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Thursday, September 10, 2026
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शौच के लिए घर से निकले थे शनि उरांव, झाड़ियों में छिपे हाथी ने कुचलकर मार डाला

गुमला न्यूज प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला: सुबह का वक्त था। 65 वर्षीय शनि उरांव रोज की तरह शौच के लिए घर से कुछ दूर झाड़ियों की ओर गए थे। उन्हें क्या पता था कि झाड़ियों के पीछे पहले से एक हाथी मौजूद है। जैसे ही शनि उरांव उसके करीब पहुंचे, हाथी ने अचानक हमला कर दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, हाथी ने उन्हें सूंड से उठाकर पटका और फिर पैरों से कुचल दिया। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

घटना भरनो थाना क्षेत्र के मारासिली पंचायत स्थित महूगांव टंगरा टोली की है। बुधवार सुबह हुई इस घटना के बाद गांव में दहशत फैल गई। मृतक की पहचान इसी गांव के रहने वाले शनि उरांव के रूप में हुई है।

झाड़ियों के पीछे पहले से मौजूद था हाथी

ग्रामीणों के अनुसार, शनि उरांव सुबह नित्यक्रम के लिए घर से निकले थे। घर से कुछ दूरी पर झाड़ियों के पास पहुंचते ही उनका सामना वहां मौजूद हाथी से हो गया। अचानक हुए हमले से उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला।

घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और इसकी सूचना वन विभाग तथा स्थानीय प्रशासन को दी गई।

इलाके में लगातार घूम रहे हाथियों से डर

ग्रामीणों का कहना है कि भरनो प्रखंड के अलग-अलग इलाकों में हाथियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। हर साल हाथियों के गांव और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचने से लोगों में डर का माहौल बन जाता है।

ग्रामीणों के मुताबिक, रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए लोगों को घर से बाहर निकलना ही पड़ता है। ऐसे में कई बार अचानक हाथियों से आमना-सामना हो जाता है। उनका मानना है कि हाथियों को करीब से देखने या उन्हें भगाने की कोशिश करने पर स्थिति और खतरनाक हो सकती है।

ग्रामीणों ने मांगी 24 घंटे निगरानी

घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की गतिविधियों पर 24 घंटे निगरानी रखने की मांग की है। उनका कहना है कि हाथियों के आबादी वाले इलाकों में प्रवेश करने की स्थिति में ग्रामीणों को समय रहते सतर्क किया जाए और उन्हें बस्तियों से दूर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

ग्रामीणों ने मृतक के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा देने की भी मांग की है।

हर साल बढ़ रहा खतरा, कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की लगातार आवाजाही के बावजूद उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हो पा रहे हैं। उनका कहना है कि सारंडा जंगल की ओर से हाथियों के झुंड के गुमला, खूंटी, सिमडेगा और लोहरदगा की तरफ आने की घटनाएं होती रही हैं और वन क्षेत्र से लगे रिहायशी इलाकों में हाथियों के पहुंचने से मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब हाथियों की आवाजाही के बारे में पहले से जानकारी रहती है, तो आबादी वाले इलाकों में उनकी मौजूदगी के दौरान लोगों को समय पर अलर्ट करने और नुकसान रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं बन पाती।

फिलहाल, इस घटना के बाद महूगांव टंगरा टोली और आसपास के ग्रामीणों में हाथियों को लेकर भय का माहौल है।


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