रांची : ‘‘संविधान बचाने, लोकतंत्र बचाने और आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा की बात करने वाले कांग्रेस पार्टी के बड़े आदिवासी नेता लोकतंत्र का मतलब भी समझते हैं? ये लोग बड़े सवालों से क्यों असहज हो जाते हैं? हमारे सवालों को तथ्य और तर्क के साथ जवाब क्यों नहीं देते हैं?
2 अप्रैल 2025 को 21.09 बजे यानी रात के 9.09 बजे मोबाइल न. 7488023740 से पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की जी का फोन आया। हम दोनों के बीच 14 मिनट 30 सेकेंड बातचीत हुई। उन्होंने मेरे साथ गाली-गलौज की, मेरी जुबान खींचने और मुझे जान से मारने की धमकी देने के बाद फोन रख दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘तुमने कुड़ू में पोलिटिकल स्पीच क्यों दिया? तुम शिल्पी और मेरे पीछे क्यों पड़े हो? तुमने क्यों कहा कि हम नौटंकी कर रहे हैं? तुम हमको नहीं जानते हो, मैं बहुत बड़ा नेता हूं। तुम मेरे सामने कुछ भी नहीं हो। तुमको खत्म कर देंगे।
झारखंड का मुख्य सचिव भी मेरे सामने मुंह खोलने की हिम्मत नहीं करता है तो तुम क्या चीज हो। मैं बहुत गुस्से में हूं। मैं तुम्हारे साथ क्या कर सकता हूं इसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकते हो। आज के बाद यदि तुमने मेरे खिलाफ मुंह खोला तो पब्लिक के सामने तुम्हारा जुबान खींच लूंगा। मैं बहुत खराब व्यक्ति हूं. जान लो मैं किसी भी हद तक जा सकता हूं.’’
मेरा बंधु तिर्की या किसी से भी व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है और न ही मैं किसी पर व्यक्तिगत हमला करता हूं। हां, जो लोग बड़े पदों पर हैं, उन्हें यह व्यक्तिगत लग सकता है क्योंकि वे आदिवासियों के प्रति जवाबदेह नहीं हैं। उन्हें सिर्फ आदिवासियों का वोट लेकर सत्ता का मजा लेना है। इस मसले पर मूल बात निम्नलिखित है।
- ‘‘पेसा आंदोलन’’ में हमने जो मूल सवाल उठाया है कि झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में संवैधानिक रूप से बने ‘‘पेसा कानून 1996’’ लागू नहीं है जबकि असंवैधानिक रूप से बनाये गये ‘‘झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001’’ और ‘‘नगरपालिका अधिनियम 2011’’ लागू है, जिसके लिए मूल रूप से हमारे वे आदिवासी नेता जिम्मेवार है जो राज्य में विगत 24 वर्षों से मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक बने। यही सवाल ने हमारे आदिवासी नेताओं को असहज कर दिया है। इसलिए वे बौखला रहे हैं। लेकिन क्या हम सवाल पूछना छोड़े दें?
- 16 मार्च 2025 को रांची कैथोलिक महिला संघ के द्वारा लोहरदगा के कुड़ू में आयोजित सभा में मैंने मूल सवाल उठाया था कि ‘‘इंडिया गठबंधन’’ ने विधानसभा चुनाव में ‘‘पेसा कानून 1996’’ को लागू करने हेतु वादा किया था लेकिन अबतक क्यों लागू नहीं किया? झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में असंवैधानिक रूप से ‘‘जेपीआरए 2001’’ और ‘‘नगरपालिका कानून 2011’’ अबतक क्यों लागू है?
- हमारे आदिवासी नेता विगत 24 वर्षों से क्या कर रहे थे? कौन सी ताकत ‘पेसा कानून 1996’’ को लागू करने नहीं दे रहा है? इन सवालों ने मंच पर बैठी कैबिनेट मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की को असहज कर दिया था? उन्होंने हमारा स्मार-पत्र लेने से इंकार कर दिया था।
- ‘‘पेसा कानून 1996’’ लागू करना कांग्रेस पार्टी का चुनावी वादा था लेकिन जब 19 मार्च 2025 को ‘‘पेसा कानून 1996’’ को लागू करने की मांग को लेकर पार्टी ने ‘‘उलीहातु’’ से रांची तक पदयात्रा की तब हमने सवाल उठाया था कि जो पार्टी सरकार में है और पंचायती राज विभाग भी उसी के पास है वह क्यों राज्यपाल को स्मार-पत्र देकर ‘‘पेसा कानून 1996’’ को लागू करने की मांग कर रही है? क्या कांग्रेस हम आदिवासियों को बेवकूफ बना रही है? इन सवालों से प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता असहज हो गए।
- 28 मार्च 2025 को ‘‘संयुक्त पड़हा समिति’’ के द्वारा खूंटी के कर्रा में आयोजित ‘‘सीओ भगाओ, जमीन बचाओ’’ कार्यक्रम में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष श्री बंधु तिर्की ‘‘रैली और धरना’’ का हिस्सा बने, जिसपर मैंने सवाल उठाया था कि जब कांग्रेस पार्टी सरकार में है, 4 मंत्री कांग्रेस पार्टी के है फिर क्या कारण है कि कार्यकारी अध्यक्ष को सी.ओ. ऑफिस के सामने धरना पर बैठना पड़ा?
- सीओ को हटाने हेतु क्यों मंत्री पत्र नहीं लिखते हैं? क्या कांग्रेसी इस तरह की नौटंकी करते हुए हम आदिवासियों को बेवकूफ बना रहे हैं? क्या मैंने गलत सवाल उठाया था? सीओ कार्यालय के सामने दिये गये मेरे भाषण और ‘‘लोकतंत्र 19’’ में दिये गये साक्षात्कार से कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष श्री बंधु तिर्की जी तिलमिला उठे हैं।
- इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि 16 फरवरी 2025 को राजनीतिक दलों के लिए आयोजित ‘‘पेसा महासभा’’ में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने यह कहते हुए मुझपर सीधा हमला करना शुरू कर दिया था, ‘‘तुमको भगवान ने बहुत दिमाग दिया है लेकिन तुम उसका गलत इस्तेमाल कर रहे हो। तुम दूसरों की पिच पर खेल रहे हो।
- हमलोगों के साथ मिलकर काम करो। इसी बीच 18 मार्च 2025 को 15.12 मिनट पर चन्द्रसेन राव का मोबाइल न. 9999033702 से फोन आया था। उनसे 24 मिनट 15 सेकेंड बात हुई, जिसमें मूल बात यह थी कि आपलोग कांग्रेस पार्टी से मिलकर काम करो। बंधु तिर्की जी का भी मूल सवाल यही था कि कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर काम करो।
- ‘‘आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद्’’ को ‘‘कांग्रेस पार्टी’’ का समर्थन संगठन के रूप में दिखाने की कोशिश थी। लेकिन जब हमने इंकार कर दिया तब उन्होंने आम लोगों को हमारे खिलाफ भड़काना शुरू किया, हमारे सहयोगी संगठनों को मुझे बुलाने पर मना करना शुरू किया और हमारी टीम को भी तोड़ने की कोशिश की। जब असफल रहे तब मुझे ही जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। लेकिन हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। हम ‘‘पेसा आंदोलन’’ के साथ अपनी सभी गतिविधियों को जारी रखेंगे।
नोट: हम उन सारे आदिवासी नेताओं से निवेदन करते हैं, जिन्हें सिर्फ फूलमाला पहनना, जयजयकार कराना और सत्ता का मजा लेना पसंद है लेकिन सवालों से डर लगता है, उन्हें तत्काल मंत्री, सांसद और विधायक के पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि हमलोग उनसे सवाल पूछेंगे ही और उनको यह व्यक्तिगत हमला लग सकता है जबकि हमलोग उन्हें पदों में होने की वजह से सवाल पूछते हैं। हमारा किसी भी नेता से न कोई निजी दुश्मनी है और न ही हमारा मकसद किसी को निशाना बनाना है।
जय आदिवासी!
-ग्लेडसन डुंगडुंग के फेेेेेसबुक वाल से
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