29.6 C
Ranchi
Wednesday, July 1, 2026
Advertisement
Home Blog Page 19

गुमला में स्मार्ट मीटर बना जी का जंजाल और आफत, लाखों का आ रहा बिजली बिल, पेमेंट कौन करेगा,,?? पावर हाउस में मची अफरा-तफरी

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

लूट और भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है विद्युत विभाग गुमला, उपभोक्ता लग रहे हैं उपयुक्त गुमला से न्याय की गुहार

गुमला : – गुमला जिला में बिजली विभाग की अकर्मण्यता और कार्य शिथिलता के कारण लूट की छूट बची हुई है, बिना पैसे का कोई कार्य नहीं होता, बिजली पॉल में आई गड़बड़ी को ठीक करने के लिए ₹200 से प्रारंभ होती है खुला खेल फर्रुखाबादी विभिन्न आकार प्रकार के कार्यों के लिए विभिन्न आकार प्रकार के दाम वसूले जाते हैं, बिजली विभाग के पदाधिकारी का दो टूक जवाब होता है, निजी मिस्त्री है दम तो देना ही पड़ेगा और विद्युत विभाग किसी की नहीं सुनता, विद्युत विभाग के पदाधिकारी से लेकर कर्मचारी तक मात्र अपनी डफली अपनी राग अलाप्ता रहता है, उपभोक्ता की सुनता ही नहीं है, और विद्युत विभाग द्वारा लगाए गयें नये विद्युत स्मार्ट मीटर लगने के बाद से बेतहाशा बिजली बिल आने से विद्युत उपभोक्ता हैरान और परेशान है, बिजली बिल सुधार को लेकर आम विद्युत उपभोक्ताओं अपनी समस्याओं को लेकर विद्युत विभाग के उच्च पदाधिकारियों के पास पहुंचकर और विद्युत कार्यालय सह पावर हाउस गुमला में प्रतिदिन सैकड़ो लोगों के बिजली बिल बिजली बिल समस्या से संबंधित समायोजन हेतु भीड़ लगी हुई है, एवं समायोजन के उपरांत किन्ही उपभोक्ता का तीन लाख, किन्हीं का ₹-160000/-, किन्हीं का ₹-55000/- तो किन्ही का ₹-30000/- रुपए बिल आ रहा है, यह विद्युत विभाग का ड्रामा नहीं तो और क्या है,,,,,????? झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीभीएनएल) की देखरेख में कई विद्युत से संबंधित एजेंसी एवं कंपनी कम कर रही है, राज्य में अलग-अलग क्षेत्र के अलग-अलग ठेकेदार द्वारा बिजली का स्मार्ट मीटर , पिछले वर्ष लगाया गया था और विद्युत उपभोक्ताओं ने यह सोचकर स्मार्ट मीटर लगाया थी की अब सही बिजली बिल आएगा परंतु विद्युत उपभोक्ताओं के साथ यह तो उल्टा खेल हो गया लोगों को समायोजन के बाद इतना ज्यादा बिल का भुगतान कर पाना , बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल चुकता कर पाना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन हो गया है,फलस्वरूप विद्युत उपभोक्ता अपने बेतहाशा बिजली बिल से परेशान और हैरान होकर अंततः विद्युत विभाग के मुख्य कार्यालय पावर हाउस गुमला का चक्कर लगा रहे हैं, फिर भी कोई समाधान सामने नहीं आ रहा है, जब वहां उपस्थितकार्यरत कार्यपालक अभियंता से पूछा गया कि इतना बिल कैसे आ रहा है तब उन्होंने उपभोक्ताओं के समस्याओं का समाधान नहीं करते हुए उन्होंने अपना ज्ञान दिया की विद्युत बिल ऑनलाइन सिस्टम से आ रहा है, अतः मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ , मैं ज्यादा से ज्यादा यह कर सकता हूं कि आपके उक्त बिल को 10 किस्तों में जमा करने का आदेश दे सकता हूं, याने की विद्युत उपभोक्ताओं का लाखों का अगर बिल आया है तो उन्हें भुगतान करना ही होगा, ऐसा उनका सोच है, जब उपभोक्ता पुराने मीटर एवं नए स्मार्ट मीटर से मिलान करने और अंतर देखने की बात कही गई तो एक बिजली कर्मी ने बतलाया कि जब हम लोग उक्त कंपनी से पुराने मीटर ढूंढने की बात कही थी तब उक्त कंपनी के लोगों ने कहा की उतने मीटर के ढेर से और उक्त गोदाम में रखे हुए सारे मीटरों से एक-एक मीटर ढूंढना असंभव है. तब उक्त समस्या का समाधान कैसे होगा ????? और विद्युत बल बढ़ता जाएगा ऐसे परिस्थिति में आमजन उपभोक्ता का क्या होगा, एक सीनियर सिटीजन विद्युत उपभोक्ता ने आक्रोशित होकर बोला की घर बेचकर बिजली बिल भर दूंगा और और पूरा परिवार वृद्ध आश्रम चला जाऊंगा, इस स्थिति से विद्युत उपभोक्ताओं का मनोबल काफी गिर गया है, और विद्युत उपभोक्ता पूरी तरह से त्रस्त है, फिर भी विद्युत विभाग के उच्च पदाधिकारी द्वारा कोई विकल्प नहीं बताया जा रहा है, और तो और संबंधित विद्युत पदाधिकारी मुख दर्शक बने हुए हैं आखिर उपभोक्ता जाए तो कहां जाएं, विद्युत बिजली स्मार्ट मीटर विद्युत उपभोक्ताओं के लिए गले की फांस बन गई है और उन्हें इंसाफ और न्याय नहीं मिल पा रहा हैं, विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा गुमला उपायुक्त से पहल करने की गुहार लगाई है, क्योंकि विद्युत उपभोक्ताओं की स्थिति काफी गंभीर बन गई है, और कोई नहीं है देखन हारा !

राम भक्तों के लिए

BREAKING NEWS: BCCI Names Shreyas Iyer as T20 Captain, Suryakumar Yadav Dropped; 15-Year-Old Vaibhav Suryavanshi Earns Maiden Call-Up

0

Mumbai – The Board of Control for Cricket in India (BCCI) has announced India’s T20 squad for the upcoming tours of Ireland in June and England in July, making several bold decisions that have sparked widespread discussion among cricket fans.

In a major leadership change, the selectors have handed the T20 captaincy to middle-order batter Shreyas Iyer. Under his leadership, India is expected to field a youthful and dynamic squad as the team prepares for a busy international season.

The biggest surprise, however, is the omission of star T20 batter Suryakumar Yadav from the squad. Whether due to his recent form or a strategic shift towards building a younger team, Suryakumar’s exclusion has become the most talked-about aspect of the selection.

Another headline-making decision is the inclusion of teenage sensation Vaibhav Suryavanshi. The 15-year-old batting prodigy from Bihar impressed everyone with his remarkable performances in IPL 2026 and age-group cricket, earning his first call-up to India’s senior T20 side.

The selectors’ decision highlights their focus on nurturing young talent and building a strong team for the future. For Vaibhav, this tour could mark the beginning of a historic international career.

राम भक्तों के लिए

Digital Marketing & Online Income from Home

0

Special Launch Offer ₹99/-

Are you looking to earn money online, start a side hustle, or build a successful digital business from the comfort of your home? The Digital Marketing & Online Income from Home ebook bundle is designed specifically for Indians who want to learn practical online skills and create new income opportunities in today’s digital economy.

This comprehensive bundle includes step-by-step guides on Digital Marketing, SEO, Social Media Marketing, Affiliate Marketing, Content Creation, Blogging, Email Marketing, Freelancing, AI Tools, and Online Business Strategies. Whether you are a student, homemaker, working professional, entrepreneur, or retiree, these ebooks will help you understand the proven methods used by successful online marketers.

Learn how to attract website traffic, grow social media pages, promote products online, generate affiliate commissions, create digital products, and build multiple income streams. The bundle also includes valuable resources such as marketing templates, AI prompts, content calendars, checklists, and practical case studies to accelerate your learning.

No technical background is required. Each ebook is written in simple language and focuses on actionable strategies that you can implement immediately.

Start your journey toward digital success today and gain the knowledge needed to build a profitable online presence.

Instant Download • PDF Format • Mobile Friendly

Complete Bundle Available Now for Only ₹99/-

Disclaimer: Results and earnings vary from person to person. Success depends on skills, effort, consistency, and market conditions.

राम भक्तों के लिए

सरकार के पास ‘परीक्षा पे चर्चा’ का इवेंट मैनेजमेंट तो है, पर ‘रोजगार पर नीति’ का भारी अकाल है

0

परीक्षा पे चर्चा’ सिर्फ एक इवेंट बनकर रह गया है, जबकि हकीकत में युवाओं का भविष्य पेपर लीक के अंधेरे में खो रहा है।​ याद रहे इतिहास गवाह है कि जब-जब छात्र सड़कों पर उतरा है, बड़े से बड़े सिंहासन ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं। 

खुद को ‘विश्वगुरु’ कहने वाली बीजेपी सरकार की प्रशासनिक रीढ़ की हड्डी इस कदर सड़ चुकी है कि पिछले 5 सालों में देश के अलग-अलग राज्यों में 70 से अधिक प्रमुख सरकारी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, जिससे 1.7 करोड़ युवाओं की जिंदगी बर्बाद हो चुकी है। वहीं यूपी के शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का बयान तो काफी निम्न स्तर और काफी हास्यास्पद है. वे कहते हैं कि पहले सौ पेपर लीक होते थे अब सिर्फ दस होते हैं. इस प्रकार 90 प्रतिशत की कमी आई है.

24 लाख छात्रों के भविष्य को नीट (NEET) के कसाईखाने में हलाल करने के बाद जो लोग इस कॉकरोच वाली छात्र-क्रांति को कांग्रेस या आम आदमी पार्टी का ‘टूलकिट’ बता रहे हैं, उनकी बौद्धिक कंगाली पर तरस आता है।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारत में स्नातक युवाओं की बेरोजगारी दर रिकॉर्ड 29.1 प्रतिशत तक जा पहुंची है, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि इस सरकार के पास ‘परीक्षा पे चर्चा’ का इवेंट मैनेजमेंट तो है, लेकिन ‘रोजगार पर नीति’ का भारी अकाल है।

विजन व नीयत में जमीन-आसमान का फर्क

​इतिहास के पन्नों से अगर हम बीजेपी की मौजूदा नीतियों की तुलना करें, तो यह साफ हो जाता है कि विजन और नीयत में जमीन-आसमान का फर्क क्या होता है।

कांग्रेस के शासनकाल में जब 1951 में पहले आईआईटी (IIT Kharagpur) और 1956 में एम्स (AIIMS) की स्थापना की गई थी, तब मकसद देश को मजबूत वैज्ञानिक और डॉक्टर देना था, न कि पेपर लीक माफियाओं की तिजोरियां भरना।

साल 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) के तहत देश के अकादमिक ढांचे को जो स्वायत्तता दी गई थी, आज उसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जैसी गैर-जवाबदेह संस्था बनाकर पूरी तरह क्रूरता से कुचल दिया गया है,

जहां परीक्षा केंद्र से लेकर उत्तर पुस्तिकाओं तक की सरेआम बोली लगाई जा रही है। ​ये वो सरकार है जो इतिहास की बात तो बहुत करती है, लेकिन इतिहास से कुछ सीखती नहीं है, वरना इन्हें याद होता कि जब 1974 में तत्कालीन सरकार की नीतियों के खिलाफ बेरोजगारी को लेकर छात्र सड़कों पर उतरे थे, तो देश की राजनीति का भूगोल बदल गया था।

पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की रिपोर्ट गवाह है कि आज देश का हर तीसरा शिक्षित युवा (लगभग 33 प्रतिशत) बेरोजगार बैठा है, जो कांग्रेस के दौर के औसत शिक्षा-बेरोजगारी अनुपात से कहीं अधिक भयावह है। जो सरकार एक नेशनल लेबल की परीक्षा को बिना धांधली के आयोजित कराने की 100 प्रतिशत क्षमता नहीं रखती, वह किस मुंह से डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भरता का ढोल पीटती है, यह देश का युवा आज अच्छी तरह समझ रहा है।

​इस सड़े हुए सिस्टम को धरातल पर घुटनों पर लाने के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले युवा अब जंतर-मंतर पर उस शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पहुंच चुके हैं, जो इस प्रशासनिक पाप के मुख्य सूत्रधार हैं।

मांगें किसी खोखले राजनीतिक घोषणापत्र की तरह नहीं हैं, बल्कि सीधे तौर पर यूपीएससी (UPSC) की तर्ज पर एक स्वायत्त ‘राष्ट्रीय परीक्षा जवाबदेही आयोग’ के गठन की मांग करते हैं, जिसके पास पेपर लीक करने वाले रैकेट की संपत्ति कुर्क करने का सीधा अधिकार हो। इसके साथ ही, जीडीपी (GDP) का अनिवार्य 6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा बजट के लिए आवंटित किया जाए और युवाओं को रोजगार सुरक्षा देने के लिए धरातल पर काम करने वाला ‘युवा रोजगार गारंटी कानून’ तुरंत लागू हो।

​वक्त आ गया है कि इस जुमला-भक्त सत्ता के अहंकार को युवाओं की संगठित ताकत से तोड़ा जाए, क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब-जब छात्र सड़कों पर उतरा है, बड़े से बड़े सिंहासन ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं। सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से बाहर निकलिए, आंकड़ों और तर्कों के इस हथियार को थामिए और जंतर-मंतर की इस वैचारिक क्रांति का हिस्सा बनिए ताकि इन सत्ताधीशों को पता चले कि देश का युवा इनका गुलाम नहीं है।

जिस तरह भारतीय जनता पार्टी अभी तक भारतीय जनता की नहीं हुई, उसी तरह काकरोच जनता पार्टी के भारतीय युवा काकरोच नहीं है बल्कि इन बारह सालों में पैदा हुए सिस्टम के काकरोच को चुनौती देने के लिए सामने आए हैं 

परीक्षा पे चर्चा’ सिर्फ एक इवेंट बनकर रह गया है, जबकि हकीकत में युवाओं का भविष्य पेपर लीक के अंधेरे में खो रहा है। जब देश का पढ़ा-लिखा युवा सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाए, तो समझो हुकूमत के पतन के दिन शुरू हो चुके हैं।

-पंकज कुमार जाट के फेसबुक वाल से

राम भक्तों के लिए

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए भाजपा जिला कार्यालय गुमला डुमरडीह में हुआ पौधारोपण कार्यक्रम

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय में पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भाजपा जिला कार्यालय गुमला डुमरडीह में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व भाजपा जिला अध्यक्ष सागर उरांव ने किया। उन्होंने पौधा लगाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं आम लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर जिला अध्यक्ष सागर उरांव ने कहा कि 05 जून से 11 जून तक *एक पेड़ माँ के नाम* कार्यक्रम के तहत जिले के सभी मंडलों मे वृक्षारोपण का कार्य होना है ! बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। पेड़-पौधे न केवल हमें शुद्ध वायु प्रदान करते हैं, बल्कि जल संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान कार्यालय परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए नियमित रूप से वृक्षारोपण अभियान चलाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मुनेश्वर साहु, भूपन साहु, सत्यनारायण पटेल, संदीप प्रसाद, निर्मल गोयल, महेश चौधरी, रामस्वरूप सिंह, लक्ष्मीकांत बड़ाईक, प्राण गोविंद दत्ता ,हरिशंकर त्रिपाठी सूरज सिंह , उदय खेरवार निशा कुमारी ,लक्ष्मी देवी सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर पौधारोपण किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन पौधों की सुरक्षा एवं संरक्षण के संकल्प के साथ किया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देने के लिए वृक्षारोपण जैसे अभियान निरंतर चलाए जाने चाहिए।

राम भक्तों के लिए

आदिवासी अधिकारों से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन पर जोर, एनसीएसटी सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने की तीन जिलों के मामलों की सुनवाई

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जनसुनवाई में भूमि, शिक्षा एवं सामाजिक मामलों के समाधान हेतु दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश

गुमला : – गुमला जिला में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने शुक्रवार को गुमला परिषदन में गुमला, लोहरदगा एवं सिमडेगा जिलों से संबंधित मामलों की विस्तृत सुनवाई की। सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष प्रस्तुत विभिन्न शिकायतों एवं मामलों पर संबंधित विभागों, संस्थानों के अधिकारियों तथा शिकायतकर्ताओं की उपस्थिति में समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

डॉ. आशा लकड़ा ने बताया कि आयोग द्वारा तीनों जिलों से संबंधित लगभग 16 मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें भूमि विवाद, भूमि अधिग्रहण, शिक्षा, जाति प्रमाण पत्र एवं अन्य सामाजिक विषयों से जुड़े मामले प्रमुख रूप से शामिल थे। गुमला जिले से संबंधित 09 मामलों की सुनवाई कर उनका निष्पादन किया गया।

सुनवाई के दौरान भूमि हस्तांतरण एवं अधिग्रहण से जुड़े कई मामलों पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के मुआवजा संबंधी मामलों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि कई लंबित मामलों का निष्पादन किया जा चुका है तथा प्रभावितों को भुगतान प्राप्त हुआ है। वहीं भारतमाला परियोजना से प्रभावित ऐसे परिवार, जिनकी भूमि अधिग्रहित होने के बाद आजीविका के सीमित साधन रह गए हैं, उनके मामलों पर विशेष संज्ञान लेते हुए उपायुक्त को पुनः जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने तथा आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

शिक्षा विभाग से संबंधित एक मामले में भरनो प्रखंड के विद्यालय की शिक्षिका के साथ हुए उत्पीड़न एवं लंबित वेतन भुगतान की शिकायत की समीक्षा की गई। आयोग को अवगत कराया गया कि संबंधित मामले में आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की गई है तथा शिक्षिका का लंबित वेतन भुगतान भी सुनिश्चित किया गया है।

सिमडेगा जिले से संबंधित एक पारिवारिक भूमि बंटवारा विवाद की सुनवाई करते हुए आयोग ने पक्षकारों को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का सुझाव दिया। वहीं लोहरदगा जिले के एक पुराने भूमि विवाद से जुड़े मामले में आवश्यक अभिलेखों एवं वंशावली संबंधी तथ्यों के परीक्षण के उपरांत अगली सुनवाई निर्धारित की गई।

बैठक के दौरान गुमला जिले में जनजातीय समाज की पारंपरिक सामाजिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का विषय भी प्रमुखता से उठा। इस पर डॉ. आशा लकड़ा ने उपायुक्त को निर्देश दिया कि जनजातीय समुदाय की पारंपरिक पड़हा व्यवस्था तथा ग्राम स्तरीय सामाजिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक पहल की जाए। उन्होंने पाहन, पुजार, कोटवार एवं अन्य पारंपरिक पदों के चिह्नीकरण तथा पंचायत व्यवस्था के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में कार्य करने का सुझाव दिया। साथ ही इस संबंध में विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर आयोग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े मामलों का समयबद्ध निष्पादन, उनके अधिकारों का संरक्षण तथा विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी मामलों में संवेदनशीलता एवं गंभीरता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

मौके पर उपायुक्त गुमला दिलेश्वर महत्तो,पुलिस अधीक्षक गुमला हरिश बिन ज़मां, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, अपर समाहर्ता राजीव नीरज, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी महेश कुमार, डीसीएलआर राजीव कुमार, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, विभागीय पदाधिकारी एवं संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम से असिस्टेंट डायरेक्टर प्रदीप कुमार दास, इन्वेस्टिगेटर राहुल, इन्वेस्टिगेटर रिया, सलाहकार राहुल यादव, निजी सचिव कुशेश्वर साहू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

राम भक्तों के लिए

विश्व पर्यावरण दिवस पर लायंस क्लब गुमला फैमिली की अनूठी पहल, किचन गार्डन अभियान का हुआ शुभारंभ

0

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमलाः- गुमला जिला मुख्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लायंस क्लब गुमला फैमिली द्वारा पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से “किचन गार्डन अभियान” की शुरुआत की गई। इस अवसर पर क्लब के सदस्यों ने अपने-अपने घरों के गमलों, क्यारियों एवं घरेलू बगीचों में विभिन्न प्रकार की सब्जियों के पौधे लगाकर समाज को पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। विश्वभर में बढ़ते प्रदूषण, घटते हरित क्षेत्र, जलवायु परिवर्तन और रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को देखते हुए इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व और भी बढ़ गया है। इसी सोच के साथ लायंस क्लब गुमला फैमिली ने यह निर्णय लिया कि केवल पौधारोपण तक सीमित न रहकर ऐसी पहल की जाए जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों के दैनिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव ला सके। इसी उद्देश्य से किचन गार्डन अभियान की शुरुआत की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ क्लब के सदस्यों द्वारा अपने क्लब के सदस्यों ने अपने अपने आवासीय परिसर स्थित गार्डन में पौधारोपण किया तथा अन्य सदस्यों को भी इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। क्लब के सभी सक्रिय सदस्यों ने इस अभियान में भाग लेते हुए पौधे लगाए और पर्यावरण संरक्षण के इस संदेश को अपने परिवार एवं समाज तक पहुंचाने का कार्य किया। इस अभियान के अंतर्गत सदस्यों ने टमाटर, मिर्च, बैंगन, धनिया, भिंडी तथा अन्य उपयोगी सब्जियों के पौधे लगाए। सदस्यों ने बताया कि किचन गार्डन न केवल घरों की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि परिवार को ताजी, पौष्टिक एवं रसायनमुक्त सब्जियां भी उपलब्ध कराता है और पैसे भी बचाता हैं और समय में जब बाजार में मिलने वाली अधिकांश सब्जियां रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के उपयोग से तैयार होती हैं, ऐसे में घर पर उगाई गई सब्जियां स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायक होती हैं। इस अवसर पर क्लब के अध्यक्ष ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या बड़े अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति अपने घर से कर सकता है। यदि प्रत्येक परिवार अपने घर, छत, बालकनी या आंगन में कुछ पौधे लगाए और एक छोटा किचन गार्डन विकसित करे तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परिवार के स्वास्थ्य में भी सकारात्मक सुधार होगा साथ ही साथ आवश्यकता इस बातकि हैं की हम केवल पौधे लगाने की नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षित करने और हरित जीवनशैली को अपनाने की है। क्लब की ओर से यह भी संदेश दिया और उक्त अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और लोगों से उक्त पर्यावरण संरक्षण के इस संदेश को अपने परिवार एवं समाज तक पहुंचाने इस अभियान के अंतर्गत सदस्यों ने टमाटर, मिर्च, बैंगन, धनिया, भिंडी तथा अन्य उपयोगी सब्जियों के पौधे लगाए। सदस्यों ने बताया कि किचन गार्डन न केवल घरों की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि परिवार को ताजी, पौष्टिक एवं रसायनमुक्त सब्जियां भी उपलब्ध कराता है। आज के समय में जब बाजार में मिलने वाली अधिकांश सब्जियां रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के उपयोग से तैयार होती हैं, ऐसे में घर पर उगाई गई सब्जियां स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायक होती हैं। इस अवसर पर क्लब के अध्यक्ष लायन शिशिर गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या बड़े अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति अपने घर से कर सकता है। यदि प्रत्येक परिवार अपने घर, छत, बालकनी या आंगन में कुछ पौधे लगाए और एक छोटा किचन गार्डन विकसित करे, तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परिवार के स्वास्थ्य में भी सकारात्मक सुधार होगा। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल पौधे लगाने की नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षित करने और हरित जीवनशैली को अपनाने की है।

क्लब की ओर से यह भी संदेश दिया गया की
पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक

आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी

जिम्मेदारियों को समझने और उन्हें निभाने का

संकल्प लेने का अवसर है। बढ़ते तापमान,

अनियमित वर्षा, जल संकट और प्रदूषण जैसी

समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब

समाज का प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण

के लिए सक्रिय भूमिका निभाए। लायंस क्लब

गुमला फैमिली द्वारा शुरू किया गया यह

किचन गार्डन अभियान पर्यावरण संरक्षण के

साथ-साथ स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा

में एक सार्थक पहल माना जा रहा है। क्लब ने

आने वाले दिनों में भी इस प्रकार के जागरूकता

कार्यक्रमों को जारी रखने का संकल्प लिया है

ताकि अधिक से अधिक लोग हरियाली बढ़ाने

और प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रेरित हो सकें।

कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने पर्यावरण

संरक्षण, पौधारोपण एवं हरित जीवनशैली को

बढ़ावा देने का संकल्प लिया तथा समाज के

सभी वर्गों से इस अभियान में भागीदारी निभाने

की अपील की। क्लब ने लोगों से अपने घरों

में किचन गार्डन विकसित करने, अधिक से

अधिक पौधे लगाने तथा प्रकृति के संरक्षण में

योगदान देने का आह्वान किया।

राम भक्तों के लिए

सिसई उप डाकघर का जर्जर भवन किसी भी वक्त धराशाई हो सकता है और बड़ी घटनाएं घट सकती है

0

जान जोखिम में डालकर,डर के साए में कार्य करने को मजबूर हैं, सिसई उप डाकघर कर्मी

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित सिसई उप डाकघर की जर्जर भवन कि खतरनाक स्थिति हो चुकी है, डाकतार विभाग की अकर्मण्यता एंव कार्य शिथिलता के कारण पिछले दिन
हल्की आंधी-बारिश में सिसई डाकघर परिसर में स्थित एक गुलमोहर का पेड़ उक्त डाकघर भवन के एक हिस्से पर गिर गया था, इससे न सिर्फ डाकघर का एक हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, बल्कि उसके चपेट में आने से चार लोग गंभीर रूप से घायल भी हो गए थें ,अगर समय रहते उक्त जर्जर गुलमोहर पेड़ को कटवा दिया जाता तो यह घटना नहीं घटती, फलस्वरूप उक्त हादसे के बाद से अब भी उप डाकघर और डाकतार विभाग से संबंधित कार्यों से आने वाले उपभोक्ताओं में दहशत का माहौल काफी बढ़ गया है, जर्जर उप डाकघर भवन में अपने कार्य से आने वाले लोगों में खौफ का माहौल व्याप्त है, बरसात के मौसम आते ही और समय-समय पर आंधी पानी आते ही उस उप डाकघर के अंदर कार्य करवाने वाले लोगो के बीच अपरा तफरी का माहौल पैदा हो जाता है और अंधड पानी शुरू होते ही, जगह-जगह से उप डाकघर के छत से इस कदर पानी टपकना शुरू हो जाता है मानो कोई फुहारा बह रहा हो और उक्त पानी से उप डाकघर और डाकतार विभाग से संबंधित सभी सरकारी रजिस्टर, कंप्यूटर, लैपटॉप और सालों पुरानी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को बचाने के लिए कर्मचारी बरसात के मौसम प्रारंभ होते ही हर साल उक्त डाकघर के छत पर बड़ा सा तिरपाल बांधकर उसी के नीचे बैठकर सभी कार्यों का निपटारा करने के लिए मजबूर हो जाते हैं , सिसई प्रखंड मुख्यालय के एकमात्र उप डाकघर में प्रत्येक दिन प्रखंड क्षेत्रों के विभिन्न ग्रामीण इलाकों से करीब 400 से 500 संबंधित उपभोक्ताओं का आना-जाना होता है। इनमें बड़ी संख्या में बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं, जो अपनी गाढ़ी कमाई जमा करने या वृद्धावस्था पेंशन लेने उक्त डाकघर में आते हैं। ग्राहकों का कहना है कि डाकघर की दहलीज पर कदम रखते ही लोगों को डर सताने लगता है और डाकघर के अंदर घुसते ही नजरें सीधे उक्त डाकघर के जर्जर छत पर टिक जाती हैं,की कहीं कोई डाकघर के छत का टुकड़ा ऊपर से न गिर जाए।
सिसई उप डाकघर के पोस्टमास्टर, जितेश्वर प्रसाद साहू ने बताया की हम कुल 15 डाककुर्मी डाकघर के छत के नीचे बैठकर काम निपटाते हैं। सिसई उप डाकघर में रोजाना ग्रामीण इलाकों से करीब 400 से 500 ग्राहकों का आना-जाना होता है। इनमें बड़ी संख्या में बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं, जो अपनी गाढ़ी कमाई जमा करने या वृद्धावस्था पेंशन लेने आते हैं। ग्राहकों का कहना है कि डाकघर की दहलीज पर कदम रखते ही डर सताने लगता है। अंदर घुसते ही नजरें सीधे जर्जर छत पर टिक जाती हैं कि कहीं कोई टुकड़ा ऊपर से न गिर जाए।
उन्होंने बताया की आजादी के बाद, वर्ष 1970 में इसे एस्बेस्टस, ईंट और चहारदीवारी का नया रूप दिया गया। लेकिन रखरखाव के अभाव में अब यह इमारत मलबे में तब्दील होने की कगार पर है। चहारदीवारी हर तरफ से टूट चुकी है। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं और छत से कंक्रीट व प्लास्टर का भारी हिस्सा कब भरभरा कर सिर पर गिर जाए, कोई नहीं जानता।
यह स्थिति डाक विभाग और स्थानीय प्रशासन के दावों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ी करती है। विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या जल्द ही इन कर्मियों और ग्रामीणों को इस डेथ ट्रैप से मुक्ति मिलेगी, यह देखने वाली बात होगी

राम भक्तों के लिए

200 आदिवासी संगठनों ने कहा-आदिवासी वनवासी नहीं हैं…भाजपा सरना-सनातन में घालमेल करने से बाज आए…! 

0

बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर उलगुलान को याद कर जन कार्यक्रम करने की अपील

बिरसा की विरासत को आरएसएस, जनजाति सुरक्षा मंच और वनवासी कल्याण आश्रम जैसे मनुवादी संगठनों से बचाने के संकल्प का आह्रवान 

रांची : 200 से अधिक जाने-माने आदिवासी, मूलवासी, जन संगठन के प्रतिनिधि, पारंपरिक स्वशासन प्रतिनिधि, शिक्षाविद व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को संयुक्त वक्तव्य जारी करके आदिवासी समेत सभी झारखंडियों से धरती आबा बिरसा मुंडा के शहादत दिवस 9 जून को आदिवासी संस्कृति, संघर्ष और उलगुलान को याद करते हुए राज्य के कोने-कोने में जन कार्यक्रम का आयोजन करने की अपील की. 

जारी विज्ञप्ति में 24 मई 2026 को आरएसएस से जुड़े संगठन जनजाति सुरक्षा मंच ने दिल्ली में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम को याद दिलाया गया है। इस कार्यक्रम में वक्ताओं, खासकर अमित शाह ने आदिवासियों को बार-बार वनवासी बोलकर संबोधित किया। इस समागम में एक बार भी बिरसा मुंडा के जल, जंगल, जमीन के संघर्ष और दिकुओं के शोषण के विरुद्ध लड़ाई को याद नहीं किया गया।

दरअसल, आरएसएस व इससे जुड़े संगठन कभी भी आदिवासी शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं क्योंकि वे आदिवसियों को हिन्दू वर्ण व्यवस्था में आखरी पायदान में खड़े वनवासी के रूप में देखते हैं। ये संगठन एक ओर “सरना-सनातन एक” बोलकर आदिवासियों के स्वतंत्र अस्तित्व को खत्म करने में लगे हैं।

वहीं दूसरी ओर ईसाई आदिवासियों की आदिवासी सूची से डीलिस्टिंग की मांग कर आदिवासियों की सामूहिकता को तोड़ने में लगे हैं। आदिवासियों को वनवासी बनाने, उनकी सामूहिकता तोड़ने और उनके जल, जंगल, जमीन को लूटने के लिए; धरती आबा के विरासत को खत्म करने के लिए आरएसएस उनके नाम का इस्तेमाल कर रही है।

रघुवर सरकार ने तो CNT को ही खत्म करने की कोशिश की थी

कहा गया है कि बिरसा मुंडा के जल, जंगल, जमीन के लिए उलगुलान एवं अंग्रेजों व हर प्रकार के शोषणकारी दिकुओं के विरुद्ध संघर्ष ने झारखंड की नींव रखी थी। लेकिन संघ इस इतिहास को बदलने में लगा हुआ है। भाजपा की रघुवर सरकार ने तो उलगुलान से निकले CNT कानून को भी खत्म करने की कोशिश की थी। जिस मुंडा दिसुम में बिरसा मुंडा ने उलगुलान का नारा दिया था, वहीं रघुवर सरकार ने हजारों आदिवासियों को देशद्रोही घोषित कर दिया था।

मोदी सरकार आदिवासियों की स्वायत्तता और जल, जंगल, जमीन के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों को खत्म करने में लगी हुई है। इन मनुवादी संगठनों द्वारा तो आदिवासियों के स्वतंत्र धार्मिक व्यवस्था को औपचारिक मान्यता और जनगणना में अलग कोड के मांगों का भी विरोध किया जाता रहा है।

संयुक्त विज्ञप्ति में प्रमुख सामाजिक-राजनैतिक नेता पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व विधायक बहादुर उरांव व मंगल सिंह बोबोंगा, ज्योत्सना केरकेट्टा, देवकीनंदन बेदिया, कुमारचंद्र मार्डी, डेमका सोय, रमेश जराई, रजनी मुर्मू, सुखनाथ लोहरा, दुर्गवाती उरांव, अलोका कुजूर, बिंसाय मुंडा, हरी कुमार भगत, कालीचरण बिरुवा, दिनेश मुर्मू, साधु हो, जयकिशन गोडसोरा, वासवी किड़ो आदि एवं जाने-माने शिक्षाविद व सांस्कृतिक अगुआ जैसे जसिन्ता केरकेट्टा, जोसेफ बाड़ा, अनुज लुगुन व नीतीश खलखो शामिल हैं।

इसके अलावा अखिल भारतीय आदिवासी विकास समिति, गाँव गणराज्य परिषद, सरना सगोम समिति, खूंटी, आदिवासी संघर्ष मोर्चा, आदिवासी मूलवासी अधिकार मंच, बोकारो, भारत जकत माझी परगना महल रामगढ़, पारंपरिक ग्राम सभा समन्वय समिति, खूंटी, आदिवासी अधिकार मंच, मानकी मुंडा स्वशासन व्यवस्था, पश्चिमी सिंहभूम, आदिवासी हो समाज सेवानिवृत संगठन, चाईबासा, आदिवासी आंदोलनकारी मोर्चा,  आदिवासी समन्वय समिति, बिरसा सेना, आदिवासी एकता मंच, मुंडा आदिवासी समाज महासभा, संयुक्त ग्राम सभा, युवा झुमुर, झारखंड जनाधिकार महासभा, जोहार, ओमोन महिला संगठन, झारखंड जनतान्त्रिक महासभा समेत अनेक संगठनों के प्रतिनिधि हैं। 

राम भक्तों के लिए

पटना में कोचिंग सेंटर विवाद ने पकड़ा तूल, बैनर फाड़ने का CCTV फुटेज आया सामने

0

यह आपके समाचार पोर्टल के लिए 300 शब्दों में पुनर्लिखित खबर है:

पटना में कोचिंग सेंटर विवाद ने पकड़ा तूल, बैनर फाड़ने का CCTV फुटेज आया सामने

पटना में कोचिंग संस्थानों के बीच चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच एक नया सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें कुछ युवक ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रौशन आनंद का बैनर फाड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। फुटेज में युवकों के चेहरे भी साफ नजर आ रहे हैं, जिसके बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। आरोप लगाया जा रहा है कि बैनर फाड़ने वाले युवक खान सर के समर्थक हैं, हालांकि पुलिस अभी इस दावे की जांच कर रही है।

जानकारी के अनुसार, कदमकुआं इलाके में लगे ज्ञान बिंदु कोचिंग के बैनर को कुछ लोगों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। बताया जा रहा है कि इसी घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। इसके बाद खान ग्लोबल स्टडीज कैंपस में ईंट-पत्थरबाजी, होर्डिंग तोड़फोड़ और सुरक्षा गार्ड के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आईं। इस हमले में एक सुरक्षा गार्ड घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद को गिरफ्तार कर लिया। वहीं दूसरी ओर, खान सर उर्फ फैजल खान के खिलाफ भी कदमकुआं थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एफआईआर में सुरक्षा गार्डों के बयान का भी उल्लेख किया गया है। गार्डों ने दावा किया है कि घटना के दौरान फैजल खान ने कथित रूप से गोली चलाने के लिए कहा था। पुलिस ने अवैध तरीके से दहशत फैलाने और फायरिंग करवाने के आरोपों की भी जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस खान सर की तलाश में जुटी हुई है और पूरे मामले की गहन जांच जारी है।

Disclaimer: यह खबर उपलब्ध आरोपों और पुलिस कार्रवाई पर आधारित है। मामले की जांच जारी है और सभी आरोप अदालत में सिद्ध होना बाकी हैं।

राम भक्तों के लिए
IIT - Polo Tshirt - Premium