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Thursday, November 5, 2026
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रांची डीडीसी ने कोरोना की आशंका के मद्देनजर एंबुलेंस, ऑक्सीजन और बेड की उपलब्धता की ली जानकारी

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रांची : कोविड-19 के संक्रमण की आशंका के मद्देनजर रांची जिला प्रशासन अभी से ही तैयारियों में जुट गया है। रांची उपायुक्त के निर्देशानुसार शुक्रवार को उप विकास आयुक्त दिनेश कुमार यादव ने कोविड-19 से संबंधित तैयारी को लेकर बैठक आयोजित की। बैठक में डीसीसी ने कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम एवं इलाज से संबंधित तैयारियों पर विचार-विमर्श किया। श्री यादव ने पदाधिकारियों से कोविड-19 के पिछले फेज के दौरान की गई तैयारियों और चुनौतियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से कहा कि कोविड-19 संक्रमण के पिछले फेज में हमें जो अनुभव मिले हैं, वह काफी महत्वपूर्ण हैं, समय रहते सारी तैयारियां पूरी कर लेनी है, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।

स्क्रीनिंग की होगी व्यवस्था

कोविड-19 संक्रमण के बढ़ने की आशंका को देखते हुए डीडीसी ने एयरपोर्ट, बस स्टैंड इत्यादि जगहों पर को स्क्रीनिंग की व्यवस्था की बात कही. बैठक के दौरान उन्होंने सदर अस्पताल सहित जिले में एंबुलेंस और ऑक्सीजन की उपलब्धता के संबंध में सिविल सर्जन से विस्तार से जानकारी ली। सिविल सर्जन ने बताया कि जिले में पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस है। साथ ही सदर अस्पताल में ऑक्सीजन की भी पर्याप्त उपलब्धता है। सदर अस्पताल में पीएसए प्लांट, एलमोओ टैंक, जंबो सिलेंडर इत्यादि की विस्तार से जानकारी देते हुए सिविल सर्जन ने बताया कि पिछले लहर से ही अस्पताल में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु व्यवस्था की गयी है। उन्होंने बताया कि जिले में जितने भी प्राइमरी हेल्थ सेंटर और सीएचसी हैं, वहां भी ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था है। डीडीसी ने इसके लिए मेंटेनेंस सर्विसिंग करने का निर्देश दिया।

वैक्सीनेशन के प्रति व्यापक प्रचार-प्रसार का निर्देश

उन्होंने कहा कि मेडिकल इक्विपमेंट्स भी पर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए। रेगुलेटर, फ्लोमीटर इत्यादि की कमी नहीं होनी चाहिए। डीडीसी ने क्वारेंटाइन सेंटर और मैन पावर से संबंधित जानकारी भी ली गयी। डीडीसी ने जिले में चल रहे हैं वैक्सीनेशन कार्य के बारे में भी संबंधित पदाधिकारी से पूरी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि वैक्सीनेशन के प्रति व्यापक प्रचार-प्रसार करें। स्कूली बच्चों को स्कूलों के साथ समन्वय स्थापित कर वैक्सीनेट करने का निर्देश डीडीसी ने दिया। बैठक में अपर समाहर्त्ता राजेश बरवार, निदेशक डीआरडीए, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, सिविल सर्जन, एसीएमओ, एमओआईसी पीएमएवाई कोऑर्डिनेटर एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

हे सिद्धभूमि हम शर्मिंदा हैं…! पर्यटन,पवित्र व तीर्थक्षेत्र के भंवर में उलझा जैन समुदाय…! क्या महज फोटो सेशन से पारसनाथ पवित्र घोषित हो जायेगा…?

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रीतू जैन

आज जैन समाज को फोटोमेनिया हो गया है..! एक ज्ञापन देना…. मंत्रियों के साथ फोटो खींचवाना और मीडिया में छपे फोटो को रिश्तेदारों के बीच शेयर कर खुद का महिमामंडन करवाना… और मुद्दों को लेकर खुद अपनी पीठ थपथपाते हुए समाज को गुमराह कर देना…!  मेरी बात जरा नकारात्मक लगेगी लेकिन यह सच्चाई के काफी करीब है। आज श्री सम्मेद शिखरजी के परिपेक्ष्य जो अफवाह फैली हुई है, उसने पारसनाथ के पवित्र घोषित करने को लेकर बाधा उत्पन्न कर दी है। कुछ दिन पहले झारखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापन देनेवाले पवन गोधा ने तीर्थक्षेत्र को पवित्र घोषित होने की खबर को सोशल मीडिया पर लिखकर, श्रेय लेने की नाकाम कोशिश की। आईबीसी 24 यूट्यूब चैनल ने खबर चलाई और विरोध के बाद खंडन कर दिया..। संतों और मुनियों के मुख से भी कई धर्म के ठेकेदारों ने झूठा संदेश दिलवा दिया…!

अब सच्चाई क्या है… वह जानिये !

भारत सरकार के अल्पसंख्यक आयोग ने एक चिट्ठी जारी की है, जिसमें 17 जनवरी 2023 को मुख्य सचिव झारखंड सरकार को इस मामले में हाजिर होने का निर्देश दिया है…। इसके अलावा बुधवार को झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के शून्य काल में विधायक इरफान अंसारी ने पारसनाथ को मदिरा पान एवं मांसाहार वर्जित क्षेत्र घोषित करने की मांग की थी। इस संबंध में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का अभी तक बयान नहीं आया है। लेकिन अफवाहों के बाजार ने सोशल प्लेटफॉर्म के जरिये इस खबर को लोकल बना दिया..! मतलब साफ है कि बिना किसी तथ्य के भ्रामक खबर फैलाई गयी। 

राजनीतिक दलों की नजर में कोई अहमियत नहीं

दरअसल, राजनीतिक लिहाज से आप झारखंड में नगण्य हैं… मुश्किल से आप 15 से 20 हजार की जनसंख्या में हैं… व्यापारिक लिहाज से आप अव्वल हो सकते हैं, राज्य की जीडीपी में आपका 2-4 प्रतिशत योगदान हो सकता है..! लेकिन वोट के मंच पर पूरी तरह से फेल हैं, इसलिये राजनीतिक दलों की नजर में आपकी अहमियत न के बराबर है। आप अयोध्या राम मंदिर निर्माण में अहम भूमिका में हैं…. काशी-मथुरा में भी आपका कार्य सराहनीय है…. क्योंकि आप दानदातारों में अगली कतार में बैठे हैं..। लेकिन ये झारखंड प्रदेश के मामले नहीं हैं.. इसलिये आप कुछ भी नहीं हैं…!

पर्वत की पवित्रता को बनाए रखना जरूरी

पारसनाथ में आपका सामुदायिक विकास में योगदान न के बराबर है… राजनीतिक दलों के साथ आप फोटो खींचवा सकते हैं लेकिन उन्हें सम्मेद शिखर के हित में खड़े करने के लिये आपके पास क्षमता नहीं है…! आपने सम्मेद शिखर जी में सिर्फ मंदिर-मठों और धर्मशालाओं का निर्माण किया है… जनहित से जुड़े कार्यों को लेकर आप हमेशा सुप्तावस्था में रहे हैं…। यात्री सुविधा के अलावा आपने न तो किसी यूनिवर्सिटी की स्थापना की है और न ही आपने एक ऐसा अस्पताल बनाने का प्रण लिया है, जिसमें आम आदमी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले सके। इसलिये स्थानीय लोगों से उम्मीद तो कतई नहीं कर सकते! आप जिस पर्वत की पवित्रता को बचाने के लिये आन्दोलनरत हैं, उस पर्वत का सबसे ज्यादा नुकसान आपने  ही किया है! आप ही हैं जिसने पर्वत को काटकर मंदिरों का निर्माण किया है…कानून को चांदी के चंद सिक्कों से खरीद कर उसका मुंह बंद करनेवाले भी आप ही हैं।

पर्वत को बचाने की मुहिम के प्रयास नाकाफी

जैन समाज ने पर्वत के संरक्षण, सुरक्षा और विकास के लिये इतनी तन्मयता के साथ काम नहीं किया है, जितना समर्पण उन्होंने नित नये मंदिर और धर्मशाला निर्माण में दिखाया…! संतों का सहारा लेकर दान दातारों की फौज खड़ी कर आपने मंदिर और मठ का निर्माण तो किया लेकिन पर्वत को बचाने की मुहिम के लिये आपके प्रयास नाकाफी रहे। मंदिर और धर्मशाला निर्माण में जिस तरह से आपने नियमों के विरूद्ध जाकर जमीनें हासिल की हैं, वह न तो नैतिकता की कसौटी पर खरी हैं और न ही कानून के दृष्टिकोण से जायज…! फिर आप किस आधार पर खुद को महावीर के अनुयायी कहलाते हैं, इसका जवाब देना चाहिये..।

अदालती चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाये

अब आप खुद आकलन कीजिये कि भारतवर्षीय तीर्थक्षेत्र कमेटी, आनंद जी कल्याण जी ट्रस्ट और अन्य नवनिर्मित संस्थाओं ने सिर्फ अपने परिसर को सुरक्षित और विकसित करने की कार्यसंस्कृति को जन्म दिया…जो यात्री सुविधाओं पर ही फोकस था। पारसनाथ सम्मेद शिखरजी पर्वत को लेकर दोनों समुदाय आज भी अदालती चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाये हैं और पवित्रता जो उनका अधिकार है, वंचितों की भांति फोटोसेशन से ही खुश हैं।

राम भक्तों के लिए

गिरिडीह में गुड गवर्नेंस वर्कशॉप सप्ताह को व्यापक बनाने पर प्रशासन का जोर, डीसी ने अधिकारियों को दिया दिशा-निर्देश

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गिरिड़ीह: जिला समाहरणालय सभागार कक्ष में शुक्रवार को उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा के नेतृत्व में सुशासन सप्ताह के तहत “प्रशासन गांव की ओर” विषयक पर  कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान गुड गवर्नेंस वर्कशॉप पर विस्तृत चर्चा करते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों व कर्मियों को आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश दिये गये। कार्यशाला में बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा 19 दिसंबर से 25 दिसंबर तक एक राष्ट्रव्यापी सुशासन सप्ताह के अंतर्गत प्रशासन गांव की ओर अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया है। जिसका उद्देश्य आमजनों की शिकायतों का निष्पादन और आमजनों को सेवाएं प्रदान करने की प्रक्रिया में सुधार करना है।

प्रशासन गांव की ओर के तहत विभिन्न कार्यक्रम होंगे

“प्रशासन गांव की ओर” अभियान के तहत सप्ताह के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जैसे जिला मुख्यालय समेत सभी प्रखंड व अंचलों में जनता दरबार का आयोजन, जन शिकायत निवारण केंद्र के माध्यम से आमजनों की शिकायतों का निवारण तथा सभी थानों में जनता दरबार आयोजन कर थाना से संबंधित आवेदनों का निपटारा व अन्य कार्यक्रम किए जाएंगे। इसके अलावा सोशल मीडिया ट्विटर फेसबुक आदि सहित मल्टीमीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से जन शिकायत निवारण एवं सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार के लिए राज्य एवं जिला प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों के अलावा प्रगति और उपलब्धियों से आमजनों को अवगत कराने का निर्देश दिया गया हैं। साथ ही गुड गवर्नेंस वीक के तहत आयोजित होने वाले वर्कशॉप के दौरान होनी वाली गतिविधियों को लेकर संबंधित विभाग को आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश दिया गया। इस कार्यशाला में आईएएस प्रशिक्षु उत्कर्ष कुमार, अपर समाहर्ता विल्सन भेंगरा, निदेशक डीआरडीए, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी व सभी कार्यालय प्रधान के अलावा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

सासाराम में धधकी थी अगस्त क्रांति की ज्वाला

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क्रांति की ज्वाला में जब देश में हर तरफ अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत का स्वर बुलंद हो रहा था, उस समय सासाराम में भी क्रांति की ज्वाला धधक रही थी।
11 अगस्त 1942 को सासाराम के छात्र व नौजवानों का विशाल समूह जनक्रांति में बदल गया। सासाराम रेलवे स्टेशन जला दिया गया। संचार व्यवस्था भंग कर दी गई और सरकारी कार्यालयों पर तिरंगा लहरा दिया गया।

12 अगस्त को डॉ. रामसुभग ¨सह के नेतृत्व में हजारों छात्रों के आने से क्रांति हुंकार भरने लगी। टाउन हाईस्कूल सासाराम के गेट पर सूर्यमल, तारा ¨सह, जगदीश प्रसाद, निरंतर ¨सह, रामनाथ रस्तोगी व इंद्रदमन के नेतृत्व में छात्रों ने धरना देकर स्कूल बंद करा दिया।
लेकिन अंग्रेजों से सहानुभूति रखने वाले एक सिद्दिकी नामक शिक्षक ने छात्रों में फूट पैदा कर दी। इस पर नियंत्रण के लिए 13 अगस्त को दानापुर से फौजियों का दल आ धमका।

14 अगस्त 1942 को दिन के करीब 11:30 बजे टाउन हाईस्कूल के पास से जुलुस निकला। एसडीएम मार्टिन ने भीड़ पर लाठी चार्ज करा दिया। बचरी निवासी जगदीश प्रसाद नामक छात्र को सीधे गोली मार दी। जिससे भीड़ हिंसक हो गई।

धर्मशाला चौक पर गोरी फौज व विद्रोहियों में भयंकर मुठभेड़ हो गई। यहां हुई फायरिंग में आजादी के तीन दीवाने सासाराम के महंगू राम, जगन्नाथ राम चौरसिया व कउपा के जयराम गोली खाकर शहीद हो गए।

इसके अलावा दो अन्य लक्ष्मण अहीर व बंशी प्रसाद वकील ने भी अपनी शहादत दी थी।

💥जिले के अन्य भागों में भी हुआ विद्रोह :

10 अगस्त को डेहरी हाई स्कूल के छात्रों ने विद्यालय का बहिष्कार कर दिया। 13 अगस्त को डालमियानगर में किसान, मजदूर व छात्र संगठनों ने विशाल प्रदर्शन किया।

रेलवे स्टेशन में आग लगा दी गई, मालगोदाम लूट लिया गया। उसी दिन तिलौथू में छात्र नेता ब्रजबिहारी के नेतृत्व में छात्रों ने हड़ताल कर डाकखाना जला दी। ढाई माह तक रोहतास, अकबरपुर, बंजारी व कैमूर के पर्वतीय क्षेत्रों में घूम-घूमकर क्रांति की ज्वाला फैलाते रहे।

11 अगस्त को अकबरपुर में परमानंद जी के नेतृत्व में बकनउरा गांव में धरमू ¨सह, शिवविलास , सरयू प्रसाद समेत अन्य लोगों ने थाने पर धावा बोल कब्जा कर लिया। लेकिन 12 अगस्त को ये सभी गिरफ्तार कर लिए गए।

💥 उपेक्षित है स्मारक :

स्वतंत्रता के इन अमर सेनानियों का स्मारक आज उपेक्षा का शिकार है। स्मारक के चारों ओर ठेला-खोमचा वालों का अघोषित कब्जा है। दुकानदारों द्वारा फलों के छिलके व कचरे स्मारक के पास फेंक दिए जा रहे हैं। स्मारक पर 15 अगस्त व 26 जनवरी को माल्यार्पण की रस्मअदायगी भर की जाती है।

अधिकतर लोगों को शायद यह भी नहीं मालूम कि वे जहां खड़ा होकर गंदगी फैला रहे हैं, उस जगह पर देश को आजाद कराने के लिए आजादी के मतवालों ने कभी अपने खून की होली खेली थी।

राम भक्तों के लिए

पारसनाथ विकास प्राधिकरण की उच्चस्तरीय बैठक में डीसी ने कहा-सम्मेद शिखर की पवित्रता से नहीं होगा खिलवाड़

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गिरिडीह : (कमलनयन) जैन धर्म के विश्व प्रसिद्ध तीर्थराज सम्मेद शिखर मधुबन का सरकार द्वारा का स्वरूप बदल कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने के प्रस्ताव के विरोध के बीच गुरुवार को गिरिडीह उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में पारसनाथ विकास प्राधिकरण की उच्चस्तरीय बैठक हुई। सरकार के निर्देश के बाद इस उच्चस्तरीय बैठक में डुमरी एसडीएम प्रेमलता मुर्मू, पीरटांड़ बीडीओ और अंचलाधिकारी के साथ डुमरी एसडीपीओ मनोज कुमार, मधुबन के गुणायतन जैन संस्था के महामंत्री सुभाष जैन, बीस पंथी कोठी के सुभाष सिन्हा समेत कई अधिकारी और अलग-अलग जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सदस्य शामिल हुए।

डीसी ने कहा: मांस-मंदिरा की बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा

बैठक में डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने मौजूद अधिकारियों को कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा कि साल बीतने को है, इसे ध्यान में रखते हुए पूरे सम्मेद शिखर मधुबन क्षेत्र में किसी सूरत में मांस-मंदिरा की बिक्री नहीं हो, और न ही सम्मेद शिखर में प्रवेश करनेवाले ही कोई इसका इस्तेमाल करे। कहा कि सम्मेद शिखर मधुबन अंहिसा के प्रर्वतकों की निर्वाण धरा-आस्था का केंद्र है। बैठक में कई और मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान डीसी ने हुए कहा कि जल्द ही सम्मेद शिखर के समुचित विकास को लेकर छह सदस्यों के पैनल का गठन किया जाएगा। इसी पैनल के सुझाव पर मधुबन में नए सड़क निर्माण के साथ बायो शौचालय व अन्य विकास कार्य किये जाएंगे। ङीसी ने जोर देकर कहा कि मांस-मंदिरा पर जो रोक पहले से लगी है, उसका पालन अब और कड़ाई से किया जाएगा। इसमें कोई लापरवाही नहीं होगी।

प्लास्टिक लेकर पहाड़ी पर नहीं जाएं: सुभाष जैन

बैठक में शामिल गुणायतन ट्रस्ट के मंत्री सुभाष जैन ने कहा कि अब मधुबन में बीस तीर्थंकरों के पूजन दर्शन और वंदना के लिए आने वाले भक्तों को हर मंदिर ट्रस्ट और भवन के द्वारा सुझाव दिया जाएगा कि वो सम्मेद शिखर की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्लास्टिक के इस्तेमाल को खुद रोकें। यहां तक कि प्लास्टिक को पार्श्वनाथ पहाड़ी पर भी लेकर नहीं जाए। जिसे वंदना करने और आस्था पर कोई चोट नहीं हो। डीसी ने कहा कि पर्यटन स्थल के रूप में किए जाने को लेकर जो भ्रम है, उसे दूर करने का प्रयास होगा। गुणायतन ट्रस्ट के मंत्री सुभाष जैन ने कहा कि पर्यटन स्थल को लेकर विकास का विरोध इस क्षेत्र की पवित्रता को लेकर है, क्योंकि वहां आने वाले फिर उसी रूप में मौज-मस्ती करेंगे, और नशीले पदार्थों का सेवन करेंगे, इसका विरोध राष्ट्रीय स्तर पर इसी बात को लेकर हो रहा है।

राम भक्तों के लिए

गिरिडीह डीसी ने कहा-युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर रोजगार के उपलब्ध कराए जाएंगे, रोजगार मेले में डीसी ने 120 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिये

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गिरिडीह: (कमलनयन) जिले के श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा जिला मुख्यालय के झंडा मैदान में बुधवार को दत्तोपंत ठेंगड़ी रोजगार मेले का आयोजन किया गया। रोजगार मेले के मुख्य अतिथि उपायुक्त  नमन प्रियेश लकड़ा, आईएएस प्रशिक्षु उत्कर्ष कुमार, उप महापौर, सांसद प्रतिनिधि, कोडरमा, उप विकास आयुक्त व अन्य वरीय पदाधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। आयोजित रोजगार मेले में कई कंपनियों के स्टॉल लगे थे। जिले के युवाओं ने झंडा मैदान में रोजगार मेले से संबंधित स्टॉलों पर रोजगार संबंधी जानकारी प्राप्त की। मेले में जिले के कुल 120 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिया गया तथा 640 युवाओं को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनका इंटरव्यू कराने के पश्चात नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। साथ ही आज के रोजगार मेले लगभग 25 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया।

योग्यतानुसार रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने कहा कि जिला प्रशासन जिले के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में सतत प्रयास कर रहा है। युवाओं को हुनरमंद बनाने का प्रयास भी चल रहा है। जिला प्रशासन से रोजगार मेला में नियुक्त होनेवाले युवाओं की कपंनीवार सूची बनाई जाएगी तथा युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। डीसी ने कहा कि युवाओं को रोजगार मेले के माध्यम से निबंधन एवं रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। लगभग 20 कंपनियां गिरिडीह की है। जिला प्रशासन युवाओं के लिए अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन कर रहा है। उन्होंने बताया कि समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जा रही है तथा सरकार द्वारा निजी क्षेत्र में स्थानीय उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत आरक्षण संबंधी जो नीति बनाई गई है, उस संबंध में भी गिरिडीह जिला के निजी कंपनियों से किया गया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि आनेवाले समय में कोडरमा जिला के साथ रोजगार को लेकर एक रोजगार मेला का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कई तरह के रोजगार युवाओं को उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आनेवाले समय में ई-गवर्नेंस रिलेटेड प्रशिक्षण जिला समाहरणालय में सभी सरकारी कर्मियों को दिया जाए। उन्होंने कहा कि आनेवाले समय में जिले के सभी आवासीय विद्यालय, सभी कस्तूरबा बालिका उच्च विद्यालयों में अवकाश के दिन करियर काउंसलिंग तथा मोटिवेशनल सेशन का आयोजन किया जाएगा।

राम भक्तों के लिए

A finish we never expected – Sushant Singh Rajput

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Sushant Singh Rajput was an Indian actor who appeared in films and television shows. He was born on January 21, 1986 in Patna, Bihar, India. Rajput began his career as a television actor, appearing in popular shows such as “Pavitra Rishta” and “Kis Desh Mein Hai Meraa Dil”. He gained widespread fame and critical acclaim for his role in the show “Pavitra Rishta”, which aired on Zee TV.

In 2013, Rajput made his film debut with the romantic comedy “Kai Po Che!”, which was based on the novel “The 3 Mistakes of My Life” by Chetan Bhagat. The film was a critical and commercial success, and Rajput received praise for his performance. He went on to star in a number of films, including “Shuddh Desi Romance”, “PK”, and “M.S. Dhoni: The Untold Story”, which was a biographical film about the life of Indian cricketer Mahendra Singh Dhoni.

Rajput was known for his versatile acting skills and natural performances. He received several awards and nominations for his work in films and television, including the Filmfare Award for Best Male Debut for “Kai Po Che!”.

In June 2020, Rajput died by suicide at the age of 34. His death sent shockwaves through the Indian entertainment industry and sparked widespread debates about mental health and nepotism in the film industry.

Rajput’s death was widely mourned by fans and fellow actors, and tributes poured in from around the world. Despite the tragedy of his untimely death, Rajput’s legacy as a talented and beloved actor will continue to live on through his work in film and television.

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राम भक्तों के लिए

बाबूलाल मरांडी ने नियोजन नीति पर सरकार को घेरा,कहा-कानूनी दावपेंच में उलझाकर युवाओं को गुमराह करने से बाज आएं

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रांची : नियोजन नीति हाईकोर्ट से रद्द होने के बाद पक्ष-विपक्ष इस मुद्दे पर उलझ गया है. भाजपा इस मामले में हेमंत सरकार को बैकफुट पर ला दिया है. वहीं झारखंड के युवा हेमंत सरकार कटघरे में खड़ा कर दिया है. इधर, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि पत्रकारों से कहा कि हेमंत सरकार ने 2021 में नियोजन नीति बनाई थी, जिसमें प्रावधान किया गया था कि जो लोग 10वीं और 12वीं झारखंड से करेंगे वहीं नौकरी के लिए योग्य होंगे। जो लोग झारखंड से बाहर से पढ़ कर आएंगे वे इसके योग्य नहीं होंगे। क्या यह नीति सही थी? झारखंड की राजकीय भाषा हिंदी है और सरकार ने हिंदी की जगह ऊर्दू को शामिल किया और हिंदी को हटा दिया, क्या यह सही है?

हाईकोर्ट के तर्क को सुप्रीम कोर्ट में कैसे चुनौती देंगे?

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड सरकार जो भी नियोजन नीति बनाने से पूर्व क्या सर्वदलीय बैठक बुलाई थी? आज वे युवाओं के गुस्से को शांत करने के लिए राजभवन का साथ मांग रहे हैं. सवाल उठता है कि हाईकोर्ट ने ये पूछा कि आपने भाषाओं के लिए जब सर्वे नहीं कराया तो फिर हिंदी के बदले ऊर्दू को कैसे शामिल कर दिया. हाईकोर्ट के तर्क को आप सुप्रीम कोर्ट में कैसे चुनौती देंगे? जिन निर्णयों पर कोर्ट की आपत्ति है उसका जवाब आप कैसे देंगे? उन्होंने कहा कि राज्यहित में नियोजन नीति बनाने की बदले आपने भाषाई स्तर विवाद को बढ़ा दिया है. सरकार के लिए युवा वर्ग को समझाना मुश्किल हो गया है. इसलिए राज्य सरकार को इस पर जिद छोड़ देनी चाहिए और नौजवानों के भविष्य से खिलवाड़ करने से बाज आना चाहिए.

सर्वमान्य नियोजन नीति बनाने की पहल करे

उन्होंने कहा कि हिन्दी और अंग्रेजी को छोड़ ऊर्दू को प्राथमिकता देना किसी के गले नहीं उतर रहा है. झारखंड के लोग अब सड़क पर उतर चुके हैं। स्थानीय और नियोजन नीति एवं ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण को नौवीं शेड्यूल में डालने के लिए राजभवन जाने से कुछ नहीं होगा. इस मामले में हाईकोर्ट के सवाल का जवाब देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. श्री मरांडी ने कहा कि पार्टी की ओर से और मेरा सरकार से आग्रह है कि झारखंड के बच्चों को गुमराह नहीं करें. स्थानीय और नियोजन नीति तय करने का काम राज्य सरकार का होता है। राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग नहीं सकती है और दूसरों के कंधों पर फेंक नहीं सकती। इसलिए सरकार से कहूंगा कि वह बिना विलंब किए अब यहीं पर बैठकर निर्णय करे। सरकार विपक्ष को विश्वास में लेकर एक सर्वमान्य नियोजन नीति बनाने की पहल करे.

राम भक्तों के लिए

बेड़ो कॉलेज की अधिग्रहित जमीन के रैयतों को जल्द मुआवजा : बंधु तिर्की

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रांची: झारखण्ड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य एवं झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा है कि  बेड़ो के करमचंद भगत महाविद्यालय द्वारा कॉलेज भवन से मुख्य मार्ग तक उपयोग में लायी जा रही रैयतों की 44 डिसमिल ज़मीन शीघ्र ही अधिग्रहित की जायेगी. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही अधिग्रहित जमीन के मालिकों को शीघ्र ही 1 लाख 25 हजार रूपये की दर से मुआवजा राशि का भुगतान किया जायेगा. श्री तिर्की ने कहा कि रांची विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में करमचंद भगत महाविद्यालय बेड़ो की ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया.

तृतीय-चतुर्थ वर्गीय पदों पर नियुक्ति दी जाएगी

श्री तिर्की ने कहा कि बैठक में कॉलेज की महत्वपूर्ण समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार किया गया. इस मामले में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि अगले वर्ष 20 जनवरी तक महाविद्यालय की उन सभी ज्वलंत समस्याओं का समाधान कर दिया जायेगा, जिसकी जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है. इसके तहत निजी रैयतों की ज़मीन के अधिग्रहण के अलावा कॉलेज के भवन निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि के भूस्वामियों की जांच के उपरांत उनके आश्रितों को योग्यता के आधार पर तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय पदों पर नियुक्ति प्रदान की जायेगी.

अभिभावकों की महत्वपूर्ण बैठक जल्द बुलाई जाएगी

बैठक में फैसला लिया गया कि महाविद्यालय के संदर्भ में अभिभावकों की एक महत्वपूर्ण बैठक जल्द ही आयोजित की जायेगी. श्री तिर्की के अनुसार बैठक में महाविद्यालय परिसर के साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण हर हाल में कायम रखने का निर्णय लिया गया. इसके अलावा अगले तीन महीने के अंदर वार्षिक खेलकूद समारोह के आयोजन का निर्णय लिया गया. श्री तिर्की ने विश्वास व्यक्त किया कि इन महत्वपूर्ण निर्णयों के अनुपालन से एक ओर कॉलेज में लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकताओं को पूरा किया जायेगा वहीं दूसरी ओर इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों एवं पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा.

राम भक्तों के लिए

नियोजन नीति रद्द होने के बाद पक्ष-विपक्ष में तकरार, सीएम के नेतृत्व में यूपीए प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला, भाजपा नहीं हुई शामिल ,

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रांचीः झारखंड हाईकोर्ट से नियोजन नीति रद्द होने पर सदन से लेकर सड़क तक हंगामा शुरू हो चुका है. हेमंत सरकार इस मामले में पूरी तरह से उलझती जा रही है. मंगलवार को सदन में नियोजन नीति को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विपक्ष को शांत करने में विफल रहे. इधर, यूपीए प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मिलकर यह मांग की है कि दोनों विधेयकों को जल्द से जल्द नौंवी अनुसूची में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार को भेजने का काम किया जाये, ताकि झारखंड के युवाओं, आदिवासी मूलवासियों को उनका हक व अधिकार मिल सके। सीएम ने कहा कि 1932 आधारित खतियान और ओबीसी आरक्षण को लेकर भाजपा को छोड़ बाकी सभी राजनीतिक दल हमारे साथ हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने राजभवन नहीं जाने के कारणों से संबंधित एक पत्र सीएम को लिखा है.

युवाओं को अधिकार दिलाने के लिए कटिबद्ध है सरकार

यह बातें आज राजभवन से निकलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया को संबोधित करते हुए कही। सीएम के नेतृत्व में यूपीए का प्रतिनिधिमंडल आज राजभवन पहुंचा था। इसके बाद सदन के बाहर मीडिया से मुखातिब होते हुए सीएम ने कहा कि झारखंड के युवाओं को उनका हक व अधिकार दिलाने के लिए पहले भी कई बार नीतियां बनी हैं, लेकिन हर बार हाईकोर्ट ने नीतियों को रद्द कर दिया है। इस बार भी हमने ऐसा प्रयास किया, लेकिन इस बार भी ऐसा ही हुआ। उन्होंने कहा कि मुझे पहले से आभास था कि कुछ ऐसी शक्तियां झारखंड के आदिवासी-मूलवासी के अधिकारों को रोकने का काम करेंगी। सीएम ने कहा कि आपको आश्चर्य होगा कि जिन लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है, उसमें 20 लोगों में से एक को छोड़कर बाकी सभी दूसरे राज्य के हैं। इस विधेयक को हमने 9वीं अनूसूची में डालने का आग्रह किया है, ताकि इस राज्य के लोगों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

दोनों विधेयकों पर राज्यपाल विचार करेंगे

सीएम ने आगे कहा कि अभी ये चीजें यहीं पर नहीं रुकेगी। हमारा प्रयास है कि आपको आपका अधिकार मिले। इस नियोजन नीति के तहत 7 लाख से अधिक बच्चों ने आवेदन किया था। वो बच्चे काफी निराश है। हम उनके प्रति काफी गंभीर हैं। कोई ना कोई वैकल्पिक तरीका निकाला जा रहा है। वे नियोजन नीति को लेकर किसी प्रकार की चिंता नहीं करें। सरकार ने आज राज्यपाल से मिलकर इस बात को रखा है कि नियोजन नीति में किसी भी तरह का उल्लंघन नहीं किया गया. हेमंत सोरेन ने कहा कि मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने आश्वस्त किया है कि दोनों विधेयकों पर वे गंभीरतापूर्वक विचार कर रहे हैं। राज्यपाल कबतक विचार करेंगे,यह अभी स्पष्ट नहीं है.

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