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Thursday, July 2, 2026
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शहीद टिकैत उमरांव व शहीद शेख भिखारी को दी गई श्रद्धांजलि. विनोद पांडेय ने कहा-हेमंत सरकार में कोई भी शहीद स्थल उपेक्षित नहीं रहेगा

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रांची: स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद टिकैत उमरांव सिंह एवं वीर शहीद शेख भिखारी की 164वें शहादत दिवस पर चुटुपालु स्थित शहीद स्थल पर जाकर झारखण्ड मुक्ति मोर्चा रांची जिला समिति ने श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम में पार्टी के केन्द्रीय महासचिव सह प्रवक्ता एवं राज्य समन्वय समिति के सदस्य विनोद कुमार पांडेय एवं राज्य समन्वय समिति के सदस्य फागु बेसरा विशेष रूप से शामिल रहे। सभी कार्यकर्ता मोराबादी स्थित गुरुजी के आवास के पास जमा होकर जिलाध्यक्ष मुशताक आलम के नेतृत्व में जुलूस के साथ चुटुपालु स्थित शहीद स्थल पर जाकर श्रद्धांजलि दी। रास्ते में जगह पर विनोद कुमार पांडेय का भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि झारखण्ड के तमाम शहीदों को हेमन्त सोरेन की सरकार में ही सम्मान मिल रहा है,  सभी परिजनों की सुध ली जा रही है। शहीद स्थल का सौंदर्यीकरण के लिए फण्ड बहुत पहले ही दिया जा चुका है। झारखण्ड में तमाम शहीद स्थलों पर सरकार संज्ञान ले रही है। कोई भी शहीद एवं शहीद स्थल अब उपेक्षित नहीं रहेगा।

ये लोग थे शामिल

मौके पर केंद्रीय सदस्य समनूर मंसूरी, अन्तु तिर्की,  रांची जिला सचिव डॉ हेमलाल कुमार मेहता हेमू,  उपाध्यक्ष अश्विनी शर्मा, जनक नायक, कलाम आजाद, बीरू साहु,  संगठन सचिव आदिल इमाम, अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व केन्द्रीय उपाध्यक्ष कुदुस अन्सारी, क्रीड़ा मोर्चा के पूर्व केन्द्रीय सचिव प्रदीप मिर्धा,  अरुण वर्मा, रमेश साहू, मंटू लाला, शिवनंदन मिश्रा, ओरमांझी प्रखण्ड अध्यक्ष नागेश्वर महतो, कांके प्रखण्ड अध्यक्ष जावेद अख्तर अन्सारी,  मो असलम, विलियम रिचर्ड लकड़ा, हारून रशीद, मृत्युंजय सिंह, साजिद कौशर, नरेश यादव, रिजवान अंसारी, असलम अंसारी, फरीद खान, परवेज़ आलम गुड्डू, दीपक मुंडा, फैयाज शाह,  राजेश सिंह, राकेश वर्मा, लक्ष्मण राम, बबलू , नीरज वर्मा, सबिबुल रहमान, शहाबुद्दीन, दीनानाथ लकड़ा,  ओम शर्मा, अजय उरांव, वसीम, अखतर मंसुरी आदि शामिल थे।

राम भक्तों के लिए

40 साल बाद अभ्रक उद्योग को मिलेगा जीवनदान, सुदिव्य ने की सीएम से पहल, जल्द बनेगी नई नीति, माइका मजदूरों के दिन फिरेंगे…!

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गिरिडीह (कमलनयन)

झारखंड के गिरिडीह-कोडरमा इलाके के परम्परागत दम तोड़ते अभ्रख उद्योग को पुनर्जीवित करने को लेकर राज्य की सतारूढ़ जेएमएम सरकार काफी गंभीर है.  इसकी पहल गिरिडीह क्षेत्र के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने की है. सोनू ने गिरिडीह शहर के अभ्रक व्यवसायियों से शनिवार को सीएम हेमंत सोरेन से मिलवा कर चालीस साल से अधिक समय से बंद पड़े अभ्रक खदानों को पुन: चालू करने का आग्रह किया है. मुख्यमंत्री ने उद्यमियों को आश्वस्त किया कि सरकार बदहाल अभ्रख उधोग की बेहतरी के लिए प्रयासरत हैं, जल्द ही न्यू ढिबरा (अभ्रख) पॉलिसी लागू की जा रही है।

मार्च 2022 के गजट में जुड़े हैं कई नये प्रावधान

बताया गया कि यह पॉलिसी लागू होने से तकरीबन चार दशकों से बंद पड़ी अभ्रख खदानों से वैध रूप से अभ्रख उत्पादन शुरू हो सकेगा, साथ ही वन विभाग और पुलिस वालों के अनावश्यक हस्तक्षेप पर विराम लग जायेगा। सीएम ने इस दिशा में पिछले वर्ष व्यावहारिक कदम उठाये हैं. राज्य सरकार ने मार्च 2022 के गजट में अभ्रख उद्योग से जुड़े कई नये प्रावधानों का उल्लेख किया है, जिसके अनुसार झारखंड राज्य लघु खनिज संशोधन नियमावली 2004 में संशोधित करते हुए वन क्षेत्र में स्थित अभ्रख खदानों के उत्पादन में लचीलापन लाये जाने के अलावा इसके भंडारण एवं नीलामी को लेकर नियम शामिल है. साथ ही राजस्थान सरकार की तर्ज पर लघु-खनिज नियमावली का झारखंड में पालन किये जाने पर भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है. बताया गया कि नई नियमावली लागू होने से पांच हेक्टेयर से कम भूमि में स्थित अभ्रख खदानों का खनन पट्टा व्यवसायी सीधे प्राप्त कर सकेंगे।

माइका व्यवसायियों ने सरकार के प्रयास को सराहा

अभ्रख निर्यातकों का कहना है कि हेमंत सोरेन सरकार द्वारा माइका उद्यमियों की भावनाओं को संज्ञान में लेकर सरकार का अबतक का प्रयास सराहनीय है, किंतु प्रयासों को और अधिक व्यवाहारिक बनाने से सरकार के राजस्व में इजाफा होगा और हजारों बेरोजगार के हाथों को रोजगार मिल सकेगा। निर्यातकों का कहना है कि खनिजों के प्रदेश झारखंड की खदानों में उम्दा किस्म की अभ्रख का प्रचुर भंडार है, इसके बावजूद इलाके के व्यवसायी राजस्थान से अभ्रख मंगाने को विवश हैं। पिछले एक वर्ष में लगभग दो हजार टन अभ्रख राजस्थान की खदानों से झारखंड आया है. जिसके कारण क्षेत्रीय सालाना टर्न ओवर के ग्राफ में काफी गिरावट आई है. जानकारों के मुताबिक वर्ष 2021-22 में सालाना टर्न ओवर 250 करोड़ से अधिक था, जो घटकर चालू वितीय वर्ष में सौ करोड़ के नीचे आ गया है.

माइका उद्योग की विश्व में है पहचान

गौरतलब है कि अस्सी के दशक से पूर्व समृद्ध अर्थव्यवस्था से परिपूर्ण गिरिडीह-कोडरमा इलाके की पहचान विश्व के मानचित्र में उम्दा किस्म के माइका उद्योग के रूप में रही है. सैकड़ों की संख्या में संचालित छोटी-बड़ी अभ्रख खदानों से सरकार के खाते में भारी-भरकम राजस्व जाता था। उस दौरान लगभग 50 हजार लोग किसी न किसी रूप में माइका व्यवसाय से जुड़े थे। लेकिन 1980  में वन सुरक्षा एक्ट लागू होने एवं कई अन्य कारणों से धीरे-धीरे खनन लीज जारी होना बंद हो गया। इसके फलस्वरूप यह उद्योग हाशिये के दायरे में आ गया। हालांकि कोयले की तरह ही अभ्रख का भी अवैध खनन (ढिबरा चुनने के नाम पर) बदस्तूर चलता रहा। सरकार ने इन्ही सभी पहलुओं को ध्यान में रखक्ऱ अब इस समस्या के निदान की ओर कदम बढ़ाया है, जिससे अभ्रक उद्योग एक बार फिर विकसित हो सके। लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हों एवं सरकार के खाते में राजस्व का ग्राफ बढ़ सके। श्री सोनू की अगुवायी में गिरिडीह-कोडरमा के अभ्रख निर्यातक अशोक जैन पाण्डया, राजेन्द्र बगेड़िया, संजय कुमार भुदोलिया, प्रवीण बगेड़िया ,राजेश छापरिया, गोपाल बगेङिया, कोडरमा के पवन दारूका, महेश दारूका, प्रदीप भदानी ने सीएम हेमंत सोरेन से रांची में मुलाकात कर उन्हें अपनी भावनाओं से अवगत कराया।

                                

राम भक्तों के लिए

Remembering Irrfan Khan on his birth anniversary 7th Jan.

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Some interesting facts about Irrfan Khan!1. His real name:Irrfan Khan was basically from Jaipur, Rajasthan, and his real name was Sahabzade Irfan Ali Khan.2. Wanted to become a cricketer:Irrfan may have worked not just in Hindi but in British and American movies as well but you will be surprised to know that he didn’t want to become an actor and instead, he wished to pursue cricket as his career.3. Start of acting journey:Irrfan’s parents were not happy with his decision of becoming a cricketer and it was only after he got a scholarship in National School Drama that his journey in acting started.4. His first job in Mumbai:He faced many struggles and hardships before getting successful as an actor. He worked as an air conditioner mechanic to support himself when he came to Mumbai and this was his first job in the city.5. His visit to Rajesh Khanna’s house:It is not confirmed but it is being said that one of the first houses that he visited as an air conditioner mechanic was of superstar Rajesh Khanna.6. Debut in Salaam Bombay:Irrfan made his debut in Bollywood in 1988 with the movie Salaam Bombay which was written and directed by Mira Nair. At that time, Irrfan was in the final year of his NSD course and the film was also nominated for the Academy Awards.7. The extra R in his name:It is quite normal for the Bollywood celebs to add extra alphabets in their names as per the demand of numerology; nevertheless, the extra R in Irrfan’s name is not because of numerology but for the fact that Irrfan liked the sound that was generated by adding an extra R.8. Wanted to quit acting:There was a time when Irrfan Khan wanted to quit acting as he was mostly getting work in TV serials and nothing good was happening in movies for him. However, then he got the chance of working in Asif Kapadia directed movie ‘The Warrior’ (2001) which increased his popularity to a great extent and after that, he gave many memorable acting performances in different flicks.9. His family:Irrfan was married to Sutapa Sikdar, whom he knew from the days of NSD. The couple got blessed with two kids – Babil and Ayan.10. Awards & Recognitions:Irrfan Khan has received many awards for the wonderful work that he has done including one National Film Award, Four Filmfare Awards and one Asian Film Award. In 2011, he was also honored with the fourth highest civilian award of India, Padma Shri.11. Said NO to Christopher Nolan:It is quite hard to believe that an actor can refuse to work with Christopher Nolan but Irrfan did this when he was approached for a good role in ‘Interstellar’ as he was already busy with ‘The Lunchbox’ and ‘D-Day’.12. His wish for his mother:He wished to gift his mother a suitcase full of cash, something which we all must have seen in flicks. Irrfan’s mother took her last breath just 3 days ago and Irrfan was not even able to attend her last rites.#RIP#BirthAnniversary#IrrfanKhan#SalaamBombay (1988) #TheWarrior (2001), #Haasil (2003) #Maqbool (2004) #TheNamesake (2006) #LifeinaMetro (2007), #PaanSinghTomar (2011) #TheLunchbox (2013), #Piku (2015), #Talvar (2015) #TheAmazingSpiderMan (2012), #LifeofPi (2012),#JurassicWorld (2015), #Inferno (2016) #SlumdogMillionaire (2008), #NewYork (2009), #Haider (2014), #Gunday (2014), #InTreatment (2010) #AmmarAlavi#bollywood#thegoldenageofbollywood

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राम भक्तों के लिए

खलारी – झारखंड पब्लिक स्कूल में मना स्व. राजो देवी की 14 वीं पुण्यतिथि, पुष्प अर्पित कर दी गई श्रद्धांजलि

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डकरा, 07 जनवरी : झारखंड पब्लिक स्कूल मोहननगर में विद्यालय के प्रधानाध्यापक अभिषेक कुमार चौहान की माता स्वर्गीय राजो देवी की 14 वीं पुण्यतिथि एक सादे समारोह का आयोजन कर मनाई गई। उपस्थित लोगों के द्वारा स्वo राजो देवी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। मौके पर बताया गया कि विद्यालय इन्हीं के नाम के ट्रस्ट श्रीमति राजो देवी सोशल एण्ड एजुकेशनल ट्रस्ट के द्वारा संचालित है। राजो देवी एक अनपढ़ कामकाजी महिला थीं, वे हमेशा भूखों, असहाय एवं अर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को अपने द्वार पर आ जाने पर बेझिझक मदद करती थीं। उन्होंने झारखंड पब्लिक स्कूल के माध्यम से निर्धन बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था कराने का एक सफल प्रयास भी किया जो आज रंग ला रही है। वर्तमान में ट्रस्ट ब्लड डोनेशन कैम्प एवं निर्धन बच्चों की मुफ्त शिक्षा पर भी काम कर रहा है। वहीं भविष्य में विद्यालय के संस्थापक जागीन चौहान एवं ट्रस्ट के संरक्षक संजय चौहान की योजना है कि स्वर्गीय राजो देवी के सपनों को और भी विभिन्न सामाजिक कार्यों के माध्यम से पूरा किया जाय। इस दौरान विद्यालय के प्रधानाध्यापक अभिषेक कुमार चौहान ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यालय हमेशा निर्धन एवं पिछड़े समाज के बच्चों को मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था कर उन्हें समाज की अगली पंक्ति में लाने का काम करेगी। मौके पर ट्रस्ट की सचिव ज्योति चौहान, कोषाध्यक्ष किरण देवी, सदस्य अमित चौहान, विद्यालय के शिक्षक रमेश महतो, राजेश कुमार, मनोज कुमार, महेंद्र चौहान, शिक्षिका फरीदा खातून, नाज़िया परवीन, साजिया परवीन, आरती सिंह, गीता देवी, संजना, श्रीवास्तव, रेणु कुमारी आदि उपस्थित थें।

एवं स्व.राजो देवी का फाइल फोटो
राम भक्तों के लिए

खलारी – प्रभु समर्पण समारोह में शामिल होंगे डकरा सुभाष नगर के बीके भाई-बहन

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डकरा, 07 जनवरी : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय डकरा सुभाष नगर के अनेकों बीके भाई-बहन ब्रह्माकुमारीज द्वारा नवनिर्मित शिव दर्शन भवन के उद्घाटन सह प्रभु समर्पण समारोह कार्यक्रम में महेश्वरी धर्मशाला, गुमला में रविवार को शामिल होंगे। जानकारी देते हुए बीके प्रीति बहन ने बताया कि ब्रह्माकुमारीज द्वारा नवनिर्मित शिव दर्शन भवन के उद्घाटन के बाद प्रभु समर्पण समारोह में परमात्मा शिव पर बारह ( 12 ) बीके बहनों का समर्पण कार्यक्रम होगा। उन्होंने कहा कि अपने लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन परमात्मा शिव पर समर्पण करने वाली सभी बीके बहने मानव समाज के कल्याण हेतु अपना जीवन समर्पित करेंगी। कहा कि ब्रह्माकुमारी एक विश्व व्यापी संस्था है, जो शांति स्थापना के कार्य में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। वही इस कार्यक्रम में राजस्थान माउंट आबु, कोलकाता और कटक से भी राजयोगी एवं राजयोगिनी भाई-बहनों के शामिल होने की बात बताई।

राम भक्तों के लिए

धनबाद की प्रियंका प्रियदर्शनी ने बिहार फैशन शो में लहराया परचम, 300 प्रतिभागियों को मात देकर जीता फर्स्ट रनर अप का खिताब

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धनबाद : धनबाद की प्रियंका प्रियदर्शी को पटना में आयोजित मिस एंड मिसेज ग्लोबल बिहार फैशन शो में नारी शक्ति फर्स्ट रनर अप का खिताब मिला। प्रियंका धनबाद रेल मंडल में पदस्थापित सीनियर डीएसटीई गौतम गुप्ता की पत्नी हैं। प्रियंका प्रियदर्शनी ने बताया कि वह केके मैनेजमेंट धनबाद में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत हैं। पटना के मशहूर मिस एंड मिसेज ग्लोबल बिहार फैशन शो के नीतीश चंद्रा एवं स्वाति ने सीजन-8 के तहत सभी प्रतिभागियों को आमंत्रित किया था। इसमें वैसे प्रतिभागी शामिल हुए जो अपने काम के प्रति व्यस्त रहते हैं। महिलाओं को उड़ान भरने के लिए एक अच्छे प्लेटफार्म की जरूरत है। निश्चित तौर पर आज की तारीख में महिलाएं काफी आगे बढ़ चुकी हैं। खासकर इस प्रतियोगिता में इंजीनियर, चिकित्सक और सेना में कार्यरत महिलाएं शामिल हुईं।

सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती

मिस एंड मिसेज ग्लोबल बिहार फैशन शो में कई राज्यों से लगभग 300 महिलाएं प्रतियोगिता का हिस्‍सा बनीं। इन्हें 10 दिनों की ट्रेनिंग भी दी गई। इसमें फर्स्ट रनर अप के तौर पर प्रियंका को नारी शक्ति से सम्मानित किया गया और सेकेंड रनर के रूप में वर्षा सम्मानित हुईं। प्रियंका ने बताया कि सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती है। उम्र के हर पड़ाव पर सपने देखते रहना चाहिए और इसे पूरा करने के लिए प्रयासरत भी रहना चाहिए। उनकी छह साल की एक बेटी भी है। इसके बावजूद भी वह अपनी प्रतिभा को प्लेटफार्म पर लाने के लिए हमेशा से प्रयासरत रही हैं। इसका परिणाम आज सभी के सामने है।

डा. अपराजिता बनीं मिस इंडिया क्वींस आफ हर्ट

इधर, धनबाद की बेटी डा. अपराजिता प्रियदर्शनी मिस इंडिया क्विज आफ हार्ट बनीं। दिल्ली के हयात होटल में आयोजित प्रतियोगिता में डा.अपराजिता को इस खिताब से नवाजा गया। डा. अपराजिता धनबाद के न्यूरोसर्जन डा.एनआर महापात्रा की बेटी हैं। वर्तमान में अपराजिता कोलकाता के अपोलो अस्पताल में इमरजेंसी कंसलटेंट के रूप में कार्य कर रही हैं। अभिनेत्री सोनाली राऊत थीं शो की जजप्रतियोगिता का आयोजन सलोनी अग्रवाल और अंकुर अग्रवाल की ओर से किया गया था। जज के रूप में अभिनेत्री सोनाली राऊत थीं। इस प्रतियोगिता प्रतियोगिता का उद्देश्य वर्किंग वूमेन को उनके दायरे से बाहर निकाल उनकी खूबियों को समाज के समक्ष लाना है। अपराजिता पेशे से चिकित्सक हैं। उन्होंने अपने कीमती समय से कुछ वक्त निकालकर इस तरह की प्रतियोगिताओं के लिए स्वयं को तैयार की और सफल भी हुई।

राम भक्तों के लिए

श्री शाकम्भरी जंयती पर देवी का सजा भव्य दरबार, हुए विविध कार्यक्रम

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गिरिडीह: वनस्पति की देवी माता शाकम्भरी की जंयती के पावन अवसर पर शुक्रवार को श्री शाकम्भरी सेवा समिति, गिरिडीह के तत्वावधान माता शाकम्भरी देवी का प्राकट्य महोत्सव विविध धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। श्री श्याम मंदिर भवन में आयोजित माता ब्रम्हाणी – रुद्राणी का भव्य श्रृंगार कर दरबार सजाया गया। इस दौरान संगीतमय मंगलपाठ में सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरूषों ने भाग लिया।  मंगलपाठ के अलावा चुनरी उत्सव, मेंहदी उत्सव, कन्याभोजन , महाआरती एवं भंडारे का आयोजन किया गया।

शाकम्भरी परिवार के सदस्यों का रहा सराहनीय योगदान

इस अवसर पर माता के भक्तों ने सपरिवार जोत में आहुति देकर माता रानी से अपने परिवार में सुख, समृद्धि, शांति की कामना की। देर शाम तक चले धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने में शाकम्भरी परिवार के सुरेश छापरिया, विनोद खडेंलवाल, दीपक चिरानिया, सुरेन्द्र छापरिया, विनय अग्रवाल, अरुण लाडिया, संजीत मरोडिया, अमित छापरिया, विनोद अग्रवाल, संजय डंगैच, रिषभ छापरिया समेत शाकम्भरी परिवार के अन्य सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।

लंगटा बाबा की समाधि पर हजारों भक्तों ने चादरपोशी,

सभी धर्मों के लोग मांगने आते हैं अपनी मुरादें

गिरिडीह: जीव समता के साधक लंगटा बाबा समाधि दिवस पौष पूर्णिमा के मौके गिरिडीह के खरगडीहा में शुक्रवार को देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए भक्तों ने बाबा की समाधि पर चादरपोशी कर मत्था टेका।  लंगेश्वरी बाबा मेला में झारखंड समेत कई राज्यों के भक्तों की भीड़  जुटी। जिसमें बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के लोग शामिल थे। परंपरा के अनुसार मजार पर जमुआ थाना प्रभारी पप्पू कुमार ने अहले सुबह पौ फटने से पहले चादरपोशी कर मेले की शुरुआत की।

हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग करते हैं सजदा

पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध लंगेश्वरी बाबा के नाम से माने जानेवाले जमुआ के खरगडीहा में लंगेश्वरी बाबा मेला एक तरफ हिंदू समुदाय की भीड़ उमड़ी थी, तो दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय के लोगों की भीड़ भी इस दौरान मेले में दिखाई पडी। अहले सुबह से ही भक्त चादर चढ़ाते हैं और अपनी मन्नत मांगते हैं. इसके अलावा जिनकी मन्नतें पूरी हो जाती हैं, वे भी यहां चादरपोशी करते हैं. यहां के लिए खास बात ये है कि यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं और समाधिस्थल में पूजा-अर्चना करते हैं. अभी मेला दो दिन और चलेगा.

राम भक्तों के लिए

खलारी – स्वच्छ भारत मिशन को लेकर बीडीओ ने की बैठक

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डकरा, 05 जनवरी : प्रखण्ड विकास पदाधिकारी खलारी लेखराज नाग की अध्यक्षता में गुरुवार को प्रखण्ड कार्यालय में स्वच्छ भारत मिशन से संबंधित बैठक किया गया। जिसमें बीपीओ बिनय कुमार गुप्ता,प्रखंड समन्वयक प्रमोद कुमार, लपरा और मायापुर पंचायत से मुखिया पुतुल देवी व पुष्पा खलखो, पंचायत सचिव परिक्षित महतो,रोजगार सेवक विश्वरंजन कुमार, लालमोहन राम उपस्थित हुए। बैठक में लपरा एवं मायापुर पंचायत के गाँवों को आदर्श गाँव बनाने के संबंध में कार्य योजना पर विचार विमर्श किया गया। बताया गया कि ठोस कचरा पदार्थ और तरल कचरा पदार्थ को लेकर जो बेहतर कार्य करेंगे उनको विभाग द्वारा रेटिंग दिया जाएगा। आदर्श ग्राम से संबंधित छः मानदंड जारी की गई है। इन मानदण्डों में ओडीएफ प्लस ग्राम घोषित करने के लिए स्टार रेटिंग तय की गई है
जिसमें सभी मानदण्डों को पूरा करने वाले ग्राम को क्रमशः एक सितारा, तीन सितारा एवं पाँच सितारा रेटिंग दी जाएगी। एक सितारा रेटिंग के लिए गांव के सभी परिवारों के पास कार्यात्मक शौचालय, गांव के सभी स्कूल,आंगनवाड़ी केंद्र, पंचायत घरों में पुरुष और महिला के लिए अलग-अलग शौचालयों के साथ कार्यात्मक शौचालय की सुविधा उपलब्ध होना एवं गांव में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन या तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था होना अनिवार्य है। वहीं तीन सितारा रेटिंग के लिए गांव के सभी परिवारों के पास कार्यात्मक शौचालय, गांव के सभी स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, पंचायत घरों में पुरुष और महिला के लिए अलग-अलग शौचालयों के साथ कार्यात्मक शौचालय की सुविधा, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था होना है। जबकि पाँच सितारा रेटिंग के लिए गांव के सभी परिवारों के पास कार्यात्मक शौचालय, गांव के सभी स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, पंचायत घरों में पुरुष और महिला के लिए अलग-अलग शौचालयों के साथ कार्यात्मक शौचालय की सुविधा उपलब्ध होना, गाँव के सभी सार्वजनिक स्थानों पर कम से कम कूड़ा, न्यूनतम स्थिर अपशिष्ट जल और सार्वजनिक स्थान पर कोई प्लास्टिक कचरा डंप नहीं देखा गया हो, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था, तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था, दीवार पेंटिंग, होर्डिंग आदि के माध्यम से गांव को ओडीएफ प्लस आईईसी संदेशों को प्रमुखता से प्रदर्शित करना चाहिए अनिवार्य बताया गया है।
अगले चरण में अन्य पंचायत के गाँवों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

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झारखंड सकल जैन समाज के मौन प्रदर्शन के बाद केंद्र-राज्य सरकारों ने अपने फैसले वापस लिए, जैनियों ने पीएम-सीएम को साधुवाद दिया

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गिरिडीह (कमलनयन): जैन धर्मावलंबियों के शिरोमणि तीर्थक्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी को पर्यटन क्षेत्र घोषित किये जाने के सरकारी प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों की सुध ली. सरकार ने जैनियों के पक्ष में फैसला लिया है. इसकी खबर मिलते ही जैन समाज में खुशी की लहर दौड़ गई. अचानक भीड़ में शोर हुआ…मिल गई खुशखबरी, शिखरजी मामले में केंद्र सरकार ने वापस लिए…नोटिफिकेशन के विवादित बिंदु… सुनिये…मुनिश्री प्रमाण सागर जी के श्रीमुख से पूरे विषय की सच्चाई. फिर गुरुवार शाम को शीर्ष जैन मुनि प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा है कि केंद्र सरकार ने सम्मेद शिखर की पवित्रता को बरकरार रखने का निर्णय लिया है. केंद्र सरकार द्वारा गठित की जानेवाली कमेटी में जैन समुदाय की ओर से दो सदस्य रखे जाएंगे.

जैैैैैैनियों ने एक-दूसरे को बधाई दी

पिछले एक पखवारे से जैन समाज की ओर से चल रहे आंंदोलन पर अब विराम लग जाएगा. जैन समाज के पक्ष में फैसला आने के बाद जैैैैैैनियों ने एक-दूसरे को बधाई दी और खुशी का इजहार किया. सरकारों के सकारात्मक रवैए को लेकर जैन मुनि ने प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गिरिडीह जिला प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया है. इससे पूर्व पर्यटन के प्रस्ताव के विरोध में आज समाज के लोग देशभर में एकजुटता के साथ शांतिपूर्ण, संयमित और अनुशासित ढंग से मौन धारण कर केन्द्र व राज्य सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचा था. जैन समाज को समर्थन देने के लिए विश्व हिन्दू परिषद समेत विभिन्न वर्गो के सामाजिक एंव धार्मिक संस्थाओं ने सर्मथन किया था.

24 जिलों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे गिरिडीह

श्री दिगबंर जैन पंचायत के बैनर तले झारखंड सकल जैन समाज ने मौन प्रदर्शन किया। गिरिडीह जिला मुख्यालय हुए मौन प्रदर्शन में झारखंड के सभी 24 जिलों से आए जैन समाज की महिलाओं-पुरूषों, छात्र-छात्राओं के अलावा, काफी संख्या में कई समाजसेवी सगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। मौन पैदल मार्च दिगबंर जैन भवन से निकल कर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गिरिडीह सर्कस मैदान तक पहुंचा। इसके बाद एक शिष्टमंडल ने पीएम और राज्य के सीएम एंव विभागीय मंत्री को प्रेषित ज्ञापन उपायुक्त के माध्यम से सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि श्रीसम्मेद शिखर जी के 24 में से 20 तीर्थंकरों (जैनमुनियों) ने पर्वत पर निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया। जैन समाज के लिए शिखरजी का कण-कण वंदनीय है  जिसकी पवित्रता अणुक्षण बनाये रखने के लिए पर्यटन प्रस्ताव को वापस लेकर जैन समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाय।

मौन प्रदर्शन में सभी धर्मों के लोग शामिल हुए

मौन प्रदर्शन में हजारों की संख्या में कतार बंद होकर चल रहे महिला-पुरुष शामिल हुए। जिनके हाथों में जैनों को प्राणों से प्यारा सम्मेदशिखर तीर्थ हमारा, जैन धर्म की जान है सम्मेद शिखर महान है, जैसे स्लोगन लिखे थे। मौन प्रदर्शन की अगुवाई, अशोक जैन पांडया, महेश जैन, सुरेन्द्र जैन सरावगी, अंकित जैन, लोकेश जैन, रमेश जैन, धीरज जैन समेत रांची, धनबाद, पलामू, देवघर, दुमका, बोकारो, टाटा , चाईबासा, सिमडेगा समेत राज्य के अन्य शहरों से आये जैन समाज के लोगों ने किया। लगभग एक किलोमीटर के मौन प्रदर्शन में अभय शाहाबादी, रोहित जालान , विजय जैन, हेमलता जैन, मंजू जैन, सरोज जैन, नवीन सेठी, डा. गुणवंत सिंह, अमरजीत सिंह सलूजा, संदीप र्डगेच, सतीश केडिया समेत मारवाड़ी समाज, वर्णवाल समाज और सिख समाज के लोगों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभायी. इस दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये गये थे।

राम भक्तों के लिए

लंगटा बाबा की समाधि पर सभी करते हैं चादरपोशी, हिंदू-मुस्लिम का भेदभाव नहीं…सबकी मुरादें पूरी करते हैं बाबा

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गिरिडीह (कमलनयन) जब देश में चारों तरफ हिंदू-मुस्लिम एकता खंडित करने का कुत्सित प्रयास जारी है. ऐसी स्थिति में आस्था के कुछ ऐसे केंद्रबिंदु भी हैं, जहां हिंदू-मुस्लिम सभी एक साथ मिलकर चादरपोशी कर अपने परिवार की दुआ मांगते हैं. इसलिए कि यहां लंगटा बाबा की रहमत बरसती है. पिछले चार दशक से यह समाधिस्थल इसका गवाह हैं. झारखंड में उत्तरी छोटानागपुर के गिरिडीह जिले में 18वीं सदी के उतरार्द्ध में जिला मुख्यालय से 42 किलोमीटर देवघर-चकाई मार्ग के खरगडीहा में सिद्ध महापुरूष लंगटा बाबा का आगमन हुआ। जिन्होंने आध्याल्मिक शक्तियों के जरिये चार दशक तक चमत्कारी लीलाएं दिखाकर पीड़ित मानव मात्र को उनके कष्टों से मुक्ति दिलायी। और 10 जनवरी 1910 की पौष पूर्णिमा के दिन ब्रम्हलीन हो गये। समाधि स्थल की खास बात यहां हिंदू-मुस्लिम का भेदभाव नहीं है. दोनों समुदाय अपनी मन्नतें पूरी होने पर चादर चढ़ाते हैं या फिर मन्नत मांगने आते हैं. दरअसल, समाधि स्थल सांप्रदायिक सौहार्द व एकता की मिसाल कायम करने की बखूबी भूमिका निभा रहा है.

जानिए कौन थे लंगटा बाबा?

लंगटाबाबा कौन थे? कहां से आए थे?  उनका वास्तविक क्या नाम था?,  यह आज तक कोई नहीं जान पाया। किंतु बाबा के संबंध में लिखी गई कुछ पुस्तकों के मुताबिक सन् 1870 ई में बाबाधाम (देवघर) जाने के क्रम में नागा साधुओं के दल में बाबा आए थे। खरगडीहा में रात्रि विश्राम के बाद दूसरे दिन अन्य साधु तो गणतव्य की ओर आगे बढ़ गये, लेकिन न जाने बाबा क्यों यहीं रुक गए. अलौकिक आभा से परिपूर्ण लम्बे कद के एक साधु ने तत्कालीन खरगडीहा थाना परिसर में ही धुनी रमा ली। कालान्तर में यही साधु लंगटाबाबा या लंगेश्वरी बाबा के नाम से विख्यात हुए। क्षेत्र के लोग बाबा की चमत्कारी लीलाओं की चर्चा आज भी बड़े सम्मान के साथ बयां करते हैं. लोग बताते हुए गर्व का अनुभव करते हैं. यहां मुस्लिम-हिंदू सभी श्रद्धापूर्वक चादरपीशी करते हैं और मन्नतें मांगते हैं. बाबा के प्रति लोगों में इतनी श्रद्धा भाव जताते हैं कि आप यहां आकर भूल जाएंगे कि हिंदू-मुस्लिम एक-दूसरे से अलग हैं. सभी बाबा के समाधि स्थल पर बड़ी श्रद्धा और सच्चे मन से मत्था टेकते हैं. लोगों को अगाध विश्वास है कि यहां मन से मत्था टेकने से उनकी मुराद पूरी होती है.

तीनदिनी समाधि मेले के आयोजन की तैयारी

लंगटा बाबा को समाधि लिए 110 वर्ष से अधिक हो गये। लेकिन इलाके में बसे लोक जीवन के दिलों में आज भी लंगटा बाबा किसी अवतारी पुरुष की तरह बसे हुए हैं. यहां हर साल पौष पूर्णिमा के दिन तीन दिवसीय समाधि मेले का आयोजन होता है. इस विशेष अवसर पर देशभर के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा की समाधि पर चादर चढ़ाने, मत्था टेकने, मन्नतें मांगने और मन्नतें पूरी होने पर अभार व्यक्त करने आते हैं. कहा जाता है कि 1910 में जब अंतिम संस्कार के दिन खरगडीहा थाना के तत्कालीन दारोगा वहाबुद्दीन खान ने बाबा के शरीर पर पहली बार चादर रखी थी. तबसे चादरपोशी की शुरुआत जमुआ के थाना प्रभारी ही करते हैं. समाधिस्थल पर यहां सालों भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. कहते हैं कि बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ वापस नहीं लौटता। अपने भक्तों पर बाबा रहमत की वर्षा करते हैं.

लंगटा बाबा मेले में उमड़ता है जनसैलाब

लंगटा बाबा समाधिस्थल के पास लगनेवाले मेले में जनसैलाब उमड़ता है. भीड़ को संभालने के लिए सेवादारों की टोली दिन-रात मेहनत करते हैं. लंगटा बाबा ऐसे धार्मिक महापुरुष हुए जिनके प्रति हिन्दू-मुस्लिम सभी धर्मों के लोगों की समान आस्था है. यही करण है कि लगभग चार दशक तक खरगडीहा में धुनी रमाकर अपनी चमत्कारी लीलाओं के जरिये बाबा ने पीड़ित मानवता का कल्याण करते हुए परस्पर भाईचारे का संदेश दिया। हर साल बाबा का समाधि दिवस समारोह काफी श्रद्धा भाव से मनाया जाता है. भक्तगण लंगर लगाते हैं. पौष पूर्णिमा को तड़के तीन बसे से ही चादर चढ़ाने का क्रम शुरू होता है, जो देर रात तक चलता रहता है। बहरहाल, मेले के आयोजन को लेकर स्थानीय प्रशासन समाधि स्थल पर विधि-व्यवस्था की तैयारी कर ली गई है. इसके लिए बाबा सेवा समिति के सेवादारों के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन की बैठक हुई. सभी ने मेले को सफल बनाने का निर्णय लिया है.

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