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Sunday, March 8, 2026
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पारसनाथ विकास प्राधिकरण की उच्चस्तरीय बैठक में डीसी ने कहा-सम्मेद शिखर की पवित्रता से नहीं होगा खिलवाड़

गिरिडीह : (कमलनयन) जैन धर्म के विश्व प्रसिद्ध तीर्थराज सम्मेद शिखर मधुबन का सरकार द्वारा का स्वरूप बदल कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने के प्रस्ताव के विरोध के बीच गुरुवार को गिरिडीह उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में पारसनाथ विकास प्राधिकरण की उच्चस्तरीय बैठक हुई। सरकार के निर्देश के बाद इस उच्चस्तरीय बैठक में डुमरी एसडीएम प्रेमलता मुर्मू, पीरटांड़ बीडीओ और अंचलाधिकारी के साथ डुमरी एसडीपीओ मनोज कुमार, मधुबन के गुणायतन जैन संस्था के महामंत्री सुभाष जैन, बीस पंथी कोठी के सुभाष सिन्हा समेत कई अधिकारी और अलग-अलग जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सदस्य शामिल हुए।

डीसी ने कहा: मांस-मंदिरा की बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा

बैठक में डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने मौजूद अधिकारियों को कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा कि साल बीतने को है, इसे ध्यान में रखते हुए पूरे सम्मेद शिखर मधुबन क्षेत्र में किसी सूरत में मांस-मंदिरा की बिक्री नहीं हो, और न ही सम्मेद शिखर में प्रवेश करनेवाले ही कोई इसका इस्तेमाल करे। कहा कि सम्मेद शिखर मधुबन अंहिसा के प्रर्वतकों की निर्वाण धरा-आस्था का केंद्र है। बैठक में कई और मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान डीसी ने हुए कहा कि जल्द ही सम्मेद शिखर के समुचित विकास को लेकर छह सदस्यों के पैनल का गठन किया जाएगा। इसी पैनल के सुझाव पर मधुबन में नए सड़क निर्माण के साथ बायो शौचालय व अन्य विकास कार्य किये जाएंगे। ङीसी ने जोर देकर कहा कि मांस-मंदिरा पर जो रोक पहले से लगी है, उसका पालन अब और कड़ाई से किया जाएगा। इसमें कोई लापरवाही नहीं होगी।

प्लास्टिक लेकर पहाड़ी पर नहीं जाएं: सुभाष जैन

बैठक में शामिल गुणायतन ट्रस्ट के मंत्री सुभाष जैन ने कहा कि अब मधुबन में बीस तीर्थंकरों के पूजन दर्शन और वंदना के लिए आने वाले भक्तों को हर मंदिर ट्रस्ट और भवन के द्वारा सुझाव दिया जाएगा कि वो सम्मेद शिखर की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्लास्टिक के इस्तेमाल को खुद रोकें। यहां तक कि प्लास्टिक को पार्श्वनाथ पहाड़ी पर भी लेकर नहीं जाए। जिसे वंदना करने और आस्था पर कोई चोट नहीं हो। डीसी ने कहा कि पर्यटन स्थल के रूप में किए जाने को लेकर जो भ्रम है, उसे दूर करने का प्रयास होगा। गुणायतन ट्रस्ट के मंत्री सुभाष जैन ने कहा कि पर्यटन स्थल को लेकर विकास का विरोध इस क्षेत्र की पवित्रता को लेकर है, क्योंकि वहां आने वाले फिर उसी रूप में मौज-मस्ती करेंगे, और नशीले पदार्थों का सेवन करेंगे, इसका विरोध राष्ट्रीय स्तर पर इसी बात को लेकर हो रहा है।


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