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Saturday, March 7, 2026
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ब्रह्मदेव प्रसाद ने कहा-हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और एकता का प्रतीक है

रांची : ओबीसी एकता अधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद ने हिंदी दिवस पर झारखंडवासियों को बधाई देते हुए भारत की करोड़ों की आबादी को जोड़नेवाली हिंदी भाषा के प्रति सम्मान और गर्व का प्रतीक बताया। श्री प्रसाद ने कहा कि हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और एकता का प्रतीक भी है। भले ही आज तकनीकी और संवैधानिक रूप से भारत की कोई राष्ट्रभाषा नहीं है, किन्तु भारत की सबसे व्यापक रूप से बोली जानेवाली भाषा है और इसे भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक माना जाता है। पिछले कुछ सालों में कुछ संस्थाओं द्वारा हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की बात भी उठाई गई।

‘सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए हिंदी दिवस मनाना उचित नहीं’

उन्होंने कहा कि कितने अफसोस की बात है कि हिंदी दिवस पर बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों में सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए हिंदी दिवस मना लिया जाता है, लेकिन हिंदी में काम करने से परहेज किया जाता है, यह हिंदी का अपमान है. आज हिंदी अपने देश से निकल कर विश्व के कई देशों धड़ल्ले से हिंदी बोली जाती है, लेकिन अपने ही देश में हिंदी उपेक्षित है. उन्होंने रांची में लंबे समय तक रहे महान हिंदी समर्थक डॉ. कामिल बुल्के की वह उक्ति याद दिलायी, जिसमें उन्होंने कहा था-मैं बेल्जियम जैसे छोटे देश को छोड़कर भारत जैसे देश को अपनाकर गौरवान्वित हूं… भारत में संस्कृत मां है, हिंदी बहूरानी है और अंग्रेजी नौकरानी है.

बता दें कि पिछले पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर श्री प्रसाद ने राजेंद्र मिश्रा जी (आबादगंज डाल्टनगंज) और वशिष्ठ पाठक के आवास गूरी गांव एवं राम मनोहर चौबे जी उर्फ लुकाई गुरु जी के आवास केतात में जाकर हिंदी पढ़ानेवाले शिक्षक के चरण स्पर्श कर उन्हें सम्मानित किया था. उन्होंने कहा था शिक्षक समाज की प्रगति का वाहक होता है. यह केवल ज्ञान प्राप्ति का तरीका नहीं है, बल्कि हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करता है.


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