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Tuesday, August 11, 2026
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टीबी मुक्त गुमला की दिशा में जिला प्रशासन की बड़ी पहल, आगामी चार माह के लिए तैयार की गई विशेष कार्ययोजना

गुमला न्यूज़ ब्यूरो – गणपत लाल चौरसिया
गुमला : –  टीबी  देश एवं झारखंड राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती है। टीबी का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिले की सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति को भी प्रभावित करता है। गुमला जिले में टीबी के अधिकांश मरीज कामकाजी आयु वर्ग से संबंधित हैं, जिससे परिवारों की आय एवं उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए टीबी के खिलाफ अभियान को और तेज करते हुए वर्ष 2026 के आगामी चार माह में गुमला जिले को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है।
इसी क्रम में आज उपायुक्त, गुमला दिलेश्वर महत्तो  द्वारा सदर अस्पताल परिसर में जिला क्षय केंद्र के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया गया। साथ ही ‘टीबी मुक्त गुमला जिला’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जिला टीबी सेल द्वारा तैयार की गई आगामी चार माह की रणनीतिक कार्ययोजना को उपायुक्त द्वारा अनुमोदित किया गया तथा कार्ययोजना पर हस्ताक्षर किए गए।
इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि पूर्व में जिला क्षय केंद्र शहर से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित था, जिसके कारण लोगों को जांच एवं उपचार संबंधी सुविधाओं के लिए आने-जाने में कठिनाई होती थी। अब नए भवन के माध्यम से जिला मुख्यालय में ही टीबी की जांच एवं उपचार संबंधी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे मरीजों को समय पर जांच कराने और उपचार प्राप्त करने में सुविधा होगी।
उपायुक्त ने कहा कि गुमला जिले को आगामी चार माह में टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष रणनीति तैयार की गई है। इस रणनीति के तहत केवल टीबी मरीजों की पहचान और उपचार ही नहीं, बल्कि बीमारी के संक्रमण को रोकने, जोखिम वाले समूहों की पहचान करने तथा टीबी से जुड़े प्रमुख जोखिम कारकों पर भी प्रभावी तरीके से कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि टीबी की दवाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं और जिले में CBNAAT एवं TrueNat जैसी अत्याधुनिक जांच सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करते हुए टीबी के मामलों की समय पर पहचान एवं उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ‘टीबी मुक्त गुमला जिला’ का उद्देश्य केवल टीबी के मामलों को कम करना नहीं, बल्कि जिले की स्वास्थ्य प्रणाली को और मजबूत बनाना है, ताकि टीबी के सभी संभावित मामलों का जल्द पता लगाया जा सके, मजबूत निगरानी प्रणाली विकसित हो तथा उच्च जोखिम वाले समूहों में संक्रमण की जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने सभी संबंधित विभागों, स्वास्थ्यकर्मियों एवं आमजनों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील की।
उन्होंने कहा कि टीबी के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों, जैसे मधुमेह, कुपोषण, पुरानी सांस संबंधी बीमारियां तथा अल्कोहल एवं तंबाकू का सेवन को कम करने के लिए भी विशेष प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सामूहिक प्रयास एवं सहभागिता से ‘टीबी मुक्त गुमला’ का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है और यह प्रयास जिले में टीबी मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
जिला टीबी सेल द्वारा तैयार कार्ययोजना नेशनल स्ट्रैटेजिक प्लान  के चार प्रमुख स्तंभों Build (स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना), Prevent (रोकथाम), Detect (समय पर पहचान) एवं Treat (प्रभावी उपचार) पर आधारित है। कार्ययोजना के तहत टीबी के मामलों की सक्रिय खोज, समय पर जांच, उपचार की निरंतर निगरानी, उच्च जोखिम वाले समूहों पर विशेष फोकस तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता गतिविधियों को गति दी जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने बताया कि जिले में टीबी उन्मूलन को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। एक चरण में जिले की 62 पंचायतों को टीबी मुक्त पंचायत के रूप में चिन्हित किया गया है। वर्ष 2026 में जिले की 169 पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस दिशा में पंचायत स्तर तक टीबी की पहचान, जांच, उपचार एवं फॉलोअप को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 21 अगस्त को नगर भवन, गुमला में टीबी मुक्त पंचायतों के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें 62 टीबी मुक्त पंचायतों के मुखिया एवं संबंधित प्रखंडों के प्रमुखों की उपस्थिति में पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा। टीबी उन्मूलन की दिशा में बेहतर कार्य करने वाली पंचायतों को कांस्य प्रतिमा/सम्मान चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। यह आयोजन जिले की अन्य पंचायतों को भी टीबी मुक्त अभियान के लिए प्रेरित करने का माध्यम बनेगा।
जिला कार्यक्रम समन्वयक विनय कुमार गुप्ता ने बताया कि नए जिला क्षय केंद्र के माध्यम से अब जिला स्तर पर टीबी की जांच एवं उपचार संबंधी सेवाओं को और सुदृढ़ किया जा सकेगा। केंद्र में उपलब्ध अत्याधुनिक जांच सुविधाओं का लाभ आमजनों को मिलेगा। आगामी चार माह की कार्ययोजना के तहत टीबी मरीजों की सक्रिय खोज, जांच, उपचार एवं फॉलोअप पर विशेष जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी, सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अनुपम किशोर, जिला क्षय रोग पदाधिकारी डॉ. के.के. मिश्रा, जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार, जिला कार्यक्रम समन्वयक विनय कुमार गुप्ता सहित स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी एवं जिला क्षय केंद्र के कर्मी उपस्थित थे।

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