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Wednesday, November 4, 2026
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अंधभक्ति अब सिर्फ मूर्खता नहीं रही, यह एक राष्ट्रीय बीमारी बन चुकी है

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जो लोग इतिहास नहीं पढ़ते, सबूत नहीं देखते, सिर्फ नारे दोहराते हैं. कंगना को झांसी की रानी, गोडसे को देशभक्त, सावरकर को सिर्फ “वीर” और चौकीदार को भगवान बना देना, यह कोई आस्था नहीं, मानसिक दिवालियापन है. ये मानवता के भी दुश्मन हैं.

सबसे खतरनाक बात यह है कि ये लोग खुद को सबसे ज्यादा देशप्रेमी समझते हैं। जबकि असल में ये वही हैं जो इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं, अपराधियों को संत बनाते हैं और असहमति को दुश्मनी। भावनाओं से चलने वाली यह भीड़ तर्क की जगह नारे रखती है, और जब कोई सच सामने लाता है तो गाली-गलौज और “एंटी-नेशनल” का ठप्पा लगा देती है।

ऐसी आस्था देश को कमजोर करती है। समाज को बाँटती है। और सबसे बड़ी बात,ये लोग अपनी मूर्खता का प्रमाण खुद रोज देते रहते हैं, फिर भी खुद को ज्ञानी समझते हैं। आँखें बंद करके रोशनी को अँधेरा कहने वालों से बड़ा खतरा इस देश को और कोई नहीं।

अंध भक्तों का सबसे बड़ा गुण आँखें बंद करके भी सब कुछ साफ दिखता है। रोशनी तो बस डिस्टर्ब करती है। जब आस्था तर्क से ऊपर हो जाती है, तो फिर अपराधी भी संत और हत्यारा भी वीर बन जाता है। चौकीदार को भगवान बनाने वाले लोग सच में अँधेरे को रोशनी समझने लगे हैं। ऐसे लोगों से बहस नहीं, दया करें क्योंकि ये बीमार लोग हैं।

अंधभक्तों की दुनिया में तथ्य नहीं, भावनाएं शासन करती हैं, जहां तर्क नहीं, नारे चलते हैं

कुछ लोग इस संसार में आँखें खोलकर जीते हैं। वे सवाल पूछते हैं, सबूत माँगते हैं, इतिहास पढ़ते हैं और असुविधाजनक सच्चाइयों से भी नहीं भागते। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आँखें बंद करके जीते हैं।

इन्हें आम भाषा में “अंध भक्त” कहा जाता है। इनकी अपनी एक अलग ही दुनिया है एक ऐसी दुनिया जहाँ तथ्य नहीं, भावनाएं शासन करती हैं, जहां तर्क नहीं, नारे चलते हैं, और जहां इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार दोबारा लिखा जा सकता है।

इस दुनिया में कंगना रनौत झांसी की रानी हैं। वास्तविक झांसी की रानी ने तलवार उठाई थी, किले की रक्षा की थी और अंग्रेजों से लड़ी थी। लेकिन अंध भक्तों की दुनिया में तलवार की जगह माइक और ट्वीट पर्याप्त हैं।

फिल्मों में भूमिका निभाना और वास्तविक संघर्ष में उतरना एक ही चीज मानी जाती है। अगर कंगना किसी मुद्दे पर सत्ता के पक्ष में बोलती हैं, तो वे वीरांगना बन जाती हैं। अगर कोई उनकी आलोचना करता है, तो वह “विदेशी एजेंट” या “टूटी हुई मानसिकता” का शिकार कहलाता है।

इतिहास की किताबें चाहे कुछ भी कहें, इस दुनिया में नायिका वही है जो सही भावनाएं प्रदर्शित करे। वीरता अब कर्म से नहीं, घोषणा से नापी जाती है।

अब रिश्ते रक्त से नहीं, विचारधारा से बनते और बिगड़ते हैं

यहां रीना ठाकुर बहन हैं। बहन का दर्जा पाने के लिए खून का रिश्ता जरूरी नहीं। जरूरी है कि बात सही दिशा में हो। जो महिला सत्ता की प्रशंसा करती है, वह बहन है। जो सवाल करती है, वह “शहरी नक्सली”, “टुकड़े-टुकड़े गैंग” या “एंटी-नेशनल” बन जाती है।

रिश्ते यहां रक्त से नहीं, विचारधारा से बनते और बिगड़ते हैं। एक दिन कोई बहन हो सकती है, दूसरे दिन दुश्मन। इस व्यवस्था में स्त्रीत्व भी राजनीतिक उपकरण बन जाता है. जब जरूरत हो तो सम्मान, जब असहमति हो तो अपमान।

आसाराम बापू यहां भी बापू ही हैं। अदालतें फैसला सुनाएं, गवाहियां आएं, सबूत पेश हों सब बेकार। अंधभक्तों की दुनिया में संत कभी गिरते नहीं। गिरते हैं तो “षड्यंत्र” का शिकार होकर।

बापू की छवि इतनी पवित्र रखी जाती है कि वास्तविकता उसके सामने फीकी पड़ जाती है। आस्था की आड़ में सब कुछ माफ हो जाता है। अपराध अगर “हमारे” संत का हो, तो वह दुर्भाग्य है; अगर “उनके” किसी व्यक्ति का हो, तो वह साजिश है। नैतिकता यहां दोहरे मापदंड पर चलती है।

क्या है देशभक्ति का नया रूप…?

गोडसे इस दुनिया में देशभक्त है। जिस व्यक्ति को इतिहास ने हत्यारा कहा, उसे यहां वीर बना दिया गया है। हत्या को देशभक्ति का रूप दे दिया गया है। सवाल पूछने वाले को देशद्रोही करार दे दिया जाता है, और हत्यारे को नायक।

इस दुनिया में हिंसा अगर “सही” मकसद से की जाए, तो वह पाप नहीं रहती। इतिहास की किताबें पलटने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि भावनाएं पहले से तय कर चुकी होती हैं कि नायक कौन है और खलनायक कौन। गोडसे की मूर्तियां लगाना, उनकी जयंती मनाना और उनकी विचारधारा को सही ठहराना, यह सब देशभक्ति का नया रूप बन गया है।

सावरकर यहां वीर हैं। उनकी विचारधारा, उनके लेखन, उनके जीवन के विवाद सब एक तरफ रख दिए जाते हैं। सिर्फ “वीर” का तमगा पर्याप्त है। आलोचना को “विदेशी मानसिकता” या “सेकुलर षड्यंत्र” कहकर खारिज कर दिया जाता है।

इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार चुनने और छांटने का अधिकार इस दुनिया में पूरी तरह सुरक्षित है। जो बातें अनुकूल हों, उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है; जो बातें असुविधाजनक हों, उन्हें या तो छिपाया जाता है या “संदर्भ से काटकर” गलत बताया जाता है। सावरकर की वीरता अब बहस का विषय नहीं, आस्था का विषय बन चुकी है।

अब तो चौकीदार स्वयं ईश्वर बन गए हैं…!

और सबसे ऊपर चौकीदार भगवान हैं। चौकीदार का काम सुरक्षा करना होता है, लेकिन यहां चौकीदार स्वयं ईश्वर बन गए हैं। आलोचना करना पाप है, सवाल पूछना अधर्म। हर उपलब्धि का श्रेय उन्हीं को, हर कमी का दोष विपक्ष, पिछली सरकारों या “विदेशी ताकतों” को।

भगवान की तरह वे कभी गलत नहीं हो सकते। उनकी तस्वीरें घरों में लगाई जाती हैं, उनके नाम पर व्रत रखे जाते हैं, और उनकी आलोचना सुनकर आस्था आहत हो जाती है। चौकीदार अगर सो जाएं, तो भी भक्त कहते हैं कि वे “रणनीति” से सो रहे हैं। अगर कीमतें बढ़ें, तो “वैश्विक परिस्थितियाँ” दोषी हैं। अगर बेरोजगारी बढ़े, तो “युवाओं में धैर्य की कमी” है। 

यह दुनिया बहुत सुव्यवस्थित है। इसमें कोई संदेह नहीं होता, कोई उलझन नहीं होती। सब कुछ साफ-सुथरा और एकतरफा होता है। सवाल पूछने वाले बाहर हैं, जवाब देने वाले अंदर। तर्क की जगह नारे हैं, सबूत की जगह विश्वास है, और इतिहास की जगह भावनाएँ।

और टीवी चैनल…इस दुनिया के आधुनिक पुजारी हैं, जो भक्ति का प्रसार करते हैं और संदेह को पाप बताते हैं…!

सोशल मीडिया इस दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर है। वहां हर दिन नए मंत्र गूंजते हैं, नई दुश्मन की सूची बनती है, और नई वीरगाथाएं गढ़ी जाती हैं। टीवी चैनल इस दुनिया के पुजारी हैं, जो भक्ति का प्रसार करते हैं और संदेह को पाप बताते हैं।

वर्तमान राजनीति में यह दुनिया खूब फल-फूल रही है। हर मुद्दे पर एक ही जवाब तैयार रहता है जो हमारे पक्ष में है वह सही, जो खिलाफ है वह देशद्रोही। कंगना रानी हैं, रीना बहन हैं, आसाराम बापू हैं, गोडसे देशभक्त हैं, सावरकर वीर हैं, और चौकीदार भगवान हैं। बाकी सब कुछ तथ्य, इतिहास, तर्क, संदेह, विवेक, सब इस दुनिया के बाहर की चीजें हैं। अंदर सिर्फ आस्था है, और वह आस्था इतनी अंधी है कि रोशनी भी उसे दिखाई नहीं देती।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस दुनिया के निवासी खुद को सबसे जागरूक और देशभक्त मानते हैं। वे सोचते हैं कि बाकी सब अंधे हैं। जबकि हकीकत यह है कि उन्होंने अपनी आँखें खुद बंद कर रखी हैं और अब अँधेरे को ही रोशनी समझने लगे हैं। अंधभक्ति अब सिर्फ मूर्खता नहीं रही, यह एक राष्ट्रीय बीमारी बन चुकी है

-प्रियंका त्रिपाठी 

राम भक्तों के लिए

आईसीआईसीआई लाइफ गारंटीशुदा इंडेक्स्ड पेंशन प्लान हुआ लॉन्च, आजीवन गारंटीशुदा आय के साथ मिलेगा इंडेक्स से जुड़ी वृद्धि का लाभ

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न्यूज – मुस्कान

आजीवन गारंटीशुदा आय

निफ्टी 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स से जुड़ी परिवर्तनीय (वेरिएबल) आय, जो ग्राहकों को बाज़ार में भागीदारी का अवसर प्रदान करेगी और सेवानिवृत्ति के दौरान होने वाली आय में बढ़ोतरी की संभावना प्रदान करेगी
इसके तहत जॉइंट-लाइफ बेनिफिट और खरीद मूल्य की वापसी जैसे विकल्प मिलेगी, साथ ही सेवानिवृत्ति की आय के प्रबंधन के लिए अन्य लचीले विकल्प भी उपलब्ध होंगे
मुंबई, अक्टूबर, 2026: आईसीआईसीआई लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड ने आईसीआईसीआई लाइफ गारंटीशुदा इंडेक्स्ड पेंशन लॉन्च किया है। यह सेवानिवृत्ति आय से जुड़ा उत्पाद है, जो ग्राहकों को गारंटीशुदा एन्युटी और वेरिएबल एन्युटी का मिश्रण प्रदान करता है। इस सुविधा के तहत गारंटीशुदा आय वाला हिस्सा ग्राहकों को आय में स्थिरता प्रदान करता है, वहीं वेरिएबल वाला हिस्सा इंडेक्स से जुड़ी आय के जरिए उन्हें महंगाई से बचाने में मदद करता है।
इस उत्पाद की मुख्य खूबी यह है कि इसमें ग्राहक 60% से 100% तक का हिस्सा गारंटीशुदा एन्युटी के रूप में चुन सकते हैं। शेष हिस्सा निफ्टी 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स से जुड़ा होता है, जिससे ग्राहक बाज़ार में भागीदारी कर अपने सेवानिवृत्ति के वृद्धावस्था में आय बढ़ने की संभावना का लाभ उठा सकते हैं।
आईसीआईसीआई लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य उत्पाद अधिकारी, श्री विकास गुप्ता ने इस लॉन्च के संबंध में अपनी टिप्पणी में कहा, “लोगों की जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है, ऐसे में उन्हें लंबी सेवानिवृत्ति अवधि के लिए योजना बनाने की ज़रूरत है। बढ़ते खर्चों और बदलती वित्तीय प्राथमिकताओं को देखते हुए, ऐसे सेवानिवृत्ति समाधान होना बहुत जरूरी है, जो स्थिरता भी प्रदान करें और साथ ही बाज़ार से जुड़ी आय में वृद्धि की संभावना भी प्रदान करें।”
‘आईसीआईसीआई लाइफ गारंटीड इंडेक्स्ड पेंशन’ के साथ, ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार गारंटीशुदा आय का स्तर चुन सकते हैं और साथ ही बाज़ार के प्रदर्शन से लाभ उठाने का अवसर भी हासिल कर सकते हैं। इस लचीलेपन से उन्हें सही फैसले लेने और अधिक आत्मविश्वास तथा वित्तीय सुरक्षा के साथ अपने सेवानिवृत्ति के वर्षों की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
यह उत्पाद सिंगल-लाइफ (एक व्यक्ति के लिए) और जॉइंट-लाइफ (दो व्यक्तियों के लिए) का विकल्प प्रदान करता है, जिसमें खरीद मूल्य की वापसी भी शामिल है। यदि एन्युटी लेने वाले व्यक्ति (या अंतिम जीवित व्यक्ति) की दुर्भाग्यवश मृत्यु हो जाती है, तो नॉमिनी को कुल चुकाए गए प्रीमियम के बराबर मृत्यु लाभ वापस कर दिया जाएगा।
इस उत्पाद के तहत ग्राहकों की फौरन नकदी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ‘एन्युटी एडवांस’ फीचर जैसी अतिरिक्त सुविधाएँ भी मिलती हैं। इससे ग्राहकों को अगले पाँच साल तक मिलने वाली गारंटीशुदा एन्युटी का 99% तक हिस्सा एकमुश्त राशि के रूप में पहले ही प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी, जिससे ज़रूरत के समय तुरंत नकदी उपलब्ध होगी। ग्राहक अपनी वित्तीय ज़रूरतों के अनुसार, एन्युटी का भुगतान मासिक, त्रैमासिक, छमाही या वार्षिक आधार पर हासिल करना चुन सकते हैं।
इसके अलावा, इस उत्पाद के तहत ग्राहकों को मूल्य वर्द्धित सेवाएँ भी मिलेंगी, जिससे उन्हें स्वास्थ्य प्रबंधन और वेलनेस सेवाएँ हासिल करना आसान होगा। ये सेवाएँ सेवानिवृत्ति की तैयारी करने और उसके बाद के जीवन में उनकी व्यापक ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करती हैं।
आईसीआईसीआई लाइफ इंश्योरेंस, इस उत्पाद को लॉन्च कर अपने सेवानिवृत्ति समाधानों के पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है। इससे ग्राहकों को अपनी दीर्घकालिक वित्तीय ज़रूरतों की योजना बनाने के लिए अधिक विकल्प और लचीलापन मिलेगा। इस उत्पाद के लॉन्च से कंपनी की वित्तीय योजना को सरल बनाने के प्रति व्यापक प्रतिबद्धता रेखांकित होती है। इससे ग्राहक अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं, जो कंपनी के इस ब्रांड वादे के अनुरूप है कि वह अपने सभी हितधारकों के लिए ‘हर कल आसान’ बनाएगी।

राम भक्तों के लिए

त्रिपुरा सीमा पर देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए बीएसएफ जवान प्रबोध तिर्की, पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित डुमरी प्रखंड के बीएसएफ के शहीद जवान तिरंगे में लिपटे प्रबोध तिर्की पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव आकाशी पकरीटोली पहुंचते ही उनके पार्थिव शरीर को देखने के लिए आम नागरिकों का जन सैलाब उमड पाड़ा, देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हुए अपने कर्तव्य का निर्वहन करने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान प्रबोध तिर्की अपराधियों से लड़ते हुए शहीद हो गए और अब वह हमारे बीच नहीं रहे। बताया जाता है कि त्रिपुरा के मीनू बॉर्डर पर ड्यूटी के दौरान अपराधियों के हमले का जवाब देते हुए, गंभीर रूप से घायल हो गए, 42 वीं वाहिनी के जवान प्रबोध तिर्की ने इलाज के दौरान शहीद हो गए, उनके शहीद होने की खबर से झारखंड राज्य स्थित उनके पैतृक गांव, गुमला जिले के डुमरी प्रखंड स्थित अकाशी पकरीटोली ग्राम पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और जब उनका पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा, तो माहौल गमगीन हो गया , फिर भी वीर शाहिद प्रमोद तिर्की अमर रहे, भारत माता की जय आदि नारों से पूरा क्षेत्र गंजे मन हो उठा और अपने वीर शहीद जवान प्रबोध तिर्की को नम आंखों और भारी मन से ग्रामीणों ने अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

बताया गया कि प्रबोध तिर्की अपने ड्यूटी पर तैनात थे इसी क्रम में अपराधियों द्वारा एकाएक हुए हमले का जवाब देते हुए
और आराधियों का सामना, करते हुए गंभीर रूप से घायल हो गए, प्राप्त जानकारी के अनुसार, 43 वर्षीय बीएसएफ जवान प्रबोध तिर्की 21 अक्टूबर की रात त्रिपुरा के मीनू बॉर्डर पर ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान अपराधियों ने एकाएक उन पर हमला कर दिया उक्त विषम परिस्थितियों में भी वीर जवान प्रबोध तिर्की ने साहस का परिचय देते हुए हमलावरों का डटकर मुकाबला किया, लेकिन इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

घायल अवस्था में उन्हें इलाज के लिए अगरतला के एलियस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा था। हालांकि, जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हुए उन्होंने 23 अक्टूबर को अंतिम सांस ली। उनके शहीद होने से न केवल परिवार ने अपना प्रिय सदस्य खो दिया, बल्कि देश ने भी एक समर्पित वीर जवान को खो दिया।

*2007 से देश सेवा में समर्पित था उक्त जीवन*

प्रबोध तिर्की वर्ष 2007 से सीमा सुरक्षा बल में अपनी सेवाएं दे रहे थे। लंबे समय से देश की सुरक्षा में जुटे प्रबोध ने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। सीमाओं की निगरानी हो या चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ड्यूटी का निर्वहन, वर्दी पहनकर देश की सेवा करना ही उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य था।

उनका जीवन उन हजारों जवानों के समर्पण का प्रतीक है, जो अपने परिवार से दूर रहकर देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। जब आम नागरिक अपने घरों में सुरक्षित जीवन बिताते हैं, तब सीमा पर तैनात जवान कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। प्रबोध तिर्की का बलिदान इसी कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की याद दिलाता है।

*पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई*
बीएसएफ के इंस्पेक्टर सिनु राम ईचागुटू की देखरेख में उक्त वीर जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव अकाशी पकरीटोली लाया गया। जहाँ अपने गांव के वीर सपूत प्रबोध तिर्की को अंतिम बार देखने के लिए ग्रामीणों और शुभचिंतकों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर आंख नम थी और हर चेहरा गमगीन। जिस बेटे को परिवार और गांव ने गर्व के साथ देश सेवा के लिए विदा किया था, उसकी पार्थिव देह लौटने का दृश्य हर किसी को भावुक कर गया।

इस दौरान उनके साथी जवानों ने अपने वीर बीएसएफ जवान प्रबोध तिर्की सम्मान में हवाई फायरिंग कर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया और संगीन नीचे किये, और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। राष्ट्र की सुरक्षा में अपना जीवन समर्पित करने वाले जवान को दी गई यह अंतिम सलामी उनके अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देश के प्रति समर्पण का सम्मान थी।

*पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे को छोड़ गए पीछे*

प्रबोध तिर्की अपने पीछे पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे को छोड़ गए हैं। परिवार के लिए यह क्षति अपूरणीय है। जिस व्यक्ति के सहारे परिवार का भविष्य और बच्चों के सपने जुड़े थे, उसके अचानक चले जाने से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

एक ओर देश सेवा पर गर्व है, तो दूसरी ओर परिवार के बिछोह का असहनीय दर्द। एक सैनिक का परिवार भी उसके साथ देश सेवा के इस सफर में त्याग और प्रतीक्षा का जीवन जीता है। प्रबोध तिर्की के परिवार के लिए अब उनकी यादें ही सबसे बड़ी धरोहर हैं।

गांव ही नहीं, पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति

प्रबोध तिर्की का निधन गुमला जिले के लिए गहरा दुख लेकर आया है। उनका जीवन और देश के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्य, साहस और जिम्मेदारी का संदेश देता रहेगा। गांव का एक बेटा देश की सेवा करते हुए दुनिया से विदा हुआ है, लेकिन उसकी स्मृतियां लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।

उनकी शहादत के प्रसंग में यह याद रखना जरूरी है कि देश की रक्षा और सुरक्षा में लगे जवान केवल वर्दीधारी कर्मचारी नहीं होते, बल्कि वे अपने परिवारों की उम्मीदों, बच्चों के सपनों और समाज के विश्वास को भी अपने साथ लेकर चलते हैं। उनका योगदान अक्सर सीमाओं से बहुत दूर रहने वाले नागरिकों के जीवन में सुरक्षा और विश्वास का आधार बनता है।

प्रबोध तिर्की का जाना एक परिवार के लिए असहनीय दुख और पूरे क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है। देश सेवा के प्रति उनका समर्पण, कठिन परिस्थितियों में उनका साहस और कर्तव्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमेशा याद की जाएगी। अकाशी पकरीटोली की धरती अपने इस सपूत को खोने के दुख में जरूर डूबी है, लेकिन देश के लिए उनके योगदान पर सदैव गर्व भी करेगी।

वीर जवान प्रबोध तिर्की को भावभीनी श्रद्धांजलि। देश के प्रति आपका समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।

राम भक्तों के लिए

जन शिकायत निवारण दिवस आयोजित, दिव्यांगजनों को मिली बैटरी चालित ट्राई साइकिल

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

जनसमस्याओं के त्वरित निष्पादन का निर्देश, कई मामलों में मौके पर हुआ समाधान

गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में समाहरणालय परिसर में साप्ताहिक जन शिकायत निवारण दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने उपायुक्त से मुलाकात कर अपनी समस्याओं एवं मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। उपायुक्त ने सभी आवेदनों को गंभीरतापूर्वक सुनते हुए संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को मामलों की जांच कर नियमानुसार आवश्यक एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान जिला प्रशासन की प्राथमिकता है तथा प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जानी चाहिए। जन शिकायत निवारण दिवस के दौरान कई मामलों का मौके पर ही निष्पादन किया गया।

इस दौरान दिव्यांगजनों को आवागमन में होने वाली कठिनाइयों को देखते हुए उपायुक्त के निर्देश पर जिला समाज कल्याण विभाग द्वारा दो दिव्यांगजनों के बीच बैटरी चालित ट्राई साइकिल का वितरण किया गया। रायडीह प्रखंड के सिकोई गांव निवासी नितेश कुजूर, ने पैरों में लकवे की समस्या के कारण चलने-फिरने में असमर्थता व्यक्त करते हुए सरकारी योजना के तहत बैटरी चालित व्हीलचेयर अथवा रिक्शा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। वहीं, चैनपुर प्रखंड के किरतोरोली गांव निवासी फुलराम लोहरा ने 45 प्रतिशत शारीरिक दिव्यांगता के कारण दैनिक आवागमन में होने वाली कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए बैटरी चालित रिक्शा उपलब्ध कराने की मांग की थी। दोनों दिव्यांगजनों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उन्हें बैटरी चालित ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई गई, जिससे उनके आवागमन को सुगम बनाने में सहायता मिलेगी।

पालकोट निवासी शिल्पा नन्दा ने अपने आवेदन में बताया कि उनके पति पिछले दस वर्षों से लापता हैं और वह बेरोजगार हैं। उनकी दोनों पुत्रियों दिशाशा नन्दा एवं जिज्ञासा नन्दा को बाल कल्याण समिति के माध्यम से मिलने वाली स्पॉन्सरशिप योजना की राशि नवंबर 2025 के बाद से बंद हो गई है, जिससे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई एवं भरण-पोषण में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने योजना की राशि पुनः चालू कराने का अनुरोध किया। उपायुक्त ने संबंधित विभाग को मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

सिसई थाना क्षेत्र के पिलखी गांव निवासी सुको देवी, पति चीखू भगत, ने अपनी खतियानी जमीन से संबंधित ऑनलाइन लगान रसीद में त्रुटि सुधारने की मांग की। उन्होंने बताया कि मौजा पिलखी के खाता संख्या 72 की जमीन के ऑनलाइन अभिलेख में त्रुटिवश उन्हें ‘टाना भगत’ दर्ज कर निःशुल्क रसीद निर्गत की जा रही है, जबकि वह इस श्रेणी में नहीं आती हैं। उन्होंने ऑनलाइन अभिलेख से उक्त प्रविष्टि हटाकर पूर्व की भांति सही लगान रसीद निर्गत कराने का अनुरोध किया।

घाघरा थाना क्षेत्र के लोहरा टोली (गोपा) के ग्रामीणों ने मसरिया डैम के पूर्वी दिशा में स्थित नहर की क्षतिग्रस्त छोटी पुलिया की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराने की मांग उठाई। ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया पिछले दो वर्षों से क्षतिग्रस्त है, जिसके कारण खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा है और कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने समस्या का शीघ्र समाधान कराने का अनुरोध किया।

इसी क्रम में गुमला प्रखंड की कलिगा पंचायत के मुखिया एवं ग्रामीणों ने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पंचायत क्षेत्र में लगभग 25 से 30 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए समसेरा में सोमा खड़िया के तालाब तथा कुटासी में माझयस तालाब का गाद हटाकर जीर्णोद्धार कराना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त बेला में जितबहान खड़िया के डांड तथा कुटासी में केशावती देवी के खेत के समीप डीप बोरिंग निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति भूमि संरक्षण विभाग से दिलाने का अनुरोध किया गया, ताकि किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सके और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिले।

रायडीह थाना क्षेत्र के कटकायां गांव, मांझाटोली पोस्ट निवासी बिमला मिंज, पति स्वर्गीय ओसकर मिंज, ने भारतमाला सड़क परियोजना के तहत पैतृक संपत्ति के अधिग्रहण से संबंधित मुआवजा राशि के भुगतान में अनियमितता का आरोप लगाते हुए आवेदन दिया। उन्होंने बताया कि मौजा कटकायां की खाता संख्या 60 की जमीन के अधिग्रहण के एवज में प्राप्त कुल मुआवजा राशि में से उनके हिस्से के 29 लाख 20 हजार 459 रुपये किशोर मिंज एवं मनीष मिंज द्वारा हड़प लिए गए हैं। उन्होंने अपने हिस्से की राशि दिलाने के लिए प्रशासन से आवश्यक कार्रवाई करने की गुहार लगाई।

रायडीह निवासी विष्णु दास, पिता स्वर्गीय भारी दास, ने चीक बड़ाईक जाति प्रमाण पत्र निर्गत कराने में आ रही कठिनाइयों को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वजों का पारंपरिक पेशा कपड़ा बुनना रहा है तथा पूर्व में अंचल कार्यालय से चीक बड़ाईक जाति का प्रमाण पत्र निर्गत किया जाता रहा है। वर्तमान में खतियान में जाति दर्ज होने से संबंधित तकनीकी कारणों के चलते प्रमाण पत्र निर्गत कराने में परेशानी हो रही है। उन्होंने मामले की जांच कर नियमानुसार जाति प्रमाण पत्र निर्गत कराने का अनुरोध किया।

विशुनपुर प्रखंड की गुरदरी पंचायत अंतर्गत काठुपानी गांव के ग्राम प्रधान खल्को असुर, वार्ड सदस्य सोनम नगेसिया, मुखिया पुष्पा चौरांठ तथा मुण्डा समुदाय के ग्रामीणों ने समुदाय के सदस्यों को अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र निर्गत कराने की मांग रखी। उन्होंने बताया कि पंचायत क्षेत्र के मुण्डा समुदाय के लोगों को नियमानुसार जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने संबंधित मामले की जांच कर पात्र लाभुकों को जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया।

जन शिकायत निवारण दिवस के दौरान उपायुक्त ने सभी प्राप्त आवेदनों के निष्पादन के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जन शिकायत निवारण दिवस का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं को सुनना, उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना तथा सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना है। सभी संबंधित पदाधिकारी प्राप्त आवेदनों पर गंभीरतापूर्वक कार्रवाई करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी नागरिक को अपनी जायज समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

राम भक्तों के लिए

विश्व हिंदू परिषद की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला में विश्व हिंदू परिषद गुमला विभाग की बैठक गुमला जिला स्थित घाघरा प्रखंड मुख्यालय के दुर्गा मंदिर धर्मशाला में दोपहर 1 बजे शुरू हुई।

बैठक में मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय सह मंत्री अरुण नेटके, झारखंड प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्रा और बजरंग दल झारखंड प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो उपस्थित रहे।

अरुण नेटके जी ने कार्यकर्ता को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यकर्ता को काम करने के लिए समय निकालना चाहिए और किया गया काम का परिणाम समाज में दिखता है। विश्व हिंदू परिषद आज दुनिया का सबसे बड़ा संगठन है और देश के प्रत्येक जिले में विहिप के कार्यकर्ता मौजूद हैं। विहिप में पद से ज्यादा महत्वपूर्ण कार्यकर्ता और उसका काम है।

विश्व हिंदू परिषद का प्रवेश द्वार बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी है क्यों कि इन दोनों में युवा जुड़े हुए हैं। बजरंग दल का कार्यकर्ता बिल्कुल हनुमान जैसा होना चाहिए जिसमें बल और बुद्धि दोनों गुण होना चाहिए।

माताओं और बहनों को लव जिहाद से बचाने का काम दुर्गा वाहिनी कर रही है। आज प्रत्येक भारतीय नारी को सीता की तरह बनना है। कार्यकर्ताओं को संगठन और काम में विश्वास रखने की आवश्यकता है, मैं ज्यादा काम करता हूं दूसरा नहीं करता मन में ऐसी भावना नहीं रखना है।

एक कुशल कार्यकर्ता वही है जो सबकी बातों को सुनता है, समझता है। कुशल कार्यकर्ता सबको एक समान मान सम्मान देता है। कार्यकर्ताओं को अपने मन में अहंकार नहीं करना है और यश मिले तो ज्यादा ख़ुश भी नहीं होना है तभी आगे जा कर जीवन में सफल हो पाएगा।

झारखंड प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्रा जी ने कहा कि 22 नवम्बर से 6 दिसंबर तक हितचिंतक अभियान चलेगा। हितचिंतक अभियान प्रत्येक 3 साल बाद शुरू किया जाता है। इस अभियान मे कोई भी हिंदू घर नहीं छूटना है। हितचिंतक अभियान हिन्दुओं को संगठन से जोड़ता है और उनकी सुरक्षा के लिए हमेशा खड़ा है। यह अभियान शहर -गांव से लेकर प्रत्येक प्रखंड के गांव – गाँव में चलाया जाएगा और विश्व हिंदू परिषद के प्रत्येक कार्यकर्ता को यह कार्य पूर्ण समर्पण से करना है।
झारखंड प्रांत बजरंग दल संयोजक रंगनाथ महतो ने कहा कि बजरंग दल ने अलग से 2 लाख हितचिंतक और 100 विस्तारक बनाने का लक्ष्य लिया है और हरेक बजरंगी इस अभियान को सफल बनाएगा।

गुमला विभाग बैठक में अलका देवी, पूर्णिमा देवी, किरण चौधरी, शैल सिंह, पूनम सिंह, पायल कुमारी, दीक्षा कुमारी, कृष्ण शर्मा, आनंद जायसवाल, सुमित गुप्ता, बीरबल रौतिया, राधेश्याम प्रसाद, रामेश्वर सिंह, अशोक कांसी, कृष्णा कुमार, संजय साहू, रितेश साहू, सकलदीप नाथ सहदेव, अरविंद लोहरा, राकेश्वर लोहरा, भिकेश्वर नागमणि, मुकेश सिंह, शानू साहू, संतोष यादव, अमन राणा, लविश सोनी, केशव चंद्र साय, अमित कुमार, दुखन गोप, प्रमोद सिंह, धनी नगेसिया, बजरंग सहाय, बुधराम लोहरा, सुधराम लोहरा, मनीष बाबू सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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विकास योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं, समय-सीमा में काम पूरा करें : महादेव कुमार महतो

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News – Kahkashan Farooqi 

गोमिया में VB-G RAM G, आवास समेत विभिन्न योजनाओं की समीक्षा, अधिकारियों व कर्मियों को दिए सख्त निर्देश

गोमिया __प्रखंड में संचालित विकास योजनाओं को गति देने और लंबित कार्यों को समय पर पूरा कराने को लेकर गोमिया प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। प्रखंड विकास पदाधिकारी महादेव कुमार महतो की अध्यक्षता में हुई बैठक में VB-G RAM G, आवास योजना समेत विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान बीडीओ ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा के भीतर योजनाओं को पूरा करने का निर्देश दिया।

बैठक में विभिन्न पंचायतों में संचालित योजनाओं की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली गई। बीडीओ ने लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने, क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को समय रहते दूर करने तथा योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए और सभी संबंधित कर्मी अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करें।

महादेव कुमार महतो ने अधिकारियों एवं कर्मियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने तथा योजनाओं की प्रगति की लगातार समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर हासिल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर भी बल दिया।

समीक्षा के दौरान आवास योजनाओं की प्रगति और VB-G RAM G के तहत संचालित कार्यों की स्थिति पर विशेष चर्चा हुई। बीडीओ ने पंचायत स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देते हुए संबंधित कर्मियों को अपने-अपने कार्यों में तेजी लाने और लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन करने को कहा।

बैठक में सभी पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सेवक (GRS), बीएफटी (BFT), कनीय अभियंता (JE), सहायक अभियंता (AE), प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (BPO) एवं ब्लॉक कोऑर्डिनेटर उपस्थित थे।
बैठक का उद्देश्य विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर लंबित कार्यों को गति देना और आम लोगों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना रहा।

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गोमिया पुलिस की कार्रवाई: दो मामलों में एक आरोपी और एक वारंटी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए

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News – Kahkashan Farooqi 

गोमिया__ गोमिया थाना पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए एक प्राथमिकी अभियुक्त और एक वारंटी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से लंबित मामलों में फरार आरोपियों और वारंटियों के खिलाफ शिकंजा कसने का संकेत मिला है।

गोमिया थाना की ओर से 27 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गोमिया थाना कांड संख्या 133/2019, दिनांक 25 जनवरी 2019 के मामले में बालेश्वर हेम्ब्रम (30 वर्ष), पिता कार्तिक हेम्ब्रम, निवासी धनईया, थाना पेंक नारायणपुर, जिला बोकारो को गिरफ्तार किया गया। उक्त मामले में भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज थी, जिसे बाद में धारा 395 के तहत परिवर्तित किया गया था।

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हजारी मोड़ पर अनियंत्रित होकर पलटी कार, CISF इंस्पेक्टर घायल; एयरबैग खुलने से टली बड़ी अनहोनी

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न्यूज – कहकशां फारूकी 

गोमिया: बोकारो जिले के गोमिया थाना क्षेत्र के हजारी मोड़ के पास रविवार देर रात सड़क हादसे में CISF फायर विंग के इंस्पेक्टर ए.के. शर्मा घायल हो गए। उनकी कार सड़क किनारे पुलिया की साइड दीवार से टकराने के बाद पलट गई। हादसे में उन्हें हल्की चोटें आईं। कार के एयरबैग खुलने से बड़ी अनहोनी टल गई।

जानकारी के अनुसार, इंस्पेक्टर ए.के. शर्मा किसी परिचित से मिलकर बोकारो थर्मल स्थित अपने कार्यस्थल लौट रहे थे। इसी दौरान हजारी मोड़ के पास उन्हें नींद की झपकी आ गई, जिससे कार अनियंत्रित हो गई। कार पुलिया की साइड दीवार से टकराकर पलट गई।

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए इंस्पेक्टर को कार से बाहर निकाला और इलाज के लिए भेजा।

नींद की झपकी आने से हुआ हादसा

गोमिया थाना प्रभारी प्रफुल्ल कुमार महतो ने बताया कि प्रारंभिक जांच में चालक को नींद की झपकी आने के कारण दुर्घटना होने की बात सामने आई है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि थकान या नींद आने की स्थिति में वाहन चलाना कितना खतरनाक हो सकता है। सुरक्षित सफर के लिए जरूरी है कि नींद महसूस होने पर वाहन रोककर पर्याप्त आराम किया जाए।

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कुम्हारडीपा के दवा दुकानदार से तीन लाख की ठगी, कंपनी के तीन कर्मियों पर आरोप

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित लोहरदगा रोड गुमला के कुम्हारडीपा के दवा दुकानदार बुद्धदेव साहू ने उपसर्ग फार्मा कंपनी के तीन कर्मियों पर 3,00,487 रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए, इस संबंध में उन्होंने गुमला सदर थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की है, उक्त आवेदन के अनुसार, बुद्धदेव साहू सरस्वती मेडिको नामक दवा दुकान के संचालक हैं और उनका आरोप है कि उपसर्ग फार्मा कंपनी के एरिया मैनेजर संतोष सिंह, बृजेश तिवारी और अजीत सिंह उनकी दुकान पर आते-जाते थे, इसी क्रम में 2 जून 2023 को तीनों ने उन्हें बताया कि कंपनी गुमला क्षेत्र से अपना कारोबार समेट रही है। इसके बाद उन्होंने दुकान में बची कंपनी की दवाइयां वापस लेने और उनका पूरा भुगतान करने का भरोसा दिया, दुकानदार के अनुसार, कंपनी के उक्त प्रतिनिधियों की बातों पर भरोसा करते हुए उन्होंने 3,00,487 रुपए मूल्य की दवाइयां उन्हें सौंप दीं, और उक्त दवाइयां ले जाने के बाद जब उन्होंने भुगतान की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल किया जाने लगा और बाद में उक्त दवा राशि लौटाने से भी साफ इन्कार कर दिया गया। भुगतान नहीं मिलने से परेशान उक्त पीडित दुकानदार ने गुमला सदर थाना पुलिस से शिकायत करते हुए, उन्होंने मामले की जांच कर आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने, तथा कानूनी कार्रवाई करने और बकाया राशि वापस दिलाने की गुहार लगाई हैं।

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बिगड़ैल हाथी ने एक ग्रामीण को अपने सूड से पड़कर आधा किमी दूर ले जाकर अपने पर से कुचलकर मौत के घाट उतारा, वन विभाग की लापरवाही से भड़के ग्रामीण

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित कामडारा थाना क्षेत्र के बुरुहातु गांव में हाथी के हमले में 40 वर्षीय ग्रामीण निकोलस तोपनो की हुई दर्दनाक मौत। उक्त घटना सोमवार की देर रात सरिता पंचायत के सुकरा टांड़ ग्राम में हुई। निकोलस हाथियों के झुंड को भगाने के लिए घर से निकला था। इसी दौरान एक हाथी ने उसे अपने सूड में ले लिया, और निकोलस को सूंड़ से उठकर करीब आधा किलोमीटर दूर ले गया और अपने सूड से पटक पटककर और अपने अपने पैरों से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया, हमले में उनकी घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई और उक्त बिगड़ैल हाथी ने उसके शव को भी बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया, उक्त घटना की सूचना मिलते ही उक्त गांव एंव आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गई, और उक्त घटना की सूचना पूरे क्षेत्र में आग की तरफ फैल गई, ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़े , मृतक के परिजनों को जैसे ही उक्त सूचना मिला पूरे परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है, वन विभाग अकर्मण्यता और कार्य शिथिलता के कारण ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है, क्योंकि वन विभाग के उच्च पदाधिकारी से लेकर कर्मचारियों तक मात्र और मात्र मूक दर्शक बनकर टुकुर-टुकुर तक रहे हैं, वही संबंधित गांव के ग्रामीणों में उक्त हाथियों के झुंड की मौजूदगी और आसपास के क्षेत्र में विचरण कर रहे बिगड़ैल हाथियों के उत्पात के द्वारा पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल उत्पन्न हो गया है।

पीड़ित ग्रामीणों के अनुसार, पूरे क्षेत्र में कई दिनों से हाथियों का झुड विचरण कर रहा है, ग्रामीणों ने बताया गया कि उक्त बिगड़ैल हाथियों के झुंड झुंड में लगभग 23 हाथी और कुछ बच्चे शामिल हैं।

मृतक निकोलस टोपनो रात लगभग एक बजे कुछ ग्रामीणों के साथ उक्त बिगड़ैल हाथियों को अपने गांव से बाहर भगाने निकले थे,

ग्रामीण के अनुसार उक्त क्षेत्र में लगातार कई दिनों से उक्त बिगड़े हाथियों का झुंड विचरण कर रहा था, फिर भी वन विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया फलस्वरुप पीड़ित गांव के ग्रामीणों ने अपनी जान पर खेल कर उक्त बिगड़ैल हाथियों को गांव से बाहर भागने में जुटे हुए थे, इसी क्रम में निकोलस टोपनो की दर्दनाक मौत हो गई, ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बिगड़ैल हाथियों के झुंड में लगभग छोटे बड़े 23 हाथी शामिल हैं, बीके रात्रि लगभग एक बजे हाथियों को भगाने के लिए ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकले थे।

इसी दौरान निकोलस तोपनो हाथी के सामने आ गए। हाथी ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। हाथी उन्हें सूंड़ में लपेटकर दूर ले गया और सूड पटक पटककर और और अपने पैरों से कुचलकर मार डाला। घटना के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश है।

लोगों का कहना है कि हाथियों का झुंड कई दिनों से गांव के आसपास घूम रहा था। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। हाथियों ने खेतों में लगी धान, केला, ईख, आलू, फूलगोभी और शकरकंद की फरालों को भी भारी नुकसान पहुंचा है,

पीड़ित संबंधित ग्रामीणों का वन विभाग पर गुस्सा टूटने की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया,वन विभाग के कर्मी भी घटनास्थल पर पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग के कर्मचारियों पर बुरी तरह फूट पड़ा।
ग्रामीणों ने वन विभाग पर सीधा आरोप लगाया हैं कि हाथियों का झुंड कई दिनों से गांव में प्रवेश कर रहा था, लेकिन उसे भगाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। लोगों ने कहा कि समय रहते कार्रवाई होती तो शायद निकोलस टोपनो के मौत का हादसा टल सकता था।
हाथियों के लगातार घुमने से ग्रामीणों की जान और फसलें दोनों खतरे में हैं। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर ले जाने की मांग की है।
लोगों ने कहा कि समय रहते कार्रवाई होती तो शायद उक्त हादसा टल सकता था।
मृतक निकोलस टोपनो के संबंधित परिजनों को वन विभाग द्वारा तत्काल एक लाख रुपए की सहायता राशि दी गई है। अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर शेष मुआवजा देने की बात कही है। ग्रामीणों को मुआवजे से संबंधित फॉर्म, टॉर्च और पटाखे भी उपलब्ध कराए गए हैं।
विभाग की ओर से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। झुंड को सारंडा जंगल की ओर भेजने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के करीब न जाएं और उन्हें भगाने के लिए खुद जोखिम न उठाएं। रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचें।

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