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Saturday, March 7, 2026
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बिहार की राजनीति में हलचल तेज, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह भी बगावत के मूड में, मंत्रियों पर आरोप के बाद एनडीए खेमे में खदबदाहट 

सुनील सिंह

पटना, बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में होने की संभावना है। चुनाव को लेकर बिहार में राजनीतिक सरगर्मी तेज है। रोज नए समीकरण बन-बिगड़ रहे हैं। नेता भी करवट बदल रहे हैं। लालू परिवार में विद्रोह की खबरों के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह सिंह ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। उनके सुर बदल गए हैं। ऐसा लगता है कि वह भी बगावत के मूड में हैं। अलग पार्टी बनाने पर विचार कर रहे हैं।

जन सुराज के प्रशांत किशोर ने एनडीए सरकार के कई बड़े मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। मंत्रियों पर आरोप के बाद बिहार की राजनीति में नया उबाल आ गया है। अब इस मुद्दे पर आरके सिंह ने अपना मुंह खोलते हुए एनडीए सरकार के मंत्रियों से जवाब देने की मांग की है। कहा है कि भ्रष्टाचार का आरोप लगा है तो जवाब देना होगा।

आरा में दो दिन पहले उन्होंने क्षत्रिय समाज के एक कार्यक्रम में अलग पार्टी बनाने की भी बात कही है। इससे लगता है कि उनका अब भाजपा से मोहभंग हो चुका है और वह नए रास्ते की तलाश में हैं।

क्या आर के सिंह का भाजपा से मोहभंग हो चुका है?

आरा से लोकसभा चुनाव हारने के बाद आरके सिंह को लगभग हाशिये पर डाल दिया गया है। ऐसा कहा जा रहा हैै कि आरके सिंह के बढ़ते कद को देखते हुए उन्हें एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत लोकसभा का चुनाव हरवाया गया। पार्टी से लेकर विरोधी नेताओं ने भी इस मामले में आरके सिंह के खिलाफ काम किया। पवन सिंह फैक्टर ने भी हार में भूमिका निभाई थी।

चर्चा थी कि उन्हें विधानसभा का चुनाव लड़ाया जाएगा। लेकिन आरके सिंह के बोल से ऐसा लगता है की पार्टी उन्हें चुनाव नहीं लड़ाएगी। इसलिए आरके सिंह अब नया रास्ता तलाश रहे हैं। केंद्र में मंत्री रहते हुए आरके सिंह ने अपनी एक पहचान बनाई। विकास के लिए कई काम किए। भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त रहे। उनकी अपनी एक छवि है। वह झुक कर व चाटुकारिता की राजनीति करने के खिलाफ हैं। इसलिए भाजपा से उनका मोह भंग हो चुका है।

हालांकि, बिहार के राजनीतिक दलों में सीट शेयरिंग को लेेकर कई राजनेता इधर से उधर हो सकते हैं. इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. आरके सिंह के तेवर के बाद दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व ने अभी तक प्रदेश नेतृत्व को किसी तरह का संदेश नहीं दिया है लेकिन आर के सिंंह ने अपने आगे कदम जरूर बढ़ा दिये हैं. अब हमें उनके अगले कदम की प्रतीक्षा रहेेगी।

 


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