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Thursday, July 2, 2026
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Is your Blue tick missing from Twitter.

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Hello everyone! Many of us may be facing issue on disappearance of the blue tick on twitter account.

As many of you may know, the blue tick on Twitter is a feature that indicates that a user’s account is verified. This means that the user is a public figure, a business, or an organization that has been confirmed by Twitter to be authentic. The blue tick is an important feature on Twitter because it helps to ensure that users can trust the information they see on the platform.

However, over the past few weeks, many Twitter users have noticed that the blue tick has disappeared from their accounts. This has caused a lot of confusion and concern among users, as the blue tick was previously seen as a reliable indicator of an account’s authenticity.

There are a few reasons why the blue tick may have disappeared. One reason is that Twitter has been implementing new measures to crack down on fake accounts and spam on the platform. As part of these measures, Twitter has been removing the blue tick from some accounts, even if they are verified.

Twitter has been cracking down on fake accounts and spam in response to concerns from users about the authenticity of the information they see on the platform. Fake accounts and spam can be harmful because they can spread misinformation and manipulate public opinion. Twitter has been taking a number of steps to address these issues, including implementing new measures to verify the authenticity of accounts and removing fake accounts from the platform.

Another reason for the disappearance of the blue tick is that Twitter has been experiencing some technical difficulties. In recent weeks, the platform has experienced widespread outages and other issues, which have caused the blue tick to disappear for some users. Twitter has been working to address these issues and to ensure that the platform is stable and reliable for users.

One of the other reason for disappearance of blue tick is that now onwards user have to pay monthly charges for bluetick , all the existing users who were using free service for bluetick has been remove and now they have to pay twitter for bluetick.

Regardless of the reason, the disappearance of the blue tick on Twitter has caused a lot of confusion and concern among users. Many users are worried that they may be targeted by spam or fake accounts, or that their accounts may be at risk of being suspended.

As a Twitter user, We understand the importance of the blue tick on Twitter. It helps to ensure that users can trust the information they see on the platform, and it helps to protect users from fake accounts and spam.

However, We also understand that Twitter is a complex platform with a lot of moving parts. As such, we think it is important for Twitter to be transparent about any changes they make to the platform, and to provide users with clear explanations of why these changes are necessary.

In addition, We think it is important for Twitter to provide users with more information about the blue tick and how it works. While the blue tick is an important feature on the platform, many users may not understand what it means or how it is determined. Providing users with more information about the blue tick could help to increase trust and understanding on the platform.

Overall, we hope that this article has helped to clarify the situation regarding the disappearance of the blue tick on Twitter. As always, if you have any questions or concerns, please do not hesitate to reach out Twitter support help desk.

राम भक्तों के लिए

बाबूलाल जी अपनी गलत नीतियों के कारण विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता नहीं बन पाये, वे इधर-उधर की नहीं झारखंड के जटिल मुद्दों पर बात करें: बंधु तिर्की

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रांची:  पूर्व मंत्री और झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा है कि झारखण्ड एवं यहां के लोगों से जुड़े जमीनी और आधारभूत मुद्दों से भटका कर कम महत्व के विषयों की ओर जब-तब ध्यान खींचने के साथ ही आम जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने से बचना भारतीय जनता पार्टी और इसके नेताओं की पहचान है. इसके कारण ही पिछले 22 वर्षों में झारखण्ड को काफी  खमियाजा भुगतना पड़ा है. श्री तिर्की ने कहा कि बाबूलाल मरांडी, भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल के नेता जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन हैं और वह केवल अपनी कमी और गलत नीतियों के कारण ही विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता नहीं बन पाये हैं. परन्तु जमीनी मुद्दों से भटकाने की उनकी नीति झारखण्ड के लिए आत्मघाती साबित हो रही है.

भाजपाई सरना धर्म कोड और 1932 के खतियान जैसे मामलों पर अपने विचार क्यों नहीं रखते…?

श्री तिर्की ने कहा कि शराब से कम या ज्यादा राजस्व की प्राप्ति भी एक महत्वपूर्ण विषय है. यह नियमित प्रक्रिया है कि किसी वित्तीय वर्ष में या फिर किसी सरकार में शराब से कम या ज़्यादा राजस्व संग्रहण हो. लेकिन भाजपा नेता, सरना धर्म कोड, 1932 के खातियान, 27 प्रतिशत आरक्षण आदि मामलों पर अपने विचार क्यों नहीं बताते कि उनकी पार्टी इस मामले पर क्या विचार रखती है? श्री तिर्की ने कहा कि शराब से राजस्व संग्रहण से ज्यादा जरूरी यह है कि झारखण्ड और झारखण्ड की ज़मीनी समस्याओं का समाधान और इसकी पहचान दिलाना,  क्योंकि झारखण्ड के आदिवासियों और मूलवासियों के साथ ही झारखण्ड के लोगों से जुड़े आधारभूत मुद्दों के समाधान का मामला आम जनमानस की भावना से पूरी तरीके से जुड़ा है.

‘वनाधिकार कानून जैसे मुद्दों पर मरांडी अपनी स्थिति स्पष्ट करें’

उन्होंने कहा कि सरना धर्म कोड को लागू करने, 1932 के खतियान का मामला, 27 प्रतिशत आरक्षण, पेशा कानून को सख़्ती से लागू करने, पाँचवी अनुसूची को झारखण्ड में लागू करने, वनाधिकार कानून जैसे मुद्दों पर भाजपा के नेताओं को अपनी स्थिति पूरी तरीके से स्पष्ट करनी चाहिये और जबतक वे ऐसा नहीं करते तबतक यही माना जायेगा कि उनके द्वारा कही जा रही बातें कुल मिलाकर झारखण्ड और यहां के आम जनमानस की भावना के विरुद्ध है. श्री तिर्की ने कहा कि सत्तापक्ष और विपक्ष में चाहे कोई भी हो, लेकिन सभी नेताओं से जिम्मेदारी की आशा की जाती है कि वे झारखण्ड के सभी लोगों के हित में काम करें और विशेष रूप से उन आदिवासियों एवं मूल निवासियों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाये.

राम भक्तों के लिए

गिरिडीह में ईद के मद्देनजर विधि-व्यवस्था पर डीसी-एसपी ने विशेष सतर्कता बरतने का दिया निर्देश,लोगों से सौहार्दपूर्ण माहौल में ईद मनाने का आग्रह

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गिरिडीह : ईद-उल-फितर (ईद) के मद्देनजर विधि-व्यवस्था के संधारण के लिए उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार इस वर्ष ईद का त्योहार 22 अप्रैल को चाँद के दृष्टिगोचर होने के अनुसार मनाया जाएगा। ईद को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने के लिए जिले में प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारियों/पुलिस बल को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। सभी प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारी/पुलिस पदाधिकारी विशेषकर मस्जिद / ईदगाह एवं पूजा घरों पर कड़ी नजर रखेंगे, ताकि ईद की नमाज के समय विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न नहीं होने पाये। प्रतिनियुक्त पुलिस पदाधिकारी अपने-अपने प्रतिनियुक्ति स्थान पर पहुँचने के पश्चात दोनों सम्प्रदाय के प्रमुख एवं गणमान्य व्यक्तियों से सम्पर्क स्थापित कर सद्भावना, शान्ति व्यवस्था एवं साम्प्रदायिक सौहार्द कायम रखने का हर संभव प्रयास करेंगे।

जिला एवं अनुमंडल स्तर नियंत्रण कक्ष का गठन किया गया

विधि-व्यवस्था को लेकर ईद के अवसर पर जिला स्तर एवं अनुमण्डल स्तर पर नियंत्रण कक्ष का गठन किया गया है, जो शनिवार के अपराह्न से रविवार के अपराहन तक कार्यरत रहेगा। जिला नियंत्रण कक्षा में दण्डाधिकारियों की समय सारणी अनुमण्डल पदाधिकारी द्वारा अलग से निर्गत की जायेगी। जिला नियंत्रण कक्ष में आलोक कुमार, निदेशक, लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन, डी.आर.डी.ए. तथा डीएसपी संजय कुमार राणा रहेंगे। जिला नियंत्रण कक्ष के वरीय दण्डाधिकारी द्वारा सभी अनुमण्डलीय नियंत्रण कक्ष से खैरियत प्रतिवेदन प्राप्त कर जिला का समेकित खैरियत प्रतिवेदन उपायुक्त, गिरिडीह एवं पुलिस अधीक्षक, गिरिडीह को प्रतिदिन संध्या 06:00 बजे तक उपलब्ध कराया जायेगा। विधि व्यवस्था बनाये रखने के लिए सभी संवेदनशील स्थानों पर दण्डाधिकारी/पुलिस सशस्त्र बल एवं लाठी पार्टी की प्रतिनियुक्ति की गयी है। संबंधित अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी अपने-अपने अधीनस्थ थाने में गतिशील रहकर विधि-व्यवस्था संधारण करेंगे. अगर कहीं कोई अप्रिय घटना घटती है तो उस स्थान पर प्रतिनियुक्ति अगले आदेश तक जारी रहेगी। उक्त तिथि तक प्रतिदिन खैरियत प्रतिवेदन संध्या 5.00 बजे तक जिला नियंत्रण कक्ष में भेजना सुनिश्चित करेंगे।

पुलिस-प्रशासन को हर गतिविधियों पर पैनी नजर रखने का निर्देश

सिविल सर्जन को निर्देश दिया गया कि ईद के अवसर पर सभी रेफरल अस्पताल / सभी प्रखण्ड स्तरीय स्वास्थ्य केन्द्र / स्वास्थ्य उप केन्द्र एवं जिला स्थित सदर अस्पताल में डाक्टर, नर्स, एवं अन्य चिकित्सीय कर्मी की उपलब्धतता सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही यथोचित मात्रा में दवा भी संबंधित अस्पतालों में उपलब्ध करायेंगे तथा जिला नियंत्रण कक्ष एवं अनुमण्डल स्तरीय नियंत्रण कक्ष में आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्बूलेंस की व्यवस्था करेंगे। जिन दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति गिरिडीह शहर में गश्ती कार्य एवं जिला नियंत्रण कक्ष में सुरक्षित दण्डाधिकारी के रूप में की गयी है, उन्हें निर्देश दिया गया कि वे समय पर जिला नियंत्रण कक्ष में अपना योगदान देंगे। किसी तरह से विधि व्यवस्था भंग होने की सूचना प्राप्त होने पर स्वयं स्तर से त्वरित कार्रवाई करते हुए तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष एवं वरीय पदाधिकारियों को सूचित करेंगे। इसके अलावा सभी अनुमण्डल पदाधिकारी एवं अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के वरीय प्रभार में रहेंगे तथा विधि व्यवस्था संधारणार्थं जिले की गतिविधियों पर पैनी नजर रखेंगे।

राम भक्तों के लिए

गिरिडीह में मना राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस: कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल में CS ने कृमि नियंत्रण की दवाई खिलाई

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गिरिडीह : कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में गुरुवार को सिविल सर्जन व अन्य अतिथियों ने राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का उद्घाटन किया गया। इस दौरान 1-19 वर्ष के सभी बच्चों को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। मौके पर उपस्थित सिविल सर्जन ने कहा कि स्कूलों और आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 1-19 वर्ष के सभी बच्चों को कृमि नियंत्रण की दवाई खिलाई जा रही है।

CS ने सभी से सहयोग की अपील की

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी को सहयोग की अपील की है। अधिक से अधिक बच्चों को दवा को सेवन कराया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की आंतों में परजीवी होने के कारण वह उनके खराब शारीरिक और मानसिक विकास, एनीमिया और कुपोषण की स्थिति को पैदा करते हैं जो उन्हें लंबे समय की परेशानियों से ग्रसित कर सकता है। जिसकी रोकथाम और निपटारे के लिए कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है।

25 अप्रैल को कृमि मुक्ति दिवस पर दवा खिलाई जायेगी

सिविल सर्जन ने कहा कि स्कूल न जाने वाले बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों में दवाई खिलाई जाएगी। जो बच्चे राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर किसी कारण से दवा नहीं खा पाते हैं, उन्हें 25 अप्रैल कृमि मुक्ति दिवस को दवाई खिलाई जायेगी। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई बच्चा छूट न जाए। एल्बेंडाजोल देने के साथ-साथ साफ-सफाई, शौचालयों के उपयोग, जूते/चप्पल पहनने, हाथ धोने आदि के संदर्भ में व्यवहार में बदलाव भी पुन: संक्रमण की घटनाओं को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है। मौके पर सिविल सर्जन, जिला शिक्षा अधीक्षक, डीआरसीएचओ, डीपीएम, एनएचएम, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मी उपस्थित थे।  

राम भक्तों के लिए

गिरिडीह डीसी ने तिसरी प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय का निरीक्षण किया,अधिकारियों को दिये कई निर्देश

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गिरिडीह:  जिले के उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने गुरुवार को तिसरी प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय का निरीक्षण किया। डीसी ने प्रखंड और अंचल कार्यालय में किए जानेवाले कार्यों की जांच की और पदाधिकारियों-कर्मचारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। निरीक्षण के दौरान डीसी ने अलग-अलग विभागों को भंडार पंजी, प्राप्त पत्रों की पंजी, निर्गत पंजी, जन आवेदन पत्रों की पंजी, रोकड़ पंजी, लॉग बुक, अग्रिम पंजी, भू-लगान पंजी, दाखिल खारिज, अंकेक्षण पंजी, नीलाम पत्र वाद, प्रधान सहायक का हैंड नोट बुक व भूमि हस्तांतरण, अतिक्रमण, अवैध जमाबंदी, म्यूटेशन, आगत-निर्गत पंजी, नीलाम पत्रवाद, लगान रसीद, मनरेगा व अन्य विकास योजनाओं का निरीक्षण किया।

डीसी ने म्यूटेशन के लम्बित मामले को जल्द पूरा करने का दिया निर्देश

निरीक्षण के क्रम में डीसी ने मॉडल विद्यालय तिसरी का अवलोकन कर वहां संचालित स्मार्ट क्लास के तहत एलईडी टीवी, पठन-पाठन व अन्य सामग्रियों की जानकारी ली तथा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया। दहुआताड़ व खिखुरी पंचायत में कुसुम योजना के तहत संचालित सोलर प्लेट तथा लगाए गए आम बागवानी में इंटर क्रॉपिंग का जायजा लिया। इसके अलावा उन्होंने अंचल में म्यूटेशन के लम्बित मामले को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश संबंधित अंचलाधिकारी को दिया। डीसी ने प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचलाधिकारी से विकास योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिया।

डीसी ने जनता दरबार लगाकर आमजनों की शिकायतें भी सुनीं

प्रखंड सह अंचल कार्यालय तिसरी के निरीक्षण के दौरान डीसी ने पदाधिकारियों-कर्मियों की उपस्थिति पंजी की भी जांच की। उपस्थिति पंजी की जांच करते हुए डीसी ने सभी को स-समय कार्यालय आकर कार्य निष्पादन का निर्देश दिया। मौके पर कई लोगों ने अपनी शिकायतें डीसी के समक्ष रखी। लोगों की शिकायतों को गंभीरतापूर्वक सुनते हुए डीसी ने संबंधित पदाधिकारियों को निष्पादन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डीसी ने वहां जनता दरबार लगाकर आमजनों की शिकायतों को सुना तथा त्वरित समाधान को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया।

राम भक्तों के लिए

मधुकम के जतरा टांड में स्व. कोड़े तिर्की की प्रतिमा की स्थापना का लिया गया निर्णय,बंधु तिर्की ने उनके योगदान की सराहना की

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रांची : राजधानी के मधुकम स्थित जतरा टांड में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें स्व. कोड़े तिर्की स्मारक समिति का गठन किया गया. बैठक में अपने विचार व्यक्त करते हुए पूर्व मंत्री और झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा कि पूरे समाज, विशेष रूप से आदिवासियों एवं मूलवासियों के विकास में स्व. कोड़े तिर्की का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और हम हमेशा से उनके विचारों के प्रति समर्पित रहे हैं और रहेंगे. साथ ही आम जन के प्रति उनके समर्पण को हमेशा याद रखेंगे.

स्व.कोड़े तिर्की स्मारक समिति का गठन

बैठक में स्व. कोड़े तिर्की स्मारक समिति का गठन किया गया, जिसमें पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की एवं शशिकांत तिर्की को संरक्षक बनाया गया, जबकि महादेव टोप्पो को अध्यक्ष, बिन्दुल वर्मा को महासचिव, ननकू तिर्की को सचिव और मंटू वर्मा को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी. इसके अलावा सुजीत वर्मा को प्रवक्ता बनाया गया. बैठक में वीरू तिर्की, ओमप्रकाश चौधरी, बिगल तिर्की, दीपू सिन्हा, सोमरा तिर्की, राजेश टोप्पो, दिनेश केरकेट्टा,संतोष सोनी और अजय लकरा को कार्यकारिणी सदस्य की जिम्मेदारी दी गयी.

28 मई को स्व.कोड़े की प्रतिमा स्थापित की जायेगी

बैठक में निर्णय लिया गया कि आगामी 28 मई को स्व. कोड़े तिर्की की प्रतिमा मधुकम जतरा टांड में स्थापित की जायेगी. बैठक में शिवा कच्छप, कुंदन वर्मा, प्रभात रंजन, रिंकू गुप्ता, संतोष गुप्ता, गोपी तिर्की, शिव कुमार भगत, सुजीत तिर्की, समेल टोप्पो एवं दिनेश तिर्की को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया. बैठक की अध्यक्षता महादेव टोप्पो ने की जबकि इसका संचालन राजेश टोप्पो ने की.

राम भक्तों के लिए

पारसनाथ पर्वत जंगल में लगी है आग: डुमरी SDM ने आग पर काबू पाने के लिए ज़रूरी कदम उठाने का लिया निर्णय

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गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित जैन समाज एंव आदिवासी समाज का प्रमुख धार्मिक स्थल पारसनाथ पर्वत के जंगल में इन दिनों आग लगी है, जिसे बुझाने के लिए स्थानीय प्रशासन ने फौरी कार्रवाई शुरू कर दी है, इस क्रम में गुरुवार को मधुबन स्थित गेस्ट हाउस में डुमरी एसडीएम प्रेमलता मुर्मू की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई। बैठक में पारसनाथ पर्वत क्षेत्र के जंगलों में लगी आग को जल्द से जल्द बुझाने को लेकर ज़रूरी कदम उठाने का निर्णय लिया गया। बैठक में वन विभाग के अधिकारी व मकर संक्रांति मेला समिति के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बाबत एसडीएम प्रेमलता मुर्मू ने कहा कि शुक्रवार से स्थानीय प्रशासन, वन विभाग के कर्मचारी और पारसनाथ संक्रांति मेला समिति के लोगों की ओर से आग बुझाने का काम शुरू किया जाएगा।

हजारीबाग डीएफओ ने भेजी गिरिडीह डीसी को आग बुझाने की कुछ तस्वीरें

बता दें कि गिरिडीह डीसी नमन प्रियेश लकड़ा को हजारीबाग डीएफओ वन्य जीव की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार कल रात दो दल पारसनाथ पहाड़ी पर रुके थे। और आज सुबह से ही वे लगातार आग बुझाने का काम कर रहे हैं। डीएफओ ने अपनी रिपोर्ट में गिरिडीह डीसी से कहा है हम उम्मीद करते हैं कि एक घंटे के भीतर हम एक स्थान पर आग पर काबू पा लेंगे। उसके बाद वे अन्य स्थानों की तलाश करेंगे।

(आज सुबह आग बुझाने की गतिविधियों की ली गई तस्वीरें)

300 लोगों की टोली आग बुझाने के संसाधनों से लैस होकर कूच करेंगे

बताया गया कि शुक्रवार की सुबह पांच बज़े लगभग 300 लोग पारसनाथ के जंगलों में आग बुझाने के संसाधनों से लैस होकर एक साथ आग बुझाने के लिए कूच करेंगे। अभियान में बगदाहा, विरनगड़ड़ा, सिंहपुर, पीपराडीह, कोठाटांड, बाघबेड़ा, कुरुआटांड, भोलाटांड़, जोभी सहित अन्य गांवों के लोग भी शामिल रहेंगे। सभी गांवों में एक टीम लीडर का गठन किया गया है। इनमें विजय सोरेन, जागो महतो, संदीप महतो, अशोक कुमार, बालेश्वर महतो व अन्य शामिल है। बैठक में एसडीएम प्रेमलता मुर्मु समेत एसडीपीओ मनोज कुमार, बीडीओ दिनेश कुमार, सीओ विनय प्रकाश तिग्गा, पीरटांड़ थाना प्रभारी दिलशान विरुआ, मधुबन थाना प्रभारी राजू मुंडा, सीआई राम विनोद सिंह, पूर्व प्रमुख सिंकदर हेंब्रम के अलावा वन विभाग के कई अधिकारी एवं मेला समिति के दर्जनों पदाधिकारी व कर्मी उपस्थित थे।

करीब पौने दो हजार एकड़ में आग की लपटों से घिरा है पारसनाथ पर्वत

इस मौके पर सिकन्दर प्रधान ने बताया कि 16 हजार 800 एकड में स्थित पारसनाथ पर्वत क्षेत्र तकरीबन पौने दो हजार एकड में इन दिनों आग की लपटें उठ रही हैं। उन्होंने कहा कि आग पर काबू पाने के लिए सभी एकमत है और अपेक्षित सहयोग कर रहे हैं. कहा कि वन विभाग एंव स्थानीय तीन सौ लोगों की टीम शुक्रवार को अहले सुबह पर्वत पर कूच करेगी और जबतक आग बुझेगी नहीं, नीचे नही आएंगे। इस दौरान टीम के सभी लोगों का खाने-पीने और जरूरी सामान जैन समाज, स्थानीय ग्रामीणों के सौजन्य से गांव के स्थानीय युवकों की टोली पर्वत पर मुहैया करायेगी।

राम भक्तों के लिए

मोदी सरनेम केस में अपील याचिका खारिज, राहुल गांधी जेल जाएं या फिर हाईकोर्ट में अपील करें…!

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सूरत : मोदी सरनेम केस में सूरत की सेशंस कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अपील खारिज कर दी. सूरत कोर्ट के फैसले से कांग्रेसियों में मायूसी छा गई. अब राहुल गांधी के पास दो ही सूरत है- राहुल गांधी हाईकोर्ट में अपील करें या जेल जाएं. क्योंकि अगर इस मामले में वे आगे अपील नहीं करते हैं तो, उन्हें जेल जाना होगा। पर उम्मीद है कि, राहुल गांधी हाईकोर्ट में अपील करेंगे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई थी। इस अहम केस में सूरत सेशंस कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुना दिया। मानहानि केस में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ राहुल की याचिका खारिज हो गई। सूरत सेशंस कोर्ट के जज ने सिर्फ एक शब्द में मामला खत्म कर दिया। जज ने कहा- डिसमिस।

राहुल गांधी को 23 मार्च को दोषी ठहराया गया था

मोदी सरनेम मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 23 मार्च को दोषी ठहराया गया था और उन्हें दो साल जेल की सजा सुनाई गई थी। जिसके तुरंत बाद उन्हें लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके बाद राहुल गांधी ने सूरत की ट्रायल कोर्ट के खिलाफ 3 अप्रैल को सूरत की सेशंस कोर्ट में एक मुख्य याचिका और दो आवेदन दायर किए थे। सूरत की सेशंस कोर्ट में राहुल गांधी की अपील पर तुरंत राहत मिल गई थी. बता दें कि भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। सजा सुनाने के 11 दिन बाद राहुल ने सूरत कोर्ट में जमानत और सजा माफी के लिए याचिका लगाई थी।

राम भक्तों के लिए

बिहार के इस गीतकार को नहीं जानने के जुर्म में हॉलीवुड के डाइरेक्टर डैनी बॉयल पर हो गया था केस

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23 जनवरी 2009 को भारत में एक फ़िल्म रिलीज हुई, नाम था “स्लमडॉग मिलियनेयर”। जी हाँ वही फ़िल्म जिसने एक नहीं बल्कि आठ-आठ ऑस्कर अवार्ड्स अपने नाम किए थे। डाइरेक्टर साहब का नाम था डैनी बॉयल, हॉलीवुड के सुप्रसिद्ध निर्देशक और फ़िल्म निर्माता, जो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। डाइरेक्टर साहब ने फ़िल्म के एक सीन में एक भजन का इस्तमाल किया था जिसके बोल थे..
“दर्शन दो घनश्याम नाथ, मोरी अँखिया प्यासी रे..
मन मंदिर की ज्योति जगा दो, घट घट बासी रे..
फ़िल्म स्लमडॉग के एक क्विज शो में एक सवाल के जबाब में इसे संत सूरदास की रचना बताया गया मतलब की डाइरेक्टर साहब ने भजन को सूरदास का बता दिया जबकि इस भजन के गीतकार थे बिहार के बेतिया जिले में जन्मे सुप्रसिद्ध कवि और गीतों के राजकुमार कहे जाने वाले ‘गोपाल सिंह नेपाली’। फिर क्या था नेपाली जी के सुपुत्र नकुल सिंह नेपाली को ये बात जैसे ही पता चली डाइरेक्टर साहब और फ़िल्म प्रोडक्शन पर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी।
आज गोपाल सिंह नेपाली जी की पुण्यतिथि है तो चलिए आपको थोड़ा विस्तार से बताते हैं कि कौन थे गोपाल सिंह नेपाली।
बिहार के बेतिया जिले के कालीबाग दरबार के नेपाली महल में 11 अगस्त 1911 को जन्म हुआ गोपाल सिंह नेपाली का जिनका मूल नाम था गोपाल बहादुर सिंह, नेपाली नाम इनके नाम के साथ इसलिए जुड़ा क्योंकि बाप-दादा थे नेपाल से। पिता फौज में और दादा बेतिया के राज छापखाने में काम करते थे। पढ़ाई तो कुछ खास हो नहीं पाई लेकिन लिखने का शौक बचपन से ही था। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, प्रकृति प्रेम, रोमांस सबकुछ दिखाई देता। राष्ट्रवादी चेतना भी उनकी कविताओं में कूट-कूट कर भरी थी।
वैसे नेपाली जी के कई सारे किस्से हैं लेकिन प्रेमचंद और जयशंकर प्रसाद जी से जुड़े किस्से आपको उनका एक विशेष परिचय देंगे।
बात कुछ ऐसी है कि जब नेपाली जी की प्रेमचंद जी से पहली मुलाकात हुई तो प्रेमचंद जी ने नेपाली जी को कविता सुनाने कहा। नेपाली जी ने कविता सुनाई। प्रेमचंद कविता सुनकर स्तब्ध रह गए और नेपाली जी से कहा….“बरखुर्दार क्या पेट से ही कविता सीखकर पैदा हुए हो?”
ये तो हो गई प्रेमचंद जी और नेपाली जी की मुलाकात की कहानी..अब चलिए जयशंकर प्रसाद जी की ओर..
एक बार नेपाली जी अपने एक मित्र के साथ, जयशंकर जी को बिना बताए उनसे मिलने पहुँच गए। जयशंकर प्रसाद उस वक्त नहा रहे थे तो उन्हें दोनों से बैठने को कहा। जयशंकर प्रसाद नहाते हुए एक कविता गा रहे थे – “पीपल के पत्ते गोल-गोल, कुछ कहते रहते डोल-डोल” जब जयशंकर प्रसाद नहाकर निकले तो नेपाली जी से उनका परिचय माँगा। नेपाली जी कुछ कहते कि उससे पहले ही नेपाली जी के साथ आए मित्र ने जबाब दिया- ये वही कवि है, जिसकी कविता आप अभी नहाते हुए गुनगुना रहे थे।
नेपाली जी ने 4 हिन्दी पत्रिकाओं- ‘रतलाम टाइम्स’, ‘चित्रपट’, ‘सुधा’ और ‘योगी’ का संपादन किया। उत्तर छायावाद के जिन कवियों ने अपनी कविता और गीतों की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया उनमें गोपाल सिंह नेपाली जी का नाम बड़े अदब के साथ लिया जाता है। एक बार की बात है कि किसी कवि सम्मलेन में नेपाली जी ने जब मंच से अपनी ये रचना पढ़ी-
सुनहरी सुबह नेपाल की, ढलती शाम बंगाल की
कर दे फीका रंग चुनरी का, दोपहरी नैनीताल की..
क्या दरस-परस की बात यहां, जहां पत्थर में भगवान है
यह मेरा हिन्दुस्तान है, यह मेरा हिन्दुस्तान है..
रामधारी सिंह दिनकर भी वहाँ मौजूद थे और नेपाली की यह गीत सुनकर गदगद हो गए थे।
इतने लोकप्रिय गीत लिखने के बाद भी वे लम्बे समय तक आर्थिक तंगी से घिरे रहे। आखिर में उनकी मुलाक़ात फिल्मिस्तान के तुलाराम जालान से हुई और उन्होंने गोपाल सिंह नेपाली से अनुबंध कर लिया। उसके बाद नेपाली ने सर्वप्रथम फिल्म ‘मजदूर’ के लिए गीत लिखा। उसके बाद अपनी फ़िल्मी करिअर में उन्होंने करीब 60 फिल्मों के लिए 400 से अधिक गीत लिखे।
जिन फिल्मों के लिए उन्होंने गाने लिखे वो हैं- ‘नाग पंचमी’, ‘नवरात्रि’, ‘नई राहें’, ‘जय भवानी’, ‘गजरे’, ‘नरसी भगत’
नरसी भगत में ही नेपाली ने दर्शन दो घनश्याम जैसा बेहतरीन भजन लिखा था..
साहित्य और सिनेमा में अपने उत्कृष्ट योगदान के बावजूद उनके जीते जी उन्हें वह सम्मान नहीं मिल सका जिसके वे असली हकदार थे, उन्होंने लिखा भी-
अफसोस नहीं हमको जीवन में कुछ कर न सके
झोलियां किसी की भर न सके, संताप किसी का हर न सके
अपने प्रति सच्चा रहने का जीवनभर हमने यत्न किया
देखा-देखी हम जी न सके, देखा-देखी हम मर न सके।
आज ही के दिन 17 अप्रैल 1963 में गीतों के इस राजकुमार ने अंतिम सांस ली।
उनकी पूण्यतिथि पर हम उन्हें नमन करते हैं।


आलेख: अंशुमन आर्यव, संस्थापक काव्यपीडिया

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राम भक्तों के लिए

कांग्रेसकर्मियों ने गिरिडीह समाहरणालय का किया घेराव,जनसभा में बड़ी संख्या में युवाओं-महिलाओं की भागीदारी रही

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गिरिङीह : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे जय भारत सत्याग्रह आंदोलन के क्रम में बुधवार को गिरिडीह जिला समाहरणालय का घेराव कर जनसभा की गयी। जनसभा में बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी रही। रैली की शक्ल में सैकड़ों की संख्या में पार्टी समर्थक गिरिडीह-डुमरी मुख्य मार्ग से होते हुए जिला समाहरणालय पहुंच कर गेट को जाम किया। जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने जमकर मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि देश के सभी संसाधनों और गरीब जनता का पैसों को बड़े-बड़े पूंजीपतियों के सौंपने पर आमादा है. राहुल गांधी प्रकरण देश में लोकतंत्र को तार-तार करने का काम किया है.

2024 में मोदी सरकार का पतन तय: सतीश केडिया

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धनंजय सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष एंव वरीय नेता सतीश केडिया ने कहा कि देश में हर स्तर पर विपक्ष के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है. विपक्ष को समाप्त करने की साजिश की जा रही है। कहा कि 2024 में इस सरकार का पतन तय है। श्री केडिया ने कहा मोदी सरकार विपक्ष मुक्त देश सवाल मुक्त संसद और लोकतंत्र मुक्त तानाशाही का निर्माण करना चाहती है, इसी वजह से एक फर्जी मुकदमे में राहुल जी को फंसा कर उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई।

जनसभा में ये लोग थे शामिल

जनसभा को नरेश वर्मा झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव और गिरिडीह विधानसभा के प्रभारी प्रमोद सिंह, गांडेय विधानसभा प्रभारी मनोज सहाय, महमूद अली खान, मनोज राय, महेश्वर इमाम, अशोक विश्वकर्मा, महेश भगत, प्रोफेसर मुकेश शाह, मोतीलाल शास्त्री, नाजो राय, रघुनंदन सिंह, मदन विश्वकर्मा, हसनैन अली, नेशाब अहमद, मरगूब आलम सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया. इस अवसर पर मुख्य रूप से इतवारी महतो, कैलू राय, यस सिन्हा, बेलाल अहमद,  विमल सिंह, सुरेंद्र राय, गायत्री देवी सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता शामिल थे।

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