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Saturday, March 7, 2026
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भूपेश बघेल की दिल्ली दौड़: शराब घोटाले की गूंज, कांग्रेस में कलह और जनता का बढ़ता असंतोष

रायपुर, 21 जुलाई: छत्तीसगढ़ की राजनीति इस समय भारी उथल-पुथल से गुजर रही है, जहां एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस संगठन के भीतर गहराती नाराज़गी ने नेतृत्व संकट को उजागर कर दिया है।

₹3,200 करोड़ के कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद बघेल को दिल्ली रवाना

होना पड़ा, जहां वे पार्टी नेतृत्व से समर्थन की आस लगाए पहुंचे। इससे पहले रायपुर में शनिवार को हुई कांग्रेस की बैठक में बघेल को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जहां वरिष्ठ नेताओं ने साफ कहा कि पार्टी को भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे परिवारों की बजाय जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

बघेल सरकार के कार्यकाल पर लगे रहे कई दाग

2018 से 2023 तक बघेल की सरकार पर न केवल रेत खनन में अनियमितताओं, बल्कि ट्रांसफर-पोस्टिंग में घोटाले और सरकारी योजनाओं में कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप भी लगे। इन घटनाओं ने राज्य की विकास गति को प्रभावित किया और निवेशकों का भरोसा भी डगमगाया।

कोयला परियोजना पर बघेल की स्थिति सवालों के घेरे में

जिस कोयला खदान परियोजना का वे आज विरोध कर रहे हैं, उसी को बघेल ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में आगे बढ़ाया था। यह परियोजना महाराष्ट्र की सरकारी कंपनी महाजेनको को दी गई थी, जिसमें अडानी एक ठेकेदार के रूप में अंतरराष्ट्रीय निविदा प्रक्रिया के तहत चुना गया। अब बघेल का विरोध उनके रुख में राजनीतिक अवसरवाद का संकेत देता है, जिससे कांग्रेस के भीतर भी असंतोष पनप रहा है।

आर्थिक नाकेबंदी पर जनता में आक्रोश

कांग्रेस द्वारा 22 जुलाई को घोषित आर्थिक नाकेबंदी को लेकर भी जनाक्रोश देखा जा रहा है। यह कदम व्यापार, परिवहन, आपात सेवाओं और छात्रों के हितों के खिलाफ माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पार्टी की विश्वसनीयता और जनसमर्थन को नुकसान हो सकता है।

जनता के मन में उठते सवाल

अब छत्तीसगढ़ की जनता पूछ रही है—क्या यह विपक्षी राजनीति केवल नाटक बनकर रह जाएगी? क्या कांग्रेस सचमुच जनहित के लिए दबाव बनाने की भूमिका निभा रही है या सिर्फ अंतरदलों की राजनीति में उलझ गई है? और सबसे अहम सवाल—क्या भूपेश बघेल अब दिल्ली और छत्तीसगढ़, दोनों जगह पार्टी का समर्थन खोने की कगार पर हैं?

News – Muskan


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