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Thursday, July 2, 2026
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देश संविधान से चलेगा, बाबूलाल के फरमान से नहीं-शिल्पी नेहा तिर्की

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रांची : मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने हाल के दिनों में झारखंड में सरना, सनातन और डीलिस्टिंग जैसे मुद्दों को लेकर चल रही राजनीति पर भाजपा और उसके आनुषंगिक संगठन आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलता है, किसी दल या व्यक्ति विशेष की वैचारिक जिद और फरमान से नहीं।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की मूल आत्मा धर्मनिरपेक्षता है। संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी अंतरात्मा की आवाज के अनुसार किसी भी धर्म, पंथ और आस्था को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने का मौलिक अधिकार देता है। यही भारत की लोकतांत्रिक ताकत और विविधता की पहचान है।

‘नियमगिरि सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि संस्कृति और अस्तित्व का केंद्र’

मंत्री ने कहा कि आरएसएस और भाजपा द्वारा डीलिस्टिंग, सरना और ईसाई को लेकर जो राजनीतिक विमर्श खड़ा किया जा रहा है, उसके पीछे एक सुनियोजित राजनीतिक एजेंडा छिपा हुआ है। इनका उद्देश्य समाज को धार्मिक आधार पर बांटना, आदिवासी समुदायों को आपस में लड़ाना और सत्ता हासिल कर जल, जंगल और जमीन पर कॉरपोरेट कब्जे का रास्ता साफ करना है।

उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में इसका खतरनाक उदाहरण देखा जा चुका है। ओडिशा के नियमगिरि पहाड़ी में वेदांता की बॉक्साइट खनन परियोजना के खिलाफ डोंगरिया कोंध आदिवासियों ने वर्षों तक संघर्ष किया। आदिवासी समुदायों ने साफ कहा कि नियमगिरि केवल पहाड़ नहीं, बल्कि उनकी आस्था, संस्कृति और अस्तित्व का केंद्र है।

इसी तरह ओडिशा के सीजिमाली पहाड़ी क्षेत्र में भी खनन परियोजनाओं के खिलाफ स्थानीय आदिवासियों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। महिलाएं और ग्रामीण जमीन पर लेटकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्हें डर है कि खनन परियोजनाओं से जंगल, जलस्रोत, खेती और उनकी सांस्कृतिक पहचान समाप्त हो जाएगी।

मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी सरना-ईसाई करके सत्ता में काबिज हुए और आज उसका परिणाम हसदेव जंगल के रूप में सामने है। हसदेव अरण्य, जिसे मध्य भारत का फेफड़ा कहा जाता है, उसे अदानी को दे दिया गया वहां कोयला खदानों के विस्तार के नाम पर लाखों पेड़ों को काटा जा रहा है और आदिवासी समुदायों को विस्थापन, पलायन और अस्तित्व के संकट का सामना करना पड़ रहा है।

‘धर्म की राजनीति की आग में झारखंड को झोंकने की कोशिश बंद होनी चाहिए’

उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस को यह स्पष्ट समझ लेना चाहिए कि झारखंड की धरती नफरत और धार्मिक उन्माद की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी। झारखंड की पहचान उसकी आदिवासी-मूलवासी संस्कृति, भाईचारा, सामाजिक सौहार्द और संघर्ष की विरासत है।

शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि धर्म की राजनीति की आग में झारखंड को झोंकने की कोशिश बंद होनी चाहिए। राज्य की जनता को भाजपा और आरएसएस के विभाजनकारी एवं कॉरपोरेटपरस्त एजेंडे से सतर्क रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता जल, जंगल, जमीन और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट है और किसी भी कीमत पर अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं करेगी।

राम भक्तों के लिए

बिहार का कुख्यात प्रेस बिल, जिसके कारण जगन्नाथ मिश्र की कुर्सी गई, वर्तमान सत्ता के लिए सबक बन सकता है…!

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बिहार प्रेस बिल के खिलाफ आंदोलन की एक तस्वीर वरिष्ठ पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट अशोक वर्मा ने साझा की है, जिसमें वे स्वयं नजर आ रहे हैं. 
अशोक वर्मा

31 जुलाई 1982 को बिहार में जगन्नाथ मिश्र के शासनकाल में आजाद पत्रकारिता को कुचलने के मकसद से कुख्यात प्रेस बिल पारित हुआ था। लेकिन पत्रकारों के जुझारू प्रदर्शन-आंदोलन के परिणामस्वरूप काला प्रेस बिल तो वापस हुआ ही, डॉ जगन्नाथ मिश्र की कुर्सी भी चली गई थी। उस दौर में मीडिया में जेपी और वाम आंदोलनों से निकले आदर्शवादी युवाओं की फौज भरी हुई थी। इसलिए काले प्रेस बिल का बिहार सहित पूरे देश में तीव्र विरोध शुरू हो गया था.

दरअसल. 1982 में बिहार के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र मीडिया की आलोचनाओं से इतने बौखला गए थे कि प्रेस का मुंह बंद करने के उद्देश्य से विधानसभा से पारित करा कर एक बेहद ख़तरनाक काला कानून बना डाला था। उस जमाने में भी सत्ता के चाटुकार पत्रकार होते थे, पर संख्या में गिनती के ही थे।

वरिष्ठ पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट अशोक वर्मा ने पटना में प्रेस बिल के खिलाफ हुए मुखर आंदोलन की एक तस्वीर साझा की है. वे अपने दोस्तों के साथ एक ऐतिहासिक, अविस्मरणीय, दुर्लभ और गर्व का अहसास दिलाने वाली 38 साल पुरानी तसवीर शेयर किया है। श्री वर्मा ने कहा कि यह तसवीर मुझे आज ही पटना के मेरे पुराने मित्र और सीनियर फोटो जर्नलिस्ट राजीव कांत ने भेजी तो मैं सुखद आश्चर्य से भर उठा।

पोस्ट देख बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट दीपक कोचगवे जी ने तारीख़ बता दी। मौन जुलूस 1 अगस्त, 1982 को निकला था। इसके एक दिन पहले 31 जुलाई को बिहार विधानसभा में कुख्यात प्रेस बिल पारित हुआ था। दीपक जी भी जुलूस में शामिल थे। दीपक जी को बहुत धन्यवाद.

यह तसवीर प्रेस बिल के विरोध में पटना में हुए पत्रकारों के मौन जुलूस की है। जूलूस में सभी अखबारों के संपादकों सहित सैकड़ों की संख्या में मीडियाकर्मी और यहां तक कि अखबार वितरण से जुड़े हॉकर भी शामिल थे। जुलूस को राजभवन जाकर राज्यपाल को ज्ञापन देना था। मौन जुलूस बेली रोड होते हुए राजभवन की ओर बढ़ रहा था। पुलिस ने नया सचिवालय के पहले स्थित चौराहे की बैरिकेडिंग कर सड़क बंद कर दी थी।

वे बताते हैं कि सड़क पर बैरिकेडिंग देख जुलूस का नेतृत्व कर रहे सीनियर पत्रकारों के तो कदम ठिठक गए, पर हम युवा पत्रकार जोश और आक्रोश से भर उठे। मैं, राजीव रंजन नाग और अंचल सिन्हा दनदनाते हुए बैरिकेड तक पहुंच गए और पुलिस से बहस शुरू हो गई। इस तस्वीर में मैं पुलिस से बहस कर रहा हूं। जेपी आंदोलन में पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ने का अनुभव साथ था ही। हमलोग बैरिकेड तोड़ने पर उतारू हो गए।

पत्रकार संघर्ष समिति का आंदोलन और लाठी चार्ज

फिर क्या था, पुलिस ताबड़तोड़ लाठियां बरसाने लगी। एक तगड़ा लट्ठ मेरे सिर के पीछे लगा सिर फूट कर खून बहने लगा। हमें पीटता देख पत्रकार संघर्ष समिति के अध्यक्ष इंडियन नेशन के संपादक डीएन झा, पत्रकार यूनियन के नेता शिवेंद्र सिंह तथा अन्य सीनियर पत्रकारों ने विरोध किया तो पुलिस उन पर भी टूट पड़ी। सभी पत्रकारों को हिरासत में लेकर पटना कोतवाली थाना ले जाया गया।

लाठीचार्ज की घटना के बाद देश भर के पत्रकार आक्रोशित हो उठे थे। दिल्ली, जयपुर, मुंबई में पत्रकारों ने हेलमेट पहन कर विरोध प्रर्दशन किया। पटना लाठीचार्ज के कुछ ही दिनों बाद मैं अपने गृहनगर झुमरीतिलैया (कोडरमा) में प्रेस बिल के खिलाफ प्रर्दशन करते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। मेरे साथ दो पत्रकार साथी और तीन राजनीतिक कार्यकर्ता भी एक महीने जेल में रहे और सरकार द्वारा मुकदमा वापस लेने के बाद ही रिहा हुए।

क्या था बिहार प्रेस बिल ?

ठीक चार दशक पूर्व भारतीय मीडिया पर एक और सरकारी हमला हुआ था। तारीख थी 4 अगस्त। प्रेस को क्लीव बनाने की सुनियोजित साजिश थी। बिहार विधान मंडल (परिषद भी) ने प्रेस बिल पारित कर दिया था। कांग्रेसी मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र द्वारा उनके आलोचक-पत्रकारों को यह नायाब तोहफा था। इसके ठीक सात वर्षों पूर्व  (25 जून 1975) इंदिरा गांधी ने भी सेंरशिप थोप कर आपातकाल की घोषणा कर दी थी।

मगर आपातकाल की तुलना में बिहार प्रेस बिल अत्यंत चतुरायी से रचा गया था। इसके प्रावधानों के तहत यदि कोई खोंमचावाला भी अखबार के टुकड़े में चना लपेट रहा हो और उसमें सरकार विरोधी खबर छपी हो, तो वह फेरीवाला भी जेल भेजा जा सकता था। इतना जटिल तथा निकृष्ट था प्रेस बिल ! यहां याद दिला दें कि दोबारा सत्तासीन होने पर इंदिरा गांधी ने फिर वैसा ही प्रयोग करना चाहा था। उस समय मेनका-संजय गांधी और सास इंदिरा गांधी के बीच ठन गयी थी। उनके संबंधों के बीच उपजे हालात की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनी हुई थीं. इससे इंदिरा गांधी आहत थीं। लेकिन आपातकाल के परिणामस्वरूप उन्हें सबकुछ बर्दाश्त करना पड़ा था.

आज का मीडिया सत्ता की छत्रछाया में 

मौजूदा केंद्र सरकार की गोद में बैठे पत्तलकारों का एक बड़ा समूह (गोदी मीडिया) सत्तापक्ष का चंवर डुला रहा है. उसकी छत्रछाया में पल-बढ़ रहा है. सोशल मीडिया जरूर विरोध करने की हिम्मत जुटाता है और गाहे-बगाहे सरकार की कार्यशैली का विरोध करता है. नतीजतन कुछ पत्रकारों को जेल भेज कर चुप कराने की कोशिश की जाती है. वहीं खबरिया चैनलों के कुछ निर्भीक पत्रकारों को चैनल से निकलवा दिया जा रहा है या फिर चैनल ही खरीद लिया जा रहा है. ये सब एक दशक पूर्व से हो रहा है. अब देखना है कि ये सब कबतक और कैसे चलता रहेगा…?   

राम भक्तों के लिए

Reverse Migration Begins: Why Thousands of Indians Are Saying Goodbye to Britain

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For decades, Britain was considered a dream destination for Indians seeking quality education, better jobs, and a prosperous lifestyle. From the iconic Big Ben to the beautiful River Thames, thousands of Indians once aspired to build a future in the United Kingdom. However, that dream now appears to be fading rapidly as a growing number of Indian students and professionals are leaving Britain and returning to India in record numbers.

According to recent data released by the Office for National Statistics (ONS), nearly 51,000 Indian students and around 21,000 Indian workers left Britain permanently in 2025 and returned to India. In total, more than 72,000 Indians exited the UK within a single year, making Indians one of the largest groups contributing to Britain’s falling migration numbers. The report revealed that Britain’s net migration has dropped sharply to nearly 171,000, almost half compared to the previous year. After Indians, Chinese nationals formed the second-largest group leaving the country, followed by people from Ukraine, Pakistan, and Nigeria.

Experts believe several major factors are driving this reverse migration trend. One of the biggest concerns among Indian families is the changing social and cultural atmosphere in many British cities, especially London. Critics have increasingly used the term “Londonistan” to describe the growing influence of radical elements and rising social tensions in certain areas. Concerns over violent protests, extremist activities, grooming gang scandals, and aggressive religious demonstrations have created fear and insecurity among many peaceful immigrant communities, including Indians.

Reports of increasing hostility toward Hindus and people of Indian origin have also added to these concerns. Many Indian families, especially parents with daughters and young children, reportedly feel uncomfortable about their long-term safety and future in such an environment. As a result, many now believe returning to India offers greater social stability and security.

Britain’s struggling economy is another major reason behind this exodus. The country is currently battling high inflation, soaring rents, expensive electricity bills, and rising food prices. Following global energy crises and economic uncertainty, living costs in Britain have become extremely difficult even for working professionals. Indian students, many of whom take large education loans to study abroad, are finding it increasingly hard to survive despite doing part-time jobs.

At the same time, the British government has introduced stricter immigration policies for foreign students and workers. New visa regulations have made it more difficult for international students to extend work visas or bring family members to the UK. Many Indians now feel that Britain is no longer as welcoming toward immigrants as it once was.

Meanwhile, India’s rapidly growing economy, expanding startup ecosystem, and increasing job opportunities are encouraging many skilled professionals to return home. This growing trend of “reverse migration” reflects not only Britain’s challenges but also India’s emergence as a strong global economic power attracting its own talent back home.

राम भक्तों के लिए

Abhijeet Bhattacharya Sparks Controversy with Remarks on Gandhi and Partition

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Singer Abhijeet Bhattacharya has sparked a major political and historical debate with his recent controversial remarks about Mahatma Gandhi and the Partition of India. His comments, made during a public discussion, have triggered strong reactions across social media and political circles, with supporters calling his words “a bold truth” while critics describe them as highly provocative.

Abhijeet stated that Mahatma Gandhi could be referred to as the “Father of Pakistan,” arguing that Gandhi’s political decisions and policies indirectly contributed to the creation of Pakistan during the Partition in 1947. According to him, the repeated compromises and negotiations with Muhammad Ali Jinnah strengthened the demand for a separate Muslim nation, eventually leading to the division of the country. He suggested that history should be revisited with a fresh perspective rather than accepting long-established narratives without question.

While speaking about India’s identity, Abhijeet emphasized what he described as the timeless and eternal nature of Bharat. He said that India is not the creation of any one individual but an ancient civilization that has existed for thousands of years through Sanatan culture, traditions, spirituality, and the sacrifices of countless generations. According to him, India’s roots are deeply connected with Sanatan Dharma, making the nation much older than modern political structures and ideologies.

Abhijeet further argued that because India’s civilization predates modern history by centuries, the country should not be limited to the idea of having a single “Father of the Nation.” Instead, he said India represents a continuous civilizational journey shaped by saints, freedom fighters, philosophers, warriors, and ordinary citizens over thousands of years.

His remarks have now evolved beyond a simple political statement and have opened a wider debate on nationalism, history, and cultural identity. Supporters believe his comments encourage people to rethink historical interpretations and rediscover India’s civilizational heritage. Critics, however, argue that such statements risk oversimplifying complex historical events and may create unnecessary controversy around respected national figures.

The debate continues to gain momentum online, reflecting how questions about history, identity, and nationalism remain deeply emotional and influential in modern India.

राम भक्तों के लिए

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद Huawei का बड़ा दावा, 2031 तक बनाएगा सुपरफास्ट चिप्स

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अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े तकनीकी प्रतिबंधों के बावजूद चीनी टेक कंपनी Huawei अब खुद अत्याधुनिक चिप निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी ने हाल ही में दावा किया है कि उसने ऐसी नई तकनीक और उत्पादन प्रक्रिया विकसित कर ली है, जिसके जरिए वह वर्ष 2031 तक सुपरफास्ट और हाई-परफॉर्मेंस चिप्स तैयार करने में सक्षम हो जाएगी। माना जा रहा है कि ये चिप्स दुनिया की सबसे महंगी और एडवांस टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रोडक्ट्स को सीधी टक्कर दे सकती हैं।

दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए हुआवे पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं। इन प्रतिबंधों के कारण कंपनी को उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक, आधुनिक मशीनों और अमेरिकी कंपनियों से मिलने वाले जरूरी हार्डवेयर तक पहुंच में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना था कि इन पाबंदियों के बाद हुआवे की तकनीकी प्रगति धीमी पड़ जाएगी, लेकिन कंपनी ने इसके उलट आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

हुआवे अब अपने रिसर्च और डेवलपमेंट पर भारी निवेश कर रही है। कंपनी का लक्ष्य केवल स्मार्टफोन चिप्स बनाना ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और हाई-स्पीड नेटवर्किंग के लिए भी अत्याधुनिक प्रोसेसर तैयार करना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी नई निर्माण तकनीकों और घरेलू सप्लाई चेन के सहारे विदेशी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है।

तकनीकी जानकारों का कहना है कि यदि हुआवे अपने लक्ष्य में सफल होती है, तो वैश्विक चिप बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है, वहीं दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के लिए भी नई चुनौती खड़ी हो जाएगी।

राम भक्तों के लिए

पालकोट थाना क्षेत्र के बांगरू ग्राम में पलटी एक यात्री बस

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न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित पालकोट थाना क्षेत्र के बांगरू ग्राम में पलटी एक यात्री बस, पुलिस और स्थानीय युवाओं की तत्परता से बची कई लोगों की जानें
शुभम गुप्ता ने अपनी कार से घायलों को गुमला सदर अस्पताल, पहुंचा जिला प्रशासन ने की आम जनता से ‘नेक मददगार’ बनने की अपील

गुमला जिला अंतर्गत स्थित पालकोट में 25 मई, 2026: पालकोट थाना क्षेत्र के बांगरू ग्राम में सोमवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यात्रियों से भरी एक यात्री बस अचानक तेज रफ्तार के कारण अनियंत्रित होकर पलट गई। हालांकि, इस बड़ी दुर्घटना में पालकोट पुलिस की त्वरित कार्रवाई और स्थानीय युवाओं की निस्वार्थ सेवा के कारण घायलों को समय रहते गुमला सदर अस्पताल पहुंचाया जा सका, जिससे कई जानें बच गईं।

थाना प्रभारी तरुण कुमार की तत्परता से टला बड़ा संकट
घटना की सूचना मिलते ही पालकोट के थाना प्रभारी तरुण कुमार ने बिना एक पल की देरी किए त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्होंने अपने दल बल के साथ अपने थाने में उपलब्ध सभी वाहनों और के साथ तत्काल घटनास्थल की ओर कूच किया। मौके पर पहुंचकर थाना प्रभारी ने खुद आगे बढ़कर राहत और बचाव कार्य की कमान संभाली। बस में फंसे दुर्घटना पीड़ितों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और पुलिस वाहनों में ही बैठाकर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। इलाके में पुलिस की इस सक्रियता की काफी सराहना हो रही है।

स्थानीय युवाओं ने पेश की मानवता की मिसाल
इस दुर्घटना के दौरान शुरुआत में घटनास्थल पर मौजूद कुछ लोगों के मन में पुलिस और कानूनी कार्रवाई का डर था, जिसके कारण वे चाहकर भी आगे नहीं आ रहे थे। लेकिन इसी बीच कुछ स्थानीय युवाओं ने आगे आकर मानवता की उत्कृष्ट मिसाल पेश की।

शुभम गुप्ता ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी निजी कार में घायलों को बैठाया और उन्हें तुरंत अस्पताल तक पहुंचाया। राहत और बचाव कार्य में उज्ज्वल प्रसाद और मुकेश केसरी भी पूरी मुस्तैदी से घायलों की मदद करते देखे गए। इन युवाओं ने पुलिस के साथ मिलकर स्थिति को संभालने में पूरा सहयोग दिया।

इस दौरान उज्ज्वल प्रसाद ने थाना प्रभारी की तत्परता की तारीफ की और वहां मौजूद लोगों का डर दूर करते हुए उन्हें समझाया कि, “दुर्घटना किसी के साथ भी हो सकती है। यदि लोग डर के कारण आज घायलों की मदद नहीं करेंगे, तो कल किसी अपने को जरूरत पड़ने पर समय पर मेडिकल सुविधा मिलना मुश्किल हो जाएगा। जान बचाने में कभी पीछे न रहें।”

जान बचाएं, सम्मान पाएं: क्या है ‘गुड सैमेरिटन’ (नेक मददगार) नीति?
घटनास्थल पर कुछ लोगों की हिचकिचाहट को देखते हुए, प्रशासन ने आम जनता को ‘गुड सैमेरिटन’ (Good Samaritan) या ‘नेक मददगार’ नीति की याद दिलाई है। सरकार ने सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों को कानूनी पचड़ों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है:

सिर्फ अस्पताल पहुंचाना है आपका काम: एक मददगार के रूप में आपको केवल घायल व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाना है। आपसे जबरन कोई पूछताछ नहीं की जाएगी।

सम्मान और प्रशस्ति पत्र: आपके द्वारा पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने के बाद, पुलिस केवल दुर्घटना का सत्यापन करती है और अस्पताल मरीज का वेरिफिकेशन करता है। इसके बाद आपकी मदद के लिए आपको ‘प्रशस्ति पत्र’ प्रदान किया जाता है।

25,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि: यदि आपने किसी बड़े सड़क हादसे (Major Accident) में किसी की जान बचाई है, तो आपके इस उत्कृष्ट कार्य के लिए 25,000 रुपये तक की राशि का भुगतान संबंधित विभाग द्वारा किया जाएगा।

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान: उत्कृष्ट मदद करने वाले नागरिकों को भारत सरकार द्वारा भी सम्मानित किए जाने का स्पष्ट प्रावधान है।

अंतिम संदेश: दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा (‘गोल्डन ऑवर’) पीड़ित की जान बचाने के लिए सबसे अहम होता है। कानून अब आपकी सुरक्षा के लिए है, आपको परेशान करने के लिए नहीं। इसलिए डरें नहीं, शुभम, मुकेश और उज्ज्वल की तरह बेझिझक घायलों की मदद करें।

राम भक्तों के लिए

रीवा हादसे के विरोध में जैन समाज सड़कों पर, गोमिया में निकली विशाल मौन पदयात्रा

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News – Kahkashan Farooqi 

गोमिया_मध्य प्रदेश के रीवा में दो जैन आर्यिकाओं की सड़क हादसे में हुई दर्दनाक मौत के विरोध में बेरमो अनुमंडल क्षेत्र के सकल जैन समाज ने मंगलवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। गोमिया, साड़म, पेटरवार एवं जैनामोड़ के सैकड़ों महिला-पुरुषों ने एकजुट होकर मौन पदयात्रा एवं जुलूस निकाला और संतों की सुरक्षा को लेकर आवाज बुलंद की।

हाथों में तख्तियां और बैनर लिए जैन समाज के लोग शांतिपूर्ण ढंग से पदयात्रा करते हुए अनुमंडल कार्यालय पहुंचे, जहां अनुमंडल पदाधिकारी मुकेश मछुवा को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देशभर में जैन साधु-संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने एवं राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने की मांग की गई।

इस अवसर पर समाजसेवी संजय जैन एवं पेटरवार की पूर्व जिला परिषद सदस्या मंजू जैन ने कहा कि रीवा की घटना ने पूरे जैन समाज को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि देशभर में जैन समाज मौन जुलूस निकालकर अपनी पीड़ा और आक्रोश प्रकट कर रहा है। साधु-संतों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

मौन जुलूस में बड़ी संख्या में जैन समाज की महिलाएं, पुरुष एवं युवा शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और शांति का विशेष ध्यान रखा गया।

राम भक्तों के लिए

बकरीद को लेकर गोमिया में प्रशासन अलर्ट, डीसी-एसपी ने किया संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा

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News – Kahkashan Farooqi 

गोमिया। आगामी बकरीद पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने को लेकर बोकारो जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इसी कड़ी में बोकारो उपायुक्त अजय नाथ झा एवं पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा ने सोमवार को गोमिया प्रखंड के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों का संयुक्त दौरा किया।
इस दौरान अधिकारियों ने दलाल टोला, चटनिया बागी एवं इस्लाम टोला पहुंचकर स्थानीय लोगों से मुलाकात की तथा बकरीद पर्व को आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में मनाने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि सभी धर्मों के पर्व-त्योहार सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश देते हैं। ऐसे आयोजनों को मिल-जुलकर मनाने से राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।

उपायुक्त एवं एसपी ने कहा कि जिले में विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। उन्होंने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और प्रशासन का सहयोग करने की भी अपील की। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि पूरे बोकारो जिले में बकरीद का पर्व शांति एवं सौहार्द के साथ मनाया जाएगा।
मौके पर बेरमो अनुमंडल पदाधिकारी मुकेश मछुवा, सीडीपीओ रविंद्र कुमार सिंह, गोमिया प्रखंड विकास पदाधिकारी महादेव कुमार महतो, अंचल अधिकारी आफताब आलम, गोमिया थाना प्रभारी प्रफुल्ल कुमार महतो सहित प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

चेंम्बर ऑफ कॉमर्स की पांचवी बैठक में जनहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित कार्यालय में चेंम्बर ऑफ़ कॉमर्स की पांचवी मासिक बैठक सिद्धिविनायक स्थित चेंबर कार्यालय में चेंबर अध्यक्ष राजेश लोहानी की अध्यक्षता में आयोजित की गई।बैठक की शुरुआत सचिव प्रणय कुमार द्वारा पिछले बैठक में लिए गए प्रस्तावों की जानकारी दी गई जिस पर अध्यक्ष ने एक-एक कर सभी एक माह में किए गए कार्यों की जानकारी हाउस के सामने रखी गई, चेंबर के पंचम बैठक में मुख्य रूप से आम जनजीवन और खासकर व्यापारियों को हो रहे परेशानियों को देखते हुए माप तौल विभाग गुमला से मिलकर कैम्प लगवाने हेतु चर्चा की गई , साथ ही जिला मुख्यालय में नो एंट्री से हो रही जाम की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से मिलकर विंडो की मांग रखने पर चर्चा हुई,वैश्विक संकट के कारण डीजल से चलने वाली जेनरेटर एंव पानी पंप के लिए डीजल की व्यवस्था की मांग के लिए डीएसओ से बात करने पर सहमति बनी। साथ ही चेंबर का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर जिला मुख्यालय में आए दिन हो रही चोरी ,छीनतई, गांधी मैदान पार्क बन रहा नशा का अड्डा व व्यापारियों के घर में हुई चोरी से संबंधित अज्ञात चोरों पर अभिलंब करवाई करने को लेकर प्रस्ताव रखा गया।बैठक में अध्यक्ष राजेश लोहानी ने कहा कि व्यपारियों के विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए सबों को एकजुटता के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का आह्वान किया।बैठक की समाप्ति की घोषणा उपाध्यक्ष अभिजीत जायसवाल ने की। बैठक में मुख्य रूप से पूर्व अध्यक्ष पद्म साबू, दिनेश कुमार अग्रवाल,दामोदर कसेरा,सहित निवर्तमान अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, चेंबर उपाध्यक्ष अभिजीत जयसवाल व बबलू वर्मा, कोषाध्यक्ष अजय कुमार ,पीआरओ प्रतीक अग्रवाल व रितेश गुप्ता,सहित कार्यकरणी सदस्यों में मुन्नीलाल साहू,संजीव मालानी, गुरमीत सिंह, पंकज खंडेलवाल, आदित्य गुप्ता,मीडिया प्रभारी मनीष कुमार केशरी, उप समिति के सदस्य शेखर अग्रवाल,मोहम्मद शाहनवाज, कुणाल कुमार,पंकज सोनी, विनोद विश्वकर्मा बृज किशोर फोगला सहित कई अन्य शामिल थे।

राम भक्तों के लिए

जनजातीय गरिमा उत्सव – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान के तहत जनजागरूकता एवं योजनाओं के शत-प्रतिशत लाभ वितरण को लेकर विशेष पहल

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिले में जनजातीय एवं विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटी जीएस) तक सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से “जनजातीय गरिमा उत्सव – सबसे दूर, सबसे पहले” जनभागीदारी अभियान संचालित किया जा रहा है। यह अभियान जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की पहल है, जिसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों को सरकारी योजनाओं एवं अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें योजनाओं से शत-प्रतिशत लाभान्वित करना है।

यह अभियान 18 मई 2026 से 25 मई 2026 तक व्यापक सूचना, शिक्षा एवं संचार ( आईईसी ) गतिविधियों के माध्यम से चलाया जा रहा है। अभियान के तहत गुमला जिले के आदिवासी एवं पीबीटीजी बहुल गांवों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम, लाभ संतृप्ति शिविर, ग्राम सभाएं, नुक्कड़ नाटक, स्थानीय प्रदर्शनियां एवं सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इस संबंध में कार्यालय समेकित जनजाति विकास अभिकरण, गुमला द्वारा जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि अभियान अवधि के दौरान योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए तथा पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए।

अभियान का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदायों को सरकारी योजनाओं एवं उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, प्रत्येक पात्र परिवार तक आधार कार्ड, बैंक खाता, स्वास्थ्य कार्ड, गैस कनेक्शन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना तथा ग्राम स्तर पर जनभागीदारी को मजबूत बनाना है। इसके साथ ही आदिवासी युवाओं को “परिवर्तन नेता” के रूप में प्रशिक्षित कर नेतृत्व विकास एवं सामुदायिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की भी योजना है।

अभियान के तहत राष्ट्रीय स्तर पर माननीय केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री एवं संबंधित जनप्रतिनिधियों द्वारा वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया गया है। वहीं राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री द्वारा तथा जिला स्तर पर जिला प्रशासन के माध्यम से कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष ग्राम सभाएं, आईईसी वैन रैलियां एवं समुदाय आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

अभियान के दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मनरेगा, किसान क्रेडिट कार्ड, वनधन योजना, विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, सिकल सेल जांच, टीबी मुक्त भारत अभियान, मिशन इंद्रधनुष एवं अन्य योजनाओं से लाभुकों को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।

अभियान के लिए “अपना गांव, अपनी शान समग्र विकास का अभियान” तथा “जनजातीय गांव, देश की जान समग्र विकास, हमारी पहचान” जैसे नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

जिला प्रशासन एवं आईटीडीए गुमला द्वारा आमजन से अपील की गई है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा अधिक से अधिक पात्र लाभुकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने में सहयोग करें।

राम भक्तों के लिए
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