23.1 C
Ranchi
Tuesday, September 22, 2026
Advertisement
HomeLocal NewsGumlaआयुष को बढ़ावा देने के दावे, लेकिन गुमला के केंद्रों में डॉक्टर-कर्मियों...

आयुष को बढ़ावा देने के दावे, लेकिन गुमला के केंद्रों में डॉक्टर-कर्मियों की कमी से मरीज परेशान

गुमला न्यूज़ ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला: सरकार आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, लेकिन गुमला में इसकी जमीनी तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर पर संचालित आयुष केंद्रों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के कई पद लंबे समय से खाली हैं। इसका सीधा असर यहां पहुंचने वाले मरीजों पर पड़ रहा है और कई लोगों को समुचित इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

खासकर ग्रामीण इलाकों में आयुष चिकित्सा पर निर्भर लोगों के लिए यह कमी बड़ी समस्या बन रही है। दूरदराज के क्षेत्रों से लोग इलाज की उम्मीद में आयुष केंद्रों तक पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टर और जरूरी स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कई बार निराश होकर लौटना पड़ता है। स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन से रिक्त पदों को जल्द भरने और आयुष केंद्रों की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है।

गुमला के आयुष भवन में 13 पद, काम कर रहे सिर्फ 3

जिला आयुष चिकित्सा भवन, गुमला में कुल 13 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें महज तीन पदों पर ही कर्मी कार्यरत हैं। जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी का एक पद स्वीकृत है और उस पर अधिकारी कार्यरत हैं। वहीं आशुलिपिक सह टंकक का एक पद खाली है। लिपिक सह भंडारपाल के एक स्वीकृत पद पर कर्मी कार्यरत है।

सबसे अहम कमी चिकित्सा पदों पर दिखाई दे रही है। आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक चिकित्सा पदाधिकारी के एक-एक पद स्वीकृत हैं, लेकिन तीनों पद फिलहाल रिक्त बताए गए हैं। इसी तरह आयुर्वेदिक मिश्रक, यूनानी मिश्रक और होम्योपैथिक मिश्रक के एक-एक पद पर भी कोई कर्मी कार्यरत नहीं है।

अनुसेवक के चार स्वीकृत पदों में सिर्फ एक पद पर कर्मी कार्यरत है, जबकि तीन पद खाली हैं। ऐसे में चिकित्सकों के साथ-साथ मिश्रक और सहायक कर्मचारियों की कमी का असर आयुष सेवाओं के संचालन पर पड़ रहा है।

प्रखंडों में भी यही हाल

जिले के प्रखंडों में संचालित आयुष केंद्रों की स्थिति भी बहुत अलग नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, घाघरा में छह स्वीकृत पदों में दो, बिशुनपुर में तीन में एक और करौंदी में तीन में एक पद पर ही कर्मी कार्यरत हैं।

वहीं डुमरी में तीन स्वीकृत पदों में एक भी पद पर चिकित्सक-कर्मी कार्यरत नहीं है। चैनपुर में तीन में एक और टोटो में तीन स्वीकृत पदों में एक पद पर कर्मी कार्यरत बताया गया है।

गुमला के यूनानी चिकित्सा केंद्र में तीन पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से एक भी पद पर कर्मी कार्यरत नहीं है। इन केंद्रों में रिक्तियों के कारण मरीजों को इलाज से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विभाग को भेजी गई रिक्त पदों की जानकारी

जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निर्मल सिंह ने भी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी को लेकर विभाग को पत्र भेजे जाने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि आयुष भवन गुमला और जिले के विभिन्न प्रखंडों में आयुष केंद्रों पर खाली पदों को दूर करने के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है।

डॉ. निर्मल सिंह के अनुसार, जल्द ही इन समस्याओं को दूर करने की दिशा में काम किया जाएगा।

ग्रामीण मरीजों के लिए सबसे बड़ी चिंता

आयुष चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने वाले ग्रामीण मरीजों की संख्या को देखते हुए इन केंद्रों में पर्याप्त चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता जरूरी है। खासकर ऐसे ग्रामीण क्षेत्र, जहां लोगों की आय सीमित है और वे स्थानीय स्तर पर ही इलाज कराना चाहते हैं, वहां आयुष केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आयुष चिकित्सा को वास्तव में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था का मजबूत हिस्सा बनाना है, तो केवल योजनाएं और घोषणाएं पर्याप्त नहीं होंगी। खाली पदों को भरने के साथ केंद्रों में जरूरी मानव संसाधन और व्यवस्थाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।


Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading