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Sunday, March 8, 2026
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गुमला में रेलवे लाइन और उद्योग का अभाव, हिंडालको पर अधूरा वादा निभाने का आरोप

गुमला, झारखंड। दशकों से लंबित लोहरदगा–गुमला–कोरबा (मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़) रेलवे लाइन की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। हाल ही में गुमला जिला मुख्यालय में रेलवे रिजर्वेशन काउंटर खुलने के बाद लोगों ने इस परियोजना को फिर से आगे बढ़ाने की अपील की है।

दशकों पुराना वादा अधूरा

स्थानीय लोगों के अनुसार, पूर्व रेल मंत्री स्व. केदारनाथ मिश्र ने अपने कार्यकाल में इस रेल लाइन को मंजूरी देने का वादा किया था। झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्व. कार्तिक उरांव के प्रयासों से इसका प्रारंभिक सर्वे भी कराया गया था। इसके बाद कई बार रेलवे सर्वेक्षण हुआ और मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अंतिम सर्वे पूरा भी कर लिया गया। हालांकि, आज तक रेल लाइन बिछाने का कार्य शुरू नहीं हो पाया।

रेलवे कनेक्टिविटी न होने से गुमला और आसपास के क्षेत्र में औद्योगिक विकास ठप है। स्थानीय उद्योग-धंधे नहीं लग पा रहे और युवाओं को रोजगार के अवसरों के लिए बाहर पलायन करना पड़ता है।

हिंडालको पर अधूरा समझौता निभाने का आरोप

इसी बीच गुमला के नागरिकों ने हिंडालको कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिले के विभिन्न इलाकों से बॉक्साइट का खनन कर रेणुकूट (उत्तर प्रदेश) और अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है, जहाँ से एल्युमिनियम फैक्ट्रियों में इसका इस्तेमाल कर उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

स्थानीय दावों के अनुसार, हिंडालको ने वर्षों पहले गुमला और आसपास के क्षेत्रों में एल्युमिनियम फैक्ट्री स्थापित करने के लिखित समझौते के बाद ही बॉक्साइट खनन का अधिकार प्राप्त किया था। लेकिन, कई दशक बीत जाने के बाद भी कंपनी ने जिले में फैक्ट्री नहीं लगाई।

नागरिकों में आक्रोश और सरकार से उम्मीदें

आदिवासी बहुल गुमला जिले के लोग इसे अपने संसाधनों के शोषण के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि यदि रेलवे लाइन बिछाई जाती और हिंडालको कंपनी फैक्ट्री स्थापित करती, तो गुमला औद्योगिक विकास और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता था।

स्थानीय नागरिकों ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की है कि हिंडालको को उसके पुराने समझौते के लिए जवाबदेह ठहराया जाए और जिले में एल्युमिनियम उद्योग स्थापित करने के लिए बाध्य किया जाए। साथ ही, रेलवे परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर लाने की अपील भी की गई है।

न्यूज़ – गणपत लाल चौरसिया 


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