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Tuesday, July 28, 2026
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विभावि भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) विभाग में संगोष्ठी का आयोजन

न्यूज – विजय चौधरी

संगोष्ठी का विषय: पार्किन्सनिज़्म एवं आधुनिक युग में फिजियोथेरेपी की भूमिका

एम्स, नई दिल्ली, न्यूरो रिहैबिलिटेशन विभाग के डॉ. प्रभात रंजन थे मुख्य अतिथि

विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हज़ारीबाग के भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) विभाग द्वारा 27 जुलाई 2026 को आर्यभट्ट सेमिनार हॉल, सी.वी. रमन साइंस ब्लॉक-1 में “पार्किन्सनिज़्म” एवं “आधुनिक युग में फिजियोथेरेपी की भूमिका” विषयों पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया

कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष डॉ. उमेन्द्र सिंह के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) चन्द्र भूषण शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व, विभाग के प्रति निरंतर सहयोग एवं शैक्षणिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से भविष्य में भी फिजियोथेरेपी के समसामयिक विषयों पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुरेन्द्र कुमार कुशवाहा ने विभाग को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के ज्ञान एवं व्यावसायिक दक्षता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन डॉ. अम्बिका गुप्ता ने किया। विभाग का संक्षिप्त परिचय डॉ. मेराज नबी सिद्दीकी ने प्रस्तुत करते हुए विभाग की स्थापना, उपलब्धियों एवं देशभर में कार्यरत पूर्व विद्यार्थियों की सफलताओं पर प्रकाश डाला तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

मुख्य वक्ता डॉ. प्रभात रंजन (पी.टी.), वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट, न्यूरो रिहैबिलिटेशन विभाग, एम्स, नई दिल्ली ने “पार्किन्सनिज़्म” विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रारंभिक पहचान, वैज्ञानिक मूल्यांकन, संतुलन एवं चाल प्रशिक्षण तथा साक्ष्य-आधारित फिजियोथेरेपी की महत्ता पर प्रकाश डाला।

द्वितीय वक्ता डॉ. अजीत कुमार (पी.टी.), वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट, रजिस्ट्रार, झारखंड स्टेट काउंसिल ऑफ फिजियोथेरेपी (JSCPT) एवं संयोजक, इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP), झारखंड ने “आधुनिक युग में फिजियोथेरेपी की भूमिका” विषय पर संबोधित करते हुए फिजियोथेरेपी के बढ़ते दायरे, अनुसंधान आधारित उपचार एवं व्यावसायिक नैतिकता पर अपने विचार साझा किए।

विशिष्ट वक्ता डॉ. आयुषी (पी.टी.), रांची ने “थिंक बियॉन्ड द शोल्डर” विषय पर व्याख्यान देते हुए कंधे की समस्याओं के समग्र मूल्यांकन एवं आधुनिक पुनर्वास पद्धतियों की जानकारी दी।

अंत में डॉ. राहुल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकगण, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुई। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।


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