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Saturday, March 7, 2026
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झारखंड की बेटियों ने राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप में रचा इतिहास, वुशु और एथलेटिक्स में भी पदकों की बौछार

झारखंड की बालिका हॉकी टीम ने राष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रचते हुए हरियाणा के रोहतक में आयोजित 68वीं राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिता के फाइनल में मेजबान टीम को हराकर चैंपियनशिप का खिताब जीता। इसके अलावा, वुशु और एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में भी झारखंड के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार और पदक झारखंड की झोली में डाले।


फाइनल मुकाबले में झारखंड की बेटियों का जलवा

राष्ट्रीय बालिका हॉकी चैंपियनशिप के फाइनल में झारखंड की बेटियों ने हरियाणा को 5-2 के अंतर से हराया। यह मुकाबला आज सुबह 11 बजे शुरू हुआ और झारखंड टीम ने पूरे खेल में शानदार प्रदर्शन किया।

फाइनल में गोल करने वाले खिलाड़ी:

  • रौशनी आइंद: 2 गोल
  • शांति कुमारी: 1 गोल
  • अंकिता लकड़ा: 1 गोल
  • बिरन हस्सा: 1 गोल

इससे पहले सेमीफाइनल में झारखंड ने पंजाब को 4-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था।


झारखंड की जीत पर बधाइयों की बौछार

टीम की इस ऐतिहासिक जीत पर झारखंड के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह, राज्य शिक्षा परियोजना निदेशक शशि रंजन, और राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी धीरसेन सोरेंग ने पूरी टीम को बधाई दी।

“झारखंड की बेटियों ने पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि खेलों में झारखंड की बढ़ती शक्ति का प्रमाण है,” सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा।


वुशु और एथलेटिक्स में भी झारखंड की धूम

68वीं राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिता के अंतर्गत झारखंड ने न केवल हॉकी में बल्कि वुशु और एथलेटिक्स में भी पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

वुशु में पदक विजेता:

  1. अमन अंसारी (45 किलो भार वर्ग) – कांस्य
  2. कृष कुमार (65 किलो भार वर्ग) – कांस्य
  3. राजकुमार (75 किलो भार वर्ग) – कांस्य

एथलेटिक्स में पदक विजेता:

  • प्रशांत कुमार: रजत पदक (रेस वॉक, अंडर-17 बालक वर्ग)

यह प्रदर्शन झारखंड के खिलाड़ियों की मेहनत और खेल विभाग की समर्पित कोशिशों का नतीजा है।


झारखंड खेल विकास की ओर अग्रसर

झारखंड के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन राज्य में खेलों के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों को दिए जा रहे समर्थन को दर्शाता है।

  • सुविधाओं का विस्तार: पिछले कुछ वर्षों में झारखंड सरकार ने खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की खोज: हॉकी और वुशु जैसे खेलों में अधिकतर खिलाड़ी ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, जो राज्य की समृद्ध खेल संस्कृति को उजागर करते हैं।
  • भविष्य की संभावनाएं: इन सफलताओं से झारखंड के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिलने की संभावना बढ़ गई है।

खेलों में झारखंड का बढ़ता वर्चस्व

झारखंड की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि राज्य में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। हॉकी में बेटियों का ऐतिहासिक प्रदर्शन और वुशु एवं एथलेटिक्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों ने झारखंड को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई है।

क्या आप झारखंड के खिलाड़ियों की इस सफलता पर गर्व महसूस करते हैं? अपनी राय हमारे साथ साझा करें।

News Desk


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