गिरिडीह: भाकपा माओवादियों के खिलाफ गिरिडीह सीआरपीएफ और जिला पुलिस को सोमवार को बड़ी सफलता मिली है। जानकारी के मुताबिक नक्सल प्रभावित पीरटांड़ थाना इलाके के नवासार गांव के जंगल में नक्सलियों के गुप्त मीटिंग होने की सूचना पर कांबिंग ऑपरेशन शुरू हुआ और जंगल के एक घर से नक्सली साहित्य के साथ रोजमर्रा की घरेलू सामग्री, दवाइयां व कई अन्य सामान बरामद किये गये। कांबिंग ऑपरेशन में सीआरपीएफ सातवीं बटालियन के अधिकारियों के साथ जिला पुलिस बल के जवान शामिल थे।
पुलिस विरोधी से जुड़ी नारेबाजी के पोस्टर बरामद
बताया जाता है कि पुलिस और सीआरपीएफ के आने की भनक नक्सलियों को लगने के बाद नक्सली भाग खड़े हुए। जिस झोपड़ीनुमा घर में नक्सलियों का दस्ता बैठक कर रहा था। उसी घर से सीआरपीएफ ने तीस मीटर कोडेक तार के साथ एक कंटेनर, 15 से अधिक कंबल, खैनी, नमक के साथ कई घरेलू समान के साथ नक्सली साहित्य और पिट्ठू बैग और सरकार और पुलिस विरोधी नारेबाजी से भरे काफी पोस्टर बरामद किये है।
सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने का था मकसद
जानकारी के अनुसार कंटेनर का इस्तेमाल नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बल को नुकसान पहुंचाने के मकसद से रखा गया था। पुलिस और सीआरपीएफ ने नवासार के जिस घर से सामानों को बरामद किया है, वो भी किसी नक्सली संगठन से जुड़े किसी समर्थक का बताया जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। जानकारी के अनुसार नवासार जंगल के घर में कई बड़े हार्डकोर नक्सली के मौजूद होने की सूचना पर पुलिस और सीआरपीएफ ने कांबिंग ऑपरेशन शुरू किया था।
गिरिडीह: जो नोटिस सात साल पहले अनुमंडल पदाधिकारी के दफ्तर से चला था, उस पर कार्रवाई क्या हुई, पता नहीं..! अब उससे ही मिलता जुलता पत्र अंचल अधिकारी के दफ्तर से निकला है…! कार्रवाई होगी..? अहम सवाल यही है..? कहानी मधुबन में स्थित गुणायतन और सम्मेदाचल विकास कमेटी के बीच बहने वाले उस नाले की है, जिससे बीसपंथी कोठी से लेकर तेरहपंथी और कच्छी भवन की गंदगी बहकर इलायची मति माता जी के आश्रम से होती हुई शाश्वत और प्रकाश भवन के पीछे से निकलकर पश्चिम को ओर बहती थी। इस संबंध में गुणायतन संस्था को डुमरी अनुमंडल पदाधिकारी ने 21 मई 2015 को नोटिस जारी किया था, और ठीक 7 साल 7 महीने बाद कुछ ऐसा ही नोटिस नाले के अतिक्रमण को लेकर पीरटांड़ अंचलाधिकारी ने श्री दिगंबर जैन सम्मेदाचल विकास कमेटी को भेजा है। मतलब पहले नोटिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, अब दूसरे नोटिस पर खानापूर्ति करने की तैयारी है…!
सात साल पहले और सात साल बाद
नाले का नोटिस, नतीजा शून्य.. जो अनुमंडल पदाधिकारी न कर
पाए वो अंचल अधिकारी करेंगे..?
2015 के नोटिस को आसान भाषा में ऐसे समझिए?
21 मई 2015 का नोटिस सुभाष जैन, प्रबंधक, गुणायतन न्यास ट्रस्ट को दिया गया।
इस नोटिस में साफ लिखा है कि गुणायतन ने सरकारी बंदोबस्ती भूमि का अवैध तरीके से क्रय किया और अवैध तरीके से जमाबंदी कायम कराकर दखल कब्जा किया..।
नोटिस में कहा गया है कि मौजा मधुबन में थाना नंबर 97, खाता नंबर 36, प्लॉट नंबर 375, रकवा 1.18 एकड़ सर्वे नाला की जांच अंचल अधिकारी, पीरटांड़ से कराई गई।
जांचोपरांत अंचल अधिकारी द्वारा यह प्रतिवेदित किया गया कि उक्त सर्वे नाला का डायवर्सन गुणायतन ट्रस्ट की भूमि पर किया गया है।
प्लॉट नंबर 367,374,377 और 378 में करने हेतु उपायुक्त, गिरिडीह के निर्देश का भी जिक्र है जिसमें कहा गया है कि “गुणायतन ट्रस्ट की जमीन के मध्य बह रहे नाले का डायवर्सन गुणायतन की जमीन के प्लॉट संख्या 367,377 और 378 पर करने में गिरिडीह के उपायुक्त को कोई आपत्ति नहीं है।
सर्वे नाले को भरने का कोई भी निर्देश नहीं दिया
उक्त पत्र में सर्वे नाले को भरने के संबंध में कोई भी निर्देश नहीं दिया गया है, फिर भी गुणायतन द्वारा उक्त सर्वे नाले को भरकर गुणायतन की जमीन में मिला लिया और सर्वे नाले का डायवर्सन प्लॉट नंबर 377 की भूमि पर कर दिया गया।
अनुमंडल पदाधिकारी के पत्र में कहा गया है कि गुणायतन ट्रस्ट ने प्लॉट संख्या 377 रकवा 0.90 एकड़ भूमि मौजी तूरी, पिता- हेमलाल तुरी, साकिन– मधुबन को कृषि कार्य एवं परिवार के भरण-पोषण करने के लिए सरकार द्वारा बंदोबस्ती में दी गई थी।
कालांतर में गुणायतन ट्रस्ट द्वारा उक्त भूमि जिसका रकवा 0.85 एकड़ है, को अवैध तरीके से क्रय और जमाबंदी कायम कराकर दखल कब्जा कर लिया गया है, जो अवैध और गैरकानूनी है।
अब 21 दिसंबर 2022 के नोटिस को समझिए..!
यह नोटिस अंचल अधिकारी ने श्री दिगंबर जैन सम्मेदाचल विकास कमेटी को भेजा है।
नोटिस में कहा गया है कि कमेटी द्वारा खाता नंबर 36, प्लॉट नंबर 375, रकवा 1.18 एकड़ भूमि जो सर्वे खतियान में गैर मजरुवा खास जमीन नाला है।
संस्था द्वारा नाले की ढलान को काट कर नाले की भूमि पर कब्जा करने की बात कही गई है।
अब हमारे अहम सवाल पर जरा गौर फरमाएं
जब 7 साल 7 महीने पहले अनुमंडल पदाधिकारी की ओर से जो नोटिस भेजा गया था उस पर क्या कार्रवाई हुई?
जब प्लॉट संख्या 377 पर नाले को गुणायतन संस्था द्वारा डायवर्ट कर दिया गया तो फिर किस आधार पर श्री सम्मेदाचल विकास कमेटी को अंचल अधिकारी द्वारा नोटिस जारी किया गया ?
2015 के नोटिस में इस बात का जिक्र है के अंचल अधिकारी ने सर्वे नाला के डायवर्सन की रिपोर्ट अनुमंडल पदाधिकारी को भेजी थी, तो क्या मान लिया जाए क्या अंचल अधिकारी ने जो रिपोर्ट भेजी वह फर्जी थी?
2015 के नोटिस में , इस बात का भी जिक्र है कि गुनायतन संस्था ने सर्वे नाले को भरकर गुनायतन की जमीन में मिला लिया, तो फिर सम्मेदाचल विकास कमेटी को नोटिस भेजने का आधार क्या है ? इस बात का जवाब अंचल अधिकारी को देना चाहिए!
अनुमंडल पदाधिकारी के नोटिस में इस बात का भी जिक्र है कि ३७७ नंबर प्लॉट मौजी तूरी के नाम से कृषि कार्य एवं परिवार के भरण पोषण करने हेतु सरकार द्वारा बंदोबस्ती में दिया गया है तो क्या मौजी तुरी को उक्त जमीन वापस की गई? अंचल कार्यालय को उस अंचलाधिकारी का नाम बताना चाहिए जिसने 2015 में सर्वे नाला का जांच प्रतिवेदन दिया था?
सवाल उठता है कि जब 377 नंबर प्लॉट पर नाले का डायवर्सन कर दिया गया, और 375 प्लॉट जिसपर सर्वे का नाला था, उसे अपनी जमीन पर मिला लिया गया (जैसा 2015 के नोटिस में लिखा गया है), तो 375 नंबर प्लॉट पर सम्मेदाचल विकास ने कैसे अतिक्रमण किया? ये सबसे बड़ा सवाल है.
राजगीर: राजगीर स्थित शांति स्तूप घुमने जाएं तो अपने मोबाइल का विशेष ध्यान रखें…अगर आप चौकन्ना नहीं हैं तो, मोबाइल स्नैचिंग के शिकार हो जाएंगे. मोबाइल गायब होने की शिकायत पर वहां का स्थानीय प्रशासन भी आपका साथ नहीं देगा. क्योंकि वहां स्नैचर गिरोह सक्रिय है और पुलिस पूरी तरह से निष्क्रिय है. पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण मोबाइल स्नैचिंग करना वहां आसान है. हजारीबाग के मूल निवासी और मुंबई में कार्यरत भैया नीरव कुमार अपने परिवार के साथ शांति स्तूप घुमने गए थे. तभी फोटो खींचते समय एक लड़के ने भीड़ का फायदा उठाकर उनका मोबाइल लेकर चंपत हो गया. नीरव कुमार तत्काल इसकी सूचना राजगीर थाने में दी. लेकिन 15 दिन बाद भी पुलिस उनका मोबाइल बरामद नहीं कर सकी है. इस बीच नीरव ने कई बार राजगीर थाने में फोन कर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन थाने में कोई भी फोन रिसीव नहीं कर रहा है.
पुलिस पर मोबाइल स्नैचर से मिलीभगत का आरोप
नीरव कुमार ने बताया कि जिस दिन उनके मोबाइल की छिनतई हुई, उसी समय थाने में तीन-चार लोग भी अपने मोबाइल गुम या चोरी होने की शिकायत करने थाने पहुंचे थे. लेकिन पुलिस ऐसी शिकायतों पर सक्रियता नहीं दिखाई. थाने में मोबाइल गुम होने या चोरी की शिकायत के लिए एक फार्म बना हुआ है. लेकिन अगर किसी के मोबाइल को मोबाइल स्नैचर उड़ा लेता है तब भी राजगीर थाने में उपलब्ध फॉर्म में अंकित नहीं हो सकता. क्योंकि यहां मोबाइल चोरी या गुम हो जाने की शिकायत के लिए फॉर्म बना हुआ है. वहां लगे सीसीटीवी भी खराब हैं. भुक्तभोगियों ने पुलिस पर मोबाइल स्नैचर से मिलीभगत का आरोप लगाया है. यही कारण है कि मोबाइल स्नैचर आसानी से मोबाइल स्नैचिंग के काम को अंजाम दे रहे हैं. पुलिस अगर सक्रियता दिखाए तो मोबाइल स्नैचर की धर-पकड़ की जा सकती है. शांति स्तूप के आसपास से प्रतिदिन 7-8 मोबाइल गायब हो जाते हैं और लोगों द्वारा स्थानीय प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद पुलिस हरकत में नहीं आती और न ही कार्रवाई करने में दिलचस्पी दिखाती है.
ये है नीरव के मोबाइल के डिटेल्स
नीरव कुमार ने 11 दिसंबर को राजगीर थाने में मोबाइल चोरी हो जाने की शिकायत दर्ज करायी है. नीरव कुमार राजा बंगला रोड, ओकनी (हजारीबाग) के मूल निवासी हैं. उन्होंने 13 अगस्त 2022 मोबाइल खरीदा था. मात्र चार माह में एक लाख से ऊपर के मोबाइल की छिनतई से नीरव काफी परेशान हाल हैं. नीरव ने अपने स्तर से बिहार के कई उच्चाधिकारियों को मोबाइल बरामद करने की गुहार लगायी है. लेकिन अभी तक कहीं सुनवाई नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल में पर्सनल डाक्यूमेंट्स मसलन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक एकाउंट्स के डिटेल्स आदि लोड हैं. नीरव लंबे समय से मुंबई में एक नेशनल मल्टी कंपनी में सिगमेंट मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं.
साहिबगंज: जिले में अवैध लॉटरी कारोबार के तार अब खुलने लगे हैं. पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. इसी कड़ी में राधानगर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस लाइन मैदान में डीएसपी जग नारायण तिवारी ने बताया कि 36 करोड़ 15 लाख 75 हजार रुपये की लॉटरी टिकट जब्त किए गए हैं. राधा नगर थाना प्रभारी राकेश कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि मसना गांव में सिठुन नदाब बरहरवा से अवैध लॉटरी के टिकट अपने घर रखे हुए हैं. सूचना मिलते ही राधा नगर थाना प्रभारी राकेश कुमार ने वरीय पदाधिकारियों को जानकारी दी. सूचना मिलते ही राजमहल एसडीपीओ जग नारायण तिवारी के नेतृत्व में छापामारी दल का गठन किया गया. छापेमारी दल के मसना गांव पहुंचते ही एक युवक पुलिस को देखकर भागने लगा. पुलिस ने उसे रोककर पूछताछ की तो उसने अपना नाम सिठुन नदाब बताया. उसके घर और टेंपू की तलाशी लेने पर 29 पैकेट लॉटरी के टिकट बरामद किये गये.
पुलिसिया पूछताछ जारी
पुलिस ने बताया कि जितनी लॉटरी के टिकट बरामद किए गए हैं, उसकी अनुमानित कीमत 36 करोड़ 15 लाख 75 हजार रुपये मानी जा रही है. अवैध लॉटरी के टिकट मिलने पर पुलिस ने युवक को गिरफ्तार करते हुए सभी लॉटरी टिकट को जब्त कर लिया है. इस मामले में राधा नगर थाना प्रभारी राकेश कुमार के आवेदन पर थाना कांड सं. 265/22 दर्ज कर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है. पूछताछ में गिरफ्तार युवक ने बताया कि लॉटरी बरहरवा के मुजम्मिल शेख के यहां से लेकर आ रहा था. पुलिस अवैध लॉटरी टिकट रैकेट के पर्दाफाश के लिए कार्रवाई कर रही है.
रांची : झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की रांची जिला समिति द्वारा झारखण्ड आन्दोलन के प्रणेता एवं झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के पूर्व केन्द्रीय अध्यक्ष वीर शहीद निर्मल महतो की 72वीं जयन्ती के अवसर पर रांची स्थित शहीद निर्मल महतो चौक पर अवस्थित उनकी आदमकद प्रतिमा पर राज्य समन्वय समिति के सदस्य सह झामुमो के केन्द्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने रविवार को बतौर मुख्य आतिथि के रूप में माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया। इस मौके पर श्री पांडेय ने कहा कि आज भाजपानीत केंद्र सरकार का रवैया झारखण्डियों के प्रति नकारात्मक रहा है। उन्हें आदिवासी मुख्यमंत्री पच नहीं रहा है। किसी न किसी रूप में भाजपा आदिवासियों को कुचलने का काम कर रही है। झारखण्ड के शहीदों को भी मिटाने का काम कर रही है। हेमन्त सोरेन की सरकार आज जिस तरह से काम कर रही है, उससे विरोधियों के अंदर खलबली है. 2024 के चुनाव में भी झारखंड में हमारी सरकार बनेगी।
ये लोग थे शामिल
इस मौके पर राज्यसभा सांसद डॉ महुआ माजी, झामुमो केंद्रीय सदस्य पवन जेडिया, जिलाध्यक्ष मुस्ताक आलम, पूर्व केन्द्रीय सदस्य अफरोज अन्सारी, जिला सचिव डॉ हेमलाल मेहता, जिला उपाध्यक्ष जनक नायक, अश्विनी शर्मा, बीरू साहू, लालजय नाथ शहदेव, आदिल इमाम, जुलफीकार खान, डॉ तालकेश्वर महतो, डॉ बबलू राम, जावेद अख्तर अन्सारी, जितेन्द्र गुप्ता, मंटू लाला, सुनील साहू, परविन्दर सिंह नामधारी, अजित नायक, रमेश साहू, सागर वर्मा, नयनतारा उरांव, मो कयूम, फरीद, उषा उरांव, परवेज आलम गुड्डू, नंदकिशोर चंदेल, राकेश वर्मा, राधा देवी, अजीत नायक, प्रदीप मिर्धा, नीरज वर्मा, मुकेश महतो, राहुल वर्मा, गोपाल पांडे, ओम शर्मा, अजय उरांव, सुरज साहू, अरुण महतो, सुमित कुमार, सहज नाथ महतो, मंगल मिंज, राजेश सिंह, मो अकबर कुरैशी, सृजन, निखिल, सहनावज हुसैन, सद्दाम, कामरान, दिनेश तिग्गा, किशोर कुमार, नईम खान, मो साजिद, विपिन पांडे, मोहन गोस्वामी, विनीत सिंह, गौरव (माही), अमर कुमार महतो, राकुमार प्रजापति, नसीम खान, अब्दुला हबीब, आसिफ, अवधेश, सोमू बनर्जी, मो अदीब अशर्फी, रमजान आदि शामिल थे।
गिरिडीह :(कमलनयन) झारखड सत्कार के श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता एवं केन्द्रीय शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी के सार्थक प्रयास से तजाकिस्तान में फंसे झारखंड के गिरिडीह, हजारीबाग व बोकारो जिले के सभी 44 मजदूरों की सोमवार सुबह को वतन वापसी होगी। जानकारी के मुताविक वतन वापसी के लिए सुबह 10:50 बजे सभी मजदूर तजाकिस्तान से उड़ान भरेंगे और 12:50 बजे दिल्ली पहुंचेंगे। अपनों की घर वापसी को लेकर परिजनों में खुशी का माहौल है। परिजनों ने केन्द्रीय राज्यमंत्री एंव हेमंत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है.
एजेंट ने मजदूरों का कॉल तक रिसीव नहीं किया
बताते चलें कि दलालों के चक्कर में ज्यादा पैसे की लालसा में सभी 44 मजदूरों को तजाकिस्तान गये थे। लेकिन समय पर तनख्वाह नहीं मिलने, खाने-पीने में हो रही परेशानी की जानकारी मजदूरों ने एजेंट को मोबाइल पर देने की कोशिश की. एजेंट ने मजदूरों का कॉल तक रिसीव नहीं किया। जिससे विवश होकर मजदूरों ने प्रवासी मजदूरों के हित में कार्य करनेवाले सिकन्दर अली के माध्यम से तजाकिस्तान से घर वापसी कराने की गुहार लगाई। सिकन्दर अली ने तत्परता दिखाते हुए अपने प्रवासी ह्वाट्सएप ग्रुप और फेसबुक के माध्यम से सारे मीडिया एवं क्षेत्र के सारे जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी। इसके बाद जनप्रतिनिधि एवं विभागीय मंत्री ने उनकी घर वापसी के लिए हरसंभव उपाय कर उनकी वापसी एवं उनके बकाये वेतन का प्रयास किया। फलस्वरूप मजदूरों के दो माह की बकाया राशि का भुगतान हो पाया, और कल घर वापसी भी हो जाएगी.
सिकन्दर अली ने मजदूरों का दियासाथ
इधर, इस मामले को लेकर प्रवासी मजदूरों की आवाज उठाने वाले सिकन्दर अली का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है, जब काम की तलाश में मजदूर विदेश जाते हैं। वहां पर उन्हें कई तरह की यातनाएं झेलनी पड़ती है। बड़ी मुश्किल से वे वतन लौट पाते हैं ऐसे में सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। गिरिडीह से हर साल काम को लेकर दलालों के चक्कर पड़कर काम के लिए विदेश चले जाते हैं और चंद महीनों बाद वहां मजदूरों के समक्ष कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है. इसके बाद दलाल कुछ कर नहीं पाता या वह फरार हो जाता है. यह सिलसिला लंबे समय से जारी है. लेकिन गरीबी-बेरोजगारी के कारण लोगों को विदेश जाना ज्यादा आसान लगता है.
वतन वापसी करनेवाले मजदूरों की सूची
गिरिडीह के बगोदर प्रखंड के अडवारा के संतोष महतो, सरिया प्रखंड अंतर्गत लुतयानो के तेजो महतो, चिचाकी के दशरथ महतो, नुनूचंद महतो, गणेश महतो, डुमरी प्रखंड अंतर्गत दुधपनियां के नंदू कुमार महतो, खेचगढी के प्रदीप महतो, चेगडो सोहन महतो, गिरि महतो, डुमरी के बीरेन्द्र कुमार, घुजूडीह के नकुल महतो। हजारीबाग जिले के बिष्णुगढ़ अंतर्गत खरना तिलेश्वर महतो, प्रदीप गंजु, रामेश्वर महतो, महाबीर महतो, रीतलाल महतो, गोवर्धन महतो, मीतलाल महतो, भलुआ के जगदीश महतो, बासुदेव महतो, प्रेमचंद महतो, बरहमदेव महतो, गोविंदपुर, बालेश्वर महतो, आशोक सिंह, जोबर के आयोध्या महतो, उमेश महतो, टेकलाल महतो, तालो महतो, बीरू सिंह, संतोष महतो, बंदखारो के मंगर महतो, नारायण महतो, कृष्णा कुमार मंडल, दिलीप महतो, विनय महतो, मनोज कुमार महतो, त्रिभुवन महतो, लालदेव महतो, बसंत मंडल तुलसी महतो, नेरकी के रोहित सिंह, बोकारो जिले के गोमियां प्रखंड अंतर्गत सिधाबारा के मुकेश महतो,महुआटांड के टीको महतो,बोकारो थर्मल के कमलेश अगरिया शामिल हैं।
Bollywood actor Anil Kapoor is widely adored by his fans He is noted for his charming personality, both on and offscreen. He is always quick to crack the joke or fire off a humorous retort. In one of the interviews, Anil Kapoor said that life is all about humour and fun. Here are some interesting facts about Anil Kapoor.Interesting facts about Anil Kapoor:66 & Still Jhakaas:The veteran actor, when asked about his secret behind looking so young at his age, revealed that he holds happiness inside and outside. He is also known for his unique sense of style and fashion.Evergreen dialogues of Anil Kapoor:Here are a few evergreen dialogues which made Anil Kapoor one of the famous actors in Hindi cinema:Maska hai maska… Ek dum jhakaas! (Yudh)Police ki goli mein itna loha hai, Ek baar thok di na… toh Zindagi bhar tere Khoon mein iron ki kami nahi hogi – (Shootout At Wadala)Shatranj ke Mohre wahi hai, magar baazi palat Chuki hai – (Meri Jung)Police asli ho ya nakli, aati sa**i hamesha late hi hai – (Musafir)Aaj Tak tum log baimaani aur zulm ka bazaar garam Karte rahey, Magar ab tumharey zulm aur paap ke pyale chalak uthe hai, ab tumhare ek-ek jurm ka hisaab liya jayega – (Mr.India)His debut lead role came in Woh 7 Din:Anil Kapoor made his debut lead role in the film, Woh 7 Din, which was a remake of the hit Tamil film, Antha Ezhu Naatkal, released in 1981. He appeared alongside Padmini Kolhapure in Woh 7 Din. It also had Naseeruddin Shah in a crucial supporting role.Anil Kapoor was not the first choice for Shekhar Kapur’s iconic superhero film, Mr. India:According to reports, the lead role for Mr. India was initially offered to Amitabh Bachchan but after it was turned down by Big-B, Kapoor was roped in to portray the character. It proved to be a major success in Kapoor’s career and the film is often regarded as one of the greatest Hindi movies ever made.A Trained singer:Many of us did not know that Anil Kapoor is a trained semi-classical singer and an all-rounder when it comes to talent. He has sung Pyar Kiya Nahi Jaata from Woh 7 Din in 1983 and I Love You from Hamara Dil Aapke Paas Hai in 2000.
रांची : ग्रामीण उपकार संस्थान झारखंड, इंडियन योग एसोसिएशन, दी ऑल इंडिया बॉय स्काउट्स एसोसिएशन, झारखंड लेखक संघ, अखिल भारतीय विज्ञान दल, लखनऊ के तत्वावधान में शनिवार को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अवसर पर साइबर क्राइम की रोकथाम के लिए उचित डिजिटल वित्तीय प्रयोग विषय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता दी ऑल इंडिया बॉयज स्काउट एसोसिएशन के आयुक्त अरविंद कुमार लाल ने की. इस अवसर पर ऊर्जा संरक्षण पर प्रदर्शनी के जरिए ऊर्जा बचाने के लिए जागरूक किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा संरक्षण के लिए स्वचालित मॉडल भी प्रस्तुत किया गया।
ये लोग थे शामिल
सेमिनार के मुख्य अतिथि घनश्याम सिंह रजिस्ट्रार, झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी जबकि, सम्मानित अतिथि रामलाल, सेवानिवृत्त आचार्य मारवाड़ी कॉलेज अमित सिंह सचिव इंडियन योग एसोसिएशन चंदन प्रजापति, अध्यक्ष झारखंड राइटर एसोसिएशन सहायक, अध्यापक रांची विश्वविद्यालय रामाशंकर सिंह, वित्त पदाधिकारी, लखनऊ निरंजन कुशवाहा, नेटवर्क सिक्योरिटी प्रशासक, झारखंड सरकार, अशोक कुमार, आईटी एक्सपर्ट, कृष्णा क्यूटी मार्क्स उपरोक्त विषयों पर विशेष जानकारी किए कार्यक्रम का संचालन विक्रांत विश्वकर्मा राज्य सचिव दी ऑल इंडिया बाय स्काउट एसोसिएशन ने किया.
दो सत्र में हुआ सेमिनार का आयोजन
सेमिनार में इंडियन योग एसोसिएशन इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट तकनीकी शिक्षा परियोजना झारखंड राइटर एसोसिएशन क्यूटी मार्क्स करियर सेंटर कैंब्रियन पब्लिक स्कूल कांके रोड संत अन्ना गर्ल्स हाई स्कूल मांडर, उत्क्रमित उच्च विद्यालय उच्च रिमांडर न्यू कैंब्रियन पब्लिक स्कूल के टीचर धातु ऑल इंडिया बॉय स्काउट एसोसिएशन डॉ भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी लखनऊ के पदाधिकारियों-विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सेमिनार में भाग लेकर जानकारियां आदान-प्रदान की और लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया. कार्यक्रम का संयोजक कुलसचिव ग्रामीण संस्थान के खेड़ी तिवारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम में आए प्रतिभागियों को कार्यक्रम की सफलता के लिए आभार प्रकट किया. कार्यक्रम का आयोजन रांची प्रेस क्लब के सभागार में हुई और यह सेमिनार 2 सत्र में आयोजन किया गया.
Speaker – Ashok Kumar, IT Security and Cyber crime Expert
रांची : हेमंत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम का वक्तव्य कि कुरमी को एसटी सूची में शामिल करने का प्रतिवेदन भेजा जायगा, तो वह वास्तव में आदिवासियों के लिए डेथ-वारंट साबित होगा। इसके लिए जेएमएम का सोरेन खानदान दोषी है। आदिवासी विरोधी सोरेन खानदान के इस खतरनाक षड्यंत्र के खिलाफ 1 जनवरी, 2023 को सेंगेल दुमका में फिर एक संथाल हूल (विद्रोह) का आगाज करेगा। आदिवासी सेंगेल अभियान राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने शनिवार को एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि पूरे देश के आदिवासी जुटेंगे, मशाल जुलूस निकालेंगे, सोरेन परिवार हटाओ आदिवासी बचाओ का शंखनाद के साथ जनसभा करेंगे। साहिबगंज में आदिवासी महिला की बर्बरतापूर्ण हत्या के खिलाफ भी आवाज बुलंद करेंगे। क्योंकि इसके पीछे भी सोरेन खानदान के वोट बैंक की राजनीति और धर्मांतरण की साजिश है।
सरकार की नियोजन नीति एक छलावा
श्री मुर्मू ने कहा कि वोट और नोट के लालच में सोरेन परिवार ने पूरे संतालपरगना को ईसाई मिशनरियों और मुसलमानों के हाथों सौंप दिया है। सोरेन परिवार ने हासा और भाषा विजय दिवस अब तक क्यों नहीं मनाया? संताली को झारखंड की प्रथम राजभाषा क्यों नहीं बनाया? सरना धर्म कोड के मामले पर टालमटोल का रवैया क्यों अपना रहे हैं? केवल लोभ-लालच और राजनीतिक स्टंटबाजी के लिए क्यों गलत स्थानीयता नीति और नियोजन नीति बनाकर शिक्षित बेरोजगार नवयुवकों को छलने का काम किया जा रहा है? इन सब बातों का जवाब मांगा जाएगा और विरोधस्वरूप हेमंत सरकार का पुतला दहन किया जाएगा।
वह दौर याद कीजिये, जब मधुबन शिखरजी में न तो भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी का दफ्तर था, न दिगंबर जैन महासमिति का। उस दौर में पर्वत की यात्रा करने में तीर्थयात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पैदल मार्ग कच्चा और बेहद पथरीला था। हर वर्ष पूरे मार्ग पर बारिश के उपरांत मिट्टी डाली जाती और पुनः बारिश में सब कुछ बह जाता था। उस दौर में जयनारायण जैन और प्रकाश जी सासनी ने पैदल मार्ग को पीसीसी पथ निर्माण करने का बीड़ा उठाया था। बिना किसी कार्यालय के कार्ययोजना तैयार की गयी… जब काम प्रारंभ हो गया उसके बाद कार्यालय खुला और दानदातारों ने मुक्तहस्त से दान दिया।
जरा उस दौर को याद करें…!
उस दौर को भी याद कीजिये, जब आरा के रहने वाले नागेन्द्र कुमार जैन ने बीसपंथी कोठी के ट्रस्टी रहते हुए मधुबन में सीतानाला से पानी पाइपलाइन के जरिये लाने में कड़ी मशक्कत की थी और उसमें वह सफल भी हुए थे। उनके व्यक्तिगत प्रयास से ही हर घर में टैब वाटर की व्यवस्था की गयी थी, जो 24 घंटे चला करता था। हालांकि कालांतर में जलापूर्ति की व्यवस्था अपग्रेड होती गयी। उन्होंने ही एक ग्राम स्तर की कमेटी बनाकर मधुबन की साफ-सफाई के सामुदायिक दायित्व की नींव रखी। ये उनकी सामुदायिक सोच थी और जयनारायण जैन और प्रकाश जी सासनी की शिखरजी के प्रति अगाध श्रद्धा के भाव। एक में सर्वजन और एक में बहुजन के प्रति समर्पण भाव था।
अब आज के दौर में चले आयें…!
अब मधुबन में 50 से ज्यादा जैन संस्थाएं हैं, 100 से ज्यादा मंदिर हैं और 1000 के आसपास मंदिरों में तीर्थंकरों की मूर्तियां हैं। उस दौर में उंगलियों में जैन संस्थाओं को गिना जा सकता था। जिनमें तेरहपंथी कोठी, बीसपंथी कोठी, जैन श्वेतांबर सोसाइटी थी. इसके अलावा भोमिया जी भवन और कच्छी भवन निर्माणाधीन था। संतों का आगमन होता था तो इन्हीं संस्थाओं में उनका चातुर्मास हुआ करता था। लेकिन धीरे-धीरे नयी संस्थाएं पंथ और प्रदेश आधारित खुलने लगीं और सम्मेद शिखरजी के प्रति जो समर्पण भाव था, वह मठ निर्माण की तरफ कन्वर्ट हो गया। इसी दौर में भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी का हाइटेक कार्यालय खुला और सम्मेद शिखरजी के विवादों को लेकर चल रही अदालती लड़ाई के लिये धन एकत्रित करने की मुहिम चली। शिखरजी विकास के नाम पर एक संस्था का गठन हुआ और धन संग्रह कर उत्तर प्रदेश प्रकाश भवन का निर्माण हो गया। यह धर्मशाला काफी उस दौर में सबसे आधुनिक हुआ करती थी। उसके बाद प्रदेश, पंथ और आगम के नाम पर संस्थाएं खुलती गयीं और शाश्वत तीर्थ की रक्षा को लेकर सोच को जंग लगती चली गयी। पुरानी संस्थाएं कुछ को छोड़कर यथावत बिना अपग्रेडेशन के चलती रहीं और नित नयी संस्थाओं ने आधुनिक व्यवस्थाओं की वजह से दान दातारों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया क्योंकि नयी संस्थाएं मठ विचारों से प्रेरित थीं।
पर्यटन स्थल को लेकर जैन धर्मावलंबियों में आक्रोश
बहरहाल, वर्तमान में सम्मेद शिखरजी की पवित्रता को लेकर आन्दोलन हो रहा है। इसलिये उन विचारों का समावेश जरूरी है जिनका नाता भूतकाल और वर्तमान से है और सम्मेद शिखरजी के भविष्य को नुकसान पहुंचाने में कारक बने हैं। एक ही सवाल है कि काश! ये संस्थाएं अपने विकास के साथ सामुदायिक विकास की गवाह बनी होतीं…! जैन समुदाय की कमजोरी की वजह से ही आज सरकार पारसनाथ को इको टूरिज्म की बात कर रही है. पर्यटन स्थान बनाया जाना जैन धर्मावलंबियों को कतई स्वीकार नहीं है. आज मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से पारसनाथ पहुंची करीब एक दर्जन महिला श्रद्धालुओं ने गुणायतन परिसर पहुंचकर मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज के समक्ष सरकार के इको टूरिज्म के फैसले का विरोध करते हुए वर्तमान में पारसनाथ की सुरक्षा पर सवाल खड़ा किया है. मुनिश्री ने महिला श्रद्धालुओं का भावनाओं से सरकार को अवगत कराने का आश्वासन दिया है. दरअसल, लंबे समय रेल यातायात की सुविधा बहाल करने की मांग की जा रही है, लेकिन जैन समुदाय की इस मांग को सरकार नजरअंदाज करती आ रही है.
डीसी ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने का निर्देश दिया
इधर, भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ कमेटी की ओर से झारखंड के मुख्यमंत्री को पांच पन्ने की चिट्ठी भेजकर सम्मेद शिखर जी तीर्थक्षेत्र की तमाम सुरक्षा व्यवस्था मुकम्मल करने की मांग की है. चिट्ठी में कहा गया है कि आए दिनों पर्वत वंदना मार्ग में अनैतिक कार्य हो रहे हैं. इसके कारण पारसनाथ की पवित्रता व शुद्धता का सवाल उत्पन्न हो गया है. हालांकि सीएम ने इसपर त्वरित संज्ञान लेते हुए विभागीय सचिव मनोज कुमार को निर्देश दिया है. सचिव के निर्देश पर गिरिडीह के डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने गिरिडीह के एसपी व एसडीओ को तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया है. डीसी ने वंदना पथ में जगह-जगह पुलिस बलों की तैनाती करने का निर्देश दिया है. श्रद्धालुओं के साथ डोली वाले की मनमानी की शिकायत पर फौरन कार्रवाई करने की बात कही गई है. हालांकि श्रद्धालुओं का मानना है कि इस निर्देश से असामाजिक तत्वों पर कोई खास असर नहीं होता है. किसी भी स्थानीय प्रशासन का नियंत्रण नहीं है. वहीं पर्यटन स्थल बनाने की बात से पारसनाथ की धार्मिक पवित्रता नष्ट होने की आशंका जैन समाज व्यथित है.