खलारी/डकरा, 03 जनवरी : खलारी प्रखंड क्षेत्र में घने कोहरे एवं कड़कड़ाती ठंढ से बचाव व राहत के लिए प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न चौक चौराहे पर प्रखंड प्रशासन ने अलाव की व्यवस्था की है। अंचलाधिकारी शिशुपाल आर्य के निर्देश पर मंगलवार को बिरहोर टोला मैकलुस्कीगंज एवं बैंक चौक खलारी के कई स्थानों पर शाम में अलाव को जला कर लोगों को राहत देने की कोशिश की गई। शाम में ठिठुरन बढ़ जाने से राहगीर, बाजार में आम जन एवं गरीब लोगों के पास कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस तरह के अलाव जलने से गरीब गुरबा एवं अन्य जरूरत मन्द को ठिठुरन से राहत मिलेगी।
खलारी/डकरा, 03 जनवरी : एसटी एससी ओबीसी एकता मंच ने अंबेडकर पार्क डकरा में मंगलवार को सावित्रीबाई फुले एवं जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर भारत के प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले एवं मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के जीवनी पर प्रकाश डाला गया, साथ ही उनके विचारों को रखा गया। वक्तावों ने कहा कि नारी मुक्ति आंदोलन की प्रणेता भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ने 1848 में महिलाओं को शिक्षित करने के साथ बहुजन समाज के बेटियों और महिलाओं को शिक्षा देने का काम किया। साथ ही महान समाज सेविका ने महिलाओं को सम्मान के साथ जीने एवं लड़कियों को हक अधिकार पढ़ाई लिखाई के प्रति जागरूक किया। वहीं मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के बारे में कहा कि 1946 में वे संविधान सभा के सदस्य के रूप में आदिवासियों के हितों की रक्षा में मुखर होकर बोले थे। जयपाल सिंह मुंडा भारतीय आदिवासियों और झारखंड आंदोलन के एक सर्वोच्च नेता थे। वर्ष 1925 में ऑक्सफोर्ड फोर्ड ब्लू का खिताब पाने वाले हॉकी के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी थे। उनकी कप्तानी में 1928 के ओलंपिक में भारत ने पहला स्वर्ण पदक प्राप्त कर पूरे देश में अपना नाम रोशन किया है। इसलिए हमें और हम सभी लोगों को उनके बताए हुए रास्ते पर चलने की जरूरत है। इस दौरान कन्हाई पासी, देवंती देवी, मधुबाला देवी, इंदिरा देवी, भीम गंझू, सिया पति देवी, गीतांजलि कुमारी, नरेश कुमार, अमरलाल सतनामी, मास्टर धनेश, अनुज कुमार, सूरज कुमार, अनिता एक्का, खेमलाल तुरी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
धनबाद:कोयलांचल की राजधानी धनबाद प्रदूषण के मामले में दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है. पिछले एक दशक में कोयलांचल में पहली बार प्रदूषण का स्तर यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) की सघनता 554 दर्ज की गई है। लेकिन सोमवार को 2011 से अधिक प्रदूषण का स्तर दर्ज होने के बाद प्रदूषण की भयावहता लोगों के दैनिक जीवन को बुरी तरह से प्रभावित करेगा. प्रदूषण के मामले में पीएम-2.5 का स्तर 544.2 और पीएम-10 का स्तर 554.9 शामिल था। यह राष्ट्रीय मानक 100 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर (एमजीसीएम) से पांच गुना अधिक है। इससे पहले 2011 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी कंप्रिहेंसिव इंवायरमेंटल पाल्यूशन इंडेक्स (सेपी) का स्तर लगभग 500 दर्ज किया गया था। एक वर्ष तक प्रतिबंध रहने के बाद फिर स्थिति में थोड़ा सुधार आया था और तत्काल प्रभाव से धनबाद में सभी तरह के नए उद्योग लगाने पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन यह नीति असरकारक साबित नहीं हुई.
एक्यूआइ की सघनता 300 से अधिक रहने की संभावना
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार अगले दो-तीन दिन तक एक्यूआइ की सघनता 300 से अधिक रहने की संभावना है। प्रदूषण की वजह से सोमवार को लोगों को सांस लेने में काफी परेशानी हुई। खासकर दमा एवं सर्दी-खांसी से ग्रसित लोग परेशान रहे। प्रदूषण बढ़ने का कारण हवा में काफी नीचे तक धूल-कणों का तैरना है। धुंध होने की वजह से धूलकण आसमान में नहीं जा पा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने का कारण ठंड, हवा में मौजूद धूल कण, झरिया की आग, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं और कोलियरी क्षेत्र में नियमों की अनदेखी कर हो रही कोयला ट्रांसपोर्टिंग है। शहर के कई इलाके ऐसे हैं, जहां सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।
कई तरह की बीमारियों को देते हैं आमंत्रण
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय पदाधिकारी रामप्रवेश कुमार ने बताया कि पीएम यानी पार्टिकुलेट मैटर, जो हवा धूलकण का आकार बताते हैं। इसके कण बेहद सूक्ष्म होते हैं जो हवा में तैरते हैं। हमारे शरीर के बाल पीएम 50 के आकार के होते हैं। इससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीएम-10 कितने बारीक कण होते होंगे। 24 घंटे में हवा में पीएम-10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक होने पर स्थिति खतरनाक मानी जाती है। हवा में मौजूद यही कण हवा के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर खून में घुल जाते हैं। इससे शरीर में कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। पीएम-10 के अंतर्गत हवा में सल्फर डाइआक्साइड, नाइट्रोजन डाइआक्साइड, ओजोन, आयरन, मैगनीज, बैरीलियम, निकल आदि तैरता है। सोमवार के दिन यही कण जमीन की सतह से काफी नजदीक तैर रहे थे।
झरियावासी तो रोज प्रदूषण खाते और पीते हैं
बताया गया कि ठंड में धूलकण हवा में कम ऊंचाई पर तैरते रहते हैं। प्रदूषित हवा सबसे अधिक फेफड़े को प्रभावित करती है। इसकी वजह से धनबाद में ब्रोंकाइटिस, दमा ट्यूबरक्लोसिस के मरीज अधिक हैं। प्रदूषित हवा से स्ट्रोक, इस्केमिक हृदय रोग, क्रानिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, कैंसर, निमोनिया और मोतियाबिंद की बीमारी भी होती है। तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषण और एलर्जी कारक तत्व वायुमंडल से हट नहीं पाते हैं। इससे अस्थमा, एलर्जी राइनाइटिस और अन्य एलर्जी विकार बढ़ जाते हैं। तापमान और ठंड में अचानक परिवर्तन के चलते, शुष्क हवा भी वायुमार्ग को संकुचित करती है, जिससे कष्टप्रद खांसी शुरू हो जाती है। लोगों से अपील की गई है कि प्रदूषित वातावरण में न रहें। अपने चेहरे पर फेस मास्क जरूर लगाएं। चेहरा ढंककर रखें। बीच-बीच में चेहरे को साफ पानी से धोते रहें। रोजाना गुड़ व गर्म दूध का सेवन करें। हालांकि कोयलांचल निवासी को प्रदूषण में जीने-मरने की आदत हो गई है. लोग कहते हैं कि झरिया निवासी तो आग के ऊपर रहने के आदी हैं, वे तो प्रतिदिन प्रदूषण खाते और पीते हैं.
सम्मेदशिखर/गिरिडीह: जैन धर्म के तीर्थराज सम्मेद शिखर-पारसनाथ को पर्यटन क्षेत्र घोषित किये जाने के सरकारी प्रस्ताव के विरोध का दायरा अब दिल्ली तक जा पहुंचा है. देश का जैन समाज आंदोलन पर उतर आया है. इधर, 5 जनवरी को पूरे झारखंड में सकल जैन समाज गिरिडीह जिला मुख्यालय में मौन प्रदर्शन करेगा, जिसमें प्रदेश के सभी 24 जिलों के समाज के हजारों महिला-पुरुष भाग लेंगे। प्रदर्शन के बाद गिरिडीह उपायुक्त के जरिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया जायेगा। मौन प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि अपने-अपने बैनरों के साथ शिरकत करेंगे।
मौखिक बयानों से संतुष्ट नहीं है जैन समाज
हालांकि सरकार की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि जैन समाज की भावना के खिलाफ सरकार नहीं जायेगी। तीर्थ क्षेत्र की धार्मिक आस्था हर हाल में पूर्ववत कायम रहेगी। लेकिन सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण सम्मेद शिखर से लेकर दिल्ली के इंडिया गेट तक जैन समाज के लोग आंदोलन कर रहे हैं. लेकिन समाज सरकारी नुमाइंदों के मौखिक बयानों से संतुष्ट नहीं हैं. इसी क्रम में मंगलवार को गिरिडीह जैन समाज के मंत्री लोकेश जैन, महिला समिति की मंत्री मंजू जैन, उपमंत्री धीरज जैन और अजय जैन ने संयुक्त रूप से पत्रकारों से कहा कि प्रस्ताव के विरोध में देशभर में समाज के लोग उद्वेलित हैं.
सम्मेदशिखर जैन समाज की आत्मा है
पदधारियों ने कहा कि हमारी एक सूत्री मांग सिर्फ यही है कि तीर्थ क्षेत्र को तीर्थ क्षेत्र रहने दिया जाय। सम्मेद शिखर जैन समाज की आत्मा है, जिसपर हमले करना कदापि उचित नहीं है। कहा कि हम सरकार से हाथ जोड़कर करवद्ध विनती करते हैं कि तीर्थ क्षेत्र की पवित्रता को बनाये रखने के लिए तत्काल जैन समाज के प्रस्ताव वापस ले लिया जाये। आज देश भर के मीडिया ने भी सम्मेद शिखर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया है. दूसरी ओर गिरिडीह जिला प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निबटने के लिए तैयार है. डीसी नमन प्रियेश लकड़ा के निर्देश पर पारसनाथ के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. वहीं जैन समाज लगातार राज्य सरकार पर अपने फैसले वापस लेने का दबाव बनाए हुए है.
भारतीय सनातन संस्कृति में आस्था सर्वोपरि है. मध्यकाल में आस्था स्थलों पर हुए बेशुमार हमलों के बावजूद भारतीय संस्कृति गरिमा के साथ आज भी कायम है. हमारी प्राचीन संस्कृति की प्रमुख विशेषता है. देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्राचीन मंदिरों (उपासनास्थलों) में कई सदियों से गणपति बप्पामोरया, हर-हर महादेव, जय माता दी और वाहेगुरू के जयकांरों से गुंजायमान है. इनमें सामाजिक समरसता और धार्मिकता-आध्यात्मिकता का बोध होता है. इन प्राचीन धार्मिक स्थलों पर आस्था से परिपूर्ण श्रद्धालु तनावपूर्ण जीवन में आत्मिक सुख पाने की चाहत में परिजनों के साथ जाते हैं. ऐसे उपासना स्थलों पर जाकर बाल-बच्चों के लिए मन्नतें मांगी जाती हैं या मन्नतें पूरी होने के बाद वहां पूजा-अर्चना या चढ़ावा के लिए जाते हैं, मत्था टेकते हैं. गृहस्थ जीवन के लिए मनोवांछित आशीर्वाद के साथ नई उम्मीदें लेकर आत्मविश्वास के साथ घर वापसी हैं. देश के इन्हीं प्राचीन मंदिरों में शक्ति और भक्ति की साधना स्थली राजस्थान के सकराय में स्थित वनस्पति की देवी माता शाकम्बरी का अलौकिक धाम “शाकम्बरी पीठ” शुमार हैं, जहां भक्तों की ऐसी अटूट आस्था जुड़ी है. इस वर्ष 6 जनवरी को पावन तिथि पड़ी है. इस अवसर पर देश भर से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे. विशाल भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारी चल रही है.
51 शक्तिपीठों में एक है शाकम्बरी पीठ
भक्तों की मानें तो माता के दरबार में सच्चे मन से मत्था टेकनेवाले हर भक्त की मनोकामना आकार लेती है और हमारे सपने हकीकत में बदल जाते हैं. मंदिर में विराजमान माता ब्रहाणी माता रुद्राणी की रहमत से भक्त की हर वाजिब मनोकामना पूरी होती है. राजस्थान के सीकर जिले के उदयपुर वाटी में स्थित मालकेतु पर्वत के मध्य घाटी, जिसके चारों ओर छोटे-बड़े शिखरों, जंगली फल-फूल के पेड़ों की लताओं के बीच स्थित माता का भव्य मंदिर है, जो मां दुर्गा स्वरुपा 51 शक्ति पीठों में एक है शाकम्बरी पीठ, जिन्हें भक्त शाक-सब्जियों की देवी शताक्षी समेत विविध नामों से पूजते हैं. देवी भगवती सांभर इलाके की अधिष्ठात्री देवी भी है. मातारानी के मंदिर के कारण इलाके का पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक एंव पुरातात्विक महत्व एंव सदियों से गौरवशाली इतिहास और विशेष संस्कृति की पहचान रही है.
युधिष्ठिर ने बनवाया था मंदिर
लोहार्गल माहात्मय समेत अन्य धर्मग्रथों के मुताबिक देवराज इन्द्र ने सकराय के इसी स्थान पर शाकम्बरी देवी की आराधना कर मां के आशीर्वाद से अपना खोया राजवैभव प्राप्त किया था। इसके अलावा महाभारत युद्ध के पश्चात गौत्र हत्या के पाप से मुक्ति के लिए पांचों पाण्डवों ने इसी लोहार्गल में आकर युद्ध में प्रयोग किये गये शस्त्रों को पवित्र कुंड में बहाये एंव धर्मराज युधिष्ठिर ने देवी शंकरा अर्थात माता शाकम्बरी का मंदिर बनाया जो कालान्तर में शाकम्बरी पीठ के नाम से विख्यात हुआ उक्त संदर्भ में कई उल्लेखित शिलालेख मंदिर के पूर्वी छोर में मंदिर की प्राचीनता का गवाह है। माता शाकम्बरी शाक की देवी के रूप में पूजित है। मान्यता है कि एक समय पृथ्वी पर सौ सालों तक वर्षा नहीं होने से पूरी पृथ्वी में त्राहि-त्राहि मच गई थी. जन-जीवन के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा तो देव -मुनियों ने देवी भगवती से प्रार्थना कर इस संकट से उबारने की गुहार लगाई। फलस्वरूप देवी भगवती ने शाकम्बरी के रूप में प्रगट होकर अपने शरीर से शाक द्वारा संसार का भरण-पोषण किया एवं वर्षा कर देवी ने सृष्टि को नष्ट होने से बचाया था. जिसके कारण पौष पूर्णिमा को देवी शाकम्बरी का प्राक्कटय दिवस मनाया जाता है. इस पावन तिथि को भक्त फल-फूल, शाक-सब्जी, हलवा-पुड़ी, खीर का भोग लगाकर सुहाग की चुनरी अर्पित करते हैं.
पौष पूर्णिमा पर होता है सामूहिक महोत्सव
ऐसे तो देश-विदेश से 365 दिन लाखों श्रद्धालु माता शाकम्बरी के दरबार में वंदना करने आते हैं, लेकिन सभी नवरात्रों के अलावा हर साल पौष पूर्णिमा को माता का प्राकट्य महोसत्व सामूहिक रूप से मनाया जाता है. इस विशेष दिवस पर देशभर के विभिन्न जनपदों में भी भक्तगण भव्य रूप से मातारानी की जयंती मनाते हैं. इस दौरान माता ब्राहाणी-रूद्राणी का भव्य श्रृंगार कर दरबार सजाकर, संगीतमय मंगल पाठ, चुनरी उत्सव, मेंहदी उत्सव, छप्पन भोग, कन्या भोजन, मंगल आरती, महाप्रसाद समेत विविध कार्यक्रमों में भाग लेकर सपरिवार जोत लेते हैं। परिवार में सुख-शांति और समद्धि की प्रार्थना के लिए लोगों को यहां पहुंचना शुरू हो गया है. माता शाकम्बरी के देश भर में लाखों भक्त है। लेकिन कहा जाता है कि माता रानी राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में कई राजघरानों की कूल देवी हैं. बगैर विघ्न-बाधा के पूजा-अर्चना संपन्न कराने के लिए पुलिस को होटलों के आसपास चौकसी बरतने का सख्त निर्देश जारी किया गया है. सकराय में पुलिस-प्रशासन हर आने-जानेवालों पर कड़ी निगाह बनाए हुए है.
डकरा, 02 जनवरी : सरस्वती विद्या मन्दिर करकट्टा में क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया। विद्यालय के विद्यार्थियों के बीच दो टीमों का गठन किया गया जिसमें एसवीएम टाइगर एवं एसवीएम फाईटर के बीच यह मैच खेला गया। मैच के दौरान एसवीएम टाइगर 12ओवर में 7 विकेट पर 70 रन बनाई वहीं दूसरी टीम एसवीएम फाईटर 7 ओवर में 3 विकेट पर 71 रन बनाकर मैच पर जीत हाशिल कर ली। इस मैच का शुरुआत प्रधानाचर्या शालीग्राम सिंह के द्वारा मैच का पहला गेंद मार कर किया गया। मौके पर आचार्य गोविंद चौहान, श्रीकांत शर्मा, संजीव सिंह, गौरी शंकर कमिला, पुरुषोत्तम सिंह,चंद्रभूषण सिंह, दिलीप शर्मा, पूनम पाठक, मती संध्या सिन्हा, नूतन सिंह तथा अन्य शिक्षक उपस्थित थे।
डकरा, 02 जनवरी : झारखंड पब्लिक स्कूल मोहननगर खलारी के अंडर 19 बालिका फुटबॉल टीम सीबीएसई राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए भोपाल रवाना हुए। ये सभी फुटबॉल खिलाड़ियो को दिनांक 03 जनवरी से 07 जनवरी तक मध्य प्रदेश भोपाल मे आयोजित सीबीएसई राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता मे शामिल होना है। इस प्रतियोगिता मे पूरे भारत देश से कई राज्य के फुटबॉल महिला खिलाड़ी शामिल होंगे। खलारी पिपरवार कोयलांचल क्षेत्र से पहली बार बालिका फुटबॉल टीम का चयन अंडर 19 सीबीएसई राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता के लिए किया गया। इस फुटबॉल प्रतियोगिता मे शामिल होने वाले झारखंड पब्लिक स्कूल के फुटबॉल खिलाड़ियो में दीपिका कुमारी, सोनी कुमारी, सुलेखा कुमारी, कंचन कुमारी, रविना कुमारी, निधी कुमारी, अलका कुमारी, करिश्मा कुमारी, पूजा कुमारी, बबीता कुमारी, रींकी कुमारी, आंचल कुमारी एवं उषो कुमारी शामिल हैं वहीं उनके साथ कोच के रूप मे गणेश कुमार महतो एवं मैनेजर के रूप मे रीता कुमारी भी शामिल रहेंगे। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अभिषेक चौहान एवं सभी शिक्षकों ने सभी खिलाड़ियो को बधाई एवं उज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी है।
डकरा, 02 जनवरी : कैलेंडर ईयर के नये साल में वित्तीय वर्ष 2023-24 की शुरुआत से एनके एरिया अपने स्वर्णिम काल में प्रवेश करने जा रहा है इसके लिए सभी तरह की तैयारियां पूरी कर ली गई है। कुछ जरुरी औपचारिकता पूरा होते ही धरातल पर सबकुछ दिखाई देने लग जाएगा। उक्त बातें एनके एरिया के महाप्रबंधक संजय कुमार ने कही। वे नववर्ष के मौके पर अपने कार्यालय के सभागार में सोमवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होनें बताया कि पुरनाडीह परियोजना को वन विभाग से स्टेज-वन क्लीयरेंस मिल गया है। स्टेज-टू क्लीयरेंस भी कुछ महीने में मिल जाएगा इसके बाद प्रति वर्ष यहां से तीस लाख टन कोयला उत्पादन हो सकेगा। केडीएच को भी स्टेज-वन इसी महीने मिल जाएगा। वहां भी स्टेज-टू क्लीयरेंस होते ही बिश्व बैंक द्वारा संपोषित इस खदान से प्रति वर्ष रिकार्ड तोड़ 40-45 लाख टन कोयला उत्पादन किया जा सकेगा। आगे उन्होंने कहा कि यहां जो रैयतों को नौकरी मुआवजा देना है उसके लिए रांची उपायुक्त से बात हुई है। जितना जल्दी जमीन सत्यापन हो जाएगा उतना जल्दी हमलोग काम शुरू कर देंगे। चुरी,केडीएच और पुरनाडीह परियोजना को राज्य सरकार ने कंर्सन टू ऑपरेट (सीटीओ) दे दिया है। रोहिणी और डकरा को भी जल्दी मिल जाएगा। उन्होनें कहा कि एनके एरिया का भविष्य संवरने का लाभ पूरे क्षेत्र को मिलना तय है इसलिए सभी अपने सकारात्मक सहयोग और योगदान प्रबंधन को दें ताकि काम में तेजी बनी रहे।
रांची : पूर्व मंत्री, झारखण्ड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य एवं झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने लंबे समय से विचाराधीन या लंबित केसों को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा कुछ दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठाए गए सवालों को ताजा कर दिया है. श्री तिर्की ने उसी मामले को आगे बढ़ाते हुए कहा कि रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार होटवार सहित पूरे प्रदेश के सभी जेलों में आदिवासियों, अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों सहित सभी वर्गों के अनेक वैसे कैदी न्याय की आस में बंद है, जिनका मामला लंबे समय से न्यायालय में सुनवाई के लिए विचाराधीन या लंबित है.
मानवता के आधार निर्णय लेने की जरूरत
श्री तिर्की ने कहा कि इसके साथ ही वैसे मामलों की संख्या भी अच्छी-खासी है, जहां मामूली अपराधों के लिए भी उन्हें जेल में रहते हुए लंबा समय बीत गया पर वैसे कैदी केवल आर्थिक या अन्य कारणों से सम्बंधित अदालतों की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से पूरा नहीं कर पाये और अबतक जेल में बंद हैं. उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश से उन्हें वैसी जानकारी और सूचनाएं मिलती हैं जो दिल को झकझोर देती है. कांग्रेस नेता ने कहा कि संवेदना एवं मानवता के आधार पर वैसे मामलों को गंभीरता से देखने की जरूरत है. उन्होंने झारखण्ड हाईकोर्ट, झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और राज्य सरकार के विधि विभाग के सक्षम अधिकारियों से इस मामले पर गंभीरता से विचार करने की अपील करते हुए कहा कि यदि इस दिशा में सार्थक और सकारात्मक कदम बढ़ते हैं तो न केवल सभी को बिना पक्षपात के शीघ्र न्याय देने का भारतीय संविधान का उद्देश्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी और अनेक लोगों की आँखों के सामने छाया अंधेरा छंटेगा बल्कि अनेक दृष्टि से कमजोर उन साधनहीन कैदियों की दुआ-प्रार्थना भी मिलेगी.
खर्चीली अदालती प्रक्रिया भी जिम्मेवार
उन्होंने कहा कि वर्षों एवं महीनों से विचाराधीन उन कैदियों के मामले भी बेचैन करनेवाले हैं, जहां छोटे-छोटे लड़ाई-झगड़े, मारपीट जैसे मामलों में गिरफ्तार अनेक विचाराधीन कैदी जेल में हैं और वे केवल अदालत की प्रक्रिया को पूरा न करने जैसे तकनीकी कारणों से ही जेल में बन्द हैं. इसके अलावा कई मामले वैसे भी हैं, जहां केवल कुछ पैसे के अभाव में उनके परिवार के सदस्य अदालती प्रक्रिया से बचते हैं क्योंकि उन्हें इस बात की चिंता है कि यदि अदालती कारवाई में उनके पास की थोड़ी-बहुत धन-संपत्ति भी यदि चली जायेगी तो वे अपना जीवन कैसे गुजारेंगे? उन्होंने कहा कि न्याय की आस में जेल में बन्द कई विचाराधीन कैदियों के मामले इस मामले में दिलचस्प एवं संवेदना से भरे हैं कि यदि उन मामलों में उन्हें आरोपित कर सजा भी सुनाई जाती है तो वह छोटी अवधि की होगी और उससे कई गुणा अधिक सजा वह पहले ही काट चुके हैं. उन्होंने कहा कि जेल में बन्द वैसे कैदियों और उनके परिवार की परेशानी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. श्री तिर्की ने कहा कि वे न्यायालय का पूरा सम्मान करते हैं और इस संदर्भ में वे झारखण्ड उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से सकारात्मक दिशा में प्रयास की अपेक्षा के साथ ही राज्य सरकार और विशेष रूप से सरकार के विधि विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में विधि-सम्मत कार्रवाई की अपील के साथ एक विस्तृत प्रतिवेदन बनाकर राज्य सरकार के साथ ही न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की अपेक्षा रखते हैं जिससे अनेक कैदियों की आंख के सामने कायम अंधेरा कोहरा छंटे.
रांची : भारत सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के कल्याण हेतु जारी प्रधानमंत्री के 15 सूत्री कार्यक्रम के अन्तर्गत संशोधित मार्गदर्शिका के आलोक में झारखण्ड सरकार द्वारा राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया, जिसमें रांची जिले से सुकुरहुटु, कांके निवासी झारखण्ड आन्दोलनकारी समनुर मंसूरी को राज्य स्तरीय सदस्य बनाया गया है। श्री मंसुरी गैर सरकारी एवं गैर निर्वाचित प्रतिनिधि बनाए गए हैं, जो अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए पूरे राज्य में काम करेंगे.
झामुमो के सदस्यों ने बधाई दी
सदस्य बनने पर राज्य समन्वय समिति के सदस्य सह झामुमो केन्द्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय, केन्द्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य, राज्यसभा सांसद डॉ महुआ माजी, झामुमो जिलाध्यक्ष मुशताक आलम, जिला सचिव डॉ हेमलाल कुमार मेहता हेमू, जिला उपाध्यक्ष अश्विनी शर्मा, जनक नायक, कांके प्रखण्ड अध्यक्ष जावेद अख्तर अन्सारी, सचिव नवीन तिर्की एवं क्रीड़ा मोर्चा के पूर्व केन्द्रीय सचिव प्रदीप मिर्धा के अलावा रांची जिले के सभी कार्यकर्ताओं ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।