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Tuesday, June 30, 2026
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मोदी काल में ईंधन की कीमतों में सबसे कम 30 फीसदी वृद्धि हुई, 80 फीसदी नहीं: पुरी

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नई दिल्ली

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि को लेकर अजीबोगरीब तर्क गढ़े जा रहे हैं. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि मोदी काल में ईंधन की कीमतों में वृद्धि सबसे कम 30 फीसदी हुई है, 80 फीसदी नहीं, जबकि मूल वेतन में दशकों से लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही सरकार विभिन्न श्रेणियों के तहत लोगों को मुफ्त योजनाएं दे रही है।

 मोदी राज में सबसे कम 30 फीसदी की वृद्धि हुई

मंत्री ने यह भी कहा कि यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई हुई जिससे तेल की कीमतें 19.56 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 130 डॉलर हो गईं। उन्होंने कहा कि मोदी राज में सबसे कम 30 फीसदी हुई वृद्धि, लेकिन लोगों की बेसिक सैलरी भी तो बढ़ी है. पुरी ने कहा कि हम अभी भी महामारी से उबर नहीं पाए हैं। अभी भी 80 करोड़ लोगों को भोजन दे रहे हैं और टीके लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पेट्रोल-डीजल पर 32 रुपये उत्पाद शुल्क लगाया, दिवाली से पहले हमने इसे घटाया और दरें कम हुई थीं।  

राज्यों को भी अपनी जिम्मेवारी लेनी चाहिए

मंत्री कहा कि पीएम लगातार कोशिश कर रहे हैं कि तेल के दाम कम हों, उन्होंने आजीविका के मुद्दे से संबंधित सहकारी संघवाद की सर्वोत्तम भावना दिखाई है। बोझ का बंटवारा समान नहीं होना चाहिए, केंद्र ने ईंधन क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी संभाली है। राज्यों को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि हम ईरान जैसे खाड़ी देशों के करीब स्थित हैं, जहां बहुत सारा तेल है। हमारे रूस के साथ ऊर्जा संबंध हैं, हम उनसे कच्चा तेल खरीदते हैं लेकिन हमारा कुल आयात 0.2 फीसदी से अधिक नहीं है, हम शर्तों के अनुसार खरीदने के लिए तैयार हैं।

राम भक्तों के लिए

कोयले की लूट के लिए केंद्र ही ज्यादा जिम्मेवार

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रंजन झा

झारखंड में इन दिनों बिजली संकट गहरा गया है. कोयले के दम पर ही यहां के सभी मुख्यमंत्री जीरो पावर कट का राग अलापते रहे हैं.  सरप्लस बिजली की बात बार-बार कही जाती रही है. पर यह सपना अबतक साकार नहीं हुआ है, वैसे मूल रूप से कोयले पर केंद्र का अधिकार है. इस लिहाज से कोयले की लूट के लिए केंद्र सरकार ज्यादा जिम्मेवार है. कोयला केंद्र सरकार का है. उसकी रक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तैनाती की गई है. सीबीआई, विजिलेंस आदि भी बीसीसीएल की संपत्तियों की हिफाजत के लिए ही है.

कुख्यात कोयला चोर बीजेपी में जाकर पवितर हो गये.

झारखंड में कोयला चोरी कभी नहीं रूकी है और शायद कभी रूकेगी भी नहीं. ऐसा नहीं था कि रघुवर सरकार में कोयला चोरी रुक गई थी. इतनी चोरी थी कि धनबाद के सांसद पीएन सिंह ने तत्कालीन कोयला मंत्री पीयूष गोयल को कंप्लेन की. कोयला चोरी का मामला तब जोर-शोर से संसद में उठा. नतीजा, ढाक के तीन पात. निरसा के एक कुख्यात कोयला चोर ने बीजेपी ज्वाइन कर ली. वह पवितर हो गये. बीजेपी सरकार बनी रहती तो वे पवितर ही बने रह जाते. इस सरकार में उनके सील भट्ठा से भारी पैमाने पर चोरी का कोयला निकला.

सरकार की पॉलिसी में ही कोयला चोरी समाहित है

इस सरकार के क्या कहने. सरकार की पॉलिसी में ही कोयला चोरी समाहित है. गुरुजी ने पहले ही इसे गरीब का हक बता दिया. हालांकि चोरी के कोयले से पले-बढ़े माफिया. खबर थी कि चोरी के कोयले के पैसे से ही आपणो घर बसा है. ऊंची अट्टालिकाएं. इसमें कोयला चोरी का पैसा लगा है. यह हम नहीं इनकम टैक्स विभाग ने कहा. मगर, होता जाता क्या है? उनकी बड़ी ऊंची पहुंच है.

कोयला चोरी मामले में सब हैं मौसेरे भाई

रघुवर सरकार ने कोयला चोरी के मामले की एसीबी से जांच की घोषणा की. मगर, जांच हुई ही नहीं. भला एक इंस्पेक्टर डीआइजी, एसपी के खिलाफ जांच करता? कोयला चोरी मामले में सब मौसेरे भाई. एक सिंडिकेट में कयी दलों के काले चेहरे. कोई जिला परिषद का, कोई भाजपा से झामुमो में कूदनेवाला. कोई और…. क्या यहां बंगाल से कम कोयला चोरी होती है? अगर, हां तो बंगाल की तरह धनबाद की कोयला चोरी की जांच भी सीबीआई को क्यों नहीं सौंपी जाती है? इसमें तो किसी स्टेट का परमिशन नहीं चाहिए. दूध-का-दूध पानी का पानी हो जाएगा…!

राम भक्तों के लिए

PM ने पेट्रोल-डीजल पर राज्यों को वैट घटाने की नसीहत दी, नागरिकों को लाभ नहीं देकर राजस्व कमाया

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नई दिल्ली: 

पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों पर बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने संज्ञान लिया. उन्होंने राज्यों को वैट घटाने की नसीहत दे डाली. पीएम ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बीच केंद्र सरकार ने पिछले साल नवंबर में ही पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटा दी थी। लेकिन कई राज्यों ने ऐसा नहीं किया है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वैश्विक चुनौती की इस घड़ी में केंद्र और राज्यों को साथ मिलकर चलने की जरूरत है। कोरोना महामारी पर हुई बैठक में कई राज्यों के सीएम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राज्यों ने पेट्रोल-डीजल पर वैट नहीं घटाकर अपने नागरिकों को लाभ नहीं दिया और राजस्व कमाया है।


राज्यों ने छह माह की देरी कीः पीएम
पीएम ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा कि देशहित में पिछले नवंबर में जो करना था उसमें अब 6 महीने की देरी हो गई है। वैट कम करके जनता को इसका लाभ दें। भारत सरकार के पास जो रेवेन्यू आता है उसका 42 फीसदी हिस्सा राज्यों के पास ही चला जाता है। वैश्विक संकट के समय एक टीम के रूप में काम करने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र राज्यों के बीच सामंजस्य जरूरी है। युद्ध की परिस्थिति पैदा होने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। ऐसे माहौल में चुनौतियां बढ़ रही हैं। कुछ राज्यों ने वैट घटाया लेकिन कुछ राज्यों ने वैट नहीं घटाकर अपने राज्य के लोगों को लाभ नहीं दिया। इस वजह से इन राज्यों में दूसरे राज्यों के मुकाबले पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादा हैं।

पीएम ने कई राज्यों के नाम भी लिए

उन्होंने कहा कि जो राज्य टैक्स में कटौती करते हैं उन्हें राजस्व की हानि होती है। गुजरात और कर्नाटक ने टैक्स कम किया है। गुजरात ने टैक्स कम नहीं किया होता तो उसे भी साढ़े 3 हजार करोड़ से ज्यादा का राजस्व मिलता। वहीं कुछ राज्यों ने वैट में कमी नहीं करके इस दौरान साढ़े 3 हजार से साढ़े 5 हजार रुपये तक अतिरिक्त राजस्व की कमाई कर ली। पीएम मोदी यहीं नहीं रुके उन्होंने राज्यों का नाम लेकर उन्हें सुना दिया। पीएम मोदी ने कहा कि मैं किसी की आलोचना नहीं प्रार्थना कर रहा हूं। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और झारखंड ने किसी न किसी कारण से केंद्र की सलाह को नहीं माना। अब आपसे सबसे आग्रह है कि वैट कम करके जनता को इसका लाभ दें.

राम भक्तों के लिए

गिरिडीह के रोजेदार का ट्रेन में पैंट्रीमैन ने रोजा खुलवाया, रेलमंत्री ने सराहा

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गिरिडीह: (कमलनयन)

भारत विविधताओं के बीच एकता वाला देश हैा तभी तो ट्रेन में सफर के दौरान पैंट्रीमैन ने झारखंड के एक रोजेदार को इफ्तार भेंटकर रोजा खुलवाया। यह वाकया सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पीएम मोदी की सरकार के रेल राज्य मंत्री दर्शना जरदोश ने रीट्वीट कर अपनी भावनाए साझां की हैं.

रेलमंत्री को पोस्ट शेयर किया

रेल मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि शहनवाज़ अख्तर ने जो पोस्ट शेयर किया है, उसमें उन्होंने लिखा- मैं शताब्दी एक्सप्रेस से हावड़ा से धनबाद जा रहा था. मैंने स्नैक्स लिया और पैंट्रीमैन से चाय की मांग की, ताकि मैं अपना (उपवास तोड़) रोजा खोल सकूं. तभी पैंट्रीमैन ने पूछा, क्या आप रोज़े में हैं? मैंने हां में अपना सिर हिलाया। उसके बाद इफ्तार के लिए खजूर समेत मुझे इतनी सारी चीज़ें मिलीं, जो रोजा खोलने के लिए प्रयाप्त थी। यह वाकया 25 अप्रैल का है.

मंत्री ने रीट्वीट किया

बता दें कि इस पोस्ट पर केंद्रीय रेलवे राज्य मंत्री दर्शना जरदोश ने रीट्वीट करते हुए लिखा है कि आपके कमेंट से पूरा भारतीय रेलवे गौरान्वित महसूस कर रहा है। उम्मीद है कि आपको भोजन पसंद आया होगा. पीएम मोदी के नेतृत्व में अच्छा काम हो रहा है। हमारी कोशिश है कि सबका साथ सबका विकास..।

गिरिडीह निवासी हैं शहनवाज अख्तर

दरअसल इससे पहले झारखंड के गिरिडीह के निवासी युवा शहनवाज अख्तर ने ट्रेन में रोजा खोलनेवाले प्रसंग को लेकर अपनी भावनाओं को ट्वीट किया था, जिसमे उन्होने कहा था कि हमारा भारत बहुत ही ख़ूबसूरत देश है. यहां कई धर्म के लोग आपस में मिल-जुलकर बड़े प्यार से रहते हैं। हम दिवाली-ईद साथ में मनाते हैं। सफ़र के दौरान भी हमें कई ऐसे लोग मिल जाते हैं, जो हमारा ख़्याल रखते हैं. अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसे पढ़ने के बाद आपका दिल भर जाएगा और आप गर्व से कहेंगे कि आप एक हिन्दुस्तानी है.

पैंट्रीमैन ने इफ्तार की व्यवस्था की

दरअसल, शहनवाज अख्तर रोज़ा में थे, तभी उन्होंने पैंट्रीमैन से चाय के लिए पूछा. पैंट्री वाले शख्स ने पूछा- क्या आपने रोज़ा रखा है. जवाब में हां मिला. तभी थोड़ी देर बाद पैंट्रीमैन ने शहनवाज़ के लिए इफ्तार की व्यवस्था की. इफ्तारी देख कर शहनवाज़ थोड़े भावुक भी हुए. उन्होंने इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया पर भी शेयर की उनकी ये पोस्ट वायरल हो रही है. रेलवे राज्य मंत्री ने उनकी पोस्ट को रिट्वीट किया।

राम भक्तों के लिए

धर्म संसद पर SC सख्त, उत्तराखंड सरकार को हिदायत, भड़काऊ भाषण के लिए प्रशासन होगा जिम्मेवार

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नई दिल्ली

धर्म संसद के आयोजन को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. 27 अप्रैल को उत्तराखंड के रुड़की में होने जा रही धर्म संसद के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को एक हलफनामा दायर कर यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि कार्यक्रम में कुछ गलत होने से रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार को चेताते हुए कहा कि भड़काऊ भाषण पर लगाम नहीं लगी तो उच्च अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल को हिमाचल के ऊना में हुई धर्म संसद पर भी नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता कुर्बान अली के वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि प्रशासन ने भड़काऊ भाषण से रोकने के लिए ज़रूरी कदम नहीं उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि ऐसे मामलों के लिए पहले आ चुके निर्देशों के पालन के लिए लिए क्या कदम उठाए गए।


राज्य सरकारों को बंदिशें लगानी होगी
बता दें कि पिछले महीने रायपुर के एक संगठन द्वारा आयोजित धर्म संसद में कालीचरण महाराज ने महात्मा गांधी के बारे में अपमानजनक शब्द कहे थे और नाथूराम गोडसे को बापू की हत्या के लिए सही ठहराया था। कालीचरण के भड़काऊ भाषण के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए उन्हें जेल भेज दिया था. वहीं हरिद्वार धर्म संसद में हिंदुओं से हथियार उठाने की अपील की गई थी. धर्म संसद में भड़काऊ भाषण का एक वीडियो सामने आने के बाद से बवाल मच गया था। दरअसल, इस धर्म संसद में एक वक्ता ने विवादित भाषण देते हुए कहा था कि धर्म की रक्षा के लिए हिंदुओं को हथियार उठाने की जरूरत है। वक्ता ने कहा था कि किसी भी हालत में देश में मुस्लिम प्रधानमंत्री न बने। वक्ता ने कहा था कि मुस्लिम आबादी बढ़ने पर रोक लगानी होगी। ऐसे हालात में धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देनेवाले वक्ताओं पर अब सुप्रीम कोर्ट ने नकेल कस दी है. अब देखना है कि राज्य सरकारें ऐसे आयोजनों पर किस तरह से बंदिशें लगाती हैं.

राम भक्तों के लिए

RIMS के पैसे से बन्ना गुप्ता चले थे गाड़ी खरीदने, प्रस्ताव पर हुआ बवाल, तब मंत्री ने कहा था कराएंगे जांच, बीत गए दो साल

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नारायण विश्वकर्मा

रांची

झारखंड में स्वास्थ्य जगत का सबसे बड़ा महकमा रिम्स अक्सर विवादों में घिरा रहता है. निर्दलीय विधायक सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पर पद का दुरुपयोग कर अपने लोगों के नाम से कोविड प्रोत्साहन राशि की निकासी का आरोप लगाया है. यह मामला अभी सुर्खियों में है. लेकिन यहां याद दिला दूं कि स्वास्थ्य मंत्री बनने के एक साल बाद यानी कोरोनाकाल (2020) में रिम्स जैसी स्वायत्त संस्था (ऑटोनोमस) से उनपर गाड़ी उपहार में लेने का आरोप लगा था. जब मामला  तूल पकड़ने लगा तो, मंत्री ने जांच कराने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ा था. रिम्स के इतिहास में ऐसा मामला पहली बार आया था, जब अनुदान पर चल रहा किसी संस्थान ने मंत्री के लिए गाड़ी खरीदने का प्रस्ताव लाया था.

गाड़ी लेने की सहमति खुद मंत्री ने दी थी

बता दें कि रिम्स शासी परिषद की बैठक में ही रिम्स में दवा खरीद से लेकर, उपकरण और बाकी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं. जहां दवा और उपकरण से लेकर रिम्स से जुड़े निर्णय लिए जाने चाहिए वहां स्वास्थ्य मंत्री के लिए गाड़ी खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया गया था. यह इतनी अजीब बात थी कि रिम्स जैसे बड़े अस्पताल में कोरोना को लेकर जब चहुंओर अफरातफरी का माहौल था. एम्बूलेंस कम पड़ गई थी, तब रिम्स के जीबी के एजेंडे में मंत्री जी के लिए गाड़ी खरीदने का प्रस्ताव शामिल किया गया था. उस समय सब कुछ तय हो गया था. 14 अक्तूबर 2020 को मंत्री जी के लिए गाड़ी खरीदने की मंजूरी मिलनेवाली थी. यह एजेंडे के 24वें नंबर में लिखा हुआ था. इस प्रस्ताव को खुद परिषद के शासी निकाय के अध्यक्ष होने के नाते स्वास्थ्य मंत्री इसे सहमति दी थी.

मामला तूल पकड़ा तो निदेशक ने पल्ला झाड़ा

इस संबंध में बवाल मचने पर तत्कालीन रिम्स निदेशक प्रभारी डॉ. मंजू गाड़ी ने कहा था कि रिम्स द्वारा मंत्री को गाड़ी का तोहफा दिया जा रहा है. जरूरत के हिसाब से गाड़ियां खरीदी जाती रही हैं. स्वीकृति मिलने के बाद गाड़ी की खरीदे जाने की बात उन्होंने स्वीकारी थी. दरअसल, जैसे ही ये मामला तूल पकड़ने लगा तो रिम्स निदेशक ने भी इससे पल्ला झाड़ने की कोशिश की. रिम्स निदेशक ने कहा कि गाड़ी नहीं खरीदी जा रही है. पहले के जीबी में प्रस्ताव रखा गया था, उसी को हमलोग लाए हैं. अब सवाल यह है कि अगर ये प्रस्ताव पिछली सरकार का है तो इसे जीबी में लाने से पहले दुरुस्त क्यों नहीं किया गया?

जरा देखिए मंत्री की कठदलीली…!

इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की सफाई पर थोड़ा गौर फरमाएं. मंत्री ने कहा कि मुझे गाड़ी की आवश्यकता नहीं है. क्योंकि पहले से सरकार ने गाड़ी दे रखी है. बेमतलब के गाड़ी की लंबी कतार का कोई मतलब नहीं है. मुझे नहीं मालूम किन परिस्थिति में एजेंडा में डाला गया है. हम बहुत हड़बड़ी में थे, जो बच्चों को लाने के लिए गाड़ी की जरूरत थी, मैंने उसमें कहा था ठीक है. ये मामला पूर्व डायरेक्टर डीके सिंह से जुड़ा है क्योंकि हो सकता है उन्होंने पूर्व के मंत्री के लिए गाड़ी का प्रस्ताव लाया होगा. उस प्रसंग में आया होगा. मुझे गाड़ी की जरूरत नहीं हैं. मैं समाजवादी रहा हूं, मुझे गाड़ी के विलासिता की आवश्यकता नहीं है. अलबत्ता रिम्स प्रबंधन की ओर यह कुतर्क दिया गया था कि तीन-तीन बार क्रास चेक होने के बावजूद एजेंडे से गाड़ी नहीं हटी. इस बीच सबकुछ पब्लिक डोमेन में आ चुका था और रिम्स प्रबंधन और मंत्री जी की भद्द पिट चुकी थी.

पूर्व निदेशक ने कहा था-मंत्री ने गलतबयानी की

दरअसल, रिम्स में 49वीं जीबी बैठक के बाद तत्कालीन प्रभारी निदेशक मंजू गाड़ी ने पूर्व निदेशक डॉ. डीके सिंह पर आरोप लगाया था कि उन्होंने ही स्वास्थ्य मंत्री के लिए वाहन क्रय का प्रस्ताव 48वीं जीबी बैठक में लाया था. उसी को गलती से लागू कर दिया गया. इस पर पूर्व निदेशक डॉ. डीके सिंह ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा था कि स्वास्थ्य मंत्री और प्रभारी निदेशक दोनों झूठ बोल रहे हैं. उन्होंने मंत्री के लिए गाड़ी खरीद का कोई प्रस्ताव नहीं लाया था. डॉ सिंह ने कहा था कि बन्ना गुप्ता ने स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद ही रिम्स प्रबंधन से खुद के लिए वाहन की मांग की थी. मंत्री के पहले पीएस ने लिखित रूप से एक गाड़ी जमशेदपुर से राजेश कुमार नाम के व्यक्ति को ओएसडी और एक ड्राइवर की मांग की थी. मंत्री के दो महीने के लिए बोलेरो गाड़ी भाड़े पर लेकर दी गई थी.

मंत्री जी बताएं-दो साल बाद भी जांच क्यों नहीं हुई?

सच कहा जाए तो 15 अक्तूबर 2020 रिम्स जीबी की बैठक में बन्ना गुप्ता का झूठ पकड़ा गया था. अगर ऐसा है तो दो साल बाद भी मंत्री ने इसकी जांच क्यों नहीं करायी? जांच की फाइल कहां  धूल फांक रही है. इस बारे में रिम्स प्रबंधन को कुछ नहीं पता. रांची के सांसद संजय सेठ ने कहा कि हां उस जीबी की बैठक में मंत्री ने गाड़ी की मांग की थी और एजेंडे में था. सांसद महोदय उस बैठक में अन्य अनियमितता को लेकर बैठक का विरोध कर निकल गए थे.

बहरहाल, इस पूरे प्रकरण में सीएमओ ने कोई कार्रवाई नहीं की. ये किसी ने नहीं पूछा कि आखिर मंत्री को रिम्स के पैसे से गाड़ी खरीदने के एजेंडे में कैसे और किसने शामिल किया? कुछ ऐसा ही नजारा अबतक सरयू राय के मामले में देखने-समझने को मिला है. विधायक के बार-बार पत्र लिखने के बावजूद सीएमओ ने अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया है. इस पूरे प्रकरण में सरयू राय को अभी तक कोई ठोस जवाब देने में विफल रहे बन्ना गुप्ता अब अदालत में निबटने की तैयारी में हैं. सरयू राय ने भी उन्हें चुनौती दे डाली है. अब देखना है कि इस मामले में सीएम हेमंत सोरेन कबतक हस्तक्षेप करते हैं….!   

राम भक्तों के लिए

सिस्टम की सड़ांध के साथ रहना हमारी मजबूरी : नारायण विश्वकर्मा

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विशिष्ट अतिथि के रूप में पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता नारायण विश्वकर्मा ने युवाओं की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि सरकार हो या निजी संस्थान, सभी ठगने में आगे हैं. श्री विश्वकर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए खाद-बीज से अक्सर किसानों को धोखा खाना पड़ता है जब खेतों में उनकी फसल खराब हो जाती है तो किसान सरकार से ठगा महसूस करता है. फसल बीमा योजना के तहत मिलनेवाली क्षतिपूर्ति की राशि लेने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है. वहीं प्रतियोगिता परीक्षाओं में सरकार द्वारा फीस ली जाती है, पर समय पर उसकी परीक्षाएं नहीं होती या रद्द हो जाती हैं. इस चक्कर में छात्रों की उम्र निकल जाती है, जिससे सरकार को कोई मतलब नहीं होता. कॉलेजों में तीन साल के कोर्स पांच साल में पूरे होते हैं. इसके लिए सिस्टम दोषी है. अलबत्ता, जांच के नाम पर लंबा समय निकल जाता है. दरअसल, सिस्टम की सड़ांध के साथ रहना हमारी मजबूरी है.

राम भक्तों के लिए

पलामू – दुग्ध क्रांति की दिशा में झारखंड सरकार कदम बढ़ा दिया है

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दुग्ध क्रांति की दिशा में झारखंड सरकार कदम बढ़ा दिया है। सरकार के इस प्रयास का सीधा फायदा किसान व जनसामान्य को मिलनेवाला है। विशेषकर पलामू के पशुपालक किसानों को इसका फायदा होगा। यह फायदा मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की शुरूआत से होगी। पलामू में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित की जा चुकी है। प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर के समीप गणके गांव में करीब 28 करोड़ की लागत से मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया गया है। अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस प्लांट का वाटर ट्रायल पूर्ण कर लिया गया है। अब दूध का प्रोसेसिंग से लेकर पैकेजिंग का ट्रायल होगा। ट्रायल के दौरान प्लांट से बने दूध एवं अन्य उत्पाद की गुणवत्ता जांच एवं अन्य सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण होने के पश्चात विधिवत उद्घाटन की प्रक्रिया पूर्ण की जायेगी। इसके बाद मेधा के नाम से उत्पाद को बाजार में उतारा जायेगा।मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट आने वाले समय में युवाओं के साथ-साथ पशुपालक किसान भाईयों को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार साबित होगा। उन्हें रोजगार से जोड़ेगा। इससे डेयरी विकास और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। जिले के स्थानीय किसान दूध के व्यवसाय से सीधे जुड़कर अपनी आमदनी को बढ़ा सकेंगे।सरकार एवं स्थानीय पलामू जिला प्रशासन दूध कारोबार को बढ़ावा देने एवं किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। पलामू सहित राज्य में दूध के कारोबार की अच्छी संभावना देखी जा रही है। किसानों द्वारा पशुपालन कर दूध का कारोबार भी किया जाता है, लेकिन उसकी सप्लाई संगठित क्षेत्र में नहीं हो पाने से उन्हें इसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। साथ ही नियमित रूप से दूध की सप्लाई भी नहीं हो पाती है। प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित होने से किसानों में विश्वास जागृत होगा कि उनके पशु का दूध उचित दाम पर सालोंभर बिक्री हो सकेगी। ऐसे में किसान पशुपालन की दिशा में बेहतर कार्य करेंगे। इससे पलामू की अथर्व्यवस्था मजबूत होगी और किसान भी आत्मनिर्भर हो सकेंगे। रोजगार की तलाश में उन्हें दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। प्लांट से लेकर पशुपालन में युवाओं एवं किसान भाईयों को अपने ही गांव-शहर में ही रोजगार मिल पायेगा।25 हजार से अधिक किसानों को होगा फायदा:मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना से पलामू के 25 हजार से अधिक किसानों को सीधा लाभ होगा। स्थानीय को रोजगार के साथ-साथ पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों की आर्थिक दशा सुधरेगी। प्रोसेसिंग प्लांट के लिए पशुपालक किसानों की दूध की खरीद की जायेगी। इसका उन्हें उचित मूल्य मिलेगा। पलामू में संचालित है 62 दूध संग्रह केन्द्रवतर्मान समय की बात करें तो पलामू में 62 दूध संग्रहण केन्द्र बनाये गये हैं। इससे 230 गांव जुड़े हैं। दूध की गुणवत्ता की जांच के लिए 46 संग्रहण केन्द्रों पर जांच की भी सुविधा उपलब्ध है, जिन केन्द्रों पर जांच की सुविधा नहीं है, वहां के दूध का नमुना संग्रह कर समीपवर्ती केन्द्र पर भेजकर जांच कराई जाती है और किसानों को उसका उचित मूल्य का भुगतान होता है। दूध संग्रहण केन्द्र से संग्रहित दूध को ठंडा करने हेतु 9 बल्क मिल्क कूलर भी स्थापित हैं। यहां पर संग्रहित दूध को ठंडा कर प्रोसेसिंग हेतु पलामू प्रमंडल क्षेत्र अंतर्गत लातेहार जिले में स्थापित प्रोसेसिंग प्लांट एवं रांची के प्रोसेसिंग प्लांट में भेजा जाता है। मेधा डेयरी प्लांट के नाम से संचालित होगा प्लांट, तकनीक है लैस है पूरा प्लांट:राष्ट्रीय डेयरी बोर्ड के तकनीकी सहयोग से स्थापित मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट ‘मेधा डेयरी प्लांट, पलामू’ के नाम से संचालित होगा। संचालन झारखंड मिल्क फेडरेशन द्वारा किया जायेगा। प्लांट तकनीक से लैस है। 20-20 हजार कीलो लीटर के दो मिल्क सायलो (टैंक) लगे हैं, जिसमें आये दूध का प्रोसेसिंग होगा। वहीं 5 हजार लीटर क्षमता की पास्तुराइजर लगे हैं, जो दूध में व्याप्त वैक्टिरियां को नष्ट करने का कार्य करेगा। वहीं 5 हजार लीटर क्षमता की क्रीम सैपरेटर लगे हैं, जिसके माध्यम से दूध के क्रीम को अलग किया जायेगा। वहीं 5 हजार लीटर क्षमता की होमोनाइजर लगे हैं। यहां से संतुलित दूध निकलेगा। सैपरेटर एवं होमोनाइजर के माध्यम से दूध की गुणवत्ता का विकास होगा। इसके अलावा अमोनिया रेफ्रिजरेटर प्लांट लगे हैं, जिसके माध्यम से दूध को ठंडा किया जायेगा। इसके अलावा दो हजार किलोग्राम प्रति घंटा क्षमता की दो ब्वाॅयलर लगे हैं। इससे दूध को गर्म करने की व्यवस्था की गयी है। दूध को 80 डिग्री तापमान पर गर्म करने का प्रावधान है, इसके बाद 4 डिग्री तापमान पर उसे ठंडा किया जाता है, ताकि दूध के बैक्ट्रिया को समाप्त किया जा सके।बिजली की व्यवस्था:प्लांट संचालन के लिए प्लांट परिसर में ही सब स्टेशन स्थापित किया गया है। इसमें 630 केबीए का ट्रासफाॅमर्र लगे हैं। वहीं सर्वो स्टेप्लाइजर लगा है, जिससे लो लो-वोल्टेज की समस्या नहीं आएगी और प्लांट का निर्वाध रूप से बिजली मिलेगी और उसका संचालन सही से हो सकेगा। बिजली कट की समस्या से निपटने के लिए 320 केवीए डीजी जेनरेटर लगे हैं, ताकि बैकअप पावर लिया जा सके।फायर फाइटिंग एवं ईटीपी की व्यवस्था:राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साइट इंचार्ज प्रदीप लायक ने बताया कि आग आदि दुघर्टनाओं से निपटने के लिए पाइपलाइन के माध्यम से फायर फाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है। वहीं इफ्लेट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) की व्यवस्था की गई है। दूध प्रोसेसिंग प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट या पाइपलाइन की प्रतिदिन सफाई के बाद निकले पानी को ईटीपी के माध्यम से शुद्ध किया जायेगा। इसके बाद इस शुद्ध पानी का इस्तेमाल गाडेर्निंग के लिए किये जाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि प्लांट की शुरु होने से पलामू के लोगों को लाभ होगा। झारखंड में 7 हो जायेगी प्रोसेसिंग प्लांट की संख्या : एमडीझारखंड मिल्क फेडरेशन के एमडी सुधीर कुमार ने बताया कि पलामू में दूध प्रोसेसिंग प्लांट की शुरूआत से राज्य में प्रोसेसिंग प्लांट की संख्या 7 हो जायेगी। वतर्मान समय में चार प्लांट क्रियाशील हैं। इनमें पलामू प्रमंडल के लातेहार एवं राजधानी रांची सहित कोडरमा और देवघर शामिल हैं, जबकि पलामू में स्थापित प्लांट की ट्रायल अंतिम चरण में है। इसके अलावा देवघर के सारठ एवं साहिबगंज में भी मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किये गये हैं। राज्य में दूध की आवश्यकता की होगी पूर्ति: आयुक्तप्रमंडलीय आयुक्त जटा शंकर चौधरी ने कहा कि गौ पालन किसान की गतिविधि में शामिल है। किसान खेती भी करते हैं और विभिन्न प्रजाति के दुधारू पशुओं का पालन भी करते हैं। दुधारू पशुओं से किसान दूध का उत्पादन करते हैं। पलामू प्रमंडल क्षेत्र में कई किसान हैं, गौ-पालन करते हैं। उनके दूध का सही बिक्री हो और सही जगह पर जाए और नियमित रूप से मूल्य का भुगतान हो, दूध बिक्री की समस्या नहीं हो, इसके लिए निरंतर सकारात्मक प्रयास की जा रही है। पलामू में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट में दूध का प्रोसेसिंग होने से यहां के किसानों को फायदा होगा। वर्तमान में यहां दूध संग्रहण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें कई संग्रहण केंद्रों पर दूध की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था भी है। 200 से अधिक गांवों के किसान इन संग्रहण केंद्रों से जुड़े हैं। पलामू में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की शुरुआत होने से यहां के किसानों को बहुत फायदा होगा। आने वाले समय में यहां के किसान खेती के साथ-साथ दुधारू पशुओं का पालन भी अधिक- से- अधिक संख्या में करेंगे। इससे दूध का उत्पादन होगा और राज्य में दूग्ध की आवश्यकता की पूर्ति होगी। आयुक्त ने पलामू के पशुपालक किसान भाइयों से अपील किया कि किसान गौ-पालन पर ध्यान दें। इससे उन्हें अतिरिक्त लाभ होगगा। इससे आर्थिक दशा में सुधार होगी और वे आगे बढ़ पाएंगे।

राम भक्तों के लिए

उपभोक्ता जागरूक बने – डा. महुआ मांझी

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दिनांक 23 दिसंबर 2021 को ऑल इंडिया ब्वॉय स्काउट एसोसिएशन एवं ग्रामीण उपकार संस्थान झारखंड के संयुक्त तत्वधान में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अवसर पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार मोराबादी स्थित Dr Ramdayal Munda tribal Research Centre के सभागार में हुई। सेमिनार की अध्यक्षता ग्रामीण उपकार संस्थान के कुलसचिव श्री केडी तिवारी ने किया। कार्यक्रम के /मुख्य अतिथि डॉक्टर महुआ मांझी/ पूर्व अध्यक्षा राज्य महिला आयोग झारखंड थी।

विशिष्ट अतिथि सफायर इंटरनेशनल स्कूल के प्राचार्य श्री अमित सिंह झारखंड रक्षा यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर डॉक्टर पूजा शुक्ला, पत्रकार श्री नारायण विश्वकर्मा , रांची दूरदर्शन के वरिष्ठ कलाकार श्री भूपेश कुमार उपस्थित थे । कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया । अतिथियों का स्वागत स्कार्फ पहनाकर एवं पुष्पगुच्छ देकर किया गया । इस कार्यक्रम में कई विद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि माननीया डा. महुआ मांझी ने कहीं कि नकली सामानों को लेने से बचें उपभोक्ता होने के नाते आप को जागरूक रहने की आवश्यकता है। सरकार के सभी कर्मचारी आपके पैसों से चलते हैं। इसलिए आपका अधिकार है कि आपको सही सुविधाएं मिले । फ्लाइट में यदि सेवा ले रहे हो और उसमें यदि कोई कमी हो तो आप उपभोक्ता फोरम में जा सकते हैं। इसमें पैसा नहीं लगता और ना ही वकील रखने की आवश्यकता है । ट्रेन में टिकट कटा कर सफर कर रहे हो और ट्रेन के लेट होने से आपकी इंटरव्यू छूट गई हो तो आप रेलवे से कंपनसेशन ले सकते हैं । कई जगह पर समान लेने पर थैला देते हैं और उसका पैसा भी लेते हैं जो गलत है। आप अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग रहें तभी आपको सही सामग्री मिल पाएगी ।

विशिष्ट अतिथि सफायर इंटरनेशनल स्कूल रांची के प्राचार्य श्री अमित सिंह ने कहा कि बच्चों एवं युवाओं को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के दिन इन बातों की जानकारी हो कि वे उपभोक्ता नियमों के संरक्षण में हैं और उपयुक्त फोरम में अपनी आवाज उठा सकते हैं ।

वही पत्रकार श्री नारायण विश्वकर्मा ने कहा कि सिविल सेंस की जरूरत है, आज इसकी कमी देखने को मिलती है जब तक हम कर्तव्य का निर्वहन नहीं करते हैं तब तक अधिकार की बात नहीं करनी चाहिए हम अधिकार से वंचित हैं । क्या हमें अधिकार मिलता है ? उपभोक्ता फोरम अभी निष्क्रिय हैं । हम जाग गए ! लेकिन उसे भी जगाने की आवश्यकता है जिससे हमें अधिकार लेना है। हमें तो आज पावर लेस कर दिया गया है। हमें अधिकार लेना है तो हमें लड़ाई लड़नी होगी संस्थान को भी जागरूक होकर उपभोक्ताओं को सही वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पूजा शुक्ला ने कही कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधान जो 1986 में थी वहीं 2019 में भी है इसमें ई मार्केटिंग और ऑनलाइन शॉपिंग को भी शामिल किया गया है ।
यदि उपभोक्ता फोरम निष्क्रिय हैं तो हमारी दोहरी जिम्मेदारी है कि हम सरकार पर दबाव बनाए और सक्रिय करने के लिए प्रेरित करें । कई दुकानदार खुदरा के जगह पर टॉफी दिया करते हैं जो गलत है, इसका विरोध हमें करना चाहिए।
उपभोक्ता वह है जो पैसों को देखकर चीजें या सेवाएं अपने उपभोग के लिए खरीदा है ना की बिक्री करने के लिए
इस कार्यक्रम का संचालन दी ऑल इंडिया बवॉय स्काउट एसोसिएशन के राज्य सचिव विक्रांत विश्वकर्मा ने किया।

धन्यवाद ज्ञापन श्री भूपेश कुमार ने किया। आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विक्रांत विश्वकर्मा, केडी तिवारी अरुण कुमार सिंह बजरंग प्रसाद उदय कुमार रवि रंजन शर्मा वीरेंद्र पांडे ने सहयोग किया।

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कचरे के ढेर में फैशन मॉडल सुरभि ने किया रैंप वॉक

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रांची : आम तौर पर मॉडल्स आपको रैंप पर कैट वॉक करती दिख जाएंगी, लेकिन आप ने कभी किसी मॉडल को कचरे के ढेर पर रैंप वॉक करते नहीं देखा होगा. लेकिन नामुमकिन सा लगने वाले इस काम को रांची के 27 साल के फोटोग्राफर प्राजंल कुमार और मिस झारखंड रह चुकी फैशन मॉडल सुरभि ने अंजाम दिया है. प्रांजल और सुरभि ने इसके लिए रिंग रोड स्थित झिरी कचरा डंपिंग यार्ड को चुना. सुरभि ने कचरे के पहाड़ पर रैंप वॉक किया और प्रांजल ने ड्रोन कैमरे से करीब 210 फीट की ऊंचाई से उसे फिल्माया और साथ ही कैमरे से तस्वीरें भी लीं. करीब चार घंटे तक पर शूट चला. इस दौरान सुरभि रेड ड्रेस पहने कचरे के ऊपर कैटवॉक करती रहीं.रिंग रोड से गुजरते समय आया आयडिया:प्रांजल ने बताया कि अकसर रिंग रोड से जब हम कार में गुजरते तो झिरी के पास हमें शीशे बंद करने पड़ते. इसके बाद भी दुर्गंध आती. चेहरे पर रूमाल रखना पड़ जाता है. जबकि बाकी रिंग रोड के चारों तरफ सिर्फ हरियाली ही हरियाली दिखती है. वहीं झिरी से गुजरते समय कचरे का पहाड़ दिखता है. मुझे यह बात बहुत परेशान करती. कैसे हमारे घरों से निकलने वाले कचरे से प्रदूषण फैल रहा है. झिरी के आसपास रहने वाली बड़ी आबादी को रोजाना इसका दंश झेलना पड़ रहा है. राजधानी के कचरे से गांव में रहने वालों की जिंगदी बार्बाद हो रही है. उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है. इसके बाद भी रांची नगर निगम कचरे को प्रोसेसिंग के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है. जबकि देश के कई शहरों में प्रोसेसिंग प्लांट लगाकर कचरा खत्म किया जा रहा है. कचरे के ऊपर पार्क बनाया जा रहा है. कचरे को रिसाइकिल किया जा रहा है और राजधानी रांची में हम कचरे के पहाड़ को और ऊंचा करते जा रहे हैं. ऐसे में मैनें सोचा कि क्यों नहीं कचरे पर किसी मॉडल से रैंप वॉक कराकर इस समस्या को देश दुनिया के सामने लाया जाए.सुरभि को रेड ड्रेस पहनाने के पिछे भी एक खास संदेश:प्रांजल ने बताया कि शूट के दौरान सुरभि को रेड ड्रेस पहनाई गई, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि अब बहुत हो गया. अगर हम इस तरह से कचरा डंप करते और उसका प्रोसेसिंग नहीं हुआ तो आने वाले वक्त में इसकी बड़ी कीमत हमें चुकानी पड़ेगी. स्किन इंफेक्शन हो गया |

राम भक्तों के लिए
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