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Thursday, November 5, 2026
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आखिर क्यो नहीं मिला मुहम्मद रफ़ी को भारत रत्न ?

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अमृतसर से लाहौर की दूरी कुल 50 किलोमीटर है। इसी दो शहरों के बीच कोटला सुल्तान सिंह गांव में हाजी अली मुहम्मद की एक नाई की दुकान थी।हाजी अली मुहम्मद अपने गांव के एकमात्र हाजी थे इसलिए उनका गांव में बेहद सम्मान था। इन्हीं हाजी अली मुहम्मद के तीन बेटों में एक थे “फिको” ।फीको को गाने का बहुत शौक था , बचपन में ही वह गांव में गाने गाकर भीख मांगते फकीरों के पीछे पीछे चलते , उनके गाए गाने गाते और गुनगुनाते।मगर उनके साथ समस्या यह थी कि “फीको” के वालिद हाजी और बेहद दीनदार थे इसलिए “फीको” के गाना गाने पर उन्हें ऐतराज था।फीको उनकी गैरमौजूदगी में अपनी नाई की दुकान पर बैठे बैठे फकीरों के गानों को गाया करते थे‌।पिता की सख्ती शायद “फीको” के इस शौक को खत्म ही कर देती कि उनके बड़े भाई दीन‌ मुहम्मद ने उनकी मदद की और उन्हें किराना घराने के अब्दूल वहीद खान , जीवन लाल‌ मट्टू , फिरोज निजामी और छोटे गुलाम अली खान साहब के यहां ले जाते और “फीको” इन सभी उस्ताद लोगों से संगीत सिखते।तभी 1937 में एक घटना हुई और लाहौर में लगने वाले एक मेले में तत्कालीन मशहूर गायक के एल सहगल परफार्म करने वाले ही थे कि बिजली की समस्या आ गयी और के एल सहगल अंधेरे में परफॉर्म करने से मना कर दिए।के एल सहगल का इंतजार कर रही भीड़ ने हंगामा कर दिया और आयोजक परेशान हो गए , तभी आयोजकों ने माईक पर ऐलान किया कि आप लोग एक बार 13 साल के इस बच्चे “फीको” को सुन लीजिए फिर के एल सहगल आएंगे।”फीको” रात भर भीड़ को गाना सुनाते रहे और भीड़ के एल सहगल को भूल कर “फीको” को ही सुनती रही।प्रोग्राम खत्म होने के बाद के एल सहगल ने “फीको” को बुलाया और शाबाशी दी , उनके साथ मौजूद संगीतकार श्याम सुन्दर ने “फीको” को एक पंजाबी फिल्म “गुल बलोच” में एक गाना गवाया “सोनियो नी हीरियो नी”https://youtu.be/uYYT3tzNK1Uश्याम सुन्दर ही “फीको” को लेकर बांबे आ गये और “फीको” को रहने के लिए एक चाल की व्यवस्था कर दी।फीको स्वभाव से इतने शर्मीले और शांत थे कि वह चाल में रहते थे और दूसरों को कष्ट ना हो इसलिए संगीत का रियाज नहीं करते थे।रियाज में समस्या होती देख “फीको” मरीन ड्राइव सुबह सुबह पहुंच जाते और संगीत का रियाज करते थे और वहीं उनकी आवाज़ हर सुबह गूंजा करती थी।मरीन‌ ड्राईव पर ही तत्कालीन अभिनेत्री और गायिका सुरैया रहती थीं , वह हर दिन फीको की गूंजती आवाज सुनतीं।एक दिन सुबह मरीन ड्राइव पर समुद्र के किनारे बैठे “फीको” रियाज़ कर ही रहे थे कि सुरैया घर से बाहर आईं और पीछे खड़ी होकर फीको को सुनने लगीं।रियाज़ खत्म होने के बाद सुरैया ने पूछा कि आपका नाम , फीको ने कहा “मुहम्मद रफ़ी”। दरअसल मुहम्मद रफ़ी के घर का नाम “फीको ही था।सुरैया , मुहम्मद रफ़ी की आवाज से इतनी अधिक प्रभावित हुईं कि उन्होंने मुहम्मद रफ़ी से आग्रह किया कि वह मरीन ड्राइव पर बैठ कर रियाज़ करने की बजाय उनके घर पर आकर रियाज़ किया करें।संकोची मुहम्मद रफ़ी मना करते रहे मगर सुरैया ने उन्हें मना लिया , और मुहम्मद रफ़ी सुरैया के घर पर जाकर रियाज़ करने लगे। यहां पर मुहम्मद रफ़ी की मुलाकात तत्कालीन सुपर स्टार संगीतकार नौशाद से हुई , नौशाद ने मुहम्मद रफ़ी को सुना और अपनी एक फिल्म में “कोरस” के तौर पर मुहम्मद रफ़ी को गाना गवाया।और फ़िर कुछ दिन बाद ही नौशाद ने अपनी फिल्म “गांव‌ की गोरी” में पहला गाना मुहम्मद रफ़ी से गवाया जिसके लिए मुहम्मद रफ़ी को ₹1 दिया। मुहम्मद रफ़ी ने इस ₹1 के सिक्के को सारी ज़िन्दगी संभाल कर रखा। मगर तब तक मोहम्मद रफी एक अंजान से गायक ही थे कि 1946 में उनका पहला गाना हिट हुआ “तेरा खिलौना टूटा रे बालक”।और फिर नौशाद और मुहम्मद रफ़ी की जोड़ी ने तहलका मचा दिया , मोहम्मद रफी ने सबसे अधिक 158 गाने संगीतकार नौशाद के साथ ही गाए।के एल सहगल के साथ गाना मुहम्मद रफ़ी का एक ख्वाब था जिसे संगीतकार नौशाद ने 1946 में “शाहजहां” फिल्म के लिए गाना गवाकर पूरा किया।इसी सबके बीच देश को आजादी मिली और लालकिले पर तिरंगा फहराने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के डाइनिंग टेबल पर देश के कुछ चुनिंदा लोगों के साथ मुहम्मद रफ़ी भी बैठे थे।इसके बाद महात्मा गांधी जी की हत्या हो गयी और जवाहरलाल नेहरू के निवेदन पर मुहम्मद रफ़ी ने महात्मा गांधी पर एक गीत गाया “सुनो सुनो ऐ दुनिया वालों बापू की ये अमर कहानी” https://youtu.be/FkfwV9rrb-kबापू के लिए गाए इस गीत को सुनकर जवाहरलाल नेहरू फफक कर रो पड़े थे।इसके बाद मुहम्मद रफ़ी 1952 में रीलिज हुई “बैजू बावरा” के गाए गीतों के कारण देश भर में छा गये , उनका गाया भजन “मन तड़पत हरि दर्शन को आज” ने भारत में तहलका मचा दिया। और‌ वह तमाम फिल्मों में हिट गीत गाते रहे।तभी भारत चीन युद्ध 1962 हो गया और सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने के लिए तत्कालीन सरकार ने सीमा पर दिलीप कुमार के साथ मुहम्मद रफ़ी को भेजा, जहां ठंड के कारण मुहम्मद रफ़ी की आवाज बैठ गयी और वह सारी रात रोते रहे कि सैनिकों को कैसे उत्साहित करूं , खैर जितना भी संभव हुआ वह अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक कैंप से दूसरे कैंप में जाते रहे और गाना सुनाते रहे।शम्मी कपूर से‌ लेकर राजेंद्र कुमार तक की फिल्मों मुहम्मद रफ़ी की आवाज के कारण सुपरहिट होती गयीं। धर्मेंद्र तो निर्माता के साथ कांट्रेक्ट में यह लिखवाते थे कि इस फिल्म में उनका गाना मोहम्मद रफी ही गाएंगे।गीत संगीत के अतिरिक्त मुहम्मद रफ़ी का मानवीय पक्ष बेहद मजबूत था , वह था उनके द्वारा लोगों की चुपचाप मदद करना। भिखारियों को बिना गिने जेब से पैसे निकाल कर भीख दे दिया करते थे।एक बार संगीतकार नौशाद ने उनकी इस आदत पर उन्हें रोका तो मोहम्मद रफी ने जवाब दिया कि “जब अल्लाह बिना गिनती के उन्हें दे रहा है तो मैं क्यों गिनूं ?”मुहम्मद रफ़ी साहब की दान देने की प्रवृत्ति इतनी ज़बरदस्त थी कि अपने घर के पास ही रहने वाली एक विधवा को मनीआर्डर किया करते थे। कुछ सालों बाद महिला के पास मनीआर्डर आना बंद हो गया , महिला पोस्ट आफिस गयी तो बताया गया कि जो व्यक्ति मनीआर्डर भेजता था उसकी मृत्यु हो गयी , महिला ने नाम पूछा तो “मुहम्मद रफी” नाम सुनकर वह हैरान रह गयी कि इतने सालों तक मुहम्मद रफ़ी उनको पैसे भेजते रहे।ऐसे ही मुहम्मद रफ़ी के ड्राइवर की भी कहानी है , कारों के शौकीन मुहम्मद रफ़ी ने विदेश से एक कार मंगाई , कार लेफ्ट साइड ड्राईव थी , मुहम्मद रफ़ी के ड्राइवर को कार चलाने में समस्या आने लगी तो घर वालों ने ड्राइवर बदल कर दूसरा रख लिया।मुहम्मद रफ़ी ने अपने पुराने ड्राइवर को बुलाया और ड्राईवर को उस समय 70 हजार की फिएट खरीद कर दिया कि लो टैक्सी में चलाकर अपने परिवार का खर्च पूरा करो।विदेश दौरे से कभी डायलिसिस की मशीन खरीद लाए और अस्पताल में गरीबों के लिए दान‌ कर दिया तो कभी अभिनेता जितेंद्र को फोन लगाकर डांटा जब वह फिल्म “दिदार ए यार” के लिए अधिक पैसे दे दिए क्योंकि फिल्म बनने में लेट हो गई थी।मुहम्मद रफी ने जितेंद्र को फोन लगाकर डांटा कि बहुत पैसे वाले हो गये हो ? जितना तय हुआ उतना ही लूगा। और अपने मैंनेजर ज़हीर को सख्ती से बोला कि बढ़े पैसे जितेन्द्र को वापस कर दें।मुहम्मद रफ़ी बेहद नर्म दिल के इंसान थे , अपने उसूलों के लिए वह लता मंगेशकर से भिड़ गये और इन‌ दोनों की आपस में कड़वाहट इतनी बढ़ गई कि 4 साल तक इन दोनों ने साथ गाना नहीं गाया , मुहम्मद रफ़ी , सुमन कल्याणपुर के साथ गाना गाते रहे।दरअसल मंगेशकर हमेशा ही संगीतकारों से अपने मन मुताबिक बदलाव करवा कर ही गाने गाती थीं वहीं मुहम्मद रफी साहब हमेशा से ही संगीतकारों के मुताबिक गाना गाते रहे। दोनों में टकराव की शुरुआत “माया” फिल्म के एक गाने ‘तस्वीर तेरी दिल से जिस दिन से’ की रिकार्डिंग के वक्त हुई ।”माया” फिल्म का यह गाना एक बंगाली गीत की धुन पर आधारित था, जिसे लता जी 1 साल पहले ही गा चुकी थी। लेकिन यह गाना रिलीज नहीं किया गया। ऐसे में जब इस गाने को हिंदी में गाया जाना था तो लता जी ने इसमें अपने मुताबिक बदलाव की मांग रखी।लता जी की इस मांग पर गाने के निर्देशक सलिल चौधरी ने असहमति जाहिर की। ऐसे में इस गाने में लता के साथ मेल वॉइस दे रहे मोहम्मद रफी यह तय नहीं कर पा रहे थे कि आखिर वह किस के हिसाब से इस गाने को गाए। गाने के दौरान उन्होंने नर्म अंदाज में इस गाने को गाया जबकि लता बदलाव करने के बावजूद असंतुलित आवाज में गाना गाए जा रही थी। ऐसे में रफी और लता के बीच गाने के बोल को लेकर कहासुनी हो गई और दोनों गायकों के बीच कोल्ड वॉर शुरू हो गई।लता मंगेशकर और मुहम्मद रफ़ी में और कटुता बढ़ी “रायल्टी” को लेकर और फिर ऐसी बहस छिड़ी कि दोनों ने साथ काम करने से इंकार कर दिया। दरअसल लता मंगेशकर ने इंडस्ट्री के सभी गायकों की आवाज उठाते हुए उनके लिए रॉयल्टी की मांग की थी। इस मुद्दे पर सभी गायकों ने मीटिंग रखी, लेकिन रफी साहब लता और रॉयल्टी की मांग कर रहे अन्य गायकों के खिलाफ थे।मुहम्मद रफ़ी का कहना था कि उन्हें गायन का मेहनताना मिल गया तो निर्माता की कमाई से उन्हें कोई हिस्सा नहीं चाहिए , जबकि लता मंगेशकर का कहना था कि निर्माता उनके गाए गाने से सालों साल तक कमाते हैं जिसमें से उन्हें भी हिस्सा चाहिए।ऐसे में रफी साहब ने कहा कि वह लता के साथ गाना नहीं गाएंगे। इस पर लता ने जवाब में कहा “आप क्या मेरे साथ गाना गाएंगे, मैं खुद कभी आपके साथ नहीं गाऊंगी।”बस फिर क्या था इस तरकार के बाद करीब 4 साल तक लता मंगेशकर और रफी साहब ने ना ही कोई गाना गाया और ना ही कोई मंच साझा किया।चार साल में जब मुहम्मद रफ़ी और सुमन कल्याणपुर के गाए गीत सफलता की बुलंदियों को छूने लगे तब लता मंगेशकर ने अपनी चौधराहट को खतरे में देख कर मुहम्मद रफ़ी से समझौता कर लिया।मुहम्मद रफ़ी हज यात्रा के बाद जब गाने से संन्यास ले लिए तब फिल्म इंडस्ट्री में हंगामा मच गया , उनको मनाने के सारे प्रयास विफल हो गये तब संगीतकार नौशाद उनके पास गए , उन्हें समझाया कि तुम्हारे गीत लोगों को सुकून देते हैं इससे अच्छी इबादत और क्या होगी ? तब जाकर मुहम्मद रफ़ी फिर गाने लगे।मुहम्मद रफ़ी के बारे में इस पोस्ट की आखिरी कहानी एक मस्जिद से जुड़ी है जहां वह नमाज़ पढ़ने गये और लोग मस्जिद बनाने के लिए मदद मांग रहे थे।मुहम्मद रफ़ी ने वहां ₹5000 दिया और आ गये , थोड़ी देर में मस्जिद से लोग उनके घर आए और पैसे वापस करने लगे कि गाने बजाने के ज़रिए हुई कमाई मस्जिद में नहीं लगाई जाएगी इसलिए यह पैसे वापस ले लीजिए।मुहम्मद रफ़ी ने उनसे कहा कि जिस अल्लाह का घर बनाने के लिए मैंने पैसे दिए उसी अल्लाह ने मुझे गला दिया , गाने का हुनर दिया है।पैसे वापस देने आए लोग वापस चले गए।यह मुहम्मद रफ़ी की लोकप्रियता ही थी कि फांसी के फंदे पर चढ़ने से पहले एक शख्स ने अपनी आखिरी इच्छा बताई कि वह मुहम्मद रफी का गाना सुनना चाहता है।कोई और देश होता तो मुहम्मद रफ़ी को पुरस्कारों से लाद देता मगर मुहम्मद रफ़ी को 1967 में केवल एक पुरस्कार “पद्म श्री” दिया गया। मुहम्मद रफ़ी आज भी “भारतरत्न” के हकदार हैं, कल भी थे और कल भी रहेंगे। आज उनके जन्मदिन पर खिराज ए अकीदत

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खलारी – विस्थापित प्रभावित एकता मंच का धरना प्रदर्शन 38 वां दिन भी रहा जारी

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डकरा, 30 दिसम्बर : विस्थापित प्रभावित एकता मंच का धरना प्रदर्शन 38 वां दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को समस्त विथापित प्रभावित ग्रामीणों की बैठक की गई। बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि जो सात सूत्री मांगें हैं उस पर सीसीएल प्रबंधन की जिम्मेवारी बनती है सीसीएल प्रबंधन सिर्फ छलावा करके अपना काम निकालना चाहती है। जेहली टांड़ के घरों के नजदीक खदान का आना प्रबंधन की अनदेखी ही कही जाएगी जिससे यहाँ के ग्रामीण डरे सहमे हुए हैं। प्रबंधन अपना उल्लू सीधा करने में लगा हुआ है जबकि डेंजर जोन में रह रहे ग्रामीणों को जान माल जाने का डर सता रहा है। इधर खदान में ब्लास्टिंग करने से अप्रिय घटना का अंदेशा जताया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रबंधन किसी अनहोनी के इंतजार में है तभी हमारी मांगों पर विचार किया जायेगा। मंच के ओर से प्रबंधन को फिर से आगाह किया गया है कि सात सूत्री मांगों को पूरा करने एवं डेंजर जोन के घरों को अन्यंत्र विस्थापित करने के बाद ही ब्लास्टिंग शुरू करे, मंच अपनी मांगों पर अडिग है अन्यथा आंदोलन और भी बृहद रूप ले लेगा। इस दौरान पूर्व मुखिया निर्मला उरांव,शिबू महली,सुरेश साव,सिकंदर अंसारी,साबिर अंसारी,इसराइल अंसारी,शाहिद अंसारी,सोनू प्रजापति,संतोष रजक,अनिल प्रसाद,हरि प्रजापति,आजाद खान,सज्जाद अंसारी,नसीम अख्तर,हसन अंसारी एवं समस्त ग्रामीण उपस्थित थे।

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खलारी – रोजगार को लेकर रैयत विस्थापित मोर्चा ने पुरनाडीह पीओ को सौंपा ज्ञापन

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खलारी, 30 दिसम्बर : रैयत विस्थापित मोर्चा ने पुरनाडीह कोल डंप में रोजगार की मांग को लेकर पुरनाडीह पीओ को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बेंती पंचायत की मुखिया सरिता देवी,पंचायत समिति सदस्य कुमारी अनुप्रिया एवं जिला परिषद सदस्य नेहा उरांव सहित सैकड़ों ग्रामीणों के हस्ताक्षर है।ज्ञापन के माध्यम से कहा गया है कि पुरनाडीह परियोजना में सैकड़ों रैयतों ने अपनी जमीन देकर परियोजना को विस्तारीकरण करने का काम किया।और प्रबंधन के द्वारा खदान खोलने के समय रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था और कोल डंप के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही गई थी साथ ही रैयत विस्थापित बेरोजगारों के जीविकोपार्जन के लिए कोल डंप दिया गया था परंतु विगत कुछ दिनों से यह भी बंद है और कोल डंप बंद होने से यहां के हजारों ग्रामीण बेरोजगार हो गए और दूसरे राज्य में पलायन करने को मजबूर है। सीसीएल प्रबंधन से आग्रह है कि ग्रामीणों के रोजगार एवं जीविका को देखते हुए पंद्रह दिनों के अंदर हमारी मांगों पर सकारात्मक पहल करें अन्यथा हम सभी आंदोलन करने को बाध्य होंगे जिसकी सारी जवाबदेही सीसीएल प्रबंधन की होगी।ज्ञापन सौंपने वाले लोगों में एरिया अध्यक्ष बिगन सिंह भोगता, केंद्रीय सदस्य रंथू उरांव, विनय खलखो,राजेंद्र उरांव, धनराज भोगता, प्रभु गंझू,सोमरा गंझू,सोटन, अरविंद, अजय, बीफा, दिलीप उरांव, धर्मवीर सहित कई लोग शामिल थे।

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खलारी – कोयलांचल के पत्रकारों की वार्षिक बैठक सह वनभोज का किया गया आयोजन

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डकरा, 30 दिसम्बर : सोशल मिडिया प्लेटफार्म पर सूचनाओं की आपाधापी में विश्वसनीय, तथ्यपरक और तेज पत्रकारिता के माध्यम से ही आप खबरों की दुनियां में बने रह सकते हैं इसके लिए पत्रकारों को अपने व्यक्तिगत आचरण को भी आर्दश बनाकर रखना होगा। उक्त बातें खलारी क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार मुक्तिनाथ गिरि ने कही। वे शुक्रवार को मानकी सपही नदी घाट पर कोयलांचल के पत्रकारों की एक वार्षिक बैठक सह वनभोज कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होनें कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारों के समक्ष प्रतिदिन परिस्थितियां बदल रही है और ऐसे दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के समक्ष भी अवसर मिल रहे हैं। आधुनिक तकनीक को अपनाकर कोई भी अपने आप का एक्सपोजर बन बड़े स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित कर सकता है। बैठक को बिष्णु साहू, राकेश कुमार,अरुण चौरसिया, सुनील कुमार, धीरेन्द्र प्रसाद आदि ने भी संबोधित किया। इसके पहले बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और निर्णय लिया गया कि अगले साल खलारी-पिपरवार कोयलांचल की समस्याओं को लेकर जन-जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए कुछ एजेंडा भी बनाया गया है। इस बीच वरिष्ट पत्रकार राकेश सिंह (पप्पू) को उनके जन्मदिन पर सभी ने स्वस्थ एवं खुशमय जीवन की मंगल कामना करते हुए बधाई व शुभकामनाएं दी। संचालन अनील पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन सुनील कुमार ने किया। इस अवसर पर दिनेश पांडेय, जीतेन्द्र राणा, मनोज प्रसाद, नरेश चौरसिया, अशोक सिंह, प्रमोद तिवारी, अखिलेश गिरि, रविंद्र यादव,विशाल कुमार, बिश्वजीत चौहान, देवनारायण गंझू, परवेज आलम, संजय ओझा, संजय कुमार सिंह, प्रकाश कुमार, प्रवेश चौहान, पंकज ठाकुर आदि मौजूद थे।

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पारसनाथ में 27 जनवरी से 3 फरवरी तक चलेगा महापारणा महामहोत्सव, डीसी ने विधि-व्यवस्था की समीक्षा की

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गिरिडीह: जिले के उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में महापारणा महाप्रतिष्ठा महामहोत्सव पर बैठक आयोजित की गई. महापारणा सम्मेद शिखर भगवान महोत्सव समिति द्वारा मधुबन पीरटांड़ में 27 जनवरी से 3 फरवरी 23 तक महापारणा महाप्रतिष्ठा महामहोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है। बैठक में डीसी ने महापारणा महाप्रतिष्ठा महामहोत्सव के आयोजन को लेकर विधि- व्यवस्था संधारण एवं अन्य बिंदुओं की समीक्षा की. डीसी ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया. कार्यक्रम के दौरान आनेवाले श्रद्धालुओं को लेकर विधि-व्यवस्था एवं तमाम जरूरी सुविधाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों को जरूरी हिदायत दी गई.

डीसी ने अधिकारियों को दिया सख्त निर्देश

बैठक के दौरान जैन समाज के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से महामहोत्सव में आवश्यक सहयोग देने का आग्रह किया। डीसी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि उक्त आयोजन के संदर्भ सभी आवश्यक सुविधाएं मसलन, पेयजल की आपूर्ति, बिजली व अन्य मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाए। साथ ही देशभर से आ रहे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कमी या व्यवधान न हो, इसके लिए  सभी अधिकारी अपनी जगह मुस्तैद रहेंगे। श्रद्धालुओं की सुरक्ष-व्यवस्था में किसी भी तरह चूक न हो, ध्यान रहे सम्मेदशिखर जी की पवित्रता हर कीमत पर अक्षुण्ण रखना हमारा दायित्व है.

देश-विदेश से श्रद्धालु पारसनाथ पहुंचेंगे

महामहोत्सव समिति के प्रमुख संयोजक ऋषभ जी जैन ने बताया कि जैन जगत के महान साधक साधना महोदधी उभयमासोपवासी अंतर्मनाचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज स्वर्णभद्र कूट में पारसनाथ टॉक पर सम्मेद शिखर जी मधुवन में सिंहनिष्कीहित की 557 दिन की अखण्ड मौन साधना में लीन है। इसके लिए सप्ताह भर चलनेवाले इस महामहोत्सव में देश-विदेश में नामी हस्तियां, नेता-अभिनेता व हजारों की संख्या में गुरु भक्तों का उपस्थित रहना सुनिश्चित है। बैठक में पुलिस अधीक्षक अमित रेणू, उप विकास आयुक्त शशि भूषण मेहरा, जैन समाज के प्रतिनिधि, अनुमंडल पदाधिकारी, डुमरी, सिविल सर्जन, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जिला नजारत उप समाहर्ता व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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Cirkus – watch it or not ?

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Rohit Shetty is an Indian film director and producer known for his work in the Hindi film industry. One of his most recent projects is “Cirkus,” a comedy-drama film that is released in Dec 2022.

“Cirkus” is a modern retelling of William Shakespeare’s “The Comedy of Errors,” set in the world of a traveling circus. The film follows the story of two pairs of identical twins who were separated at birth, and the chaos that ensues when they are reunited as adults.

The film features an all-star cast, including Ranveer Singh, Pooja Hegde, Jacqueline Fernandes, and Varun Sharma. Singh plays the role of one of the twins, while Hegde plays the love interest of both twins. Fernandes and Sharma play supporting roles as members of the circus.

“Cirkus” was well-received by audiences and critics alike, with praise for its catchy music, colorful production design, and performances by the cast. It was a commercial success at the box office, grossing over $17 million worldwide.

In addition to directing “Cirkus,” Rohit Shetty is also known for his work on the “Golmaal” film series and the popular television show “Khatron Ke Khiladi.” He is known for his signature style of over-the-top action and comedy, and has established himself as one of the most successful directors in the Hindi film industry.

Overall, “Cirkus” is a fun and entertaining film that showcases Rohit Shetty’s unique vision and talent as a director. It is a must-watch for fans of Bollywood cinema and anyone looking for a lighthearted and enjoyable comedy.

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खलारी – मुख्यमंत्री सुखाड़ राहत योजना के तहत आयोजित कार्यक्रम में खलारी प्रखंड के 15 लाभुक किसान हुए शामिल

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डकरा, 29 दिसम्बर : राज्य सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री सुखाड़ राहत योजना को लेकर गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन सभागार रांची में आयोजित कार्यक्रम में खलारी प्रखंड के खलारी और बमने पंचायत के 15 लाभुक किसान सम्मिलित हुए। खलारी के सभी किसान पारंपरिक पोशाक धोती-कुर्ता और हरा साफा में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य रुप से प्रखंड के खलारी पंचायत की ग्राम बलथरवा के दो किसान छोटू पाहन और सुरेश गंझू को माननीय मुख्यमंत्री झारखंड हेमंत सोरेन के द्वारा चेक दे कर सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि झारखंड में कम बारिश होने के कारण खरीफ फसलों को काफी नुकसान हुआ था, खरीफ फसलों की बुवाई पर असर पड़ा। जिसे देखते हुए राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री सुखाड़ राहत योजना शुरू की गई। इस मौके पर प्रभारी प्रखण्ड कृषि पदाधिकारी आदित्य नाथ झा, किसान छोटू पाहन, सुरेश गंझू , गुजरा पाहन, लाला मुंडा, बाबूलाल पाहन, प्रभात महतो, किशन मुंडा, देवी गंझू, सजीत मुंडा, सुलेन्द्र कुमार मुंडा, नारायण महतो, अशोक कुमार, मनभवन लोहरा, भीखू महतो एवं कृष्ण कुमार शामिल हुए।

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खलारी – देश के औद्योगिक विकास में हिंद मजदूर सभा का बड़ा योगदान : जीएम

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डकरा, 29 दिसम्बर : देश के औद्योगिक विकास में हिंद मजदूर सभा का बड़ा योगदान रहा है। यह संगठन प्रबंधन और ट्रेड यूनियन को पक्ष-विपक्ष के रूप में नहीं मानकर उद्योग के विकास के लिए साथ मिलकर काम करने में विश्वास रखती है इसलिए एचएमएस देश के कई औद्योगिक क्षेत्र में नंबर-वन ट्रेड यूनियन है। उक्त बातें एनके एरिया के महाप्रबंधक संजय कुमार ने कही। वे गुरुवार को डकरा जनता मजदूर संघ कार्यालय में एचएमएस के 75 वें स्थापना दिवस समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोयला क्षेत्र में इनसे जुड़े कई श्रमिक संगठन काम कर रही है और सभी अपना साकारात्मक योगदान कंपनी के लिए दे रहे हैं। एचएमएस के झारखंड कोषाध्यक्ष कमलेश कुमार सिंह बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद एक स्वतंत्र, स्वालंबी एवं प्रजातांत्रिक केन्द्रीय श्रमिक संगठन की आवश्यकता को महसूस करते हुए बड़े समाजवादी सोंच के नेताओं ने इसका गठन किया। इस संगठन ने हमेशा अपने को सभी राजनीतिक दलों से दूर रखते हुए सिर्फ मजदूरों के कल्याण और उधोग के विकास को प्राथमिकता दी। उन्होनें कहा कि आज का दिन मजदूर और उधोग के सर्वांगीण विकास का शपथ लेने का दिन है। समारोह को गोल्टेन प्रसाद यादव,गुल्फी देवी,चुरामन दास,विकास दुबे, संदीप सिंह छोटू एवं राकोमयू के सुनील कुमार सिंह ने भी संबोधित किया। इसके पहले कमलेश सिंह ने महाप्रबंधक को शाॅल ओढ़ाकर और श्रीफल भेंटकर स्वागत किया। दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। अंत में सभी के बीच मिठाई बांटी गई। अध्क्षता गोल्टेन प्रसाद यादव, संचालन डीपी सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन मंतोष सिंह ने किया। इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि रविन्द्र नाथ सिंह सेफ्टी बोर्ड मेंबर एवं मनु सिंह,अजय झा, निर्भय सिंह, उज्वल सिंह, गोलू यादव,
जिमी, छोटू बारीक,अजय चौहान, गणेश ठाकुर शर्मा, निरंजन चौबे, प्रकाश उरांव, टुपा महतो,विजय प्रताप सिंह, टेकलाल महतो, चंद्र भूषण सिंह ,बुटन चौहान, फूलचंद मिश्रा, राकेश कुमार, शशिकांत सिंह, आनंद सिंह, सुधीर कुमार चौहान, रविंदर उरांव, निरंजन साव,राजमुनी उरांव, बैजन्ती देवी,ललिता देवी, रतन लोहार, अमृत बाई, पार्वती कुमारी, मोहनी देवी, मीणा देवी, सुकरी देवी, मुनिया देवी, गणेश राम, बिबता मुंडा, मखल गंजू, पर्भु गंजू ,कंचन महतो, संजय राम, किशुन महतो आदि मौजूद थे।

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खलारी – मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के आदेश के विरोध में की गई सर्वदलीय बैठक

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खलारी, 29 दिसम्बर : प्राथमिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खलारी में डीएमएफटी मद से हाल ही में लगाये गए अल्ट्रासाउंड मशीन को सदर अस्पताल राँची को वापस सुपुर्द करने के असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी राँची के लिखित आदेश के विरोध में गुरुवार को प्राथमिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खलारी के प्रांगण में सर्वदलीय बैठक की गई। इस बैठक में सभी राजनीतिक दलों के प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, समाजसेवी, प्रबुद्ध वर्ग एवं जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। उपस्थित सभी लोगों ने इस आदेश का पुरजोर विरोध किया साथ ही इसे हास्यास्पद बताया, कहा कि सदर अस्पताल को ग्रामीण क्षेत्र से अल्ट्रासाउंड मशीन मंगाने की जरूरत पड़ रही है जो सरकार की स्वास्थ्य सम्बंधित विफलता को दर्शाता है। मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को शहर के लोगों की चिंता सता रही है परन्तु खलारी के लोगों की चिंता उन्हें जरा भी नहीं है, लाखों की आबादी को आखिर किसके भरोसे छोड़ना चाहते हैं? डीएमएफटी मद से प्राप्त सुविधाओं पर पहले यहां के प्रभावित लोगों का हक है न कि अन्य जगहों का। अति आवश्यक परिस्थिति में सदर अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है परन्तु खलारी की जनता को भगवान भरोसे छोड़ना कहाँ का न्याय है? इस दौरान स्वास्थ्य केन्द्र में अति आवश्यक जरूरतों पर चर्चा की गई। साथ ही खलारी एवं बुढ़मू चिकित्सा पदाधिकारी के द्वारा असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी रांची को 16 सूत्री मांग पत्र दिया गया। माँग पत्र में खलारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को बुढ़मू से अलग करने, गायनोकोलॉजिस्ट डॉक्टर की उपस्थिति प्रतिदिन अनिवार्य करने, डीजीओ गायनोकोलॉजिस्ट या रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर का अस्थाई रूप से प्रबंध, जरूरत के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में दवाई उपलब्ध करवाने, ओटी टेबल लाइट सेट स्टेबलाइजर इत्यादि की व्यवस्था, डॉग वाइट वैक्सीन उपलब्ध कराने, लैब टेक्नीशियन एवं पैथोलॉजी जांच लैब की व्यवस्था, लेबर रूम की साफ सफाई एवं हाईटेक व्यवस्था युक्त करने क्योंकि हर महीने लगभग 30 से 35 गर्भवती महिलाओं की प्रसव कराई जाती है, एंबुलेंस के लिए ड्राइवर और इंधन की व्यवस्था, एक चार पहिया वाहन ड्राइवर एवं इंधन के साथ यहां स्वास्थ्य कर्मी व चिकित्सकों के क्षेत्र भ्रमण हेतु उपलब्ध कराने, एक एमपीडब्ल्यू स्टाफ उपलब्ध कराने, सोलर इनवर्टर की व्यवस्था क्योंकि अस्पताल में लाइट की स्थिति सही नहीं रहती है और जनरेटर में इंधन की उपलब्धता नहीं होने के कारण जनरेटर नहीं चलता है अतः इंधन की व्यवस्था, यहां आने वाले मरीजों के लिए स्वच्छ पेयजल के लिए एक्वा गार्ड मशीन की व्यवस्था, सफाई कर्मी की व्यवस्था एवं सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था शामिल हैं। कोविड-19 महामारी पुनः आगमन की संभावना को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में उपरोक्त मांगों को जल्द से जल्द व्यवस्था करने की मांग की है जिससे कि खलारी के लाखों ग्रामीणों को सहज सुविधा मुहैया कराया जा सके। मांग पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री झारखंड सरकार, स्वास्थ्य मंत्री झारखंड सरकार, राज्यसभा सांसद डॉ महुआ माजी, संजय सेठ सांसद रांची,
समरी लाल विधायक कांके एवं उपायुक्त रांची को भी दिया गया है। इधर सांसद संजय सेठ एवं सांसद महुआ मांझी के पहल पर राँची उपायुक्त ने मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी रांची के आदेश को निरस्त करने का आदेश दिया गया है।

राम भक्तों के लिए

झॉलीवुड की हीरोइन रिया हत्याकांड: पति ने नाटकीय अंदाज में रची थी हत्या की साजिश, पुलिस पहली पत्नी से कर सकती है पूछताछ

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नारायण विश्वकर्मा

रांची : हीरोइन पत्नी की कमाई पर ऐश करनेवाले पति ने किसी हिंदी फिल्म की पटकथा तरह एक षडयंत्र रचा और अपनी पत्नी को मौत के घाट उतार दिया. लेकिन 24 घंटे के अंदर षडयंत्र का पर्दाफाश हो गया और पति अब जेल की सलाखों के पीछे है. झारखंड के जॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री पर्दे पर ईशा आलिया के नाम से चर्चित रिया कुमारी की हावड़ा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 16 पर बुधवार तड़के गोली मारकर हत्या कर दी गई थी पर हत्या करनेवाला उसका अपना पति ही कातिल निकला. पति प्रकाश कुमार उर्फ प्रकाश अलबेला के खिलाफ रिया के परिजनों ने उसपर हत्या का आरोप लगाया. इसके बाद पुलिस ने गुरुवार की सुबह पति को गिरफ्तार कर लिया. अभिनेत्री अपने पति प्रकाश कुमार और ढाई साल की बेटी के साथ कोलकाता जा रही थी. पति ने नाटकीय अंदाज में हत्या की साजिश रची थी.

अब पति बना पत्नीहंता

पुलिसिया पूछताछ के बाद और बुधवार रात को रिया कुमारी के परिवार द्वारा दर्ज शिकायत के आधार पर प्रकाश को गिरफ्तार किया गया है। इस हत्या में शामिल अन्य लोगों को भी पुलिस तलाश रही है. रिया की मौत की खबर से झॉलीवुड के सभी कलाकार सकते में हैं. किसी को यकीन नहीं हो रहा है कि प्रकाश अलबेला अपनी पत्नी को मौत के घाट उतारने की ऐसी घृणित योजना भी बना सकता है.   पुलिस ने प्रकाश के खिलाफ 302 (हत्या), 201 (गलत सूचना देने), 498 ए (किसी महिला का पति या रिश्तेदार के उससे क्रूरता करने) और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

प्रकाश ने पुलिस को बताई थी झूठी कहानी

बता दें कि पति प्रकाश ने पुलिस को नाटकीय अंदाज में बताया था कि बागनान थाना क्षेत्र में महिषरेखा के पास जब उन्होंने शौच जाने के लिए कार रोकी, तभी लुटेरों के एक समूह ने उनकी कार पर हमला किया। तीन लोगों के एक गिरोह ने सुबह करीब 6 बजे उन पर हमला किया, जो उनका सामान लूटने की कोशिश कर रहे थे। जब उसकी पत्नी उन्हें बचाने के लिए दौड़ी, तो लुटेरों ने रिया को गोली मार दी और तुरंत मौके से भाग गए। प्रकाश ने पुलिस को यह भी बताया कि वह अपनी पत्नी को वाहन तक ले गया और मदद की तलाश में करीब 3 किलोमीटर तक चला। उसने कुलगछिया-पिरताला में राजमार्ग के किनारे कुछ लोगों को देखकर उन्हें आपबीती सुनाई। स्थानीय लोगों ने उलुबेरिया में एससीसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उसकी पत्नी को भर्ती कराने में मदद की, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पति-पत्नी के बीच लंबे समय से कायम था विवाद

रिया के परिजनों ने थाने में दर्ज मामले में प्रकाश पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. इससे साफ होता है कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था.  रिया के परिजनों का कहना है कि प्रकाश रिया की अक्सर पिटाई करता था। मानसिक प्रताड़ना देता था। दोनों झालीवुड से जुड़े हैं। प्रकाश डायरेक्टर है. रिया ने कई नागपुरी और खोरठा एलबम में काम कर लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गई  थी. बाद में दोनों ने लव मैरिज की। दोनों के बीच लंबे समय से मनमुटाव था। बताया गया कि शुरुआत में प्रकाश ने ईशा को अपनाने से इनकार कर दिया था। जब मामला कोर्ट में पहुंचा तब दोनों ने शादी की।

2009 में झॉलीवुड में कदम रखा था

रिया मूल रूप से हजारीबाग (चौपारण) की रहने वाली थी. उसके पिता की झारखंड में फर्निचर की दुकान थी. लेकिन पारालाइसिस होने के बाद वह रांची में बेटी के फ्लैट में ही रहते हैं. झॉलीवुड के अभिनेता रमन कुमार ने बताया कि रिया कुमारी ने साल 2009  में झारखंडी फिल्म इंडस्ट्री झॉलीवुड में कदम रखा था। लेकिन प्रतिभाशाली होने के कारण वह बहुत जल्द झॉलीवुड की बेस्ट एक्ट्रेस बन गई. इसके बाद वह रांची के टैगोर हिल एरिया में मां तारा अपार्टमेंट में किराया के एक फ्लैट रहने लगी. इसी फ्लैट में पति प्रकाश अलबेला और दो साल की बेटी के साथ रहती थी। बताया जाता है कि इसी अपार्टमेंट में वह एक फ्लैट अपने से खरीद ली थी और उसकी किस्त वह भर रही थी. 12 साल के अंदर रिया की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी हो गई थी. उसने भोजपुरी, खोरठा, बांग्ला सहित कई एलबम में काम कर पैसे भी कमाए और शोहरत भी बटोरी. वह खूबसूरत और मृदुभाषी थी. एलबम और खोरठा फिल्म के अलावा वह डांस इवेंट में भी अपनी ख्याति अर्जित कर चुकी थी.

प्रकाश की पहली पत्नी से एक बेटा-बेटी है

हजारीबाग निवासी प्रकाश ने आर्केस्ट्रा में सिंगर के रूप में अपनी पहचान बनायी. इसी क्रम में उसकी जान-पहचान रिया से हुई. रिया की गुड लूकिंग के कारण प्रकाश ने उसे एलबम में डांस करने के लिए प्रेरित किया. उस वक्त पूरी तरह से बालिग भी नहीं हुई थी, जबकि प्रकाश दो बच्चे का पिता बन चुका था. उसकी पहली पत्नी से एक 18 वर्षीय बेटा और एक बेटी भी है. ये लोग उनके साथ नहीं रहते हैं. लेकिन झगड़े की जड़ में पहली पत्नी पर शक की सूई घूम रही है. इधर, प्रकाश का साथ मिलने से रिया आगे बढ़ती गई और अंतत: तमाम विरोध के बावजूद दोनों को शादी के बंधन में बंधना पड़ा. इस बीच प्रकाश ने सिंगिग छोड़कर रिया के लिए प्रोड्यूसर बन गया. कहा जाता है कि रिया की अच्छी कमाई से प्रकाश जलता था और झगड़े की जड़ में पैसा भी एक अहम हिस्सा हो सकता है. बहरहाल, पुलिस की तफ्तीश के बाद हत्या के कारणों का खुलासा जल्द होने की संभावना है.

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