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Sunday, March 8, 2026
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वाणिज्य विभाग ने चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की रूपरेखा पर बोर्ड ऑफ स्टडीज में की विस्तार से चर्चा

हजारीबाग — विनोबा भावे विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग ने हाल ही में अपने बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में सत्र 2025–29 से लागू होने वाले चार वर्षीय स्नातक (FYUG) पाठ्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मुख्तार आलम ने की और इसमें आंतरिक व बाह्य दोनों स्तर के शिक्षाविदों ने भाग लिया, ताकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किया जा सके।

बैठक में यह तय करने पर सहमति बनी कि नए चार वर्षीय पाठ्यक्रम में मेज़र, एडवांस मेज़र, असोसिएटेड कोर, इलेक्टिव कोर्स तथा एडवांस रिसर्च व रिसर्च कोर्स को सम्मिलित किया जाए, ताकि छात्र-छात्राओं को बहु-विषयक विकल्प, गहन विशेषज्ञता और शोध-कौशल दोनों मिल सकें।

विस्तार से हुई चर्चा में शामिल गणमान्य सदस्य: बाह्य सदस्यों के रूप में प्रो. नाजिर अहमद नजीर (यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर) और प्रो. कृति भाष्वर सिंह (सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड) तथा आंतरिक सदस्यों के रूप में विभागीय फैकल्टी—डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल, डॉ. बी. डी. त्रिवेदी (मार्खम कॉलेज ऑफ कॉमर्स), डॉ. कृष्ण कुमार (आदर्श कॉलेज, राजधनवार), डॉ. अंतरा गुप्ता (मार्खम कॉलेज ऑफ कॉमर्स), डॉ. निर्मला खेस (के. बी. महिला कॉलेज), डॉ. सुभाष कुमार (अन्नदा कॉलेज), डॉ. संतोष कुमार लाल (प्राचार्य, सरिया कॉलेज, सरिया) उपस्थित रहे।

विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मुख्तार आलम ने बैठक में बताया कि नया चार वर्षीय ढांचा विद्यार्थियों को अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा के साथ-साथ बाजारोन्मुख कौशल भी देगा, जिससे स्नातक स्तर पर ही वे आगे के उच्च अध्ययन या व्यावसायिक चुनौतियों के लिए बेहतर तैयार होंगे। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम निर्माण के दौरान स्थानीय और राष्ट्रीय शैक्षिक आवश्यकताओं तथा रोजगार-क्षेत्र की मांगों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है।

बैठक के दौरान पाठ्यक्रम के विषयगत मॉड्यूल, क्रेडिट-डिस्ट्रिब्यूशन, इंटर्नशिप और मूल्यांकन पद्धतियों पर तकनीकी व शैक्षणिक स्तर पर गहन विमर्श हुआ। सदस्यगणों ने राष्ट्रव्यापी शोध-मानकों और विश्वविद्यालय के संसाधनों के मद्देनज़र कोर्सगत संरचना में आवश्यक संशोधनों के सुझाव दिए।

अंत में यह निर्णय लिया गया कि प्राप्त सुझावों को संकलित कर संशोधित रूपरेखा तैयार की जाएगी और आवश्यक अनुमोदन प्रक्रियाओं के लिए संबंधित विश्वविद्यालय निकायों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि नई पाठ्य-रूपरेखा लागू होने तक लगातार फीडबैक-आधारित समायोजन और शिक्षक-प्रशिक्षण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।

News – Vijay Chaudhary


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