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Wednesday, July 1, 2026
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लोहार को OBC में रखने के विरोध में अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी, ST का दर्जा हासिल करने की होगी जद्दोजहद

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नारायण विश्वकर्मा

लोहार समुदाय को एसटी की सूची में शामिल करने की मांग वाली याचिका झारखंड हाईकोर्ट में खारिज होने के बाद अब इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी है. बहुत जल्द सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी. याचिकाकर्ता गिरिडीह निवासी दशरथ प्रसाद शर्मा ने कहा कि यह कितनी विचित्र बात है कि लोहारा (कोई जाति समुदाय नहीं) को एसटी बताकर लोहार समुदाय को एसटी सूची से हटा कर ओबीसी बताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट में सुनाए गए फैसले को भी मीडिया ने सभी तथ्यों को उजागर नहीं किया है, यह मीडिया का अर्द्धसत्य है. सही बात तो ये है कि राज्य सरकार का यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का ही उल्लंघन है।

लोहारा जाति केंद्र-राज्य सरकारों की जाति सूची में शामिल नहीं

उल्लेखनीय है कि संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां आदेश (संशोधन) अधिनियम 1976 में लोहार एसटी में अधिसूचित है. गजट में भी लोहार समुदाय को एसटी माना गया है. दुर्भाग्यपूर्ण यह है झारखंड सरकार ने 13 अगस्त 2019 द्वारा लोहार समुदाय के बदले लोहारा समुदाय को एसटी बता दिया है. जबकि लोहारा समुदाय का वजूद ही नहीं है. यहां तक कि झारखंड में 1932 के खतियान में भी लोहारा जाति बदले लोहार दर्ज है. झारखंड में अनुसूचित जनजाति में लोहरा और लोहारा को शामिल किया गया है. वहीं याचिकाकर्ता दशरथ शर्मा द्वारा इस संबंध में सूचना अधिकार के तहत मांगी गई रिपोर्ट में भी झारखंड में लोहारा नाम के किसी समुदाय का कोई वजूद नहीं बताया गया. लोहारा जाति के नाम पर कोई जाति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जाता.

झारखंड हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने को कहा

बता दें कि कुछ दिन पूर्व झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश शंकर की एक बेंच ने झारखंड सरकार के उस फैसले को सही बताया,सही बताया जिसमें अगस्त 2019 में लोहार जाति को एसटी की श्रेणी से बाहर करते हुए ओबीसी में शामिल किया गया है। याचिकाकर्ता दशरथ प्रसाद शर्मा और सरकारी वकील की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने लोहार को एसटी में शामिल करने के लिए दायर याचिका खारिज कर दी थी। इस याचिका में कहा गया था कि झारखंड सरकार ने लोहार जाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की श्रेणी से अलग करते हुए ओबीसी में शामिल कर दिया है। पहले लोहार जाति एसटी में थी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में ही सुनवाई संभव है.

लोहार-लोहरा और लोहारा के पेंच में उलझाया गया
इस संबंध में 13 और 23 जुलाई 2001 को लोहार जाति के सदस्यों द्वारा टीआरआई के निदेशक से विचार-विमर्श किया गया. समाज के विशिष्ट और जानकार लोगों ने बताया कि अंग्रेजी में लोहारा (Lohara) हिन्दी में लोहार (Lohar) जिसे स्थानीय भाषा में समाज द्वारा Lohra (लोहरा) कहा जाता है. जाति सूची में लोहार को लोहारा बताया गया है. दरअसल जातियों की सूची में हिंदी में कहीं लोहारा शब्द का जिक्र ही नहीं है. निदेशक ने सदस्यों को बताया कि बिहार सरकार द्वारा लोहारा,लोहरा को जाति सूची से विलोपित कर सिर्फ लोहार जाति दर्ज है. इस तथ्य के आधार पर पटना उच्च न्यायालय के फैसले के आलोक में बिहार सरकार द्वारा लोहार जाति के सदस्यों को अनुसूचित जनजाति का सशर्त औपबंधिक रूप से जनजाति का जाति प्रमाण पत्र निर्गत किया गया. इसके आधार पर सरकारी सेवकों को प्रोन्नति का लाभ भी दिया गया. वहीं सुप्रीम कोर्ट में लोहार जाति को पिछड़ी जाति एनेक्सर-ii एवं लोहरा-लोहारा को अनुसूचित जनजाति मानते हुए मुकदमा खत्म कर दिया गया.

5 साल बाद भी टीएसी ने फैसला नहीं दिया

बता दें कि 13 अगस्त 2019 को झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग द्वारा जारी पत्र में आवेदक दशरथ प्रसाद शर्मा को जो जवाब दिया गया, अब उसपर जरा गौर फरमाएं. लोहार जाति को झारखंड राज्य में अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के संबंध में विभाग ने बताया कि दशरथ प्र. शर्मा के पत्र सं-Jharkhand/Supreme Court Order/Lohar/2019/03, 10 मई 2019 के प्रसंग में उल्लेख है कि लोहार समुदाय को झारखंड राज्य के अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के संबंध में डॉ.रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान  के पत्र सं-281,3 अगस्त 2018 के द्वारा समर्पित प्रतिवेदन में मंतव्य दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा Civil Appeal no.-SLP-2688(C) no. of 1996/1569 of 1994 फैसले में लोहार जाति को अन्य पिछड़ी जाति के रूप में दर्शाया गया है. लोहार जाति में वह विशेषताएं नहीं जो अनुसूचित जनजातियों में निहित है. अत: लोहार जाति को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है. पत्र में यह भी कहा गया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, झारखंड की अधिसूचना सं-2767,13 सितबंर 2017 के द्वारा अन्य जातियों के साथ लोहार जाति के संबंध में मूल्यांकन के लिए जनजातीय परामर्शदातृ परिषद (टीएसी) की उपसमिति के द्वारा अध्ययन किया जा रहा है. हालांकि सूचना है कि टीएसी की उपसमिति में कभी इसका अध्ययन नहीं किया गया है.      

राम भक्तों के लिए

पिकनिक की मस्तीवाली सीटी के बदले, सीएम अगर सिस्टम की सीटी बजा पाते तो, शायद अंकिता को जीवनदान मिल जाता…!   

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नारायण विश्वकर्मा

झारखंड में सियासी हलचल के बीच दुमका में अंकिता हत्याकांड ने उबाल ला दिया है. इस मामले में बड़ी खबर ये है कि झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने संज्ञान लिया है. डीजीपी नीरज सिन्हा और मुख्य सचिव सुखदेव सिंह को तलब किया है. दुमका की इस लोमहर्षक घटना के बाद पूरे शहर में 144 लागू है और पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई है. पांच दिन के इलाज के बाद अंकिता ने आखिरकार सिस्टम की चौखट पर दम तोड़ दिया. सोमवार को अंकिता का अंतिम संस्कार कर दिया गया. अंकिता की मौत के बाद सरकार अब डैमेज कंट्रोल में लग गई है. हालांकि स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को यह मानना पड़ा है कि, कहीं ना कहीं सरकार से चूक हुई है. लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर बड़े सवाल उठाए जा रहे हैं. आखिर मंत्री अंकिता को देखने रिम्स क्यों नहीं गए? पिकनिक मनाने क्यों चले गए?

सरकार अंकिता की मौत के बाद ही क्यों जागा?

अंकिता तो अब हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़ कर निकल गई, पर वो सिस्टम के लिए कई सवाल छोड़ गई है, लेकिन ये भी कड़वी हकीकत है कि इसका जवाब कभी नहीं मिलेगा. अंकिता के नरपिशाच पड़ोसी ‘शाहरुख’ ने पेट्रोल छिड़क कर अंकिता को जलाया जरूर, पर सिस्टम ने तो उसे दूसरी बार जला कर मार डाला। वह तो मात्र 45 प्रतिशत ही जली थी. उसे समय रहते बचाया जा सकता था. 23 अगस्त से अंकिता रिम्स में जीवन और मौत से जूझ रही थी तो, उधर सिस्टम सरकार को पिकनिक के इंतजाम में व्यस्त दिखा. जबतक वह रिम्स में रही, बन्ना गुप्ता ने न तो उसकी सुध ली और न उन्होंने रिम्स प्रशासन को इलाज की मुकम्मल व्यवस्था करने की हिदायत दी. दुमका के विधायक बसंत सोरेन रांची में थे, पर उन्होंने भी मानव धर्म का निर्वाह नहीं किया. दूसरी ओर दुमका के भाजपा सांसद भी खोज-खबर लेने की जहमत नहीं उठायी. वह भी प्रशिक्षण शिविर में डटे रहे. कोई बयान जारी नहीं किया. अंकिता को फौरी तौर पर राहत पहुंचाने के मामले में दोनों ओर से खामोशी छायी रही.

दुमका के एमपी-एमएलए कहां हैं? और अब डैमेज कंट्रोल का नाटक

दुमका झारखंड की उपराजधानी है पर, वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था से सभी वाकिफ हैं. सुविधा के अभाव में अंकिता को रिम्स लाना पड़ा. कहा जा रहा है कि चंदा करके लोगों ने इलाज और रांची लाने का खर्च जुगाड़ किया. इसमें काफी समय लगा. सिस्टम अगर साथ देता, तो उसे एयरलिफ्ट किया जा सकता था. रांची में पूरा सरकारी महकमा है. लेकिन तमाम आलाधिकारी इससे बेखबर रहे. रिम्स की हालत को लेकर अभी हाल में झारखंड हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है. रिम्स में बदइंतजामी का आलम है. पीड़िता के इलाज में भी कोताही बरती गई. ये विभाग के मुखिया की कार्यशैली की पोल खोलता है. फिलहाल तो सरकार का कामकाज ही ठप्प है. अगर ऊपर से आदेश आ जाता तो, शायद रिम्स प्रशासन समुचित उपाय करता. अंकिता को इलाज के लिए दिल्ली नहीं ले जाने के सवाल पर भी मंत्री का गोलमोल जवाब था. कहा कि अगर परिवार कहता कि दिल्ली इलाज के लिए ले जाना है तो, जरूर भेजा जाता. मंत्री के इस तर्क से कोई सहमत नहीं हो सकता. उधर, सरकार गिरने के डर से बैठकों का दौर चल रहा था. लतरातू डैम जाने के कार्यक्रम में सभी व्यस्त और मस्ती में थे. मंत्री जी पीड़िता के परिवार चाह कर भी उनसे नहीं मिल सकते थे. मंत्री के इस हास्यास्पद बयान पर जनता ही गौर करे.

आखिर पांच दिनों तक सरकार कहां थी?

दरअसल, इस घटनाक्रम के बाद पूरे देश के लोग उबलने लगे, तब सरकार को होश आया. सीएम ने आनन-फानन में 10 लाख के मुआवजे की घोषणा की. वहीं राजभवन भी हरकत में आया. सरकार और सिस्टम अब घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं. अब रांची से लेकर दुमका तक सब एक स्वर से अंकिता के लिए न्याय मांग रहे हैं. अब तमाम तरह की घोषणाएं की जा रही हैं. बन्ना गुप्ता के मात्र यह कह देने से कि वे संवेदनशील हैं. राज्य सरकार गंभीर है. या फिर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. दोषी और अपराधी को स्पीडी ट्रायल चलाकर फांसी की सजा दिलाई जाएगी. घटना के बाद इस तरह के बयान दिए ही जाते हैं. लेकिन इस बयानबाजी से आपकी जिम्मेवारी खत्म नहीं हो जाती. सरकार की यह चूक अक्षम्य है. आखिर पांच दिनों तक सरकार कहां थी? इतनी बड़ी घटना के बाद दुमका के विधायक बसंत सोरेन भी रांची में थे. वहीं दुमका के सांसद कहां हैं? अभी तक उनका कोई बयान नहीं आया है.

सत्तापक्ष और विपक्ष अब अंकिता की मौत पर राजनीति का खेल खेल रहा है. राजनीतिक दल अब अंकिता हत्याकांड को कम्यूनल कलर देने की कोशिश कर रहे हैं. शुक्र है कि उस हत्यारे की गिरफ्तारी हो गई, वरना दुमका में उठे विरोध की लहर को शांत करना दुमका पुलिस-प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बन जाता. बहरहाल, पिकनिक की मौज-मस्ती में चूर सीएम मस्तीवाली सीटी की जगह अगर सिस्टम की सीटी बजा पाते तो शायद अंकिता को जीवनदान मिल सकता था.   

राम भक्तों के लिए

पीएम मोदी के विकास के मुद्दे पर देशवासी लड़ेंगे 2024 का चुनाव : अर्जुन मुंडा

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गिरिडीह: भारतीय जनता पार्टी के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण शिविर के समापन सत्र में भाग लेने मधुबन आये झाररवंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि इस बार 2024 का आम चुनाव देश की जनता पीएम नरेन्द्र भाई मोदी के सर्वांगीण विकास के मुद्दे पर लड़ेगी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारा देश आर्थिक,सामाजिक, राजनीतिक और वैश्विक व तकनीकी स्तर पर लगातार आगे बढ़ रहा है. श्री मुंडा सोमवार को यहा पत्रकारों से बात कर रहे थे।

अंकिता हत्याकांड का फास्टट्रेक कोर्ट में सुनवाई हो

उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि अमृत काल से लेकर अगले 25 वर्षों तक के कालखंड में देश को सभी स्तरों पर आत्मनिर्भर बनाकर विकसित करना है. यह भारत सरकार का संकल्प है और इस दिशा में भारत सरकार यथासंभव प्रयासरत है. झारखंड में ताजा राजनीतिक स्थिरता की बाबत मंत्री ने जेएमएम का बगैर नाम लिये कहा कि यह सवाल तो उनलोंगो से पूछा जाना चाहिये, जो लोग राज्य की राजनीतिक अस्थिरता के लिए जिम्मेवार है. दुमका की बेटी अंकिता कुमारी हत्याकांड पर श्री मुंडा ने कहा कि यह जघन्य ह्त्या है. पहले राज्य प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करना सुनिश्चित करे। इसके अलावा मेरी अदालत से अपील है कि फास्टट्रेक कोर्ट में मामले की सुनवाई हो ताकि शीघ्र बेटी के परिजनों को न्याय मिल सके।

राम भक्तों के लिए

झारखंड की सियासत का सत्ता संग्राम, सबसे बड़ा सवाल…आखिर किसकी होगी ताजपोशी…?

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 नारायण विश्वकर्मा
झारखंड में खनन लीज मामले को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है. भारत निर्वाचन आयोग में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई विधायक बसंत सोरेन के खिलाफ चल रहे मामले में चंद दिनों बाद फैसला आनेवाला है. चर्चा है कि चुनाव आयुक्त हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन के विरोध में फैसला दे सकता है. अगर ऐसा हुआ तो हेमंत सरकार को सीएम की कुर्सी गंवानी पड़ेगी. पिछले साल भर से हेमंत सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है. हेमंत सरकार को गिराने की पहली बार पिछले साल कोशिश हुई थी तो, मैंने ट्वीट किया था कि कोई भी आदिवासी सीएम झारखंड में अबतक अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है. पिछले तमाम घटनाक्रमों पर गौर करें तो, यह कहा जा सकता है कि अब वह घड़ी उनकी चौखट पर दस्तक दे रही है. अगर हेमंत सोरेन की सदस्यता चली जाती है, तब यह सवाल खड़ा हो जाएगा कि अब कौन बनेगा झारखंड का नया मुख्यमंत्री? इधर, चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस को भेज दी है. रिपोर्ट हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन दोनों को लेकर है. चुनाव आयोग की अनुशंसा पर राज्यपाल दिल्ली में विधि विशेषज्ञों से राय ले रहे हैं. 24 अगस्त तक राज्यपाल रांची लौट आएंगे.
कल्पना और सीता भी हैं दावेदार…!
वैसे हेमंत सोरेन की उत्तराधिकारिणी के रूप में उनकी पत्नी कल्पना सोरेन का नाम सहजता से तो लिया जा रहा है. पर उनके नाम पर झामुमो के अंदर सहमति कैसे बन पाएगी, ये अहम सवाल है. राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन के परिवार में से किसी एक नाम पर विचार चल रहा है. परिवार में शिबू सोरेन, उनकी बड़ी बहू विधायक सीता सोरेन के अलावा कल्पना सोरेन का नाम भी चर्चा के केंद्र में है. शिबू सोरेन के परिवार में सीता सोरेन तीसरी बार विधायक बनी हैं. वह परिवार और झामुमो में हेमंत सोरेन से भी वरिष्ठ विधायक हैं. सियासी हलचल के बीच सीता सोरेन के तेवर नरम जरूर हैं, पर तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम पर उनकी निगाहें टिकी हुई हैं. झामुमो के अंदर कल्पना सोरेन का नाम सामने आने पर वह किस तरह की प्रतिक्रिया देंगी, यह अभी नहीं कहा जा सकता. हेमंत सोरेन के बदले कल्पना सोरेन की ताजपोशी को वह सहजता से स्वीकार कर लेंगी, इसमें संदेह है. झामुमो के सभी वरिष्ठ विधायकों से अगर रायशुमारी की गई तो, सीता सोरेन के नाम पर सहमति बन सकती है, पर कल्पना सोरेन के नाम पर एक राय बनाना आसान नहीं होगा. वैसे अंदरखाने में चर्चा है दोनों गोतिनी के बीच सीएम की दावेदारी को लेकर रस्साकशी जारी है.


कल्पना सोरेन की कुंडली में है राजयोग…!
झामुमो के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बदले राजनीतिक हालात में घर की बड़ी बहू सीता सोरेन का स्वाभाविक रूप से सीएम बनने का हक बनता है. झामुमो के आधे से अधिक विधायक सीता सोरेन के नाम पर अपनी सहमति दे सकते हैं. ऐसा होने से पार्टी में मतभेद नहीं उभरेंगे और सरकार को अपना कार्यकाल पूरा करने में भी आसानी हो सकती है. मान लिया जाए कि कल्पना सोरेन के नाम पर सहमति बन भी गई तो, उन्हें चुनाव लड़ाने में परेशानी आ सकती है. छह माह के अंदर हेमंत सोरेन को बरहेट विधानसभा क्षेत्र से उन्हें उम्मीदवार बनाया जाएगा. इसमें कई तकनीकी पेंच है. कल्पना सोरेन उड़ीसा के मयुरभंज जिले की निवासी हैं. ऐसी स्थिति में चुनाव में दिए जानेवाले तमाम कागजात में जाति प्रमाण पत्र को लेकर सबसे ज्यादा परेशानी आ सकती है. झारखंड में खतियान के आधार पर जाति प्रमाण पत्र बनाया जाता है. दूसरे राज्य का खतियान यहां मान्य नहीं है. इसके बावजूद अगर जाति प्रमाण बनवा भी लिया गया तो विपक्ष इस मामले को अदालत में चुनौती दे सकता है. झामुमो में हेमंत सोरेन का विकल्प अगर सीता सोरेन होंगी तो, कल्पना सोरेन को उपचुनाव नहीं लड़ाना पड़ेगा. वैसे झामुमो के ही एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि 4-5 साल पूर्व कल्पना सोरेन की कुंडली बनायी गई थी. कुंडली में उनके राजयोग होने की बात कही गई है.
दोनों भाइयों की विधायकी पर दिल्ली की टेढ़ी नजर
बता दें कि हेमंत सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए रांची के अनगड़ा में पत्थर खनन लीज आवंटित कराया. सीएम के पास खान विभाग भी है। भाजपा का दावा है कि यह जनप्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन है, लिहाजा उनकी विधानसभा की सदस्यता खत्म होनी चाहिए. बसंत सोरेन के खिलाफ शिकायत में निर्वाचन आयोग से एक खनन कंपनी में साझीदार होने संबंधी तथ्य छिपाने का आरोप है। आयोग में हेमंत सोरेन के खिलाफ चल रहे मामले में बहस पूरी हो गई है। दोनों भाइयों की सदस्यता रहेगी या जाएगी, इसका निर्णय राज्यपाल को लेना है. लेकिन इस प्रकरण में दिल्ली की प्रमुख भूमिका से भी इंकार नहीं किया जा सकता.
दिल्ली में चल रहा है मंथन
खबर है कि दिल्ली में बैठे राजनीतिक धुंरधर झारखंड की सियासत पर नजरें गड़ाए हुए हैं. वैसे हेमंत सोरेन की सदस्यता गई तो, वे तुंरत इस्तीफा देकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं और दुबारा शपथ लेकर अगले छह माह तक वे सीएम बने रह सकते हैं. फिर छह माह के अंदर बरहेट उपचुनाव जीत कर वे अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को करारा जवाब दे सकते हैं. दूसरी ओर अगर उनपर पांच-छह साल के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई, तब वे भारी मुसीबत में आ जाएंगे. इसके बाद झामुमो में सत्ता शीर्ष की लड़ाई शुरू होने की संभावना है. विश्वसनीय सूत्र का दावा है कि दिल्ली में हेमंत सरकार को चलता करने की रणनीति बनाई गई है. खैर, ये राजनीतिक कयास है, पर राजनीति में सब संभव है.
कांग्रेस भी सीएम पद की दावेदारी की सुगबुहाहट
यहां यह बताते चलें कि झामुमो के अध्यक्ष शिबू सोरेन स्वाभाविक पसंद हो सकते हैं। उनके नाम पर झामुमो के साथ-साथ कांग्रेस को भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. छह माह के भीतर गुरुजी को भी विधानसभा की सदस्यता हासिल करनी होगी। दूसरी ओर शिबू सोरेन की बढ़ती उम्र और उनकी बीमारी, उन्हें झारखंड के नए सीएम के तौर पर स्वीकार करेगी या नहीं, यह भी बड़ा सवाल है. सत्ता के गलियारे में चल रही चर्चा के अनुसार झामुमो में वरिष्ठ विधायक और मंत्री चंपई सोरेन, मंत्री जोबा मांझी के अलावा गिरिडीह के झामुमो विधायक सुदिव्य सोनू भी विकल्प हो सकते हैं। वहीं हेमंत सोरेन के खिलाफ प्रतिकूल फैसला आने के बाद कांग्रेस भी दबाव बढ़ा सकती है। कांग्रेस के 18 विधायक हैं, जो भीतर ही भीतर सरकार में घुटन महसूस कर रहे हैं. बदली राजनीतिक परिस्थिति कांग्रेस खुलकर सामने आ सकती है. कांग्रेस के तीन विधायकों के कैश कांड को लेकर कांग्रेस के अंदरखाने में कई विधायक नाराज बताए जाते हैं। दरअसल, कांग्रेस में सत्ता में सीधी भागीदारी की सुगबुगाहट है. कांग्रेस का एक खेमा ऐसा भी है जो कांग्रेस के लिए सीएम पद की दावेदारी ठोक सकता है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि झामुमो की ओर से अगर सीता सोरेन के नाम पर सहमति बनी तो, सरकार में उठे तूफान को शांत किया जा सकता है. लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के चलते अगर पत्नी मोह नहीं छोड़ा गया तो, झामुमो में टूट संभव है. बहरहाल, चंद दिनों बाद झारखंड की सियासत के सत्ता संग्राम में किसकी जीत होगी और किसकी ताजपोशी, अब सबकी निगाहें राजभवन पर टिकी हुई हैं.

राम भक्तों के लिए

कॉमन मैन से राजीव कुमार कैसे बन गए PIL MAN…?

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नारायण विश्वकर्मा
रांची : केस मैनेज करने के नाम पर पैसे के लेन-देन के आरोप में बुरी तरह से फंसे झारखंड हाइकोर्ट के चर्चित अधिवक्ता और पीआईएल मैन नाम से मशहूर राजीव कुमार की गिरफ्तारी के बाद उनकी छवि को गहरा धक्का लगा है. राज्य में जनहित याचिकाओं से बनी पहचान को भुनाने में वह बुरी तरह से गच्चा खा गए हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबियों की शेल कंपनी में निवेश, उनके अनगड़ा में माइनिंग लीज आवंटन, खूंटी में मनरेगा घोटाले में आइएएस पूजा सिंघल सहित अन्य की गिरफ्तारी आदि से जुड़ी जनहित याचिकाओं में अधिवक्ता राजीव कुमार पैरवीकार हैं. इन मामलों में झारखंड हाइकोर्ट में सुनवाई चल रही है. इसके अलावा 100 से अधिक विभिन्न मामलों में जनहित याचिकाओं में राजीव कुमार पैरवी कर चुके हैं. लगभग पांच दर्जन से अधिक जनहित याचिकाएं हाइकोर्ट में अभी लंबित हैं.
कोड़ा कांड से राजीव को मिली थी प्रसिद्धि
बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा कांड से वह चर्चा में आये थे. इसके बाद 2020 में राजीव कुमार ने हेमंत सोरेन के ओएसडी रहे गोपाल जी तिवारी की कुंडली खोल कर रख दी थी. इसके बाद सीएम ने तिवारी को सीएमओ से चलता कर दिया था. इसके बाद राजीव की साख और भी इजाफा हुआ था. उन्हें पीआईएल मैन कहा जाने लगा. तिवारी प्रकरण में लोकप्रियता हासिल करने बाद राजीव कुमार ने मीडिया में कहा था कि झारखंड मंत्रालय के सभी विभागीय सचिव सौ करोड़ के क्लब मेम्बर में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि वे मीडिया के प्रति अपना दायित्व निभा रहे हैं. अब जो करना है सरकार को करना है. उनके सौ करोड़ के क्लब मेम्बर वाले बयान के बाद किसी भी आईएएस अफसर ने विरोध दर्ज नहीं कराया था. हां, यह बात सही है कि यहां के अफसर सामान्य तौर पर सौ करोड़ के क्लब वाले हैं. राजीव कुमार ने यह भी कहा था कि हम टैक्स देते हैं, इसलिए अगर भ्रष्टाचार होगा तो हमको बोलने का हक है. उन्होंने पूजा सिंघल जैसी आईएएस का नाम लेकर कहा था कि वो सौ के ऊपर वाली मेम्बर हैं. जो दो साल के बाद ही सही साबित हुआ. लेकिन उनके मामले में भी यह बात सौ प्रतिशत सही हुई. करोड़ों की रिश्वत मांगनेवाले वे झारखंड हाईकोर्ट के पहले वकील बन गए. अब पता नहीं वे कैसे और किस तरह से टेक्स भरते होंगे, यह तो जांच का विषय है.
कैसे बने पीआईएल मैन?
2007 के पूर्व राजीव कुमार की बतौर वकील मामूली हैसियत थी. उन्होंने लगभग डेढ़ दशक पूर्व मोरहाबादी के एदलहातू की निचली बस्ती में 7 कट्ठा जमीन में दो गायों से खटाल शुरू किया था. 2009 तक उनके पास 10-12 गायों का एक खटाल हुआ करता था. वे दूध बेचने का भी काम करते थे. इस काम में एदलहातु निवासी दुर्गा उरांव (मुंडा) ने उनकी भरपूर मदद की. कहते हैं कि दोनों मिलकर जमीन का कारोबार भी किया करते थे. उस दौरान उनके पास लेम्ब्रेटा स्कूटर हुआ करता था. कुछ दिनों के बाद मारुति कार हो गई. फिर मार्शल जीप और अभी वर्तमान में इनके पास इनोवा के अलावा भी कुछ कीमती कारें हैं. अरगोड़ा स्टेशन के निकट गौरीशंकर नगर में राजीव कुमार के पास एस्बेस्टस शीट के दो कमरे का मकान हुआ करता था. आज वहां आलीशान बिल्डिंग है. बाकी जांच के बाद और भी खुलासे का अनुमान है.
राजीव ने दुर्गा मुंडा जैसे लोग को ही क्यों चुना?
दुर्गा उरावं (मुंडा) जैसे मामूली शख्स के नाम से राजीव कुमार ने कई जनहित याचिका दायर की थी. कोड़ा सहित उनके कई मंत्रियों को जेल भेजवाया. रातों-रात दुर्गा मुंडा को एक झटके में आसमान का सितारा बना दिया. उन्हें हाईकोर्ट द्वारा गार्ड भी मुहैया कराया गया. हालांकि यह सवाल तो अब भी सत्ता के गलियारे में उठता है कि केस करने के लिए राजीव कुमार ने दुर्गा मुंडा जैसे लोग को ही क्यों चुना? इसके पीछे की कहानी भी विचित्र और रहस्यमय है. इसपर विस्तार से बहुत जल्द लिखने की कोशिश होगी.

18 अगस्त को राजीव ईडी कोर्ट में पेश होंगे
बहरहाल, राजीव कुमार के मामले में अब थोड़ा यूटर्न भी आ गया है. कोलकाता पुलिस ने कोर्ट में बताया है कि राजीव ने स्वीकारोक्ति बयान में कुछ खुलासे किए हैं। उन्होंने झारखंड के कुछ बड़े सरकारी अफसरों व न्यायिक अफसरों के नाम भी बताए हैं, जिन्हें उनसे आर्थिक लाभ होते थे। यही कारण है कि ईडी ने कोलकाता कैश कांड में मनी लाउंड्रिंग के आरोप में राजीव पर केस दर्ज कर लिया है और उन्हें 18 अगस्त को रांची के ईडी कोर्ट में हाजिर होना है. इसमें राजीव कुमार के मुवक्किल शिवशंकर शर्मा को भी आरोपी बनाया है. समझा जाता है कि राजीव के जेल से निकलने की राह में मनी लांड्रिंग केस मसीबत की सौगात लेकर आ रही है.

नोट: अगले अंक में असली दुर्गा मुंडा कौन था…?, की कहानी के साथ याचिकाकर्ता शिवशंकर शर्मा के फसाने पर फोकस रहेगा.

राम भक्तों के लिए

ग्रीन रेजीडेंसी के प्रांगण में अमृत महोत्सव मनाया गया

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इंद्रदेव लाल

रांची : आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर बरियातू स्थित तेतरटोली के ग्रीन रेजीडेंसी के प्रांगण में झंडोत्तोलन किया गया है. रेजीडेंसी के करीब दौ सौ लोगों ने रंग-बिरंगे परिधान पहने और हाथ में तिरंगा लिए भारत माता का जयघोष किया. झंडोत्तोलन केंद्रीय विद्यालय संगठन की पूर्व सहायक आयुक्त श्रीमती रेणू उपाध्याय ने किया. इस अवसर पर श्रीमती उपाध्याय ने प्रधानमंत्री के महिला सम्मान की रक्षा के लिए संकल्प लेने के आह्रवान को सराहा. उन्होंने अपने संबोधन के बाद ऐ मेरे वतन के लोगों…गाकर सबका मन मोह लिया.

कार्यक्रम में ये लोग थे शामिल

इस अवसर पर ग्रीन रेजीडेंसी के सचिव सुजीत सिंह, कोषाध्यक्ष ए.के. श्रीवास्तव और संतोष कुमार, कार्यकारी सदस्य श्रीमती अनामिका, श्रीमती दिव्या एवं प्रदीप कुमार और स्कूल के स्टूडेंट्स उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रफुल्ल सिंहा ने कहा कि इसके पूर्व भी ग्रीन रेजीडेंसी के निवासी 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन सभी एक साथ हर्षोल्लास के साथ मनाते आए हैं. इस बार अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में समारोह को यादगार बनाने में सभी का योगदान रहा. इसके लिए उन्होंने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया.  

राम भक्तों के लिए

ऑपरेशन लोटस टला जरूर, पर हेमंत सरकार पर कायम है दिल्ली की वक्रदृष्टि

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नारायण विश्वकर्मा
झारखण्ड में दूसरी बार सरकार गिराने का फार्मूला फेल हुआ है. यह सही है कि “ऑपरेशन लोटस” एक बार फिर बेअसर साबित हुआ, पर सरकार गिराने के मामले का अभी पूरी तरह से पटाक्षेप नहीं हुआ है. हेमंत सरकार पर दिल्ली की वक्रदृष्टि कायम है. हेमंत सरकार गिराने की कोशिश 2021 से जारी है. जुलाई 2021 में कांग्रेस के एक दर्जन विधायक पाला बदलने की फिराक में थे. इस खबर को मैंने ही पहली बार ब्रेक किया था. तब लोगों को यकीन नहीं हुआ था. 6 जुलाई 2021 को हमने ‘झारखंड में सियासी भूकंप की आहट…!’ शीर्षक से यह बताने की कोशिश की थी कि कैसे सरकार गिराने का खेल शुरू किया गया था. खबर प्रकाशित होने के मात्र 8 दिनों बाद यानी 15 जुलाई 21 को सरकार गिराने की साजिश का खुलासा किया गया था. उस समय भी करीब-करीब वही कांग्रेसी विधायक थे, जिनकी हरकतों से सत्ता के गलियारों में सनसनी फैल गई थी. खासकर कांग्रेसी खेमे में खलबली मच गई थी.
9 एमएलए के नाम कौन और क्यों छिपा रहा है?
बता दें कि उन दिनों मीडिया के निशाने पर विशेष रूप से कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी सुर्खियों में छा गए थे. इस बार वह तीन विधायकों के साथ रंगे हाथ पकड़े गए. सरकार गिराने की पहली कोशिश को कांग्रेस विधायक अनूप सिंह ने कथित तौर पर नाकाम कर दिया था. इस बार भी उन्होंने ही विधायकों की खरीद-फरोक्त की पोल पट्टी खोली. हालांकि पकड़े गए विधायकों ने अभी तक अन्य कांग्रेसी विधायकों का नाम नहीं लिया है और न अनूप सिंह ने बाकी विधायकों के नाम उजागर किए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अन्य 9 विधायकों के नाम कौन और क्यों छिपा रहा है? संभव है कोलकाता पुलिस की पूछताछ के बाद ही गिरफ्तार विधायक अन्य विधायकों के बारे में कुछ बता पाएं.
MLA के भाई-देवर और मामा रकम लेने पहुंचे थे..!
वैसे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस के अन्य 9 विधायक सत्ता के सौदागरों के संपर्क में जरूर थे. एक विधायक के मामा, दूसरे के भाई और तीसरे के देवर पैसे लेकर रफूचक्कर हो गए. हालांकि कोलकाता की सीआईडी पुलिस ने जुलाई में 75 लाख रुपए कांग्रेसी विधायकों में मिलने की बात कही है. इसके अलावा चर्चा यह भी है कि कांग्रेस के एक बुजुर्ग विधायक को राज्यपाल बनाने का ऑफर मिला था. एक निर्दलीय विधायक को उप मुख्यमंत्री और कइयों को मंत्री पद मिलने की बात हुई थी. सत्ता के सौदागरों से ये तमाम बातें दिल्ली और गुवाहाटी में हुई थी. कई दौर की बातचीत के बाद बड़ी रकम देने का निर्णय लिया गया था. कोलकाता सीआईडी पुलिस को गुवाहाटी और दिल्ली पुलिस ने सूत्रधारों से मिलने नहीं दिया, वरना कुछ न कुछ सच्चाई सामने जरूर आ सकती थी.

निशिकांत आखिर अनूप सिंह पर हमलावर क्यों?
इधर, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे कांग्रेस विधायक अनूप सिंह के खिलाफ ट्विटर वार चलाए हुए हैं. सांसद के ट्विटर का असर हेमंत सरकार पर भारी पड़ता रहा है. सांसद ने 10 अगस्त को अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि मैंने आज नई फिल्म के लिए कहानी फाइनल की. फिल्म का नाम होगा एक था अनूप...! दरअसल, निशिकांत दुबे ने फिल्म के टाइटल में था लिखा हुआ है. कहीं वे ये तो नहीं कहना चाह रहे कि कुछ दिनों बाद अनूप सिंह के राजनीतिक कैरियर का अंत हो जाएगा…? इसी तरह से निशिकांत दुबे ने पिछले 2 अगस्त को ट्वीट किया कि पूरे सीसीएल में विधायक अनूप सिंह के कारनामों की जांच सीबीआई से करानी चाहिए. वैसे बेरमो कोयलांचल के लोगों को पता है कि कई कोलियरी प्रबंधन से उनकी गजब की साठगांठ है. कहा जाता है कि अनूप सिंह के छोटे भाई गौरव कुमार के नाम से कई खदान आवंटित हैं.
2021 में सांसद ने गौरव पर भी सवाल खड़े किए थे
बताते चलें कि निशिकांत दुबे पिछली बार सरकार गिराने में अनूप सिंह के छोटे भाई गौरव कुमार पर हमलावर थे. सांसद ने अपने ट्विटर पर गौरव कुमार को सरकार गिराने की कथित साजिश के मामले में तो एक नया शिगूफा ही छेड़ दिया था. जुलाई 21 में उमाशंकर अकेला, डॉ. इरफान अंसारी के अलावा बरकट्ठा विधायक अमित कुमार यादव दिल्ली गये थे। इनमें रांची से दिल्ली जाने के लिये जिस पीएनआर का इस्तेमाल किया गया है, इसको लेकर गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने सवाल खड़े किये थे. सांसद ने इस मामले में अपने ट्विटर हैंडल पर पूछा है कि कुमार गौरव कौन हैं? कहीं विधायक अनूप सिंह के भाई तो नहीं हैं? दो भाई की लड़ाई में सीएम व झारखंड पुलिस मूर्खतापूर्ण कार्रवाई कर ठेका मजदूर व सब्जी बेचनेवाले से सरकार तो नहीं गिरा रही? हालांकि, इस मामले में झारखंड यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष कुमार गौरव ने निशिकांत को आड़े हाथों लेते हुए पलटवार करते हुए कहा था कि मेरे और मेरे बड़े भाई जयमंगल सिंह (अनूप सिंह) के बीच किसी बात को लेकर कोई लड़ाई नहीं है। निशिकांत दुबे बेकार की गलतफहमी न पालें। 15 जुलाई की फ्लाइट से मैं दिल्ली नहीं गया था, बल्कि 14 जुलाई की रात मैं दिल्ली से वापस रांची आया था। कुमार गौरव नाम का कोई दूसरा शख्स शायद उस फ्लाइट से गया हो। एक चर्चा यह भी है कि कुमार गौरव बेरमो कोयलांचल की एक खदान को लेकर वन विभाग से फॉरेस्ट क्लियरेंस चाह रहे थे. इसके लिए उन्होंने अनूप सिंह से फॉरेस्ट क्लियरेंस कराने के लिए सीएम से कहलवाया था.
साल भर बाद भी चार्जशीट दायर नहीं, आरोपियों को बेल
हालांकि, पिछले साल हुए घटनाक्रम में पकड़े गए लोगों के तार दिल्ली-मुंबई से जुड़े हुए थे. इस बार के घटनाक्रम में गुवाहाटी और दिल्ली से जुड़े हुए तार हैं. ये और बात है कि साल भर बीतने के बावजूद पुलिस ने अभी तक चार्जशीट दायर नहीं की. तीन माह पूर्व सरकार गिराने के सभी आरोपियों को जमानत मिल गई है. अनूप सिंह ने ही 22 जुलाई 2021 रांची के कोतवाली थाने में सरकार गिराने की कथित साजिश के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी थी. उस दौरान बोकारो से लेकर रांची तक हाईवोल्टेज ड्रामा चला था. बोकारो का दुंदीबाद बाजार विधायकों की खरीद-फरोख्त की मंडी बनने जा रहा था। मजेदार बात तो यह है कि इस बार जिस गाड़ी से तीनों विधायकों धरे गए हैं, उस गाड़ी का नंबर जेएच 09 है, जो बोकारो का कोड है.

राम भक्तों के लिए

अपने ही लोगों के चक्रव्यूह में फंसा है अभिमन्यू, सरकार पर छाये संकट के बादल

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नारायण विश्वकर्मा
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद को ईडी द्वारा समन भेजने के बाद झारखंड सरकार पर अब खतरा मंडराने लगा है. कहते हैं त्रिभुज के दो कोण जब बराबर हो जाते हैं, तो तीसरा कोण स्वत: बराबर हो जाता है. त्रिभुज के तीसरे कोण पर भी देर-सबेर ईडी की नजरें इनायत हो सकती है. हेकड़ीबाज पंकज मिश्र की गिरफ्तारी के बाद से ही सत्ता के गलियारे में इस बात की चर्चा थी कि अब अभिषेक प्रसाद पर ईडी की गाज गिरेगी. ईडी का अभिषेक प्रसाद को समन मिलने के बाद सीएमओ के अंदरखाने में खदबदाहट है. वहीं झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के घर में भी इसकी धमक महसूस की जाने लगी है. शिबू सोरेन की पोती और दुर्गा सोरेन सेना की अध्यक्ष जयश्री सोरेन ने मीडिया में यहां तक कह दिया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सही हैं, पर सरकार में कुछ गलत लोग घुस गए हैं और वे सरकार की छवि को खराब कर रहे हैं. उधर, पंकज-पिंटू पर कार्रवाई से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता-नेता और विधायक अंदर से खुश हैं और बाहर जमकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर पार्टी के पुराने समर्पित कार्यकर्ता-नेता अपनी भावना व्यक्त कर रहे हैं.

सूरज ने कभी फंसाया था गुरू जी को, हेमंत को फंसाया दलालों ने
झामुमो के एक पुराने समर्पित कार्यकर्ता ने पंकज मिश्रा की गिरफ्तारी और अभिषेक प्रसाद को ईडी का समन मिलने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सच तो यह है कि जैसे भोले-भाले गुरुजी को सूरज मंडल ने फंसाया था, उसी तरह से शालीन और सुलझे हुए हेमंत सोरेन को उनकी चंडाल चौकड़ी ने फंसा दिया है. खासकर अभिषेक प्रसाद को लेकर वे अंदर से उबल रहे हैं. कहा गया कि अग्रवाल बंधु, सिन्हा-श्रीवास्तव, पांडे, राउत, ठाकुर और अन्य चाटुकार अधिकारियों के चक्रव्यूह में हमारे अभिमन्यू (हेमंत सोरेन) बुरी तरह से फंस चुके हैं. कहा कि पूजा सिंघल की गिरफ्तारी के बाद ही हमारे कार्यकारी अध्यक्ष को सचेत हो जाना चाहिए था. ईडी और मीडिया को ललकारने वाले पंकज मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद अभिषेक प्रसाद का फंसना तय था. इसके बाद भी सीएम साहब उनके (पिंटू) मोहपाश में उलझे हुए हैं तो, कोई क्या कर सकता है. लेकिन पार्टी के भविष्य के लिए यह कतई शुभ संकेत नहीं है.
कुछ चाटुकारों ने पार्टी को हाईजैक कर लिया है
पार्टी के एक अन्य पुराने नेता ने कहा कि झामुमो अब गुरुजी की पार्टी नहीं रही. कुछ चाटुकार लोगों ने झामुमो को हाईजैक कर लिया है. पार्टी को अपनी जागीर बना ली है. यही कारण है कि गुरुजी के परिवार में भी बागी स्वर तेज हो रहे हैं. इसके बावजूद हेमंत सोरेन पर इसका कोई मलाल नहीं है. गुरुजी के एक कट्टर समर्थक (संताली) ने कहा कि पंकज मिश्रा की कारस्तानियों के कारण झामुमो के दुर्ग (संतालपरगना) की रक्षा करना पार्टी के लिए चुनौती बन गई है. पंकज मिश्रा को लेकर झामुमो के समर्थकों में गहरी नाराजगी है. झामुमो के वरिष्ठ नेता और विधायक लोबिन हेंब्रम ने पिछले दिन जो भी कहा है उसपर भी हमारे रहनुमा (हेमंत सोरेन) की नींद नहीं खुली है. हालांकि साहेबगंज में उनकी दहाड़ का असर ये हुआ है कि बरहेट में पंकज मिश्रा के खिलाफ झामुमो कार्यकर्ता गोलबंद होने लगे हैं. उनका कहना है कि बाहरी लोग धन-बल के जोर पर सरकार और पार्टी पर पूरी तरह से कब्जा जमा लिया है. मंत्रालय और सीएम हाउस के आसपास मंडराते लोगों में कितने आदिवासी-मूलवासी नजर आते हैं? इसे देखा जा सकता है.
पिंटू का आदेश यानी सीएम का आदेश

सीएम के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद के फर्श से अर्श तक पहुंचने के पीछे की कहानी के बारे में झामुमो के कई पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं ने बताया कि मूल रूप से 2011-12 में झामुमो में पिंटू का प्रवेश हुआ. महज तीन-चार साल के बाद वह मोटा आसामी बन कर उभरा. 2016 में जब उसे खनिज आवंटित हुआ तो, बरहेट के विधायक के रूप में हेमंत सोरेन का उसे भरपूर साथ मिला. ईडी को सूचना मिली है कि पिंटू के इशारे पर ही पंकज मिश्रा संताल में अवैध खनन करवाते थे. कहा जाता है कि अवैध खनन और परिवहन पर पिंटू का ही नियंत्रण था. पंकज-पिंटू की बातचीत की विवरणी भी ईडी के हाथ लग गई है. इसलिए पंकज की गिरफ्तारी के बाद पिंटू ही नहीं सीएमओ के उच्चाधिकारियों और कारोबारियों के होश फाख्ता हैं. क्योंकि पिंटू के तार सभी से जुड़े हुए हैं. सीएमओ में उनका आदेश सीएम का आदेश माना जाता है. अब पिंटू की वजह से सीएम से लेकर कई अधिकारी और सरकारी दलाल सकते में हैं.

स्कूटर पर चलनेवाला… अब अरबों का मालिक कैसे बना?

कहा जाता है कि पिंटू कभी एक स्कूटर से चला करता था और टीवी रिपेयरिंग कर अपनी जीविका चलाता था. आज वह अरबों का मालिक बन बैठा है. करीब 20 साल पूर्व उसने शिव शक्ति इंटरप्राइजेज के नाम से पीएमआरवाई स्कीम के तहत लोन लेकर रातू रोड में मोटर पाटर्स की दुकान खोली थी. साहेबगंज में खनन के लिए शिवशक्ति इंटरप्राइजेज के नाम पर ही उसने 11 एकड़ से अधिक जमीन खनन के लिए आवंटित कराया है. इसके अलावा उनके खिलाफ सरकारी कोष में जालसाजी करने व 18 करोड़ रूपए तक के गबन की शिकायत दर्ज है. अंडर ग्रेजुएट होने के बावजूद उसे प्रेस सलाहकार बना दिया गया. पंकज मिश्रा की तरह पिंटू भी ईडी से पूछताछ के क्रम में उसे मजबूरी में कुछ ऐसे राज खोलना पड़ सकता है, जिससे सरकार में भूचाल आ सकता है. वहीं विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष हेमंत सोरेन के अलावा ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के खिलाफ हल्ला बोलेगा, जो सरकार की मुसीबत में ही इजाफा करेगा. अब देखना है कि सत्तापक्ष कैसे और किस तरह से अपना बचाव करता है, यह देखना दिलचस्प होगा.

राम भक्तों के लिए

आखिरकार पंकज मिश्रा पर कसा ED का शिकंजा, और कितने हैं रडार पर…कौन होगा अगला निशाना..?

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नारायण विश्वकर्मा

आखिरकार खनन व टेंडर घोटाले के बहुचर्चित नाम पंकज मिश्रा पर ईडी ने शिकंजा कस दिया है. उनपर सीएम का विधायक प्रतिनिधि होने का तमगा लगा हुआ है. दरअसल, झारखंड कई मामलों में नई इबारत लिखता रहा है. झारखंड में किसी भी मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र का विधायक प्रतिनिधि कभी इतनी सुर्खियों में नहीं रहा. पंकज मिश्र का नाम रांची से लेकर दिल्ली चर्चा में है. यहां तक कि झारखंड हाईकोर्ट को भी कहना पड़ा था कि पंकज मिश्र और सीएम का प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू का नाम बहुत सुना जा रहा है. अब पता नहीं कोर्ट की टिप्पणी को सीएमओ ने क्यों नजरअंदाज किया? वैसे पंकज मिश्रा जब-जब मीडिया से मुखातिब हुआ तो, उन्होंने बहुत ही दिलेरी से जांच एजेंसियों की खिल्ली उड़ायी. उनकी साफगोई ऐसी कि जैसे वह पूरी तरह से दूध का धुला हुआ हो.

पंकज मिश्रा की गिरफ्तारी के राजनीतिक मायने…?

सत्ता के गलियारे में पंकज मिश्रा की गिरफ्तारी के अब राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. क्योंकि उनके साथ सीएम हेमंत सोरेन और ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम का नाम भी जुड़ा हुआ है. बता दें कि पंकज मिश्रा सीएम हेमंत सोरेन का पहला विधायक प्रतिनिधि है जिसे मंगलवार को ईडी ने गिरफ्तार किया. पंकज मिश्रा मंगलवार को एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी ऑफिस पहुंचे थे. वहां उनसे पूछताछ के बाद अंतत: उनकी गिरफ्तारी हुई. हालांकि इस बात का अंदेशा पहले से ही था कि डाहु यादव की पूछताछ के बाद पंकज मिश्रा का पकड़ा जा सकता है. इससे पूर्व ईडी ने डाहू यादव से अवैध पत्थर खनन मामले में पूछताछ जारी रखी. इसके कुछ दिनों बाद ईडी ने उनके बैंक खाते को 1.60 करोड़ रुपये अटैच कर लिया था. डाहू यादव का पंकज मिश्रा से  करीबी का रिश्ता है. दरअसल, पिछले दिन अवैध खनन मामले में पंकज मिश्रा, डाहू यादव और उनके सहयोगियों के 38 बैंक खातों में जमा 11.88 करोड़ रुपये ईडी ने जब्त कर लिया है. ईडी ने साहिबगंज, बरहेट, राजमहल, मिर्जा चौकी और बरहरवा में 19 स्थानों पर तलाशी ली थी. इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और 5.34 करोड़ रुपये नकदी जब्त की गई थी. इस तलाशी अभियान के दौरान, ईडी ने साइट से अवैध रूप से संचालित किये जा रहे पांच स्टोन क्रशर, पांच अवैध बंदूक और कारतूस भी जब्त किए थे. यहां तक कि स्टोन चिप्स के भंडारण इधर-उधर खपाने की तैयारी को भी पुलिस ने नाकाम कर दिया था.  

अब चर्चा के केंद्र में है अभिषेक प्रसाद

खबर है कि साहेबगंज में अवैध खनन से 100 करोड़ की कमाई की गई है. खास बात यह है कि इसमें कई नौकरशाहों और राजनेताओं के पैसे भी शामिल हैं. बाकायदा ईडी ने 15 जुलाई को जारी प्रेस रिलीज में यह बातें कही थी. इसके बावजूद पंकज मिश्रा अपनी हेकड़ी दिखा रहा था. वह बीमार भी पड़ गया. ईडी को विभिन्न व्यक्तियों के बयानों, डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों सहित जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों से पता चला कि जब्त नकदी-बैंक बैलेंस वन क्षेत्र सहित साहिबगंज क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किए जा रहे अवैध खनन से प्राप्त हुए हैं. खनन के मामले में सीएम के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद पर ईडी की निगाह है. संभव है कुछ दिनों के बाद उनपर भी ईडी की गाज गिरे. वैसे पंकज मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद सीएमओ में एक तरह का अजीब सन्नाटा है. कुछ लोग दबी जुबान से कह रहे हैं कि अबकी बार पिंटू उस्ताद की बारी है. पिंटू से जले-भुने झामुमो के कई कार्यकर्ता और कुछ नेता-विधायक अंदर से बहुत खुश नजर आ रहे हैं.

मंत्री के भाई से भी हो सकती है पूछताछ…!

उल्लेखनीय है कि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंकज मिश्रा के खिलाफ गत चार जून को केस दर्ज किया था. उन पर साहिबगंज जिले के बरहरवा थाने में वर्ष 2020 में एफआईआर दर्ज की गयी थी. इसी तहत उन्हें अभियुक्त बनाया गया है. इस मामले में ईडी ने शंभु नंदन कुमार का बयान भी दर्ज किया था. शंभु ने ईडी को दिये अपने बयान में राज्य के कैबिनेट मंत्री आलमगीर आलम का भी नाम लिया था. साहिबगंज जिले के बरहरवा में जून 2020 के टेंडर विवाद में एक केस दर्ज किया गया था. जिसे इडी ने टेकओवर कर लिया है. इस मामले में दोनों ही आरोपियों को साहिबगंज पुलिस ने क्लीन चिट दे दी थी. ऐसे पुलिस अधिकारियों से भी ईडी की पूछताछ कर सकती है. मंत्री आलमगीर आलम के भाई की कंपनी नगर पंचायत बरहरवा में वाहन प्रवेश शुल्क वसूली के टेंडर में शामिल थी. उक्त कंपनी ने एक डमी कंपनी खड़ी कराकर पांच करोड़ रुपये तक की बोली लगवा दी. बाद में पैसा जमा नहीं कराने पर दूसरी बोली 1.46 करोड़ में आलमगीर आलम की कंपनी ने ठेका ले लिया. शंभु ने बड़ी चालाकी से इस ठेके को 1.80 करोड़ में ले लिया. शंभु ने 22 अप्रैल को इडी में आवेदन देकर पूरे मामले की जानकारी दी थी और अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगाई थी. चर्चा है कि ईडी आलमगीर आलम के भाई से पूछताछ कर सकती है. अब देखना है कि ईडी के रडार पर अगला निशाना कौन है?

राम भक्तों के लिए

रांची डीसी ने रिंची ट्रस्ट अस्पताल व ट्राई के कार्यों की समीक्षा की, कल्याण अस्पतालों के औचक निरीक्षण का निर्देश

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रांची : रांची के उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा उपायुक्त ने गैर सरकारी संस्था रिंची ट्रस्ट अस्पताल और ट्राई को निर्देश दिया है कि उनके द्वारा संचालित कल्याण अस्पताल में की परफॉर्मेंस इंडीकेटर्स (Key performance indicators) के सभी बिंदुओं का अनुपालन करना सुनिश्चित करेंगे। कल्याण विभाग द्वारा निर्मित तिगड़ा, रातू स्थित कल्याण अस्पताल का संचालन गैर सरकारी संस्था ट्राई तथा जोन्हा कल्याण अस्पताल का संचालन  रिंची ट्रस्ट अस्पताल द्वारा किया जाता है। डीसी ने कल्याण विभाग द्वारा संचालित तिगड़ा और जोन्हा अस्पताल के प्रबंधन समिति को अलग-अलग खाता खोलने का निर्देश दिया है।

स्वास्थ्यकर्मियों के मानदेय में पारदर्शिता बरतने का निर्देश

डीसी ने बैठक के दौरान पैरामेडिकल स्टाफ, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी ली। रोस्टर के अनुसार सभी चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ अस्पताल में कार्य कर रहे हैं या नहीं इसकी लगातार जांच की जाएगी। स्वास्थ्यकर्मियों को दिए जा रहे मानदेय में पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया गया। दवाइयों की खरीद के सम्बंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया। दवाओं तथा अन्य आवश्यक सामग्रियों की खरीदारी वित्तीय नियमों के अनुसार करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि कितने मरीज इलाज के लिए आते हैं उसकी सम्पूर्ण जानकारी नियमित अंतराल पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। सभी मरीजों का टिकट बनाने और मरीज की सम्पूर्ण विवरणी उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है।

आयुष्मान के तहत मरीजों का इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश

डीसी ने जिला अभियंता को तिगड़ा अस्पताल और जोन्हा अस्पताल में इलेक्ट्रिसिटी वायरिंग मरम्मत तथा वाटर सीपेज की समस्या का समाधान हेतु आवश्यक कार्य करने और तिगड़ा अस्पताल के पहुंच पथ बनाने एवं फर्स्ट क्वार्टर की व्यय विवरणी उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक निर्देश दिया गया। इस बैठक में उप विकास आयुक्त, परियोजना निदेशक आईटीडीए,  जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला अभियंता जिला परिषद, कार्यपालक अभियंता विद्युत आपूर्ति समेत अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए
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