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Monday, March 9, 2026
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दिशोम गुरु शिबू सोरेन को आदिवासी रीति-रिवाज से दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि

गुमला, 5 अगस्त: झारखंड आंदोलन के पुरोधा और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर गुमला जिला के सरना पूजा स्थल, पालकोट रोड में आदिवासी समाज ने परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों, छात्र-छात्राओं और स्थानीय लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत आना-आदि प्रार्थना और पारंपरिक आदिवासी अनुष्ठान से हुई, जिसके बाद दिवंगत नेता की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने शिबू सोरेन के जीवन संघर्ष, आदिवासी अधिकारों की लड़ाई और झारखंड आंदोलन में उनके योगदान को याद किया।

विश्व आदिवासी आयोजन समिति के अध्यक्ष नेल्सन भगत ने कहा, “दिशोम गुरु एक विचारधारा थे, जिनके सिद्धांतों को आत्मसात कर हम झारखंड को उनके सपनों का राज्य बनाएंगे। उनका जाना सिर्फ शारीरिक रूप से है, उनकी सोच और संघर्ष की भावना हमेशा हमारे साथ रहेगी।”

वहीं समिति के सह-सचिव नरेश उरांव ने नम आंखों से श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “यह केवल एक नेता की नहीं, एक अभिभावक की विदाई है। झारखंड ने अपना मार्गदर्शक खो दिया है।” उपाध्यक्ष विमलचंद्र बड़ाईक ने गहरी संवेदना जताते हुए कहा, “झारखंड की आत्मा आज रो रही है, दिशोम गुरु के बिना सब कुछ अधूरा लग रहा है।”

श्रद्धांजलि सभा में जीतेश मिंज, महावीर उरांव, सोनो मिंज, बुधवा उरांव और शांति देवी जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी श्रद्धांजलि दी। गुमला के सभी प्रमुख छात्रावासों के आदिवासी छात्र इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस आयोजन ने दिशोम गुरु के प्रति आदिवासी समाज की गहरी आस्था और सम्मान को दर्शाया। वक्ताओं ने शिबू सोरेन की सादगी, दूरदर्शिता और संघर्षशील जीवन को आदर्श बताते हुए उन्हें सच्चा जननेता बताया और उनके अधूरे सपनों को साकार करने की शपथ ली।

न्यूज़ – गणपत लाल चौरसिया 


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