पांचवीं अनुसूची में डाला जाय। अच्छी दलित संख्या वाले क्षेत्रों को एससी रिजर्व निर्वाचन क्षेत्र बनाया जाय।

गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में भूमिहीन दलितों जैसे वंचित परिवारों को स्वयं-सत्यापित या ग्राम सभा सत्यापित वंशावली के आधार पर मतदाता सूची में दर्ज किये जाने की बात कही गई. एक राय यह भी थी कि गांव बैठक से बनी मतदाता सूची के हिसाब से वंचित मतदाताओं को सूची में जोड़ा जाय।

सारे वंचित मतदाताओं को संगठित कर नागरिकता आंदोलन बनाने के लिए इस मुद्दे पर लम्बी सक्रियता की जरूरत मानी गयी। इन दोनों मुद्दों के साथ MMDR जैसे मुद्दों को जोड़कर धरना प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम का निर्णय लिया।

कार्यक्रम में ये लोग थे उपस्थित

कार्यक्रम में आदिवासी अधिकार मंच, हासा और भाषा बचाओ संगठन, आदिवासी विमेंस नेटवर्क, ऐपवा, वन अधिकार मंच, UMF समेत कई संगठन के प्रतिनिधि भाग लिया. इनमें मुख्य रूप से अफजल अनीस, डेमका सोय, प्रफुल लिंडा, दिनेश मुर्मू, एलिना होरो, मंथन, सुखनाथ लोहरा, सेल्सटीन कुजूर, जेम्स हेरेंज, राजा भाई, बासिंग हस्सा, चंद्र प्रभात मुंडा, आकृति लकड़ा, अंबिका यादव, नंदिता, सिराज, अजीत कन्डेयांग, श्रीनिवास, टॉम कावला समेत कई वक्ताओं ने भाग लिया.

 


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