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Wednesday, July 1, 2026
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एक छोटा विमान गुमला लोहरदगा बॉर्डर पहाड़ी क्षेत्रों से गुजरते हुए एक पेड़ से टकराते हुए बाल बाल बचा, एक वीडियो वायरल की जा रही है

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत जिला बिशनपुर क्षेत्र में एक छोटा विमान पेड़ों से टकराने से बाल बाल बचा बताया जा रहा है कि उक्त छोटा विमान गुमला – लोहरदगा बॉर्डर क्षेत्र के पहाड़ी क्षेत्र से गुजरते वक्त जमीन से मात्र 30 फीट की ऊंचाई पर उड़ते समय एक पेड़ से टकराते टकराते बाल बाल बची ऐसा बताया जा रहा है और उससे संबंधित वीडियो वायरल की जा रही है l

राम भक्तों के लिए

पिस्तौल – जिंदा गोली बरामद – दो अलग-अलग मामलों में हुई कार्रवाई, एक आरोपी का रहा है आपराधिक इतिहास

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला पुलिस ने सोमवार को दो अलग-अलग मामलों में दो अपराधियों को रंगे हाथ हथियार के साथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में गुमला जेल भेज दिया हैं, गुमला पुलिस ने उनके पास से दो पिस्तौल और जिंदा गोलियां बरामद की है।

पहली घटना सदर थाना क्षेत्र के चेटर निवासी शिवा केरकेट्टा से संबंधित है। पुलिस ने उसे सोमवार दोपहर करीब 12 बजे गिरफ्तार कर जेल भेजा। उसके पास से एक पिस्तौल और तीन जिंदा गोलियां बरामद हुईं हैं, इस संबंध में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) सुरेश प्रसाद यादव ने बताया कि रविवार शाम करीब 6:15 बजे चेटर मैदान में क्रिकेट मैच चल रहा था। इस दौरान अंपायरिंग कर रहे विकास कॉलोनी निवासी बलजीत सिंह का शिवा केरकेट्टा से मामूली विवाद हो गया।

विवाद बढ़ने पर शिवा केरकेट्टा ने अपनी कमर से पिस्तौल निकालकर बलजीत सिंह पर तीन गोलियां चला दीं। हालांकि, गोली किसी को नहीं लगी। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने शिवा को पकड़ लिया और पिस्तौल छीनकर गुमला सदर थाने को सौंप दिया था।

दूसरी घटना में, गुमला पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गुमला बाईपास स्थित जोराग मोड़ के समक्ष एक व्यक्ति किसी आपराधिक घटना को अंजाम देने की फिराक में

घूम रहा है। उक्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर समय पर जोराग निवासी अशोक नायक को धर दबोचा।

तलाशी लेने पर अशोक नायक के पास से एक देसी कट्टा और एक जिंदा गोली बरामद हुई, बाद में पुलिस से विधिवत गिरफ्तारी करते हुए उसके होंडा ड्रीम बाइक जब्त कर उसे गुमला सदर थाना ले आई, और बरामद पिस्टल के संबंध में गहराई से पूछताछ करने पर अशोक नायक ने कोई सही जवाब और कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाया। एसडीपीओ सुरेश प्रसाद ने बताया कि गिरफ्तार अशोक नायक का पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है और वह एक हत्याकांड में भी शामिल था।

राम भक्तों के लिए

उपायुक्त ने विभिन्न तकनीकी विभागों की प्रगति की समीक्षा की, लंबित कार्यों को गुणवत्ता के साथ शीघ्र पूर्ण करने के दिए निर्देश

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में सोमवार को समाहरणालय सभागार में विभिन्न तकनीकी विभागों द्वारा संचालित विकास एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेष प्रमंडल, लघु सिंचाई विभाग, वाटरवेज, ग्रामीण कार्य विभाग, पथ निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्रमंडल, जिला परिषद, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (जल जीवन मिशन), भवन निर्माण विभाग, एनआरईपी तथा विद्युत विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की विभागवार समीक्षा की गई।

समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि लंबित निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण करना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

बैठक में स्वास्थ्य उपकेंद्रों के निर्माण से संबंधित भूमि विवाद के मामलों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु संबंधित अंचल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। साथ ही विभागों को लंबित भुगतानों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा गया।

उपायुक्त ने विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र एवं अन्य जनोपयोगी भवनों के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा संबंधित अभियंता नियमित रूप से कार्यस्थलों का निरीक्षण कर प्रगति की निगरानी करें।

विद्युत विभाग की समीक्षा के दौरान सुदूर क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों में विद्युत आपूर्ति से संबंधित लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया गया, ताकि बच्चों एवं लाभुकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें

उपायुक्त ने सभी तकनीकी विभागों को निर्माणाधीन योजनाओं का समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण सुनिश्चित करने तथा योजनाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, विभिन्न तकनीकी विभागों के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

जिला स्थापना सह अनुकंपा समिति की बैठक संपन्न

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में सोमवार को समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ में जिला स्थापना सह अनुकंपा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों से प्राप्त अनुकंपा नियुक्ति, प्रोन्नति, सेवा संपुष्टि, स्थानांतरण, पदस्थापन एवं अन्य प्रशासनिक मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में सामान्य अनुकंपा नियुक्ति के तहत प्राप्त दो प्रस्तावों पर विचार किया गया। इनमें से एक मामले को समिति द्वारा अनुमोदित किया गया, जबकि दूसरे मामले में आवश्यक जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बाद अगली बैठक में विचार करने का निर्णय लिया गया। उग्रवादी हिंसा के तहत प्राप्त एक प्रस्ताव पर विचारोपरांत नियमानुसार आवेदन अस्वीकृत किया गया।

एमएसीपीएस के अंतर्गत विभिन्न कार्यालयों से प्राप्त दो प्रोन्नति संबंधी प्रस्तावों पर भी समिति द्वारा विचार किया गया। इनमें से एक प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई, जबकि दूसरे प्रस्ताव पर अगली बैठक में पुनः विचार करने का निर्णय लिया गया।

बैठक के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा सरकारी माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक की सेवा संपुष्टि संबंधी प्रस्ताव, अनुमंडल पदाधिकारी बसिया द्वारा सेवा संपुष्टि तिथि संशोधन संबंधी प्रस्ताव, जिला पंचायत राज कार्यालय में पदस्थापन एवं अनुसेवक की प्रतिनियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव, प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों में प्रधान लिपिक, लिपिक एवं अनुसेवक के स्थानांतरण एवं पदस्थापन से जुड़े मामलों सहित विभिन्न प्रशासनिक प्रस्तावों पर विचार किया गया।

इसके अतिरिक्त विभिन्न कर्मियों द्वारा चिकित्सीय एवं व्यक्तिगत आधार पर समर्पित स्थानांतरण संबंधी अभ्यावेदनों पर भी समिति ने विचार किया।

बैठक में अन्य प्रशासनिक विषयों एवं विभागीय प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श करते हुए आवश्यक निर्णय लिए गए।

बैठक में उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, अपर समाहर्ता राजीव नीरज, अनुमंडल पदाधिकारी गुमला अखिलेश कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आरती कुमारी, एसीएमओ, जिला शिक्षा पदाधिकारी कविता खालको, जिला शिक्षा अधीक्षक नूर आलम खान, जिला सामान्य शाखा पदाधिकारी सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

मोदी दौर में वामपंथ की विरासत पर मर्सिया मत लिखो, हम अभी ज़िंदा हैं !

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– दीपंकर भट्टाचार्य (महासचिव, भाकपा माले )

असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने मोदी दौर में भाजपा की “अजेयता” के मिथक को फिर से मज़बूत करने की कोशिश की है. और इस मिथक के साथ हमें मुफ़्त में कई मर्सिये भी थमा दिए गए हैं – तमिलनाडु में द्रविड़ियन राजनीति के अंत का ऐलान, क्षेत्रीय दलों और इंडिया गठबंधन की कब्र खोदने की कवायद, और बेशक वामपंथ की पुरानी विरासत पर विदाई गीत.

भाजपा की यह “अजेयता” का मिथक 2024 में लगभग टूट ही गया था, हालांकि पूरी तरह नहीं. भाजपा अपने दम पर सिर्फ़ 240 सीटों तक सिमट गई थी, जो साधारण बहुमत से 33 सीट कम थीं. मोदी 3.0 की सरकार तभी बन सकी जब उसे जदयू और टीडीपी जैसे क्षेत्रीय दलों का सहारा मिला.

उस आंशिक झटके के बाद से यह हुकूमत चुनावों को सत्ता-विरोधी जन-असंतोष की लहर से बचाने और जादुई बहुमत गढ़ने की कला में और माहिर हो गई है. बेशर्म संस्थागत हेराफेरी और बेहद सोची-समझी सामाजिक इंजीनियरिंग के मेल से यह काम किया जा रहा है. महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली से लेकर बिहार, और अब हाल में असम तथा पश्चिम बंगाल तक, हमने चुनाव-दर-चुनाव इसी रणनीति को काम करते देखा है.

दिल्ली में इंडिया टीम की बैठक से पूर्व भाजपा ने शहर में ऐसे बैनर-पोस्टरों से पाट दिया है. सभी पोस्टरों के नीचे एक ही कैप्शन लिखा है-‘INDI एलायंस वाले जो आपस में लड़ रहे हैं,वो साथ क्या लड़ेंगे!’

‘संघ परिवार की आक्रामक रणनीति का असरदार जवाब तैयार किया जाना चाहिए’

2024 के चुनाव के बाद संघ परिवार ने जो आक्रामक रणनीति अपनाई है, उसका असरदार जवाब अभी तैयार किया जाना बाकी है. लेकिन विपक्ष के नाम लिखे जा रहे इन राजनीतिक मर्सियों का भी तर्क के साथ जवाब देना ज़रूरी है. मिसाल के तौर पर, क्षेत्रीय पार्टियों के लिए लिखे जा रहे जल्दबाज़ी भरे ख़याली मर्सियों को ही देख लीजिए.

यह सच है कि तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि वहाँ भाजपा या उसकी सहयोगी एआईएडीएमके ने उनकी जगह ले ली है. इसके उलट, तमिलनाडु में एक और क्षेत्रीय ताक़त विजय थलापति के टीवीके का उभार देखने को मिला है, जिसने अपने नाम के मुताबिक़ काफ़ी असरदार मौजूदगी दर्ज कराई है.

भाजपा आज भले ही 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में हो, लेकिन उनमें से 6 जगहों पर वह अब भी क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर ही हुकूमत चला रही है.

डीएमके और तृणमूल की हार को क्षेत्रीय पार्टियों के अंत की शुरुआत बताकर पेश किया जा रहा है, तो वहीं केरल में एलडीएफ की हार को भारत की राजनीति में वामपंथ के हाशिये पर चले जाने की निशानी बताकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है.

यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि 1977 से अब तक वामपंथ कम-से-कम तीन प्रमुख राज्यों- पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और केरल-में से किसी न किसी एक राज्य में सत्ता में रहा है.

‘एलडीएफ की हार कोई अनहोनी नतीजा नहीं’

पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे ने लगातार 34 साल (1977-2011), त्रिपुरा में 25 साल (1993-2018) और केरल में 10 साल (2016-2026) तक सरकार चलाई. लेकिन पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के उलट, केरल की राजनीति का मिज़ाज हमेशा अलग रहा है. वहाँ आम तौर पर हर पाँच साल पर सरकार बदलती रही है. 2021 का चुनाव इसका एक अपवाद था, जब एलडीएफ लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटा था.

इसलिए एलडीएफ की हार कोई अनहोनी नतीजा नहीं थी. ऐसे में सिर्फ़ इस वजह से कि आज किसी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं है, वामपंथ को “ग़ैर-ज़रूरी” या “पुराना पड़ चुका” घोषित करना सरासर बेतुकी बात है. कम्युनिस्ट वह पहली ग़ैर-कांग्रेसी राजनीतिक धारा थे जो किसी राज्य में सत्ता तक पहुँचे थे, लेकिन 1977 तक वामपंथ को मुख्य रूप से संघर्षों और जनआंदोलनों की एक विपक्षी ताक़त के रूप में ही देखा जाता था.

‘वाम मोर्चे को सबसे बड़ा झटका प. बंगाल में लगा’

इसलिए चुनावी नज़रिए से वामपंथ के लिए असली चिंता किसी राज्य की सत्ता हाथ से निकल जाने की नहीं, बल्कि उन राज्यों में उसके वोट प्रतिशत का गिरना है जहाँ कभी उसका मज़बूत जनाधार हुआ करता था. इस लिहाज़ से देखें तो सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे को सबसे बड़ा झटका पश्चिम बंगाल में लगा है, जहाँ उसका वोट प्रतिशत 2011 में 41 फ़ीसदी से कुछ ज़्यादा था, जो हालिया चुनावों में घटकर लगभग 5 फ़ीसदी रह गया है.

2011 में वाम मोर्चे की हार कोई हैरानी की बात नहीं थी. 34 साल तक लगातार सत्ता में रहने के बाद ऐसी थकान स्वाभाविक थी, ख़ासकर तब जब औद्योगीकरण के नाम पर ज़मीन अधिग्रहण की अलोकप्रिय मुहिम ने गाँवों में वामपंथ के सामाजिक आधार को गहरी चोट पहुँचाई थी और उसके साथ उसके रिश्तों में बड़ी दरार पैदा कर दी थी.

लेकिन 2016 में महज़ 10 फ़ीसदी वोट और 3 सीटों वाली भाजपा का 2026 तक उछलकर लगभग 46 फ़ीसदी वोट और 208 सीटों तक पहुँच जाना कहीं ज़्यादा गंभीर चिंता का विषय है. यह सिर्फ़ सीपीआई(एम) के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे वाम आंदोलन के सामने खड़ी एक बड़ी राजनीतिक चुनौती है.

‘चुनाव में धांधली तरक़्क़ीपसंद भारतीय के लिए चिंता का विषय होना चाहिए’

महज़ दस साल के भीतर भाजपा प. बंगाल की राजनीति के हाशिये से उठकर सत्ता के केंद्र तक पहुँच गई है. 2026 के चुनावों में चुनावी धाँधली और हेरफेर के जिन हथकंडों ने भाजपा की जीत को बेहिसाब बड़ा दिखाने में भूमिका निभाई, वे अपनी जगह हैं. लेकिन उससे भी ज़्यादा चिंता की बात पश्चिम बंगाल में संघ की ज़हरीली सांप्रदायिक नफ़रत, कट्टरता और समाज को बाँटने वाली सोच का गहराई तक फैल जाना है. यह सिर्फ़ वामपंथ के लिए नहीं, बल्कि हर समझदार और तरक़्क़ीपसंद भारतीय के लिए चिंता का विषय होना चाहिए.

संघ परिवार के लिए पश्चिम बंगाल लंबे समय से प्रतीक्षित एक “आख़िरी सरहद” था. बंगाल में भाजपा की जीत ने त्रिपुरा और मेघालय से लेकर असम और प. बंगाल तक, बांग्लादेश के चारों ओर भाजपा-शासित राज्यों की श्रृंखला पूरी कर दी है. और बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भाजपाई मुख्यमंत्रियों के साथ “अंग-बंग-कलिंग” का सर्किट भी पूरा हो गया है. इस हौसले से लबरेज़ होकर भाजपा अपने “एक देश, एक पार्टी” के अभियान को और तेज़ करेगी.

परिसीमन और “एक देश, एक चुनाव”- ये दोनों इरादतन भारत की चुनावी व्यवस्था को भाजपा के शिकंजे में कसने के लिए हैं. लेकिन अगर हम अर्थव्यवस्था, शासन या विदेश नीति की तरफ़ देखें, तो मोदी सरकार रसातल में पहुँच चुकी है. इसे अब इस हुकूमत के सबसे चाटुकार समर्थक भी नकार नहीं सकते.

बेशक पिछले सौ साल में कम्युनिस्ट भारत में आज़ादी, इंसाफ़ और जनता के हक़ों की सबसे जीवंत, प्रतिबद्ध और लगातार उठने वाली आवाज़ों में से एक रहे हैं. आज पहले से कहीं ज़्यादा भारतीय जनतंत्र को देश के कम्युनिस्टों की दरकार है, जो इस वक़्त की माँग पर खरे उतरे और एक दूसरी आज़ादी की लड़ाई खड़ी करें. वामपंथ की वापसी व जनतंत्र की हिफ़ाज़त- ये दोनों अब एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.

राम भक्तों के लिए

BJP का IQ लेवल देखिए…हिन्दू राष्ट्र बनाना है और अखंड भारत भी…यक्ष प्रश्न ये कि उसमें 60 करोड़ मुस्लिम होंगे, तो हिन्दू राष्ट्र कैसे बनेगा ?

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Mohan Bhagwat+Narendra Modi pixKk Arora [mtrkk1@gmail.com]
-विष्णु राजगढ़िया-

पीपल के भूत की तरह यह बात भी हौवा है कि भाजपा लंबी योजना के साथ अपनी B टीम, C टीम वगैरह बनाती है। अपने ही खिलाफ आंदोलन कराती है। इनका IQ लेवल देखिए। हिन्दू राष्ट्र बनाना है और अखंड भारत भी। दोनों एक दूसरे के विपरीत। बांग्लादेशी घुसपैठियों को भगाने की ऐसी चुल्ल क्यों मची है, जब अखंड भारत बनाना ही है। उसमें 60 करोड़ मुस्लिम होंगे तो हिन्दू राष्ट्र कैसे बनेगा? इनका जवाब तो दूर, इन्हें सवाल भी समझ नहीं आएगा।

अब आइए 70 साल की गंदगी साफ करने का दावा। इसमें अटल-आडवाणी के 6.5 साल और खुद मोदी के 3 साल शामिल हैं। किसी भाजपा वाले को 70 का गणित समझ नहीं आता।

सबकी स्क्रिप्ट लिखकर सबकी लंबी प्लानिंग करनेवाले अपनी ही प्लानिंग नहीं कर पाते

मोदी की डिग्री। पहले खुद कई इंटरव्यू में कहा, मैंने कोई पढ़ाई नहीं की है। 2014 के चुनाव नामांकन में कुछ और लिख दिया। हल्ला हुआ, तो अमित शाह ने मोदी की एमए इन एंटायर पोलिटिकल साइंस की डिग्री दिखा दी। केजरीवाल ने RTI में मांगा, तो केस करा दिया। सबकी स्क्रिप्ट लिखकर सबकी लंबी प्लानिंग करने वाले अपनी ही प्लानिंग नहीं कर पाए।

कितनी लंबी योजना बनाते हैं ये लोग, इसे राज्यों में देखें। जिस राज्य में जीत की पूरी संभावना होती है, वहां भी चुनाव के पहले और बाद तक कोई ढंग का चेहरा नहीं उभार पाते। रिजल्ट के बाद भी CM खोजने में मशक्कत करनी पड़ती है। दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण राज्य में ले-देकर रेखा गुप्ता मिलती है। दूरदृष्टि वालों को तो दो-चार महीने पहले ही कोई ढंग का नेता खोज लेना था। भले ही घोषणा बाद में करते। यूपी में योगी ने कैसे CM पद लिया, सब जानते हैं।

झारखंड में CM-CM खेलते रहे

झारखंड बना तो प्रथम CM बाबूलाल मरांडी बने। डोमिसाइल विवाद में उन्हें हटाकर अर्जुन मुंडा को बना दिया। मरांडी की लोकप्रियता कायम रही, लेकिन सम्मान नहीं मिला, तो उन्होंने अलग पार्टी बना ली। इससे भाजपा को नुकसान हुआ। लोकप्रिय विधायक मधु कोड़ा को टिकट नहीं दी। वह निर्दलीय लड़कर विपक्षी खेमे से CM बन गए। अर्जुन मुंडा की लोकप्रियता के बावजूद उन्हें केंद्र में भेज दिया।

रघुवर दास भी लोकप्रिय CM रहे, लेकिन उन्हें ओड़िशा का गवर्नर बना दिया। अब वापस बुला लिया। बाबूलाल मरांडी अपनी अलग पार्टी के जरिये विपक्ष का स्पेस छीन रहे थे, अचानक उन्हें वापस भाजपा में लाकर प्रदेश की कमान दे दी। पूरी संवादहीनता और अराजकता की स्थिति इनकी दूरदृष्टि, दीर्घकालिक योजना और चरम बुद्धिमत्ता का हासिल है। अन्य राज्यों में भी चलें तो हैरतअंगेज उदाहरण मिलेंगे।

भारी विरोध के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान को बनाए रखना जरूरी क्यों?

इनका IQ चेक करना हो, तो यूजीसी सवर्ण नियम देख लें, जिससे कोर वोटर भड़क गया। NEET पेपरलीक और CBSE मामले भी खुद भाजपाई बच्चों की जिंदगी तबाह कर रहे हैं। कोई IQ वाला होता, तो फौरन मंत्री को हटाकर अफसरों को भी दिखने योग्य सजा देता।

दिखावा ही सही। NEET 2024 में इससे भी बड़ा पेपरलीक था। 2026 के पेपर लीक मामले में भारी विरोध के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान को बनाए रखकर समर्थकों को निराश करने वाले लोग कितनी दूर की सोच पाते होंगे? CBSE के अफसर को हटाए। दो-चार दिन उसे हिमाचल घूमने भेज देते। लेकिन नहीं, दूसरे ही दिन उससे भी अच्छी पोस्टिंग दे दी।

यह इतने बुद्धिमान हैं कि देश की राजधानी को ही दस साल केजरीवाल के हवाले कर दिया? जी-20 की अध्यक्षता के दौरान दिल्ली सरकार पर मोदी नहीं, केजरीवाल थे। देश भर में इठलाने वाले मोदी जी को देश की राजधानी में ही कसक का सामना करना पड़ा।

इतनी शानदार स्क्रिप्ट तो सलीम-जावेद भी नहीं लिख पाते

कोरोना काल में ऑनलाइन मीटिंग में मोदी जी को अपने ही द्वारा बनाए गए सीएम केजरीवाल की रोकटोक सहनी पड़ी। बीजेपी वालों ने उसी केजरीवाल से यह स्टेटमेंट दिलाया गया कि मोदी कायर और साइकोपैथ है। फिर अपने ही द्वारा खड़ी की गई आम आदमी पार्टी के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर जेल भेजना पड़ा। दुख तो मोदीजी को भी हुआ होगा। लेकिन लंबी प्लानिंग का मामला था। इसके बाद की स्क्रिप्ट तो और खतरनाक है।

केजरीवाल के खिलाफ मामले एक खास जज के पास भेजे गए। उस जज को पहले ही संघ के कार्यक्रमों में बुलाया गया। फिर इसकी खबर मीडिया में चलवा दी। उधर केजरीवाल से कह दिया कि जज बदलने की मांग करो। इधर जज से कह दिया कि केजरीवाल की बात मत सुनना। इतनी शानदार स्क्रिप्ट तो सलीम-जावेद भी न लिख पाए कभी।

असल खेल हिन्दू-मुस्लिम नरेटिव का है

एमए इन एंटायर पोलिटिकल साइंस का IQ लेवल भी ऐसा ही हौवा ही होता है। पीपल पेड़ के भूत जैसा। वहम है वहम। असल खेल हिन्दू-मुस्लिम नरेटिव का है। युवा आक्रोश को दिशा मिले, तो इनका IQ इतना भी तय नहीं कर पाएगा कि ट्रंप की तरह यूएस कैपिटल पर दंगे कराना है, या जनमत का सम्मान करना है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व सोशल एक्टिविस्ट हैं.
ये उनके अपने विचार हैं.)

राम भक्तों के लिए

क्या सिर्फ टैक्स देने वालों को मिले वोट का अधिकार?’ वायरल वीडियो ने छेड़ी नई बहस

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नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हाल ही में एक स्ट्रीट इंटरव्यू का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति ने दावा किया कि भारत में मतदान का अधिकार केवल उन लोगों को मिलना चाहिए जो टैक्स देते हैं। उसका तर्क था कि जब लोकतांत्रिक व्यवस्था का संचालन करदाताओं के पैसे से होता है, तो वोट देने का अधिकार भी उन्हीं लोगों तक सीमित होना चाहिए जो सरकारी राजस्व में योगदान करते हैं।

Shortfiles नामक प्लेटफॉर्म द्वारा साझा किए गए इस वीडियो को कुछ ही दिनों में लाखों लोगों ने देखा। वीडियो ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी। एक ओर कई लोगों ने इसे संविधान और लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ बताया, वहीं दूसरी ओर कुछ वेतनभोगी कर्मचारियों, उद्यमियों और व्यवसायियों ने इस विचार के पीछे छिपी निराशा और असंतोष को समझने की बात कही।

यह विचार पूरी तरह नया नहीं है। राजनीतिक दर्शन में इसे “एपिस्टोक्रेसी” (Epistocracy) कहा जाता है, जिसमें यह तर्क दिया जाता है कि शासन से जुड़े निर्णयों में अधिक ज्ञान रखने वाले या व्यवस्था में अधिक योगदान देने वाले लोगों को ज्यादा राजनीतिक शक्ति मिलनी चाहिए। दुनिया के कई देशों में समय-समय पर इस तरह की बहसें उठती रही हैं।

भारत के संदर्भ में यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि देश की कुल आबादी लगभग 140 करोड़ है, जबकि आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम है। ऐसे में कुछ लोग सवाल उठाते हैं कि सरकारी खर्चों का बड़ा हिस्सा वहन करने वाले वर्ग की प्राथमिकताओं को नीतियों में कितना महत्व मिलता है।

हालांकि संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वभौमिक मताधिकार भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिलाओं में से एक है। यदि मतदान का अधिकार आय या कर भुगतान से जोड़ दिया जाए, तो समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं।

फिर भी, इस वायरल वीडियो ने एक ऐसे मुद्दे को सामने ला दिया है जिस पर देश के एक वर्ग में लंबे समय से असंतोष देखने को मिलता रहा है। चाहे लोग इस सुझाव से सहमत हों या असहमत, लेकिन यह स्पष्ट है कि वीडियो ने करदाताओं, सरकारी नीतियों और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के बीच संबंधों पर एक नई सार्वजनिक चर्चा को जन्म दे दिया है।

राम भक्तों के लिए

Vodafone Idea ने लॉन्च किया Graduate Hiring Program 2026, फ्रंटलाइन सेल्स में युवाओं को मिलेगा करियर बनाने का मौका

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नई दिल्ली: टेलीकॉम क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Vodafone Idea Manpower Services Limited (VIMSL) ने अपने Graduate Hiring Program (GHP) 2026 की घोषणा की है। इस कार्यक्रम के तहत कंपनी ऊर्जावान, महत्वाकांक्षी और करियर उन्मुख युवाओं को फ्रंटलाइन सेल्स के क्षेत्र में अवसर प्रदान करेगी।

भर्ती प्रक्रिया पश्चिम बंगाल, कोलकाता, असम, नॉर्थ बंगाल रीजन और सिक्किम के लिए आयोजित की जा रही है। चयनित उम्मीदवारों को Graduate Sales Trainee के पद पर नियुक्त किया जाएगा। कंपनी द्वारा इस पद के लिए 3.8 लाख रुपये वार्षिक (CTC) पैकेज की पेशकश की जा रही है।

Vodafone Idea के अनुसार, चयनित उम्मीदवारों को एक वर्ष के संरचित प्रशिक्षण एवं विकास कार्यक्रम से गुजरना होगा। कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उन्हें Territory Sales Executive (TSE) के पद पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

कंपनी ने बताया कि प्रतिभागियों को टेलीकॉम सेल्स का व्यावहारिक अनुभव, समर्पित Buddy, Guide और Mentor का सहयोग तथा तेजी से करियर विकास के अवसर प्रदान किए जाएंगे। साथ ही उन्हें देश की अग्रणी टेलीकॉम ब्रांड्स में से एक के साथ काम करने का मौका भी मिलेगा।

इस भर्ती अभियान के लिए वर्ष 2026 में स्नातक (Graduate) होने वाले छात्र आवेदन कर सकते हैं। किसी भी विषय के स्नातक उम्मीदवार पात्र होंगे, बशर्ते उनके ऊपर कोई सक्रिय बैकलॉग न हो। हालांकि, सेल्स एवं मार्केटिंग में बीबीए (BBA) करने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इच्छुक उम्मीदवार अपना बायोडाटा (CV) reetika.dutta1 @ vodafoneidea.com पर भेज सकते हैं।

राम भक्तों के लिए

भारत में इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा की नई शुरुआत, Green SM ने दिल्ली में लॉन्च किया ऑल-इलेक्ट्रिक ‘Green SM Limo’

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New Delhi – वियतनाम की अग्रणी कंपनी विंग्रुप (Vingroup) की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकाई ग्रीन एसएम (Green SM) ने भारतीय बाजार में कदम रखते हुए अपनी ऑल-इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवा ‘Green SM Limo’ लॉन्च कर दी है। कंपनी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नई दिल्ली से अपनी सेवाओं की शुरुआत की। इसके साथ ही भारत, वियतनाम, लाओस, इंडोनेशिया और फिलीपींस के बाद ग्रीन एसएम का पांचवां अंतरराष्ट्रीय बाजार बन गया है।

ग्रीन एसएम की यह नई सेवा सीधे तौर पर देश की प्रमुख राइड-हेलिंग कंपनियों ओला और उबर को चुनौती देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। कंपनी अपनी टैक्सी सेवा में VinFast Limo Green नामक सात-सीटर इलेक्ट्रिक एसयूवी का उपयोग करेगी, जिसे विशेष रूप से यात्री परिवहन के लिए विकसित किया गया है।

यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वाहनों में पीने का पानी और वेट टिश्यू जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं सुरक्षा के लिए वाहनों में अंदर और बाहर कैमरे, एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम तथा ड्राइवर और यात्रियों दोनों के लिए इमरजेंसी सपोर्ट बटन लगाए गए हैं।

कंपनी के अनुसार, सभी ड्राइवरों को “ग्रीन ड्राइवर्स” कहा जाएगा। इन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन, सड़क सुरक्षा और बेहतर ग्राहक सेवा से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। यह सेवा कंपनी की “Ride 5 Star” प्रतिबद्धता के तहत शुरू की गई है, जिसमें वाहन की गुणवत्ता, सुरक्षा, पेशेवर व्यवहार और बेहतरीन ग्राहक अनुभव पर विशेष जोर दिया गया है।

ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनी ने लॉन्च ऑफर भी पेश किया है। 5 जून से 11 जून तक Green SM ऐप के माध्यम से बुक की गई सभी सवारी पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। हालांकि प्रति राइड अधिकतम छूट 250 रुपये तक सीमित रहेगी।

 

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विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर एनसीसी शिविर में जागरूकता अभियान, 500 से अधिक कैडेट्स को किया गया जागरूक

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला में 7 जून 2026 को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर गुमला जिला के सिसई प्रखंड स्थित बी.एन. जालान कॉलेज में आयोजित एनसीसी शिविर में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा कैडेट्स एवं विद्यार्थियों को सुरक्षित, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन के महत्व से अवगत कराना तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में उनकी भूमिका को सशक्त बनाना था। कार्यक्रम में 500 से अधिक एनसीसी कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुग्गी ने किया। उन्होंने उपस्थित कैडेट्स को खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ भोजन, संतुलित आहार, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की पहचान तथा उपभोक्ताओं के अधिकारों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में युवाओं की भुमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अपने संबोधन में गुग्गी ने फोर्टिफाइड फूड, ईट राइट इंडिया अभियान एवं “आज से थोड़ा कम तेल, चीनी और नमक” जैसी जनहितकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए स्वस्थ खान-पान की आदतों को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि बिना वैध एफएसएसएआई लाइसेंस, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, बैच नंबर एवं अन्य आवश्यक विवरण वाले खाद्य उत्पादों का निर्माण, भंडारण एवं विक्रय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर सिसई क्षेत्र के विभिन्न प्रतिष्ठानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर भी जागरूकता अभियान चलाया गया, जहां खाद्य कारोबारियों एवं आम नागरिकों को खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक किया गया।

यह कार्यक्रम नागरिक क्लब, पटना (बिहार) के सहयोग से आयोजित किया गया। नागरिक क्लब, पटना सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत संस्था है। संस्था के संस्थापक एवं सचिव तथा फूड सेफ्टी ट्रेनर डॉ. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि सुरक्षित भोजन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है तथा खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता एक स्वस्थ एवं सशक्त भारत के निर्माण की आधारशिला है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुग्गी, फूड सेफ्टी ट्रेनर डॉ. राकेश कुमार सिंह, रवि कुमार, संतोष पाठक, प्रियांशु कुमार, सूरज कुमार,सुधांशु कुमार, उदय कुमार खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम, ज्ञान सिटी एजुकेशनल ट्रस्ट, एनसीसी शिविर के पदाधिकारियों एवं नागरिक क्लब, पटना (बिहार) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम के अंत में सभी एनसीसी कैडेट्स एवं विद्यार्थियों ने सुरक्षित भोजन अपनाने, खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

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