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‘बुंदेली बावरा’ का आगाज़: बुंदेलखंड के सुरों, लोकभाव और विरासत को मंच देने जा रही पहली बड़ी संगीत प्रतियोगिता

छतरपुर, दिसंबर 2025। बुंदेलखंड की धरती पर मेहनत और मिट्टी की खुशबू से साथ-साथ लोकगीतों की अनूठी धड़कन भी बसती है। उसी धड़कन को नया मंच, नई पहचान और नई उड़ान देने के उद्देश्य से बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रमुख चैनल ‘बुंदेलखंड 24×7’ ने एक अनोखी पहल की है। चैनल ने बुंदेली लोकगीतों पर आधारित बुंदेलखंड की पहली बड़ी संगीत प्रतियोगिता ‘बुंदेली बावरा’ की शुरुआत कर दी है। प्रतियोगिता की शुरुआत चंदेरी में संगीत सम्राट बैजू बावरा की समाधि पर माल्यार्पण से हुई।

लोकधुनों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की बड़ी पहल

‘बुंदेली बावरा’ का उद्देश्य बुंदेलखंड के गाँव–कस्बों में छिपी उन आवाज़ों तक पहुँच बनाना है, जिनमें लोकगीतों की सादगी, मिट्टी की महक और जीवन की कहानियाँ बसी हैं, लेकिन जिन्हें मंच और पहचान की दरकार है। यह प्रतियोगिता सिर्फ एक गायन कार्यक्रम नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव है।

शो को महान लोकसंगीत साधक बैजू बावरा को समर्पित किया गया है, ताकि उनकी तपस्या, परंपरा और लोकधुनों के प्रति समर्पण को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सके।

“बैजू बावरा बुंदेलखंड की आत्मा थे” – फाउंडर अतुल मलिकराम

इस पहल को लेकर बुंदेलखंड 24×7 के फाउंडर अतुल मलिकराम ने कहा—

“बैजू बावरा सिर्फ लोकगायक नहीं थे, वे बुंदेलखंड की आत्मा की आवाज़ थे। उनकी धुनों में हमारी परंपराएँ सांस लेती थीं। ‘बुंदेली बावरा’ उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि है। हमारा मकसद है कि युवा अपनी मिट्टी की उस अनमोल संगीत विरासत को जाने, समझे और उस पर गर्व महसूस करे।”

उन्होंने कहा कि यह मंच सिर्फ प्रतियोगिता नहीं बल्कि बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की अटूट कड़ी है।

“लोकगीतों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास”— चैनल हेड आसिफ पटेल

चैनल हेड आसिफ पटेल ने बताया कि ‘बुंदेली शेफ’ जैसे सफल कार्यक्रम के बाद अब चैनल बुंदेली संगीत परंपरा को सशक्त बनाने जा रहा है।

उन्होंने कहा—

“लोकगीतों में हमारा इतिहास, संघर्ष, प्रेम और जीवन की पूरी कहानी छिपी है। इन्हें वह सम्मान और मंच मिलना चाहिए, जिसके ये हकदार हैं। भारी संख्या में रजिस्ट्रेशन ने साबित किया है कि लोकगीत आज भी लोगों के दिलों की धड़कन हैं।”

अब प्रतियोगिता पूरे बुंदेलखंड में फैले ऑडिशन के माध्यम से आगे बढ़ रही है।

6 जिलों में शुरू हुए ऑडिशन, 500 से अधिक वीडियो एंट्रीज़ प्राप्त

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होते ही बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली।
अब तक 500 से अधिक वीडियो एंट्रीज़ प्राप्त हुई हैं।

ऑडिशन कार्यक्रम इस प्रकार हैं—

  • 11 दिसंबर 2025 – झाँसी: झाँसी, दतिया, निवारी के कलाकार शामिल
  • 12 दिसंबर 2025 – हमीरपुर: महोबा, बांदा, जालौन के प्रतिभागी
  • 13 दिसंबर 2025 – छतरपुर: छतरपुर और चित्रकूट क्षेत्र के लोकगायक
  • 15 दिसंबर 2025 – पन्ना
  • 17 दिसंबर 2025 – टीकमगढ़: टीकमगढ़ और ललितपुर के कलाकार
  • 18 दिसंबर 2025 – सागर: सागर और दमोह के प्रतिभागी

चयनित कलाकार आगे क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और ग्रैंड फिनाले में पहुँचेंगे। मूल्यांकन में सुर, भाव, बुंदेली शब्दों की पकड़ और लोकपरंपरा से जुड़ेपन को विशेष महत्व दिया जाएगा।

बुंदेलखंड 24×7— लोकसरोकारों की बुलंद आवाज़

पृथक बुंदेलखंड की आवाज़ बुलंद करने वाले बुंदेलखंड 24×7 ने पिछले कई वर्षों में सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक मुद्दों और जनआंदोलनों को अपनी पहचान का हिस्सा बनाया है।

‘बुंदेली बावरा’ इसी सोच का विस्तार है—
एक ऐसा मंच जहाँ लोक कलाकारों को सम्मान, पहचान और अवसर एक साथ मिल सके।

‘बुंदेली बावरा’: संस्कृति, सुर और अभिमान का उत्सव

कुल मिलाकर यह प्रतियोगिता सिर्फ सुरों का संग्राम नहीं बल्कि—

  • बुंदेलखंड की आत्मा,
  • उसकी परंपरा,
  • उसकी मिट्टी,
  • और लोकसंगीत की अनूठी विरासत

का उत्सव है।

जब आने वाले दिनों में प्रतियोगिता के मंच पर लोकधुनें गूंजेंगी, तो पूरा बुंदेलखंड गर्व से कहेगा—
“हाँ, ये आवाज़ें बुंदेलखंड की हैं!”

News – Ranu


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