23.1 C
Ranchi
Tuesday, September 22, 2026
Advertisement
HomeLocal NewsGumlaगुमला में धूमधाम से मना करमा पर्व, मांदर की थाप पर थिरके...

गुमला में धूमधाम से मना करमा पर्व, मांदर की थाप पर थिरके कदम; भाई-बहन के प्रेम और प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश

गुमला न्यूज़ ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला: प्रकृति, भाई-बहन के अटूट प्रेम, सुख-समृद्धि और सामुदायिक एकता का पर्व करमा पूरे गुमला जिले में पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों, विभिन्न संगठनों, छात्रावासों और अन्य संस्थाओं में करमा पूजा को लेकर विशेष आयोजन हुए। दुंदूरिया लोहरदगा रोड स्थित आदिवासी छात्रावास, जिला मुख्यालय के कृष्ण छात्रावास और डीएसपी रोड स्थित एसएस हाई स्कूल छात्रावास समेत कई जगहों पर लोगों ने पारंपरिक तरीके से करमा पूजा की।

ढोल-नगाड़े और मांदर की थाप पर जंगल से लाई गई करम डाली

करमा पर्व के दिन भाई-बहन सुबह से ही पूजा की तैयारियों में जुटे रहे। पारंपरिक ढोल, नगाड़े और मांदर की थाप के बीच लोग करम वृक्ष की डाली लाने के लिए आसपास के जंगलों की ओर गए। वहां करम वृक्ष की पूजा-अर्चना के बाद विधि-विधान से करम डाली लेकर लोग अपने-अपने पूजा स्थलों पर पहुंचे और उसे स्थापित किया।

इसके बाद पूजा स्थल पर करम डाली की विधिवत पूजा की गई। शाम को पुजारी और पाहन-बैगा ने पूजा-अर्चना कर भाई-बहन के प्रेम और बंधन से जुड़ी धर्मा-कर्मा की कथा सुनाई। इसके साथ ही करमा पूजा का मुख्य अनुष्ठान संपन्न हुआ।

रातभर लोकगीत और मांदर की थाप पर झूमते रहे लोग

करमा पर्व का उत्साह पूजा तक ही सीमित नहीं रहा। करम डाली स्थापित होने के बाद देर रात तक पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य का दौर चलता रहा। बड़े-बुजुर्गों से लेकर युवक-युवतियां और बच्चे तक पारंपरिक वेशभूषा में मांदर और ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते नजर आए।

करमा पर्व की खास बात यह रही कि इसमें अलग-अलग उम्र और वर्ग के लोग सामूहिक रूप से शामिल हुए। लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य के जरिए लोगों ने अपनी संस्कृति और परंपरा को जीवंत रखा।

करम डाली के विसर्जन के साथ होता है पर्व का समापन

करमा पूजा के अगले दिन सुबह करम डाली को नदी, तालाब या जलाशय में विसर्जित किया गया। इसके बाद ही करमा पर्व का समापन माना गया और व्रत रखने वाले लोगों ने अन्न-जल ग्रहण किया।

प्रकृति और संस्कृति से जुड़ा है करमा पर्व

करमा पूजा झारखंड की लोक संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इसमें करम राजा और करम वृक्ष की पूजा की जाती है। पर्व के जरिए अच्छे कर्म, प्रकृति के प्रति सम्मान, भाई-बहन के रिश्ते, सुख-समृद्धि और सामुदायिक एकता का संदेश दिया जाता है।

गुमला में करमा पर्व के आयोजनों ने एक बार फिर जल, जंगल और जमीन से जुड़ी झारखंड की सांस्कृतिक परंपरा को सामने रखा। पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया गया।


Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading